रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

बैगानी लोक कथा... लक्ष्मी बड़ी की सत्य - डा. विजय चौरसिया

 

बैगानी लोक कथा...

लक्ष्मी बड़ी की सत्य

- डा. विजय चौरसिया

एक गांव में एक बूढ़ा और एक बुढ़िया रहते थे. उनकी दो लड़की थीं। उनकी एक लड़की का नाम लक्ष्मी और एक का नाम सत्यवती था. दोनों बहनें आपस में बहुत लड़ती थी. एक बहन कहती है मैं बड़ी हूं तो दूसरी बहन कहती मैं बड़ी हूं. बूढ़ा - बुढ़िया उन दोनों से कहते की तुम लोग आपस में मत लड़ा करो. परंतु वे दोनों उनकी बात नहीं माना करती थीं।

एक दिन छोटी बहन अपनी बडी बहन से कहती है . दीदी आज हम एक गांव जायेंगे. तुम भी साथ में चलो. तब दोनों बहनें एक साथ गांव से निकल पडी . बड़ी बहन लक्ष्मी आगे - आगे जा रही थी. उसके पीछे - पीछे उसकी छोटी बहन सत्यवती चल रही थी.

उन्हें रास्ते में भीम मिला . तो भीम ने पूछा ऐ लड़की तुम लोग कहां जा रही हो . तो छोटी बहन कहती है - भगवान हम लोग आपस में बहुत लड़ते हैं . इसलिये एक गांव जा रहे हैं . तब भीम भी उन लड़कियों के साथ चलने लगा. जाते जाते रास्ते में उन्हें भगवान विष्णु जी मिले. तो विष्णु भगवान ने भीम से पूछा भीमसेन तुम कहां जा रहे हो. तो भीम सेन ने कहा भगवान ये दोनों बहनें आपस में बहुत झगडा करती हैं. इसलिये इनका फैसला करने इनके साथ जा रहा हूं. तो विष्णु भगवान ने कहा ठीक है - मैं भी तुम लोगों के साथ चलता हूं.

इस प्रकार विष्णु भगवान भी उनके पीछे - पीछे चल दिये. सभी चलते चलते एक गांव में पहुंच गये. उन्हें गांव में पहुंचते - पहुंचते रात हो गयी. तो भीम उन तीनों से कहते हैं. अब तो रात हो गयी है कहीं विश्राम किया जावे.

तो विष्णु भगवान लक्ष्मी से कहते हैं. लक्ष्मी तुम किसी के घर जाकर हम लोगों के रुकने की व्यवस्था करो. तुम जाकर किसी के घर की परछी देख कर आओ. जिसमें रुका जा सके. तब लक्ष्मी पूरे गांव में घूम कर आयी. परंतु उन लोगों के रुकने की कहीं भी व्यवस्था नहीं हो पायी. तो भगवान विष्णु लक्ष्मी से पूछते हैं. क्यों लक्ष्मी कहीं रुकने की व्यवस्था हुयी की नहीं. तो लक्ष्मी कहती है. नहीं प्रभू गांव के सभी लोग मुझे ड़ंड़ा मारकर भगाते हैं.

तो भगवान विष्णु कहते हैं. ठीक है. चलो हम देखते हैं और किसी के घर में रात्री विश्राम की व्यवस्था करते हैं. ऐसा कहकर विष्णु जी सभी को अपने साथ ले गये. तब विष्णु जी एक गरीब के घर के सामने रुक गये. उस घर में एक औरत अपने बेटे के साथ रहती थी. लड़के ने अपने घर मेहमानों को आते देखा. तो अपनी मां से कहा मां अपने घर मेहमान आये हैं.

तो मां कहती है. बेटा हम लोग बहुत गरीब हैं. इन मेहमानों को क्या खिलायेंगे पिलायेंगे. यह बात विष्णु भगवान ने सुन ली और सोचा की ये लोग गरीब हैं. इनकी सहायता की जानी चाहिये.

उस दिन उस गांव में राजा के लड़की की शादी थी. रात को राजा ने उस लड़की और उसकी मां को निमंत्रण पर बुलाया था. तो उनके पास लड़की की बिदा में देने के लिये पैसा नहीं था. इसलिये वे लोग राजा के घर नहीं जा रहे थे. तब विप्णूं भगवान ने कहा तुम लोग वहां जरुर जाओ. राजा के घर उसकी लड़की की शादी हो रही है. तुम लोग वहां जाकर निमंत्रण खा कर आ जाओ.

तो लड़की की मां भगवान विष्णु से कहती है. कि महराज हम लोग वहां कैसे जायेंगे. हमारे पास तो लड़की को बिदाई में देने के लिये कुछ भी नहीं है. तो विष्णु भगवान कहते हैं. तुम्हारे घर में मसाला पीसने का लोढ़ा सिलौटा तो होगा ही. तुम लोग उसी को लेकर चले जाओ और उसी से लड़की के पांव पखार कर आ जाना. भगवान विष्णु की बात मानकर वह लड़की और उसकी मां राजा के घर लोढ़ा सिलौटा रखकर राजा के यहां शादी में गये और लड़की को लोढ़ा सिलौटा भेंट करके तुरंत वापस अपने घर आ गये.

दूसरे दिन जब सुबह हुयी तो राजा ने देखा की हमारी लड़की को कोई लोढ़ा सिलोंटा से पांव पखार कर गया है. तो उसने अपने चौकीदार से पूछा कि क्यों रे कौन यह लोढ़ा - सिलौंटा भेंट में दे गया है. तो चौकीदार कहता है महाराज वही हैं वे मां बेटी वे ही लोढ़ा सिलौटा भेंट करके तुरंत वापस चली गयी थी. हम लोगों ने देखा तक नहीं वे तुरंत चली गयी. तो राजा कहता है ये लोढ़ा - सिलौटा हीरा मोती के बने हैं.

राजा ने कहा चौकीदार तुम तुरंत जाकर उन मां बेटी को सम्मान पूर्वक लेकर आओ. चौकीदार मां बेटी के घर गया और उनसे कहा की तुम को राजा ने अभी बुलाया है. मां बेटी दोनों घबड़ा गयी कि राजा ने क्यों बुलाया है . वे नहीं जा रही थीं तो चौकीदार ने उन्हें सम्मान पूर्वक चलने का आग्रह किया.

तब उन दोनों को चौकीदार ने राजा के सामने हाजिर किया. तो राजा ने पूछा क्यों लडक़ी तुमने यह हीरा मोती से बना लोढ़ा सिलौटा भेंट किया है. तो लड़की और उसकी मां आश्चर्य में पड़ जाती हैं. तब राजा ने खुश होकर उन मां बेटी को आधा राज्य उपहार में दे दिया.

अब आधे राज्य में उन मां बेंटी का शासन तो आधे राज्य में उस राजा का शासन था. मां बेटी राजा के घर से अपने घर खुशी खुशी आ गये. तो विष्णु भगवान ने उन मां बेटी से कहा कि तुम्हारी दी हुयी भेंट क्या हो गयी. इतना सुनते ही मां बेटी ने भगवान विष्णु के पैर पकड़ लिये. तब विष्णु भगवान ने कहा जाओ हमारा आशीर्वाद है.

आधे राज्य पर शासन तुम करना और आधे राज्य पर राजा शासन करेगा. ऐसा कहकर विष्णु भगवान भीमसेन , लक्ष्मी और सत्यवती वापस आने लगे. तब विष्णु भगवान ने उस घर की ओर मुड़कर देखा तो वह छोटा सा घर एक विशाल महल और कई मंजिलों की अटारीयों में बदल गया.

यह देखकर लक्ष्मी दंग हो गयी तब विष्णु भगवान लक्ष्मी से पूछते हैं. क्यों लक्ष्मी अब तुम बताओ कौन बड़ा है. लक्ष्मी या सत्य ? तो लक्ष्मी ने कहा महाराज सत्य बड़ा है. तब भगवान ने लक्ष्मी और सत्य को आशीर्वाद दिया और अपने लोक चले गये ।

--

बायोडाटा डॉ.विजय चौरसिया

सम्प्रति -ª चिकित्सा कार्य, पत्रकारिता, लोक संस्कृति पर लेखन, प्रदेश के लोक नृत्यों एवं लोक संस्कृति के संरक्षण हेतु प्रयासरत। म.प्र.तथा देश की विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं जैसे कादंबनी, धर्मयुग,हिन्दुस्तान टाइम्स, दिनमान,इंड़िया टूडे, दैनिक भास्कर, नवभारत,नई दुनिया में एक हजार से अधिक लेखों का प्रकाशन। ª मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में करीब 30 लोक नाट्य एवं लोक नर्तक दलों का नेतृत्व एवं देश - विदेशों तथा फिल्मों में लोक नृत्यों का प्रदर्शन। चीन,मलेशिया,इंडोनेशिया,सिंगापुर,मारीशस, म्यानमार, दक्षिण अफ्रिका हरारे एवं बंगला देशों की यात्रा।

उप्लब्धियां-ª म.प्र. की प्रसिद्व समाजसेवी संस्था सावरकर शिक्षा परिषद में अध्यक्ष।सावरकर लोक कला परिषद में निर्देशक। दैनिक भास्कर पत्र समूह के क्षेत्रीय संवाददाता। इंटरनेशनल रोटरी क्लब डिंड़ौरी में सदस्य।राजीव गांधी शिक्षा मिशन ड़िड़ौरी में जिला इकाई के सदस्य। पंचायत समाज सेवा संचालनालय म.प्र. द्वारा डिंड़ौरी जिले के वरिष्ट नागरिक समूह के सदस्य। प्रदेश प्रतिनिधी रेड़ क्रास सोसायटी, म.प्र.,राष्ट्रीय भारत कृषक समाज के आजीवन सदस्य।.,दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर भारत सरकार द्वारा लोक नृत्यों के लिये 2012.13 के लिये गुरु नियुक्त। चेयरमेन जूनियर रेड़ क्रास सोसायटी म.प्र.।

शोध पत्र -ª स्वराज संस्थान संचालनालय संस्कृति विभाग भोपाल द्वारा स्वाधीनता फैलोशिप 2006.07, प्प्रचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग म.प्र., उच्च शिक्षा विभाग म.प्र. भाासन, मेरठ बाटनी कालेज मेरठ,रानी दुर्गावती विश्वविघालय जबलपुर,जवाहर लाल नेहरु कृशि विश्वविघालय जबलपुर, स्वराज भवन भोपाल एवं गौंड़ी पब्लिक ट्रस्ट मंड़ला, भाासकीय चंद्र विजय महाविघालय डिंड़ौरी,रानी दुर्गावती महाविघालय मंड़ला,भारतीय संस्कृति निधि दिल्ली,,गुरु घासीराम विश्वविद्यालय रायपुर,इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविघालय अमरकंटक में आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार 28 फरवरी 2012 को शोध पत्र का वाचन।

प्रकाशित कृतियां -ª एशिया महाद्वीप की सबसे पुरानी जनजाति बैगा के जनजीवन पर आधारित भारत वर्ष की प्रथम हिन्दी पुस्तक 'प्रकृति पुत्र बैगा' का म.प्र. हिन्दी ग्रंथ अकादमी भोपाल द्वारा प्रकाशन। म.प्र. की प्रसिद्व जनजाति गौंड़ में प्रचलित बाना गीत पर आधारित 'आख्यान' (गोंड राजाओं की गाथा) पुस्तक का म.प्र. आदिवासी लोक कला अकादमी द्वारा प्रकाशन। म.प्र. की प्रसिद्व जनजाति परधान द्वारा गायी जाने वाली गाथा रामायनी, पंडुवानी एवं गोंड़वाना की लोक कथाओं का वन्या प्रकाशन भोपाल द्वारा राजकमल प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित। जनजातीय लोक गीतों में राजनैतिक एवं सामाजिक चेतना शोध पत्र का प्रकाशन स्वराज भवन संस्कृति संचालनालय भोपाल द्वारा.।

अप्रकाशित कृतियां -ª बैगा जनजाति में प्रचलित चिकित्सा पद्वति,सर्प विष तंत्र - मंत्र चिकित्सा,म.प्र. के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आदि।

संर्पक-डॉ.विजय चौरसिया

चौरसिया सदन गाड़ासरई जिला ड़िड़़ौरी म.प्र.मो.

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.