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सैलाब - कविताएँ - विनोद सिल्ला


1.

सूत्र

सूत्र ही है वो
जो रख सकता है
बांधकर
तिल्लियों को
उसका कर्तव्य है
सभी तिल्लियों को
एकजुट रखना
एकजुटता है उसका
परमो धर्म
हालांकि
बिखराव भी है
उसी के हाथ
एकजुटता व बिखराव
निर्भर करता है
सूत्र की नियत पर
सूत्र की नियति पर

-विनोद सिल्ला

2.

सैलाब

सहनशीलता
व्यक्ति की
कमजोरी नहीं
बल्कि ताकत है
जो थामे होती है
गुस्से का सागर
जो थामे होती है
एक जलजला
जिस दिन
टूट जाता है बांध
सहनशीलता का
आ जाता है सैलाब
जिससे हो जाता है
बड़े से बड़ा किला
ध्वस्त

-विनोद सिल्ला:

3.

ढह गया किला

उन्होंने डाली जयमाला
एक-दूसरे के गले में
हो गए एक-दूसरे के
सदा के लिए
प्रगतिशील लोगों ने
बजाई तालियां
हो गए शामिल
उनकी खुशी में
रूढ़ीवादियों ने
मुंह बिचकाए
नाक चढ़ाई
करते रहे कानाफूसी
करते रहे निंदा
अन्तर्जातीय प्रेम-विवाह की
देते रहे दुहाई
परम्पराओं की
देखते ही देखते
ढह गया किला
सड़ी-गली
व्यवस्था का

-विनोद सिल्ला:

4.

इधर-उधर की मिट्टी

ऐ! हवा
ये मिट्टी जो तुम
साथ लाई हो
ये यहाँ की
प्रतीत नहीं होती
तुम चाहती हो मिलाना
उधर की मिट्टी
इधर की मिट्टी में
और इधर की मिट्टी
उधर की मिट्टी में
तभी तो लाती हो
ले जाती हो
सीमा पार मिट्टी
लेकिन कुछ ताकतें हैं
इधर भी
उधर भी
जो नहीं चाहती
इधर-उधर की मिट्टी
आपस में मिले

-विनोद सिल्ला

5.

हादसा

वो हादसा
नहीं बन पाया
समाचार-पत्रों की
मुख्य खबर
सभी समाचार-पत्रों ने
मुखपृष्ठ पर
रखा था स्थान
आरक्षित
हादसे के
सचित्र समाचार के लिए
अगले दिन
समाचार-पत्र का
आरक्षित स्थान
हादसे के दोषी
औद्योगिक संस्थान के
विज्ञापन से
भरा मिला
संवाददाताओं द्वारा
खोद-खोद कर
पूछे गए प्रश्न
कचोट रहे थे
हादसा पीड़ितों को

-विनोद सिल्ला:

6.

शह-मात

जाने क्यों
शह-मात खाते-खाते
शह-मात देते-देते
कर लेते हैं लोग
जीवन पूरा
मुझे लगा
सब के सब
होते हैं पैदा
शह-मात के लिए
नहीं है
कुछ भी अछूता
शह-मात से
लगता है
शह-मात ही है
परमो-धर्म
शह-मात है
कण-कण में व्याप्त
शह-मात ही है
अजर-अमर

-विनोद सिल्ला:

7.

वोटों की फसल

पक गई
वोटों की फसल
दिया गया इसमें
अराजकता का जल
समय-समय पर
डाली गई
दंगों की खाद
आवश्यकतानुसार
छिड़का गया
भाषावाद-क्षैत्रवाद व
जातिवाद का कीटनाशक
मठाधीशों के
आशीषों की वर्षा ने
लगा दिए चार-चाँद
उपज में
मेहनती हाथ
लिए दराँती रह गए
घुस गए खेत में
पूंजीपति लोग
लेकर कंबाईन हार्वेस्टर
बटोर ले गए
दाना-दाना
फसल का

-विनोद सिल्ला:

8.

गमी-खुशी

जीवन में
अनेकों अवसर
आए ऐसे
जो नहीं थे कम
किसी जलजले से
जैसे-तैसे
गुजर गया
वह समय भी
अनेकों आए
खुशी के अवसर
इन अवसरों पर
नहीं लगे
ज़मीन पर पैर
लेकिन गुजर गया
वह समय भी
अब खुशी
नहीं करती
अधिक उत्साहित
गम नहीं करता
अधिक दुखी
पता है मुझे
गुजर जाएंगी
ये घड़ियाँ भी

-विनोद सिल्ला:

9.

यादें तो यादें हैं

आ जाती हैं यादें
बे रोक-टोक
नहीं है इन पर
किसी का नियन्त्रण
नहीं होने देती
आने का आभास
आ जाती हैं
बिना किसी आहट के
दे जाती हैं
कभी गम का
तो कभी खुशी का
उपहार
जब भी
आती हैं यादें
स्मृतियों के
रंगमंच पर
चल पड़ता है
चलचित्र-सा
लौट आते हैं
पुराने दिन
पुराना समय
यादें तो यादें हैं

-विनोद सिल्ला:

10.

हवा का रुख मोड़ने वाले

हर लचकदार वस्तु
अपने आपको
हवा के रुख के साथ
मोड़ लेती है
कुछ एक
सख्त प्रवृत्ति के
जिन्हें अक्सर
सूखे ठूँठ
अकड़े हुए ठूँठ
कहा जाता है
जो सीधे खड़े रहते हैं
अक्सर टूट जाते हैं
पर झुकते नहीं
उनका प्रयास
हवा के रुख को
मोड़ने का होता है
और जो इस प्रयास में
कामयाब हो जाते हैं
उन्हें लोग
कार्ल मार्क्स
नैल्सन मण्डेला
अम्बेडकर
कहने लगते हैं

-विनोद सिल्ला

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परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - अध्यापन

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)
5. जिंदा होने का प्रमाण(लघुकथा संग्रह)
6. छुअन (कविता संग्रह)
7. कितना सुखद तेरा आना (लघुकविता संग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)

सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
13. एच. डी. एफ. सी. बैंक ने रक्तदान के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र दिया, 28, नवंबर 2018
14. श्रेष्ठ हिन्दी प्रेमी सम्मान-2019, मीन साहित्य-संस्कृति मंच द्वारा
15. कलम का भीष्म पितामह सम्मान-2020, राष्ट्रीय आंचलिक भाषा साहित्य संस्थान द्वारा

पता :-

विनोद सिल्ला
मकान नं. 771/14
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

ई-मेल vkshilla@gmail.com

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