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मीठा अहसास - खुद से भी तुम बस इतना पूछो क्या चाहते हो तुम जग में। संजय कर्णवाल

1

कोई ख़ुशी हमको करीब से आकर

मीठा सा अहसास कराती है।

सहज सरल बन जाओ जीवन में

ये सीख हमको सिखलाती है।।

छोटी सी कोई बात कभी मन को

झकझोर कर जाती है।

देकर सहारा कभी कोई बात

हमें आगे पथ पर बढाती है।।


2

रहे रत दिन क्यूं तकदीर भरोसे

खुद ही खाय क्यूं ज़िन्दगी में धोखे

ना समझी में हम क्यूं रहे भटकते

छोटी छोटी खुशियों को भी मन तरसते

बचपन के सारे अरमां क्यूं रहे अधूरे

कोई कुछ तो बताय जो हो जाय पूरे


3

मन की बेचैनियां मन को तड़पाती कितना

सारी की सारी यादें, याद आती हैं कितना

मन की हर बात पल पल याद आ करके

मन को मेरे क्यूं इतने ऐसे धड़का करके

खुशियों के पल दूर रह जाते है इतने

रो रो के अरमां आँखों से बह जाते है कितने


4

खिले खिले से ये फूल मुस्काते हैं

मुस्कान से अपने पास बुलाते हैं।

इनका खिलना और महकना जग को

लगता है बहुत ही सुहाना जग को

बहारें गुनगुनाती है नये नये   नगमों से

शामो सहर बड़ी खूबसूरत है नज्मों  से


ये चाँद  बड़ा ही प्यारा है।

पूरा भरा रूप इसका न्यारा है ।।

ये प्यारी सी चाँदनी हमें सुहाती है

हरदम तनमन मे सुख पंहुचाती है

शीतलता और मस्ती से भर जाती है

चंदा किरणे बनके चाँदनी जब आती हैं

6

खुद से भी तुम बस इतना पूछो

क्या चाहते हो तुम जग में।

मन से इतना सोचो अपने

क्या उम्मीदें रखते हों तुम जग से

कुछ दे जाओ तुम इस जग को

सोच समझकर आगे रखो पग को


7

इतने भी हम अनजाने नहीं थे

फिर भी चालाकी जाने नहीं थे

कर जाते है कुछ लोग हद पार भी

रह जाता हैं हैरान ये संसार भी

जान सको तो जान लो उनको

एक दृष्टि से पहचान लो उनको


8

उठे हैं जो कदम बढ़ते ही जाय

आगे मुक़ामो पर चढ़ते ही जाय

आ गए हम बढ़ते हुए मंजिल की ओर

काली रात बीत जाने पर लेकर नई भोर

इसका स्वागत मन से करे हम

इसमें प्यारे न्यारे रँग भरे हम


9  

रुक सकते नहीं कभी भी ये पल जाने वाले

कैसे समझे हम,कैसे होंगे पल आने वाले।।

हम सोचे भी कैसे सोचे मन में अपने

ऐसे ही होते हैं कल आने वाले फिर जाने वाले।।

कोई न रोके जाती बहारों को यहाँ

इनके इशारे लगते हैं सबको सबक सिखाने वाले

हम भी तो हो जाय तैयार कुछ पाने को

रहते हैं तैयार सदा ही कुछ पाने वाले।।


10 

मधुर मधुर ये गीत सुहाते है मन को

ये आ आकर धड़काते है  धड़कन को

आकर शाम सवेरे दोहराते है फिर से गीत वही

कभी न भूले ये सब ही अपनी प्रीत रीत वही

आसमान को छू लिया करते हौसलों से अपने

पंछी न्यारे न्यारे उड़ते है फासलों से अपने।

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