साहित्य की यात्रा पर चलें - मनजीत सिंह

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साहित्य की यात्रा पर चलें हमारे हिन्दी साहित्य में तीन काल हैं। वे काल आदिकाल, मध्यकाल और आधनिक काल है। इसमें मध्यकाल व आधुनिक काल बडे प्रचल...

साहित्य की यात्रा पर चलें

हमारे हिन्दी साहित्य में तीन काल हैं। वे काल आदिकाल, मध्यकाल और आधनिक काल है। इसमें मध्यकाल व आधुनिक काल बडे प्रचलित हैं। मध्यकाल के भी दो भाग है भक्तिकाल व रीतिकाल। भक्तिकाल में निर्गुण काव्यधारा व सगुण काव्यधारा का जिक्र है। निर्गुण काव्यधारा लिखने वाले संत काव्य धारा के कवि कबीरदास व सूफी काव्यधारा के कवि जायसी है। सगुण काव्य धारा के कवियों का मैं जिक्र करता हूं। इसमें रामकाव्यधारा के तुलसीदास व कृष्ण काव्यधारा के सूरदास है वहीं रीति काल में हम तीन भागों को पढते आये हैं। रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध व रीतिमुक्त है। इन तीनों अवस्थाओं का कवि बिहारी रहा है। अब मैं आधुनिक काल का जिक्र करता हूं इसमे छः भाग है। जो इस प्रकार हैं।

1. भारतेन्दु 1857-1900

2. द्विवेदी 1900-1920

3. छायावादी 1920-1935

4. प्रगतिवादी 1935-1943

5. प्रयोगवादी 1943-1960

6. समकालीन/ साढोतरी/ नई कविता 1960-अब तक

आगे चलकर में इनका अलग-2 युग का अलग-2 जिक्र करूंगा

भारतेन्दु युग 1857 से लेकर 1900 तक है इसमें मुख्य भारतेन्दु हरिशचन्द्र, श्रीधरपाठक, बद्रीनाथ चौधरी, ठाकुर जगमोहन सिंह व प्रताप नारायण मिश्र आदि कवि है। इस युग की मुख्य विशेशताएं देशभक्ति की भावना, प्रकृति चित्रण, समाज सुधार व प्रेम निरूपण है। इसमें बज्र भाषा, अलंकार, खडी बोली आदि का प्रयोग किया है। इसका प्रभाव ब्रहम समाज (राजाराम मोहन राय), आर्य समाज(स्वामी दयानंद), रामकिशन ( रामकृश्ण परमहंस ) व इस युग में कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई।इस युग के मख्य भाव रहे।

द्विवेदी युग सन 1900 से लेकर 1920 तक ही चला इस युग में मुख्य कवि महाबीर प्रसाद द्विवेदी, हजारी प्रसाद द्विवेदी, मैथिलीशरण गुप्त , अयोध्या सिंह उपाध्याय आदि रहे हैं। इस युग में 1900 में एक सरस्वती नामक अखबार का सम्पादन हुआ है। इस युग में मुख्य विशेषता या प्रवृतियां यह रही है कि इनमें देशभक्ति की भावना रही, नारी महिमा(एक नहीं दो-दो माताएं, नर से बढकर नारी) यह लेख बहुत प्रचलित हुआ व सामाजिक चेतना का प्रभाव रहा है। इसमें खडी बोली व छंदो की विविधता का वर्णन देखने को मिलता है।

छायावादी युग सन 1920 से लेकर 1935 तक चला इस युग में मुख्य कवि सुमित्रा नंदनपंत, महादेवी वर्मा, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, डा रामकुमार वर्मा, जयशंकर प्रसाद आदि रहे हैं। इस युग की मुख्य विशेषता यह थी कि प्रेम व सौन्दर्य का वर्णन, स्वतन्त्रता की लालसा, विद्रोह का स्वर, प्रकृति का वर्णन, नारी का चित्रण मुख्य रही है। इसमें खडी बोली मानवीकरण अलंकार का प्रयोग तत्सम प्रधान व संस्कृत निष्ठ, छंद मुक्त काव्य, इसमें मुख्य रही है। छायावादी का अर्थ कुछ लेखकों ने इस प्रकार बताया है आचार्य नगेन्द्र के अनुसार ‘ स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह ही छायावाद है। ‘ आचार्य देवराज कहता है कि छायावाद गीतिकाव्य है प्रकृति काव्य है, प्रेम काव्य है। दूसरी ओर डा रामकुमार वर्मा ने कहा कि ‘ आत्मा की छाया परमात्मा पर पडने लगती है ओैर परमात्मा की छाया आत्मा पर पडने लगती है। तो वह छायावाद है।

प्रगतिवादी युग सन 1935 से लेकर 1943 तक चला। इसमें मुख्य कवि सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला,रामधारी सिंह दिनकर, नागार्जुन,नगेन्द्र शर्मा, बाल कृष्ण भट्ठ, शर्मा नवीन आदि रहे है। इसमें शोषक वर्ग के प्रति घृणा, शोषितों के प्रति दया, क्रांति भावना, सामाजिक जीवन का चित्रण इसमें मुख्य विशेषता रही है। इसमें आम भाषा या व्यवहारिक भाषा, लाक्षणिक भाषा, व्यंग्यपूर्ण विलाश्ठ, प्रतीकात्मक इत्यादि भाषा विशेष पर जोर रहा है।

प्रयोगवादी युग प्रगतिवाद युग का एक अंग है। यह युग 1943 से लेकर 1960 तक रहा। इसमें मुख्य भारत भूषण अग्रवाल, नेमिचन्द्र जैन, गिरिजा कुमार माथुर, प्रभाकर, मुक्तिबोध है क्षणवाद, निराशावाद, यथार्थ चित्रण,बौद्धिकता,व्यक्तिता,नास्तिकता का नग्न चित्रण है। नये प्रतिबिम्ब, प्रतिमान, अपमान, छंद योजना, विभिन्न भाषा शब्दों का प्रयोग बडे जोर शोर से किया है। इस युग में ‘तार सप्तक‘ नामक पत्रिका आरम्भ हुई। और 1946 में ‘प्रतीक‘ नामक,व 1951 में दूसरा ‘तार सप्तक‘ का अंक निकालना शुरू हुआ इस युग में पत्रिका मुख्य आकर्शण है।

नयी कविता का युग 1943 से 1960 तक है इसमें मुख्य कवि हीरानंद सचिदानंद वात्सयान अज्ञेय, भारत भूषण, लक्ष्मीकांत, शर्वेश्वर दयाल सक्सेना, धर्मबीर भारती है। इस युग में मानव मूल्यों का विघटन, नूतन मानव की कल्पना, आशा व निराशा का चित्रण दिया गया है। प्रयोगवादी की भाषा का प्रयोग, आंचलिक एक स्थान के शब्दों का प्रयोग, असंख्य प्रतीक इसमें विशेष विशेषता रही है। प्रारम्भ 1954 में डा जगदीश चन्द्र, रामस्वरूप चतुर्वेदी ने नई कविता नाम से अद्धवार्शिक काव्य संग्रह प्रकाशित किया यहीं से नई कविता की शुरूआत हुई।

समकालिन व साढोतरी युग सन 1960 से लेकर आज तक है। इसमें मुख्य कवि लीलाधर जगूडी, मुक्तीबोध, कुमारेन्द्र, केदारनाथ अग्रवाल, वेणुगोपाल कुमार विकल, विश्णुखरे, दूधनाथ सिंह है। समकालिन जीवन का वर्णन, विद्रोही स्वर, पीडा बोध व जनक्रांति , राजनेताओं के प्रति क्रोध आदि इसमें मुख्य रहा है। इसमे असभ्य भाषा, छंदप्रतीक,अपमानों से रहित है। अकविता, अतिकविता,अस्वीकृत कविता,सनातन कविता, अपरम्परावादी कविता, नाटकीय कविता आदि नाम अनेक आलोचकों ने रखा है। उपरोक्त विषय पद्य के साहित्य का वर्णन किया गया है। इसमें 1857 से लेकर आज तक का साहित्य का वर्णन किया गया है। अनेक कवि बताए गए है प्रत्येक युग के साथ बताई गई इसमें प्रत्येक युग की विशेषताएं, भाषा आदि का वर्णन बडा यथार्थ ढंग से पेश करने की कोशिश की है। आज इसको पढें और साहित्य में रूचि रखें। साहित्य ही समाज को बदल सकता है। एक नई दिशा दे सकता है। भटके हुए को रास्ता दिखा सकता है। उसी का नाम साहित्य है। आज साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं बल्कि एम आर आई मशीन की तरह काम करता है मैं चाहता हूं कि साहित्य में पैनापन लाकर साहित्य की रचना करें।

कवि भी समाज का अभिन्न अंग होता है। वह जिस समाज में रहता है। उसके प्रति उसका विशेष दायित्व भी बनता है कि कवि अपनी रचना के माध्यम से अपने विचारों की अभिव्यक्ति प्रदान करता है वह असंतोष के कारण को भी स्पष्ट करता है। यहाँ आकर उसका स्वरूप बहुत उंचा हो जाता है।

दशोत्थान के प्रयास चल रहे हैं इसमें कवि की भूमिका है कि वह इसमें अलग रह ही नहीं सकता। यदि वह ऐसा सोचता है या प्रयास करता है कि मेरा इसमें कोई लेना देना नहीं है, तो वह गलत है। देशोत्थान सभी नागरिकों का मिला-जुला प्रयास है। कवि की भी देशोत्थान में अपनी विशेष भूमिका का निर्वाह करना है।

कवि अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों में उत्साह का संचार करता है। वह उनमें छिपे देवत्व को जगाता है। आगे बढने की प्ररेणा देता है। कविता में बहुत बडी शक्ति होती है।कवि की कविता में अदम्य शक्ति होती है। कवि मनचाहे ढंग से समाज को परिवर्तन कर सकता है। कवि कल्पनाजीवी नहीं होता , अपितु उसमें देश के नव-निर्माण की अदभुत शक्ति एंव क्षमता होती है। कवि स्वप्न में ही खोया नहीं रहता है कवि की भूमिका बडी क्रांतिकारी होती है। समाज पर इस युगधाराओं का प्रभाव पडता है साहित्य में उसका लेखा जोखा रहता है। किन्तु साहित्य नई प्रेरणा देकर समाज का निर्माण करता है। समाज में परिवर्तन लाने की जो शक्ति साहित्य में छिपी होती है वह तोप, तलवार तथा बम के गोलों से भी नहीं है। साहित्य समाज का पथ-प्रदर्शक होता है। उसका पूरा व्यक्तित्व तब निखरता है जब वह समग्र रूप से परिवर्तन चाहने वाली जनता के आगे पुरोहित की तरह आगे बढता है। इसी रूप में वह हिन्दी साहित्य को उन्नत एवं समृ़द्ध बनाता है।

मेरा यह मानना है कि साहित्यकार को स्वांत सुखाय की रचना करते समय भी सामाजिक दायित्व की अनदेखी नहीं करनी चाहिए व बुद्धिजीवी वर्ग से सम्बन्धित है उसका दायित्व है कि समाज के सुख की बात भी सोचे। जब वह समाज से बहुत कुछ पाता है तो उसका दायित्व बन जाता है कि समाज को कुछ प्रदान भी करें। प्रत्येक व्यक्ति को समाज के निर्णय में अपना योगदान देना चाहिए अगर समाज के उत्थान के लिय कोई कार्य हो तो। साहित्यकार भी इससे पृथक नहीं है। उसका भी दायित्व समाज के अन्य लोगों से बढ़कर है। उसे सम्पूर्ण रूप से अपनी भूमिका निर्वाह करनी चाहिए तभी कहीं जाकर एक आदर्श समाज का निर्माण होगा। कवि, कवयित्री, कहानीकार, आलोचक, रंगकर्मी, उपन्यासकार आदि सभी की भूमिका बहुत अहम है। ये सभी मिलकर पूरे समाज, देश, दुनिया की तस्वीर को बदल सकते है। हम सबने जितने भी कलम के सिपाही है उन सब से मेरी अपील है कि वह अपनी रचनाओं में गरीबी, मजदूर, किसान, छात्र, महिला के दुर्दशा का वर्णन करें और एक उज्ज्वल समाज की स्थापना करें।

मनजीत सिंह पुत्र श्री भूप सिंह

गांव भावड तह गोहाना जिला सोनीपत

छात्र :- एम. ए उर्दू पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाल

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ 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रचनाकार: साहित्य की यात्रा पर चलें - मनजीत सिंह
साहित्य की यात्रा पर चलें - मनजीत सिंह
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