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दोहरा चरित्र - टीना कर्मवीर

दोहरा चरित्र

   तुम कहते हो महिला की कोई जाति नहीं होती।

फिर शोषण की कैसे अपनी जाति हो सकती है।

तुम कहते हो आज के दौर में कहा है जातिवाद

फिर क्यों हमें पायल तडवी की तरह मौत दे देते हो


तुम ना जानो दर्द हमारा, आकर देखो फिर बोलो

तुम्हें बस आता है हम पर व्यंग्य  है करना 

तुम क्या जानो समस्या हमारी  पितृसत्ता

जातिवाद, निरक्षरता, तंगहाली, पूर्वाग्रह


“इतनी छोटी कहां है मेरी आजादी कि

तुम्हें और तुम्हारे जैसों को पूरी जगह ना हो”

  मेरा तो बस इतना है मानना दलित स्त्रियों के

चिंतन और संघर्ष की कठिन है,

पर वह लड़ रही है और लड़ती रहेगी।

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टीना कर्मवीर

सामाजिक कार्यकर्ता,स्वतंत्र विश्लेषक, शोधार्थी

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