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बसन्त आया - कविताएँ - संजय कर्णवाल

रंगों के, मन की उमंगों के नये दिन आये हैं।

घर आँगन में, जीवन में कई खुशियाँ लाये हैं।।

जब जब आती है जीवन में बहारें

बड़े प्यारे लगते हैं ये सब नजारे

गीत कोई ये मन गुनगुनाता है

मन को कोई अपना नजर आता है

अरमान मचल जाते हैं।

ये मौसम जब जब आते हैं।

2

बसन्त आया तो पेड़ो पर कलियों ने पतियों ने डेरा डाल दिया।

झूम झूम के गाये तराने कोयल,मौसम ने देखो कमाल किया।।

बने जो फूल नये, ख़ुशी से फूल रहे

सदा ही इनके ऐसे उसूल रहे

खिली है डाली डाली नये फूलों से

सज गयी है धरती बसन्त के झूलों से

3

रंगों सा है बसन्त सुहाना

आया है लेकर कोई तराना।

मस्त हुआ है सारा जमाना

मिला जो सबको ये खजाना।

खुशियों से भरा मौसम है

हवाओं में कोई सरगम है

धीरे से कलियों का खिलना

आकर उनसे भौंरों का मिलना

कर  जाता है मन को मतवाला

नई किरणें ले फिर से उजाला

सब मन ही मन मुस्काते

गीत नये जैसे वो दोहराते।

4

आयी है पेड़ो पर नई डाली

बैठी उन पर कोयल काली

मीठी मीठी बोली में घोली

उसने जैसे मिश्री की प्याली

साथ में सारा जग मन ही मन

गाता मीठे गीतों की लाडियां

साथ मिला तो बन गई मिलकर

प्यारी न्यारी जीवन की कड़ियाँ

5

नई नई सी छटा छाई है मधुबन में

खुशबू के झोंके आये है घर आँगन में

पत्ता पत्ता डोल रहा है, राज सारे खोल रहा है।

मस्ती में हर पंछी अपनी भाषा में बोल रहा है।

हर कोई मस्ताना सा लगता है इसमें

सबको लगता है नया जीवन है जिसमें

6

बसन्त के गीत नये, मन में जो घूम रहे

नई नई रानाईयों में हम सभी झूम रहे

ये ऋतु नई,सांसों को महका रही

कोयलिया नये नये तराने गा रही

मन करता है, नाचूँ घूम-घूम के

आते हैं जब जब मौसम झुमके

रंगों से नये रंग बनाऊं मैं भी

इनमें कहीं खो जाऊं मैं भी

7

हर तरफ हरियाली की झलक मिलती है।

इस  मौसम में हजारों कलियां खिलती हैं

आती हैं बहारें लेकर नये नज़ारे चारों ओर

कोयलिया मचाने लगती है मधुबन में शोर

मन का मयूर भी नाचे झूम झूम के

आओ हम सभी चले घूम घूम के

8

आ गई नई ताजगी इस मौसम में

फैल रही हरियाली सारे आलम में

बसन्त का ये जादू ,बनाता है मस्त

मस्त बहारों में खिलखिलाता है बसन्त

जब जब आता है,मन खिल जाता है

इन हसीं वादियों में मन गुनगुनाता है

9

पीली पीली सरसों से भरे  खेत लहलहाते हैं

चारों ओर हवा के झोंके खुशबू से भर जाते हैं

खेतों की हरियाली देखो नये ढंग दिखाती हैं

धरती की अंगड़ाई भी नये राग सुनाती है।

इस मौसम के ये रंग निराले सबको नजर आते हैं

पंछी भी मिलकर सारे मीठे सुर में गीत कोई गाते हैं

10

मस्त बहारों का, मस्त नजारों का क्या कहना इस मौसम में

हर कोई हैरान हैं, क्या हो रहा है सोचो तुम फिर से

दमखम से

लाते हैं जैसे खोज कहीँ से खुशियों का पैगाम कोई

मन में ताजगी भर जाता है जैसे सुबह शाम कोई

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