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निश्चय - चंचलिका शर्मा


ठाकुर महेन्द्र सिंह की छोटी बहू मृदुला संतान संभवा थीं । हवेली में रौनक थी फिर एक बार मगर ठकुराइन शांति देवी थोड़ी बेचैन थीं । अगर छोटी को कन्या संतान हुई तो ? पुरखों के सम्मान में पैबन्द लग जाएगा ...

मृदुला अपने पति रघुवीर सिंह के संग डाक्टर के पास जाती है चेकअप के लिए । सब कुछ ठीक रहता है । ठकुराइन के हुक्म के अनुसार डाक्टर को कानून के खिलाफ जाकर बताना पडा कि मृदुला की जन्म लेने वाली संतान कन्या है ।

हवेली के लिए यह एक दुःसमाचार था ... ठकुराइन ने सोचा ये कैसे संभव हो सकता है , बड़ी और मझली बहुओं ने तो उन्हें दो - दो पोतों का सुख दिया हैं । उन्होंने छोटी बहू को अपने कमरे में बुला कर आदेश दिया , यथाशीघ्र गर्भपात करवा लो । ठाकुर वंश के नाम पर वे कोई धब्बा नहीं लगवाना चाहती।

मृदुला सभी के चेहरे को आशा भरी निगाहों से देख रही थी, कोई तो इस हुक्म का विरोध करे  मगर हवेली में तो ठकुराइन के अनुमती के बिना एक पत्ता भी हिलता न था । शेष आस लिए वह धीमे कदमों से अपने कमरे में आती है । रघुवीर सिंह ने भी कठोर स्वर में अपनी माताजी के हुक्म को दोहरा दिया ।

अपने मास्टर पिता की शिक्षा दीक्षा में पली- बढ़ी मृदुला के लिए यह रात घोर संकट की रात थी । आकर पलंग पर निढाल  होकर गिर पड़ती है और उसकी आँख लग जाती है सपने में प्यारी सी एक बच्ची आकर कहती है , " माँ , मुझे मत मारो माँ .. मुझे ये दुनिया देखनी है .. मुझे बचा लो माँ ." ... मृदुला की नींद टूट जाती है । इधर - उधर नजर दौड़ाकर अपनी गुडिया को ढूँढती है मगर उसे आशा की एक किरण दिखाकर वो जा चुकी थी ।

मृदुला कमरे में चक्कर लगाते हुए सोचने लगी किसी ज्ञानी महापुरूष ने ठीक ही कहा है , अपराध करने वाले से अपराध सहने वाला अधिक अपराधी होता है । उसने दृढ़ निश्चय लिया , चाहे कुछ भी हो जाए , चाहे कानून का सहारा ही क्यों न लेना पड़े , वह अपनी कन्या को ज़रूर जन्म देगी ।

अगले दिन ठाकुर परिवार के लिए मानो एक नया सवेरा था । मृदुला पूरे परिवार के सामने अपना फैसला सुनाती है . अपनी सास से कहती है,   " माँ , आप भी तो एक औरत हैं , कितने अच्छे से अपने बच्चों की परवरिश की है  फिर आप क्यों चाहती हैं कि आपकी पोती , अपने भाइयों की बहन इस दुनिया में  न आए ? "

मृदुला की इस याचना ने ठकुराईन पर जाने  क्या जादू किया उन्होंने मृदुला को गले से लगा लिया ,  " बेटी , मुझे माफ कर दे . आज एक बहुत बडे पाप से तूने मुझे बचा लिया . मेरी पोती ज़रूर आएगी ,इसी आँगन में अपने भाइयों के संग खेलेगी ."

ठाकुर परिवार को अब अपने आँगन में आने वाली परी का  बेसब्री से इंतजार था ..

---- चंचलिका शर्मा

वडोदरा, गुजरात

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