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पूरी जिन्दगी की नैया पार है - सतीश कुमार यदु

पूरी जिन्दगी की नैया पार है,
उम्र नाव तो अनुभव पतवार है !!!*

सोलह संस्कार गतिशील उम्र की नेमत है !
गर्भाधान से अंत्येष्टि ही जीवन में 'कीमत' है !!!
विकासात्मक परिवर्तन कालानुक्रम मे,
आयु ही निरंतरता का पहचान है !
अनुभवपूरित कौशल के अनुप्रयोग से,
मिलता समस्या का समाधान है! !!

*पूरी जिन्दगी की नैया पार है,
उम्र नाव तो अनुभव पतवार है !!!*

सामाजिकता, संज्ञानात्मक भावनाएँ उम्र के सोपान है !
आयु, अनुभव, नमनीयता गतिशील जीवन के वरदान है !!
ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास जीवन के आश्रम चार है !
शिशु, युवा, प्रौढ़ वृद्ध मानव विकास के घर-संसार है !!

*पूरी जिन्दगी नैया की पार है,
उम्र नाव तो अनुभव पतवार है !!*

जागृत, स्वप्न, सुसुप्त व तुरीय, मानव जीवन के है अवस्थाएँ चार !
वय, उम्र, अवस्था व आयु सब अनुभव के भण्डार है !!
सहज, सरल, सुगम, सहृदय है, तो जीवन गुलजार है !!
जीवन के दिन चार है, यही तो जीवन आधार का है !!!

*पूरी जिन्दगी की नैया पार है,
उम्र नाव तो अनुभव पतवार है !*

सतीश कुमार यदु
कवर्धा, कबीरधाम (छ. ग.) 

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