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लघुकथा - शक का अपराधी - ज्ञानदेव मुकेश

 

      शक का अपराधी

  मैं टेबुल-कुर्सी पर बैठकर कुछ लिखने में तल्लीन था। मेरे हाथ में एक इम्पोर्टेड कलम थी, जो मुझे गर्व का भान करा रही थी। तभी मुझे प्यास लगी। मैंने बड़ी लापरवाही से कलम को टेबुल के किनारे छोड़ा और पानी पीने रसोईघर में चला गया।


  जब लौटकर आया तो मेरी कलम कहीं नजर नहीं आई। मैं चकराया। तभी मैंने कामवाली को कमरे से बाहर जाते देखा। अनायास शक की एक काली छाया मेरे मन-मस्तिष्क में जा घुसी। मैंने कामवाली को एक चोर की तरह देखा। मगर उसे टोकने की हिम्मत जुटा नहीं पाया। मैंने एक दूसरी मंहगी कलम निकाली और अपना काम पूरा किया।
   अगली सुबह मैं फिर काम में मगन था। आज मैं थोड़ा चौकन्ना था। कामवाली दूसरे कमरे में झाड़ू लगा रही थी। तभी किसी आगन्तुक ने लगातार कई बार कॉल बेल बजा दी। मुझे लगा, वह जल्दी में है। मैंने हड़बड़ी में फिर कलम वहीं टेबुल किनारे रखी और बाहर दरवाजे की तरफ लपका।


   दरवाजे पर दूधवाला था। उसे देर हो गई थी। इसलिए वह जल्दी में था। मैंने दूध का पैकेट लेकर रसोईघर में रखा और वापस टेबुल तक आया।
‘ये लो ! फिर कलम गुम !’ टेबुल पर कलम न पाकर मेरे मुंह से ये शब्द निकल गए। कामवाली के पांव कमरे से बाहर जाते दिख रहे थे। मैं आज भी चुप रहा। आज कामवाली एक बड़ी चोर की तरह दिखी।


  अगले दिन से मैं बहुत सतर्क रहा। मेरी अगली कलम गायब होने से तो बचती रही। मगर कामवाली जब भी मेरे कमरे में आती तो मैं उसे एक अपराधी की तरह देखता और घिनौना मुंह बनाकर अपने नाक-भौं सिकोड़ लेता।


   पांचवे दिन मुझे टेबुल के ड्राअर से एक फाइल निकालनी थी। मैं ड्राअर खोलकर फाइल खींची। मैं आश्चर्यचकित रह गया। फाईल के पास मेरी इम्पोर्टेड कलम खुली अवस्था में गिरी पड़ी थी। मैंने दूसरी फाइल हटाई। फिर हैरानी। दूसरी कलम भी वहीं दबी पड़ी दिख गई। मैंने अपनी स्मृति को कुरेदा। याद आया, उन पिछले दोनों दिन ड्राअर खुली थी। निस्संदेह मेरी लापरवाही से कलमें उसमें जा गिरी थीं। मुझे गहरा दुख और अफसोस होने लगा।


  अगली सुबह मैं अपने काम में लगा था। तभी कामवाली झाड़ू करती मेरे कमरे में आयी। मैं अनायास एक अपराधी की तरह झटके से खड़ा हो गया। मैंने कामवाली की तरफ देखा। वह भी मेरी ओर देख रही थी। उसे देख, मुझे आज ऐसा लगा जैसे उसने मुझे देख आंखों में मेरे लिए घृणा भर ली हो और नाक-भौं सिकोड़ लिया हो।    
                           
                                                  -ज्ञानदेव मुकेश  
                                                फ्लैट संख्या-301, साई हॉरमनी अपार्टमेन्ट,
                                                अल्पना मार्केट के पास,
                                                न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी, 
                                                पटना-800013 (बिहार)


e-mail address - gyandevam@rediffmail.com

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