नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

बाल कथा - मैं चोर नहीं हूँ - विशाल श्रीवास्तव

मैं चोर नहीं हूँ।

एक बार की बात है एक गाँव में शरद नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही ईमानदार था। वह सदैव दूसरों का भला सोचता रहता था। सभी गाँव वाले शरद से खुश रहते थे। जब भी कोई उसे मुसीबत में दिखाई देता वह उसकी मदद के लिए तैयार हो जाता,इसी प्रकार उसके दिन बीतते गये।

एक दिन की बात है,उसी गाँव में एक अजनबी रहने के लिए आया। वह स्वभाव से बहुत अच्छा था। गाँव के सभी लोग उसकी बात मानने लगे । धीरे- धीरे अजनबी ने गाँव वालों पर अपना विश्वास जमा लिया।

एक रात को उसी गाँव के एक घर में चोरी हो गई। लोग यही न समझ पाये कि चोर कौन है, तभी अचानक से वह अजनबी वहां पर आया और बोला ,"क्या बात है, । अजनबी के इस प्रश्न पर एक आदमी बोला कि चोरी हो गई है। अजनबी बोला ,"चोर कौन है,इस प्रश्न पर सभी लोग चुप हो गये। शरद की ओर इशारा करते हुए अजनबी ने कहा कि ये कौन है। कहीं यही तो चोर नहीं! इतना कहकर वह अजनबी वहां से चला गया। सभी गाँव वालों ने शरद पर ही शक किया और उसे पीटने लगे। मार खाते हुए शरद ने कहा कि आप सभी लोग मुझे क्यों पीट रहे हो, मैंने क्या कर दिया है जो आप सभी गाँव वाले मुझे इस तरह पीट रहे है। तभी एक गाँव वाला बोला कि तुम चोर हो, । शरद ने पूछा कि आप से यह किसने कहा। गाँव वाले अजनबी को खोजने लगे ,लेकिन अजनबी वहां से भाग चुका था । गाँव वालों ने शरद को छोड़ दिया तब शरद ने कहा कि मैं चोर नहीं हूँ। मैं तो आप का ही भाई हूँ। तब गाँव वालों के सिर शर्म से झुक गये और शरद से माफी मांगने लगे।

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.