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परीक्षा की तैयारी......... परीक्षा को न मानें युद्ध का मैदान - डॉ. सूर्यकांत मिश्रा

परीक्षा की तैयारी.........

परीक्षा को न मानें युद्ध का मैदान

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पढ़ाई के साथ मनोरंजन को भी दें समय....

आने वाले कुछ महीने बच्चों के लिए बड़े तनाव भरे रहने वाले हैं । परीक्षा के दिन जैसे- जैसे समीप आते जाते हैं ,बच्चों की नींद गायब हो जाती है । उन्हें भूख भी नहीं लगती । कब पानी पीना है और कब गला तर करना है यह भी पता नहीं चल पाता है । हमेशा अच्छे नंबर लेन वाले विद्यार्थी भी चिंतातुर हो जाते हैं । बच्चों के तनाव को दूर करने में शिक्षकों और पालकों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है । इन दिनों माता- पिता को अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है । विद्यार्थी जीवन में परीक्षा का समय वह समय होता है जिससे भागा नहीं जा सकता है,बल्कि उसका डटकर सामना करना ही विद्यार्थी जीवन का कर्तव्य होता है । परीक्षा का भय बच्चों की सकारात्मक सोच को नकारात्मक दिशा में मोड़कर बुरे परिणाम की ओर ले जा सकता है । इसलिए प्रत्येक शिक्षक और माता- पिता को इस ओर गौर करने की जरूरत है कि परीक्षा से पूर्व बच्चा किसी भी प्रकार के दबाव के दायरे में न आने पाए । उसकी कठिनाइयों का समाधान पूरी रुचि लेकर पालकों को निकालने का प्रयास करना चाहिए। नियमित दिनचर्या तैयार कर उस पर अमल करने से बहुत सी समस्याएं स्वमेव समाप्त हो जाती हैं । सुबह उठने से लेकर रात में सोने के समय और भोजन तथा मनोरंजन की समय- सारिणी ही परीक्षा के भय से उबार सकती है । इस दौरान स्वास्थ्य- वर्धक भोजन पर भी पर्याप्त ध्यान देना जरूरी है ।


सबसे पहले पौष्टिक भोजन पर हो ध्यान

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हम अनादिकाल से जानते आ रहे हैं कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है । जब तक पढ़ने के लिए हमारा मन और शरीर तैयार नहीं होगा तब तक हम अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सकेंगे । इसलिए सबसे पहले पौष्टिक भोजन की सूची तैयार कर उसे ग्रहण करने का समय तय कर लें । इस बात का विशेष ध्यान रखें कि परीक्षा के दिनों में तली हुई चीजें और जंक फूड बिल्कुल भी न लें । विद्यार्थी जीवन किशोरावस्था और यौनावस्था का हमसफ़र होता है । इस उम्र में दिन में कई बार खाने की आदत भी सामान्य तौर पर दिखाई पड़ती है । दोपहर और रात के भोजन के बीच भूख लगने पर चना- गुड़ तथा मुरमुरा खाया जा सकता है,जो स्वास्थ्य-वर्धक होने के साथ सुपाच्य भी होता है । कुछ दिनों के लिए सड़क किनारे लगने वाले ठेलों में उपलब्ध भेल, गुपचुप और अन्य तरह की जिव्हा को आकर्षित करनी वाली चटपटी चीजों की ओर से अपनी नजरें हटा लेनी चाहिए । फलों का सेवन और पेय - पदार्थ के रूप में दूध तथा लस्सी का प्रयोग किया जा सकता है । सेव और अनार के साथ ही सूखे

मेवों का सेवन मस्तिष्क को भरपूर ताजगी देकर पढ़ी जा रही सामग्री को सहेजने में लाभकारी हो सकते हैं ।

खुद को करें हर तरह से तैयार

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कहते हैं भगवान भी उसी की मदद करते हैं जो खुद को हर परिस्थिति में अडिग रख पाने  की स्थिति में होते हैं । विद्यार्थी जीवन हर रूप में पढ़ाई के प्रति अडिग रहने वाला होना चाहिए । चाहे माहौल कैसा भी हो हमारा प्रयास उसे अनुकूल बनाने वाला ही होना चाहिए । हमने गुदड़ी के लाल वाली कहावत सुन रखी है । अनेक बार उसे प्रत्यक्ष देखने का अवसर भी मिला है । सुविधा न होने पर भी सफलता का परचम लहराना ही " गुदड़ी के लाल " का पर्याय होता है । रेस के मैदान में हमने गरीब परिवार की " दुतिचंद " को मैडल की हकदार बनते देखा है । दौड़ के लिए आवश्यक रूप से पैरों में होने वाले जूते भी उसे नसीब नहीं थे । आज पढ़ाई के लिए ऐसी कठिन परिस्थितियां कहीं भी नहीं हैं ।सरकार द्वारा निः शुल्क पुस्तकों से लेकर हर प्रकार की पाठ्य सामग्रियां उपलब्ध कराई जा रही हैं । समाज सेवी संस्थाएं भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। जरूरत है लक्ष्य निर्धारित करने की । फिर उस लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम किसी भी सूरत में पीछे न खिंचे जाएं ।इस तरह का हठी जीवन बच्चों को परीक्षा के भय से दूर रखते हुए कामयाबी के द्वार तक जरूर पहुंचा सकेगा । किसी की संपन्नता को देख अपनी कमियों पर निराश न हों वरन इस संकल्प के साथ आगे बढ़े कि मेरे पास जो सुविधा है वह जरूरत से कहीं ज्यादा है । मेरा दावा है ऐसा करने और सोचने वाला बच्चा रेस में कभी नहीं पिछड़ सकता है ।

कठिन विषय को बनाएं मछली की आंख

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मछली की आंख पर निशाना साधना आसान काम नहीं था, फिर भी धनुर्धर अर्जुन ने इसे ही अपना लक्ष्य बनाया और फिर सटीक निशाना लगाकर सफलता की सीढ़ी पर चढ़ गया । विद्यार्थियों को भी कुछ इसी तरह की तैयारी करनी होगी । जो भी विषय कठिन लगता हो उसे पहले तैयार करें। उसे किसी भी स्थिति में मछली की आंख से कम न आंकें । लगातार उस विषय की तैयारी एक दिन उसे आसान बना दिखाएगी। प्रायः देखा गया है कि हाई स्कूल की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को विज्ञान और गणित असाध्य विषय लगता है । इसी तरह हायर सेकंडरी के विद्यार्थी गणित,भौतिक शास्त्र , रसायन एवम एकाउंटेंसी जैसे विषयों को कठिन श्रेणी में रखते आये हैं । ऐसे विद्यार्थियों को यह ठान लेना चाहिए कि इन विषयों की पढ़ाई अन्य विषयों के साथ मिलाकर प्रतिदिन करना ही है । जब रोज- रोज इन विषयों को दोहराया जाएगा तो वह दिन दूर नहीं होगा जब उक्त विषयों के सवाल डराने वाली शक्ल को छोड़कर स्माइल देते नजर आएंगे । परीक्षा कक्ष में कई बार ऐसे अवसर भी आते हैं जब प्रश्न पत्र में आए प्रश्नों का उत्तर लिख पाना असंभव प्रतीत होता है । उस समय दिमाग में किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न किए बगैर यह सोचना चाहिए कि उक्त प्रश्न मेरे लिए ही नहीं अन्य साथियों के लिए भी ऐसी ही स्थिति निर्मित कर रहा है । इससे अवसाद की स्थिति से बचा जा सकता है और बाकी प्रश्नों के उत्तर आसानी से लिखे जा सकते हैं । नकारात्मकता से बचने मनोरंजन भी जरूरी

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परीक्षा की तैयारी के बीच मन विचलित न हो और नकारात्मक विचार न आएं यह संभव नहीं । प्रत्येक विद्यार्थी को इस तरह की बाधा उत्पन्न करने वाले विचारों से सावधान रहने की जरूरत है । इसके लिए पढ़ाई के बीच ब्रेक लेना और कुछ मनोरंजन की दुनिया से जुड़ाव बनाना एक अच्छा कदम हो सकता है । कुछ बच्चों को खेल में रुचि हो सकती है तो कुछ को टी वी देखने में आनंद आ सकता है । मनोरंजन का जो भी साधन आप अपनाने जा रहे हों ,यह जरूर ध्यान रखें कि वे अत्यंत थकाने वाले न हों । टी वी के ऐसे कार्यक्रम कतई न देखें जो विशुद्ध मनोरंजन से परे दिमाग पर जोर डालने वाले न हों । मनोरंजन और खेल के द्वारा हमारे मस्तिष्क की थकी हुई ऊर्जा पुनः जागृत होकर चेतन और अचेतन मन को सक्रिय करने का कार्य करती है । लगातार पढ़ते रहने से मस्तिष्क भी ऊब का अनुभव करता है। अतः कुछ देर टहलना , कुछ खेलना और हँसी - मजाक से संबंध जोड़ना उचित हो सकता है । कभी भी अपने मन में इस तरह के विचारों को प्रवेश करने का मौका न दें जो आपके पाठ्यक्रम के कठिन अंशों को न पढ़ने की नकारात्मक सलाह दे रहे हों । यह मान लिया जाना चाहिए कि कुछ भी कठिन स्तर का नहीं होता है यदि हम पूरे मन से उसका अध्ययन करें ।

डॉ. सूर्यकांत मिश्रा

न्यू खंडेलवाल कॉलोनी, ममता नगर

प्रिंसेस प्लैटिनम, हाउस नंबर 05

राजनांदगाँव (छ. ग.)

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