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लोक कथा - किस्सए चार दरवेश - भाग 1 - सुषमा गुप्ता

भूली बिसरी लोक कथाएँ सीरीज़–24


किस्सये चार दरवेश

अमीर खुसरो – 1300–1325


अंग्रेजी अनुवाद -

डन्कन फोर्ब्ज़ – 1857


हिन्दी अनुवाद -

सुषमा गुप्ता

अक्टूबर 2019

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Series Title: Bhooli Bisari Lok Kathayen – 24

Book Title: Kissaye Char Dervesh (Tales of Four Dervesh)

Published Under the Auspices of Akhil Bhartiya Sahityalok

E-Mail: sushmajee@yahoo.com

Website: www.sushmajee.com/folktales/index-folktales.htm

Copyrighted by Sushma Gupta 2019

No portion of this book may be reproduced or stored in a retrieval system or transmitted in any form, by any means, mechanical, electronic, photocopying, recording, or otherwise, without written permission from the author.

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विंडसर¸ कैनेडा

अक्टूबर 2019

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अनुक्रमणिका

सीरीज़ की भूमिका

किस्सये चार दरवेश

अमीर खुसरो कौन?

किस्सये चार दरवेश का परिचय

1 पहले दरवेश के कारनामे

2 पहले दरवेश के कारनामे–2

3 दूसरे दरवेश के कारनामे

4 दूसरे दरवेश के कारनामे–2

5 आजाद बख्त की कहानी–पहला भाग

6 आजाद बख्त की कहानी–दूसरा भाग

7 तीसरे दरवेश के कारनामे

8 चौथे दरवेश की कहानी

सीरीज़ की भूमिका

लोक कथाएँ किसी भी समाज की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा होती हैं। ये संसार को उस समाज के बारे में बताती हैं जिसकी वे लोक कथाएँ हैं। आज से बहुत साल पहले, करीब 100 साल पहले, ये लोक कथाएँ केवल ज़बानी ही कही जातीं थीं और कह सुन कर ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दी जाती थीं इसलिये किसी भी लोक कथा का मूल रूप क्या रहा होगा यह कहना मुश्किल है। फिर इनका एकत्रीकरण आरम्भ हुआ और इक्का दुक्का पुस्तकें प्रकाशित होनी आरम्भ हुईं और अब तो बहुत सारे देशों की लोक कथाओं की पुस्तकें उपलब्ध हैं।

सबसे पहले हमने इन कथाओं के प्रकाशन का आरम्भ एक सीरीज़ से किया था – “देश विदेश की लोक कथाएँ” जिनके अन्तर्गत हमने इधर उधर से एकत्र करके 2000 से भी अधिक देश विदेश की लोक कथाओं के अनुवाद प्रकाशित किये थे – कुछ देशों के नाम के अन्तर्गत और कुछ विषयों के अन्तर्गत। दोनों में 70–70 पुस्तकें थीं।

इन कथाओं को एकत्र करते समय यह देखा गया कि कुछ लोक कथाएँ उससे मिलते जुलते रूप में कई देशों में कही सुनी जाती है। तो उसी सीरीज़ में एक़ और सीरीज़ शुरू की गयी – “एक कहानी कई रंग”[1]। इस सीरीज़ के अन्तर्गत एक ही लोक कथा के कई रूप दिये गये थे। इस लोक कथा का चुनाव उसकी लोकप्रियता के आधार पर किया गया था। उस पुस्तक में उसकी मुख्य कहानी सबसे पहले दी गयी थी और फिर वैसी ही कहानी जो दूसरे देशों में कही सुनी जाती हैं उसके बाद में दी गयीं थीं। इस सीरीज़ में 20 पुस्तकें प्रकाशित की गयीं। यह एक आश्चर्यजनक और रोचक संग्रह था।

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आज हम एक और नयी सीरीज़ प्रारम्भ कर रहे हैं “भूली बिसरी लोक कथाएँ”। इस सीरीज़ में हम उन पुरानी लोक कथाओं की पुस्तकों का हिन्दी में अनुवाद कर रहे हैं जो बहुत शुरू शुरू में लिखी गयी थीं। ये पुस्तकें तब की हैं जब लोक कथाओं का प्रकाशन आरम्भ हुआ ही हुआ था। जिनका मूल रूप अब पढ़ने के लिये मुश्किल से मिलता है और हिन्दी में तो बिल्कुल ही नहीं मिलता। ऐसी ही कुछ अंग्रेजी और कुछ दूसरी भाषा बोलने वाले देशों की लोक कथाओं की पुस्तकें हम अपने हिन्दी भाषा बोलने वाले समाज तक पहुँचाने के उद्देश्य से यह सीरीज़ आरम्भ कर रहे हैं।

इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि ये सारी लोक कथाएँ बोलचाल की भाषा में लिखी जायें ताकि इन्हें हर वह आदमी पढ़ सके जो थोड़ी सी भी हिन्दी पढ़ना जानता हो और उसे समझता हो। ये कथाएँ यहाँ तो सरल भाषा में लिखी गयी है पर इनको हिन्दी में लिखने में कई समस्याएँ आयी है जिनमें से दो समस्याएँ मुख्य हैं।

एक तो यह कि करीब करीब 95 प्रतिशत विदेशी नामों को हिन्दी में लिखना बहुत मुश्किल है, चाहे वे आदमियों के हों या फिर जगहों के। दूसरे उनका उच्चारण भी बहुत ही अलग तरीके का होता है। कोई कुछ बोलता है तो कोई कुछ। इसको साफ करने के लिये इस सीरीज़ की सब किताबों में फुटनोट्स में उनको अंग्रेजी में लिख दिया गया हैं ताकि कोई भी उनको अंग्रेजी के शब्दों की सहायता से कहीं भी खोज सके। इसके अलावा और भी बहुत सारे शब्द जो हमारे भारत के लोगों के लिये नये हैं उनको भी फुटनोट्स और चित्रों द्वारा समझाया गया है।

ये सब पुस्तकें “भूली बिसरी लोक कथाएँ” नाम की सीरीज के अन्तर्गत प्रकाशित की जा रही हैं। ये पुस्तकें आप सबका मनोरंजन तो करेंगी ही साथ में दूसरी भाषाओं के लोक कथा साहित्य को हिन्दी में प्रस्तुत करेंगी। आशा है कि हिन्दी साहित्य जगत में इनका भव्य स्वागत होगा।

सुषमा गुप्ता

अक्टूबर 2019


[1] “One Story Many Colors”


(क्रमशः अगले भाग में जारी...)

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