रचनाएँ खोजकर पढ़ें

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -


विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


उत्कोचः भारतीय समाज का सच - सुनीता

साझा करें:

सुनीता सहायक प्राध्यापिका राजा सिंह कॉलेज, सीवान जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा उत्कोचः भारतीय समाज का सच ‘उत्कोच’ हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य...

सुनीता

सहायक प्राध्यापिका

राजा सिंह कॉलेज, सीवान

जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा

उत्कोचः भारतीय समाज का सच

‘उत्कोच’ हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य रचनाकारों में से एक डॉ0 जयप्रकाश कर्दम द्वारा रचित उपन्यास है। उत्कोच का अर्थ है-रिश्वत या घूस। इस साधारण विषय पर रचित यह एक असाधारण उपन्यास है। इस मुद्दे पर लिखा गया अपनी तरह का यह पहला उपन्यास है। ‘उत्कोच’ मनोहर की कथा है। वह बिक्री कर जैसे विभाग में (जो रिश्वतखोरी के लिए बदनाम है) क्लर्क के रूप में कार्यरत है। वह भ्रष्टाचार का घोर विरोधी है। वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में रिश्वत का बहिष्कार करता है। उसकी पत्नी श्यामा उसके विचारों से तालमेल नहीं बैठा पाती। प्यारी सी बेटी सुजाता के जन्म के पश्चात् उनके जीवन में खुशियाँ छा जाती है। परन्तु श्यामा मनोहर पर सदैव दबाव बनाती है कि वह रिश्वत लेकर अतिरिक्त कमाई से अपने परिवार की सुख-सुविधा के साधन जुटाए। वह क्रोध में कहती है। सही कह रही हूँ। सुजाता से तनिक भी प्यार नहीं है तुम्हें।01 मनोहर अपने सिद्धांतों पर अडिग है। अंततः श्यामा तनावग्रस्त रहने लगती है वह बीमार पड़ जाती है। छोटी सी बच्ची सुजाता को छोड़कर वह असमय दुनिया से कूच कर जाती है।

निरन्तर इतने आघातों को झेलते हुए भी मनोहर अपने सिद्धांतों पर अटल रहता है। वह अपने मित्रों को भी रिश्वतखोरी का त्याग करने की प्रेरणा देता रहता है। ‘उत्कोच’ या रिश्वत भारतीय प्रशासनिक तंत्र में रच-बस गया है। यह आधुनिक समस्या नहीं है, बल्कि अत्यंत प्राचीनकाल से भारत में इसके प्रमाण मिलते है। '' हाल के दिनों में स्थानीय ताराचंडी धाम स्थित 12वीं सदी के शिलालेख के पूरी तरह से पाठन के बाद अधिकारी द्वारा उत्कोच लेने का उल्लेख सामने आया है।02 अंग्रेजी शासनकाल में भी रिश्वत या उत्कोच का बोलबाला था। अपनी सुप्रसिद्ध कहानी 'नमक का दरोगा' में प्रेमचंद्र लिखते है। नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर की मजार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए। ऐसा काम ढूंढना जहाँ कुछ ऊपरी आय हो।03 उल्लेखनीय है कि उक्त वक्तव्य में एक पिता अपने पुत्र को रिश्वत लेने का उपदेश दे रहा है, वह भी बड़े सात्विक भाव से। वर्तमान समय में तो उत्कोच भारतीय राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, कला, सभी क्षेत्रों में विषाणुओं की तरह फैल गया है।

सभी भ्रष्टाचार से त्रस्त है, परंतु अवसर आने पर स्वयं भी रिश्वत लेने से नहीं चूकते, स्वयं के भ्रष्टाचार के लिए सभी के पास अपने-अपने तर्क हैं। मनोहर की पत्नी श्यामा तर्क देते हुए कहती है, अरे बाबा, भष्टाचार वह होता है, जब लोग गबन या घोटाला करते हैं। तुम यदि थोड़ी-बहुत रिश्वत लेते हो तो वह भ्रष्टाचार नहीं होता है।.............तुम अपने मन से इस ग्रंथी को निकाल दो।04 श्यामा, मनोहर को हीनभावना से ग्रस्त समझती है, जबकि सच्चाई यह है कि वह स्वयं हीनभावना से ग्रस्त है। दूसरी महिलाओं के गहने, कपड़े देखकर वह स्वयं को हीन समझती है। किसी समारोह में नहीं जाना चाहती, किसी से मिलती जुलती नहीं है। मनोहर पर रिश्वत लेने के लेने के लिए दबाव बनाती है। झगड़ा करती है। अंततः तनावग्रस्त रहने के कारण बीमार पड़ जाती है।

मनोहर आदर्श पात्र है। घर एवं बाहर दोनों जगह अपमान व उपहास का पात्र बनने पर भी वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता। रोजमर्रा की समस्याओं में भी वह अपने उसूल नहीं तोड़ता। लखनऊ जाने के लिए कंफर्म सीट न मिलने की स्थिति में उसके एस0 टी0 ओ0 सुझाव देते है। ष्अरे किसी भी ट्रेन से चले जाओ। टी.सी. को सौ-पचास रूपये देना, सीट का इंतजाम हो जाएगाष्05 परन्तु मनोहर किसी स्तर पर भी रिश्वत का समर्थन करने को तैयार नहीं होता है। 'सेवासदन' के दरोगा कृष्णचन्द्र की भांति अपना रास्ता नहीं बदलता। कृष्णचन्द्र कहते हैं - धर्म का मजा चख लिया, सुनीति का हाल भी देख चुका। अब लोगों को खूब दबाऊँगा। खूब रिश्वत लूंगा, यही अंतिम उपाय है। 06

भ्रष्टाचार से लड़ते हुए मनोहर को उस समय सुखद आश्चर्य हुआ, जब उसी के दफ्तर में काम करने वाला क्लर्क सुन्दरलाल, रिश्वतखोरी का विरोध करने लगता है। दरअसल सुन्दरलाल के पुत्र को विद्यालय में कुछ लड़के 'दो नम्बरी का बेटा' कहकर चिढ़ाने लगे थें। इस कारण वह हीनभावना का शिकार हो जाता है। अपने बेटे को शर्मिन्दगी से बचाने के लिए सुन्दरलाल, अब से रिश्वत न लेने का प्रण करता है। इस उम्मीद के साथ उपन्यास समाप्त होता है कि कभी न कभी सभी को रिश्वत या उत्कोच की बुराईयां समझ में आएंगी।

उपन्यास भारतीय समाज की एक ज्वलंत समस्या को उजागर करता है। 'भ्रष्टाचार' एक ऐसी समस्या है, जिसे सभी भुनाना चाहते है। परन्तु इसकी जड़ में जाकर कोई प्रहार नहीं करना चाहता। आखिर किसी न किसी को तो शुरूआत करनी ही होगी। प्रत्येक व्यक्ति अगर अपने स्तर पर प्रयास करे तो बड़ी से बड़ी समस्या भी हल हो सकती है। मनोहर के विचार उल्लेखनीय है। आप लोग बहुत कुछ कर सकते हो। भ्रष्टाचार के विरूद्ध आंदोलन एक दिन में तो खड़ा होगा नहीं। सभी लोग अपने-अपने स्तर से भ्रष्टाचार का विरोध कीजिए।07 अपने साथी सुन्दरलाल द्वारा प्रश्न पूछने पर पुनः मनोहर समझाता है। आप लोग जो रिश्वत लेते है, यह भी तो भ्रष्टाचार ही है। आप लोग रिश्वत लेना बन्द कर दीजिए। ऐसा करके हम लोग कम से कम अपने दफ्तर में तो भ्रष्टाचार खत्म कर ही सकते हैं।08 अपने अध्यापक मित्र सुधीर राजौरा को समझाते हुए मनोहर कहता है - तुम अध्यापक हो। बच्चों को समाज पर रिश्वत के दुष्प्रभावों के बारे में बताकर उन्हें प्रेरित कर सकते हो कि बड़े होकर जब वे नौकरी पर जाएँ तो रिश्वत नहीं लें।09 मनोहर समस्या की जड़ पर प्रहार करना चाहता है।

इस प्रकार उत्कोच या रिश्वत की समस्या को आधार बनाकर यह उपन्यास लिखा गया है। परन्तु लेखक की पैनी दृष्टि समाज की अन्य बुराइयों को भी नजरअन्दाज नहीं कर सकी है। जातीय विषमता, वर्गीय विषमता, सामाजिक विषमता व आर्थिक विषमता किस प्रकार एक-दूसरे में गुंथे हुए हैं, इसे लेखक ने भलीभांति दर्शाया है। यथास्थान जाति संबंधी, आरक्षण संबंधी व स्त्री जीवन की समस्याओं का भी चित्रण हुआ है। यह उपन्यास डॉ0 कर्दम के लेखन की विविधता को दर्शाता है।

उपन्यास की भाषा अत्यंत सरल व सहज है। आवश्वकतानुसार अंग्रेजी, उर्दू, आदि शब्दों का भी प्रयोग किया गया है। मनोहर की माँ के संवाद, श्यामा की मृत्यु व अंत्येष्टि क्रिया के दृश्य भावुक कर जाते है। उत्कोच या रिश्वत भ्रष्टाचार का बीज है। भ्रष्टाचार से पूरा भारतीय समाज त्रस्त है। यह किसी एक वर्ग की समस्या नहीं है। उम्मीद है कि उपरोक्त उपन्यास को किसी विशेष साहित्य की चौखट में कसने की बजाय मुक्त रूप से पढ़ा व सराहा जाएगा।

--

संदर्भ

1 - डॉ0 जय प्रकाश कर्दम, 'उत्कोच' पृ0-87 पहला संस्करणः 2019, प्रकाशकः राधाकृष्ण प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड जी-17, जगतपुरी दिल्ली- 110051

2 - 'भ्रष्टाचार की कहानी बहुत पुरानी' https/m.jagran.com/bihar 19 अक्टूबर 2012

3 - प्रेमचन्द्र 'नमक का दारोगा' premchand.co.in>namak-ka-daroga

4 - डॉ0 जयप्रकाश कर्दम 'उत्कोच' पृ0- 76

5 - वही पृ0- 68

6 - प्रेमचन्द 'सेवासदन' पृ0- 09 धीरज पॉकेट बुक्स।

7 - डॉ0 जयप्रकाश कर्दम 'उत्कोच' पृ0- 64।

8 - वहीं पृ0- 64

9 - वहीं पृ0- 122

-----****-----

|दिलचस्प रचनाएँ:_$type=blogging$count=5$src=random$page=1$va=0$au=0$meta=0

|समग्र रचनाओं की सूची:_$type=list$count=8$page=1$va=1$au=0$meta=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: उत्कोचः भारतीय समाज का सच - सुनीता
उत्कोचः भारतीय समाज का सच - सुनीता
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/12/blog-post_66.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/12/blog-post_66.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ