नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

आम आदमी खास आदमी - व्यंग्य - हनुमान मुक्त

आम आदमी खास आदमी

सामान्यतः आदमी सिर्फ आदमी नहीं होता ।आदमी के भी प्रकार होते हैं। यह दो प्रकार का होता है। आम आदमी और खास आदमी ।

खास आदमी खास होते हैं। जिनका रहना सहना, बोलना चालना, खाना-पीना सभी कुछ खास होता है। जब आम, खास के संपर्क में ज्यादा समय तक रहता है तो धीरे-धीरे वह उसके गुणों को अपने में आत्मसात करना शुरू कर लेता है। यह इसका सार्वभौमिक गुण है। उसके रंग ढंग धीरे-धीरे  इसमें प्रवेश करना शुरू कर जाते हैं और धीरे-धीरे यह आम से खास बन जाता है।

कुछ खास किस्म के लोगों का जन्म इसी प्रकार से होता है। वैसे ज्यादातर खास आदमी जन्मजात खास होते हैं। खास का जन्म चाहे कैसे भी हुआ हो लेकिन खास बनने के बाद इनकी जाति एक ही हो जाती है ।

"खास आदमी "

इन्हें कुछ भी कहने की आजादी होती है वे आजाद होते हैं। आजादी इनकी बांदी होती है ।वे आजादी से जो कहते हैं, आजादी को वह करना पड़ता है ।क्या मजाल जो उनकी मर्जी के बगैर पत्ता हिल जाए।आजादी उनकी  परमिशन के  बिना आम तक नहीं पहुंच सकती।

आम चाहे आजादी को कितना ही अपनी और रिझाएं, लेकिन आजादी चाह कर भी उनकी ओर नहीं रीझ सकती। जब तक मालिक ना चाहे तब तक बांदी कैसे कुछ कर सकती है।

चाहे ये  कितना भी चीखें चिल्लाएं।

हमें चाहिए.. आजादी।

हमें चाहिए ..आजादी।

गरीबी से.. आजादी।

भुखमरी से ...आजादी। बेरोजगारी ...से आजादी। अशिक्षा ...... से आजादी ।

लेकिन आजादी तो आजाद है नहीं फिर वह कैसे आम के पास जा सकती है ।

मार्क ट्वेन कहते हैं, "जब हम भूखे कुत्ते को रोटी का टुकड़ा डालते हैं तो वह हमको काटता नहीं है ।"

खास और आम में यही फर्क है। खास पर रोटी के टुकड़े का कोई फर्क नहीं पड़ता। आप चाहे कितना ही वोट देकर उसे खास बना दे।

खास भी यह सब जानता है वह इसका प्रयोग आम पर करता है। वह आम की ओर टुकड़ा डालता है ,उछालता है।

टुकड़ा लेने के लिए आम आपस में  आम से ही लड़ता हैं ।किसी को टुकड़ा मिलता है ।किसी को नहीं ।

वे फिर खास  की ओर  ललचाई दृष्टि से देखते हैं। खास भी उनकी ओर ललचाई दृष्टि से देखता है। दोनों के ललचाने में फर्क होता है। खास टुकड़ा उछलता है ।फिर इसकी पुनरावृत्ति होती है। आम और खास का यह खेल चलता रहता है  अनवरत निरंतर...!

दोनों इस खेल को खेलने के अभ्यस्त हो चुके हैं ।

खास आम से कहता है।

"हम देख रहे हैं !

"हमने देखा है !

"हम देखेंगे !

खास आम की इस उछल कूद को देख रहा है। बरसों से इसे देखता आया है और इसे आगे भी देखता रहेगा

ऐसा उसका विश्वास है। आम इसका  अर्थ अलग तरह से लेता है ।वह सोचता है खास को उसकी गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, अशिक्षा, रोग दिख रहे हैं।

फिर वह इसी जुमले को जोरों से बोलता है।

हमें चाहिए.... आजादी!

गरीबी से.…. आजादी !

भूखमरी से ....आजादी! बेरोजगारी से... आजादी !

अशिक्षा से... आजादी!

रोगों से.... आजादी !

हमें चाहिए.... आजादी।

खास का मुंह उसके दिल में रहता है वह फिर अपना जुमला दोहराता है। टुकड़ा उछलता है। खेल शुरू करता है ।आम का दिल उसके मुंह में रहता है।

वह फिर टुकड़ा लूटता है ।उछल कूद मचाता है ।आपस में लड़ता है ।खेल का पुनः दोहरान होता है ।

इस प्रकार की उछल कूद से कुत्ता परेशान हो जाता है । बार बार  ललचाना ।

टुकड़े के लिए उछलना ।

आपस में लड़ना।

फिर वही अनुक्रिया।

बार-बार पुनरावृत्ति से जानवर भी समझ जाता है ।वह भी समझ गया है। सीख भी गया है ।उद्दीपन और अनुक्रिया की थार्नडाइक की थ्योरी उसके समझ में आ गई है। मालिक उसे जुमले से उद्दीप्त कर रहा है ।अनुक्रिया में वह उससे आजादी की आशा में वोट दे रहा है लेकिन यह सब जुमला ही है।

अब उसने भी कहना शुरू कर दिया है। हमने देखा है।

हम देख रहे हैं।

हम देखेंगे ।हम देखेंगे ।

हम देखेंगे। हम देखेंगे ।

वह दिन की जिसका वादा है ।

हम देखेंगे  हम देखेंगे।

--

#हनुमान मुक्त

93,कान्ति नगर

गंगापुर सिटी(राज.)

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.