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लोक कथा - किस्सए चार दरवेश - सुषमा गुप्ता - खंड दो


पूर्व खंड -

खंड 1 |

भूली बिसरी लोक कथाएँ सीरीज़–24


किस्सये चार दरवेश

अमीर खुसरो – 1300–1325


अंग्रेजी अनुवाद -

डन्कन फोर्ब्ज़ – 1857


हिन्दी अनुवाद -

सुषमा गुप्ता

अक्टूबर 2019

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खंड 2

किस्सये चार दरवेश[1]

किस्सये चार दरवेश फारसी में, चार दरवेश की कहानियाँ हिन्दी में और Tales of Four Derweshes अंग्रेजी में एक ऐसी पुस्तक का नाम है जो आज से 700 साल पहले, 1300–1325, फारसी में लिखी गयी थी। इसको लिखने वाले का नाम है अमीर खुसरो देहलवी।

किस्सये चार दरवेश उनकी एक बहुत ही प्रसिद्ध पुस्तक है जो इतनी पुरानी लिखी हुई जाने के बावजूद इतनी लोकप्रिय है कि जब यह प्रकाशित होनी शुरू हुई तो फिर कभी “आइट औफ प्रिन्ट” नहीं हुई। “दरवेश” सूफ़ी लोगों को कहते हैं। ईराक में ये लोग खानाबदोश होते हैं इधर उधर घूमते रहते हैं। ऐसे कुछ लोग ज्यू में भी पाये जाते हैं। अधिकतर ये लोग जादू टोना जानते हैं। ये सन्त किस्म के लोग होते हैं। इनको उर्दू में कलन्दर भी कहते हैं। इस तरह यह कहानी ऐसे ही चार संतों की कहानी है।

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700 साल पहले की लिखी हुई, यानी 1300 और 1325 के बीच में लिखी गयी अमीर खुसरो की इस पुस्तक को भारत में पहली बार कलकत्ता में मीर अमान मुहम्मद ज़ाकिर फारसी से उर्दू में अनुवाद करा कर 1804 में दुनियाँ के सामने लाया गया था। यह अनुवाद साहित्यिक उर्दू में किया गया था जिससे साधारण लोग इसका आनन्द नहीं उठा सके।

उसके बाद 1857 में इसको डन्कन फोर्ब्ज़[2] ने अंगे्रेजी में अनुवाद करके संसार के सामने रखा। आज हम उसी अंग्रेजी पुस्तक का हिन्दी अनुवाद करके आप सब हिन्दी भाषा समझने वालों तक पहुँचा रहे हैं।

वैसे तो अमीर खुसरो ने बहुत कुछ लिखा है – मसनवी शायरी गजलें दोहे पहेलियाँ और उनकी सभी रचनाएँ बहुत पसन्द की जाती हैं और मिलती भी हैं पर हम यहाँ पर अपनी भूली बिसरी पुस्तकों की कड़ी में अमीर खुसरो की लिखी हुई यह पुस्तक “किस्सये चार दरवेश” आपको बोलचाल की हिन्दी भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है आपको यह पुस्तक पढ़ कर बहुत अच्छा लगेगा। तो लीजिये पढ़िये उसे आज अब हिन्दी में।


[1] Kissaye Chahar Darwesh. By Amir Khusro. 1300-1325. 5 Tales.

[2] Bagh-O-Bahar or The Tales of Four Darweshes. Translated by Duncan Forbes from Mir Amman version of 1804. 1857. This book is available at : http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/baghobahar/index.html#index


(क्रमशः अगले खंडों में जारी...)

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