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हिन्दी गीत विविधा भाग 1 : रतन लाल जाट

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  1.गीत-“मेरा भारत देश है।”                 रतन लाल जाट   मेरा भारत देश है, जहाँ गाँवों की भरमार है। इस देहाती अंचल में,             निव...

 

1.गीत-“मेरा भारत देश है।”
                रतन लाल जाट  
मेरा भारत देश है,
जहाँ गाँवों की भरमार है।
इस देहाती अंचल में,            
निवास हम करते हैं।
वो किसान, जो अपने
वतन की शान है॥

इन टूटी-फूटी झूग्गी-झोंपड़ियों में,          
खुशबू वो स्वर्ग की पाते हैं।
खाते हैं ऐसे साथ घुलमिलकर,
माटी के धूल-भरे आँगन में बैठकर।
तमतमाती धूप में,
सूखी रोटी नमक-मिर्च लगाकर॥
उतना आनन्द, उतनी खुशी,
स्वाद वो, वो सन्तुष्टि।
ऐसा लगता है,
जैसे छत्तीस भोज  हो खाये॥
मेरा भारत———

हम वतन की आत्मा,
देखनी हो तो देखें किसान में।
जो सच्चा कर्मशील है,
और बिना किसी फल की आस में।
खून-पसीना बहाकर अपना,
सबको देता नया जीवन है॥
मेरा भारत———

धोती-कुर्ता, लाल पगड़ी,
ऐसा उसका पहनावा।
जैसे वतन हिन्द ने आकर,
स्वयं अवतार एक लिया॥
उनके फटे-मैले चिथड़ो से,
खुशबू मेहनत की आती है।
सामने क्या उसके,
मलय-गिरि की बहार है?
और क्या फूलों की सौरभ,
  उनके आगे सब थोथे हैं॥
  मेरा भारत———

भारत माँ के हलधरों की,
सुडौल काया है सजी-धजी।
सत्य-प्रेम की है वो,
एक सच्ची निशानी॥
उनके व्रज जैसे अंग,
हथोड़े जैसे हाथ हैं।
  मेरा भारत———

वो हिम्मत है,
जो उठते तूफानों में।
चाल अपनी कभी,
धीमी ना करते हैं॥
जो उमड़ती लहरों में भी,
नाव अपनी तेज चलाते हैं।
आती हुई मुश्किलों में,
हँसकर वो, अटल हिमालय बन जाते हैं।
मेरा भारत———

ऐसी सहन-शक्ति उनमें,
लगते हैं धरा के जैसे।
धीरता है इतनी,
मानो स्वयं आसमाँ है॥
जो आती विपदाओं में,
कभी निराश ना होते हैं।
किसान से हम पायें वो हँसी,
जो अपने जीवन की खुशी है॥
मेरा भारत———
            
2.गीत-“हम तेरी श्वासों पर जीते हैं”
                  रतन लाल जाट
हम तेरी श्वासों पर जीते हैं,
तू क्यों खींचे मेरी श्वासें हैं।
गिरते हुए अश्रु अपने,
चरण तुम्हारे धोते हैं॥

फिर भी तुम हमको,
चरणों की धूल ना समझते हो?
अपनी राहों में, क्यों?
काँटा हमको मानते हो॥
फूल बन हम,
मरने की आस लगाये हैं।
ना जाने कब-से? बैठ अकेले,
माला तेरे नाम की जपते हैं॥

आ, कुचल दे मुझको,
कर दे तू नाश मेरा।
तेरे आँचल की हवा से,
मर जायेंगे हम यहाँ।
मरते दम भी देखेंगे तुझको,
बस, यही ख्वाब रखते हैं॥

कुछ भी समझो तुम,
हम ना कभी मानते,
दुश्मन तुमको।
मार देना हमको,
मर जायेंगे हम भी तो॥
मरते दम तक आत्मा,
बस, जपेगी माला तेरी।
सच है, दिल करता, पुकार तेरी॥
सुन ले, तू अब प्रिये!
बस, इतनी-सी बात कहनी है॥
  4
3.गीत-“ऐसा बुरा हाल हुआ रे।”
                  रतन लाल जाट
ऐसा बुरा हाल हुआ रे-२
उसको पिया ने धोखा दिया है।
जिन्दा होकर भी वो,
समझो गया है अपनी जान से॥
दिल अपना गँवा के,
सपने औरों के देखे।
ढह गयी सारी मंजिलें,
जिस दिन प्यार किया उससे॥
ऐसा बुरा हाल हुआ रे-२

चैन अपना लुटाके,
बन गया वो प्यासा।
कभी ना बुझेगी,
प्यास उसकी यहाँ।
चाहे हो अमृत की वर्षा।
फिर भी एक बुन्द होठों को छूयेगी ना॥
प्यासे-प्यासे,
अधर रह जायेंगे।
रो-रोकर सूख गये,
नयन भी अपने॥
जप-जपकर नाम पिया का,
अब तो श्वासें भी थम गयी है।
ऐसा बुरा हाल हुआ रे-२

यदि वो अपनी ना होती,
तो अनजान बनकर भी।
किसी रोज हम मुलाकातें॥
बहाना कोई बना कर जाते।
वो दिल की बातें॥
कर लो, अब संधि-समझौते।
लेकिन भगवान भी हमको,
कभी मिला पायेगा ना॥
सब कुछ अब हमको,
झूठा-सा लगने लगा है।
ऐसा बुरा हाल हुआ रे-२

पिया उसकी जान है,
जग में वो ही प्यार है।
हो नहीं सकता है,
प्यार कभी औरों से॥
जन्मों-जन्मों तक दिल चाहेगा,
बस, प्यार उसका ही रहेगा।
खुशबू बनकर महकेगी पिया,
पागल भँवरा बन वो फिरेगा॥
कहीं डगर के काँटों में,
यहाँ-वहाँ मंडरायेगा।
तो कभी मर जायेगा,
तड़पकर उसके बिना॥
कभी ना वो मिल पायेगी उसको,
बस, सात जन्मों तक वो रोयेगा अकेले।
ऐसा बुरा हाल हुआ रे-२

4.गीत-“कहाँ मुझे छोड़ गई?”
              रतन लाल जाट
कहाँ मुझे छोड़ गई?
कुछ भी ना पता बता गई।
कहाँ मुझे छोड़ गई?

तुमको यकीन था,
मुझ पर इतना क्या?
कि- मैं रह सकूँगा?
बिन तुम्हारे भला॥
मालूम होती
यदि मुझको,
तेरी राहें।
तो आ जाता,
जहाँ भी तू होती,
  वहाँ पर मैं।।
याद नहीं, आया कोई,
गलती तो, यह हो गई।
चाहती थी, कहना हमको भी।
लेकिन दिल से, कहा गया नहीं ॥
कहाँ मुझे छोड़ गई?

मेरे प्यारे दिलबर,
मालूम है तुझको सब।
तुम बिन कैसा?
हाल है मेरा।
बन्द कर आँखें,
देख लो, तुम जरा॥
बताओ तुम क्यों मैं?
तुझको छोड़ गई?
कभी ना चाहा था,
क्या? जो जूदा हो गई॥
कहाँ तुझे छोड़ गई?

संग तेरे चलने को,
कर रहा इन्तजार।
बड़ी मुश्किल से,
आया अवसर,
हो गया बेकार॥
थोड़ी-सी खबर,
रखना अपनी।
मैं नहीं तुम,
क्योंकि पिया हो मेरी॥
क्यों मुझे छोड़ गई?
क्यों तुझे छोड़ गई?

5.गीत-“यह दिन, यह खुशी”        
             रतन लाल जाट
यह दिन, यह खुशी।
रहे जीवन में सदा ही॥

हम तुमको देते रहें, ढ़ेर सारी बधाई।
आप हमें बाँटते रहो, सदा ही मिठाई॥
खाकर मिठाई, नाचने लगें हम।
गीत गाते रहें, तेरे ही संग॥
इस दिन हम सब भूल जायें।
नवज्योति लगाकर दीप जलायें॥
सबको उस रोशनी से जगमगा दें।
इस दिन सबको हम अपना बना लें॥
दिल खोल के, सबको पुकारें।
प्यार से हम, उनको बतायें॥
यह दिन, यह खुशी

यह पल एक याद बनकर रहे।
चाहे आप हम रहें या ना रहें,
फिर भी वो प्यार हमेशा ही रहें॥
उसको याद कर, अपनों को देख।
इस दिन सब, कितने खुश हैं नेक॥
तेरे संग, इस दिन।
बस, तेरे जन्मदिन॥
यह दिन, यह खुशी

6.गीत-“मेरे सपनों की रानी”
             रतन लाल जाट
मेरे सपनों की रानी,
तुमको मैंने कब जानी?
जन्मों की साथी,
तू है मेरी सजनी॥

भोली-सी सूरत,
प्यारे-से नयन।
बोले जैसे कोयल,
फूल-सा बदन॥
सीधी-सादी चाल है,
झूमे वो बाँहें डालके।
आये जब पास मेरे,
तो चूम लूँ मैं उसे॥

हर रोज देखूँ, उसको हँसती।
जैसे खिलता हो कोई फूल-कली॥
बलखाती, वो लहराती है नाचती,
जैसे एक लहर हो, सागर की॥..................

बस, प्यार है वो मेरा,
बहुत सुन्दर है जीवन अपना।
नजर के सामने उभरता,
वो मेरी आँखों का सपना॥
रहूँ उसके संग, मैं दिन-रात-२
फिर भी दिल, ना भरे एकबार-२

जीऊँ मैं जैसे नया है जीवन कोई,
लगता है स्वर्ग उतर आया यहीं॥..................

7.गीत-“ऐसा राग गुनगुनायें”
               रतन लाल जाट
आओ, मिलकर हम, ऐसा राग गुनगुनायें।
वो सरगम, जो सारी दुनिया का दर्द भूलाये॥

उसमें हर इंसान का सपना हो।
और वो हम सबका अरमां हो॥
हमको अपना गम ना सताये।
लेकिन हर दिल की तड़प रूलाये॥………

अपनी पुकार, इतनी लम्बी हो।
कि- गूँजे सारी गलियाँ वो॥
जहाँ दिखती है जिन्दगी,
हर चेहरे पर खिलती।
और होठों की बात बताये,
आँखों में छुपा दर्द दिखाये॥…………

8.गीत-“ऐसे बोल ना बोलो”
               रतन लाल जाट
ऐसे बोल ना बोलो-२
जो किसी के दिल को चुभे।
प्यारे-से बोल अनमोल है जो,
मरने के बाद भी, सदा रहते।।

मीठे बोल सबको लुभाते हैं,
मीठे बोल सबको हँसाते है।
जब मीठे बोल मिले ना,
ना हो मीठा बोलने वाला।
तो इस दुनिया में,
क्या मतलब है बोलो

हमको रोना पड़ता है,
मीठे बोल के खातिर।
सब बोलते हैं, बोल,
लेकिन सबमें है अंतर॥
कोयल की वाणी और
कौए की काँव-काँव।
देखो, फर्क कितना है?
इन दोनों में अलगाव॥
दिल को ना भाये,
कड़वे हैं बोल जो

बोली सबको बदल देती है,
दुश्मन को दोस्त बनाती है।
जब कोई अपना हो,
और कोई बोल उसको।
चूभ जाये तो,
दुश्मन बन जाता है वो

9.गीत-“बदलते-बदलते बदल गया जमाना”
                        रतन लाल जाट
बदलते-बदलते बदल गया जमाना।
रोकेंगे और टोकेंगे अब तुझे दिवाना?
तू चलता रहे अपनी राहें।
डरना नहीं उड़ती धूल से॥

अपनी रफ्तार से चल तू,
दुनिया का गुलाम नहीं है तू।
अपनी मंजिल, बस तेरे हाथ में,
हिम्मत किसमें है जो तुझे रोके।
विश्वास नहीं कभी मरता,
इंसान खुद जीतता-हारता।

दुनिया एक सुन्दर बगिया है,
इस बगिया में फूल कई हैं।
भँवरा बन मंडराये,
मन आये, जहाँ जाये।
कौन रोके, तुझको भला?

बस, मालिक से डरना है,
उसके आगे नहीं चलना है।
जब वो आये,
हमको बुलाने।
तो सब छोड़के,
हमको होना है जुदा॥

10.गीत-“मोहब्बत”
            रतन लाल जाट
मोहब्बत, मोहब्बत, मोहब्बत-२
जीवन का गान है मोहब्बत।
दिल का खुमार है मोहब्बत॥
मोहब्बत एक पैगाम है,
सारी जिन्दगी इसके नाम है।
मोहब्बत में एक जादू है,
ये दो दिलों का सौदा है॥

मोहब्बत में कोई टकरार नहीं,
मजहब का यहाँ कोई बैर नहीं।
जब मोहब्बत हो जाये,
तो रंगीन सारी फिजाएँ॥
जिन्दगी में जरूरी है मोहब्बत,
ना लगाओ इसकी कोई कीमत

दिवानों का राग है,
मोहब्बत में जुनून है।
जो मौत को भी हरा दे,
मोहब्बत में वो ताकत है॥
मोहब्बत हमको रूलाती है,
कभी बहुत हँसाती है।
वही मोहब्बत है,
जो दिन-रात जगती है॥
तड़पाती है मोहब्बत,
पर प्यारी है सोहबत

मोहब्बत में ना कुछ सोचते हैं,
मोहब्बत में ना कोई देखते हैं।
बस, मोहब्बत ही नजर आती है,
हर तरफ मोहब्बत के नजारे हैं॥
तो यारों! कर लो मोहब्बत,
खुदा की होती है बरकत

11.गीत-“आदत पड़ गई मेरी”
                 रतन लाल जाट
आदत पड़ गई मेरी।
तुमसे बात करने की॥

जब तक बात ना हो,
नींद ना एकपल आये।
सारी रात मुझको,
बस, तेरी याद सताये॥
बात करके तुमसे,
जी मेरा झूम उठे।
दुनिया का गम छुटे,
तू ही जिन्दगी लगे॥

देखकर रूप तुम्हारा,
दुनिया खूबसूरत लगती।
जैसे मैं दिवाना हो गया,
जब हो गई अपनी दोस्ती।।

12.गीत-“वो एक पावन मूरत है।”
                   रतन लाल जाट
मेरे दिल के मन्दिर में,
वो एक पावन मूरत है।
जलता है दीपक उसके,
चरणों में हरपल रहता है॥
आँखें अपनी बरसती,
अश्रूमाला है जपती।
श्वाँसें अपनी गीत उसका,
दिन-रात गाती है

सपने में उसको,
जब हम पास पाते हैं।
और अपनी हर मुराद,
जब वो पूरी करती है॥
याद उसको हम करते है,
प्यार दुनिया को सीखाते हैं।
इस दुनिया में जो सच्चा है,
सब संग उसका पाते हैं।
प्रेम-विष होने पर भी,
सब घूँट उसका पीते हैं॥

उथल-पुथल होती है,
जब दिल अपने तड़पते हैं।
हरपल याद करते हैं,
बन्द कर आँखें तस्वीर देखते हैं।।
जब आँखें अपनी खुलती है,
तो सारा जग दिखता है।
जहाँ वो ना होती है,
मन कभी ना लगता है।।
आँचल उसका लहराती,
देखो, वो पवन भी है।

जब पहले देखा तो,
पास खड़ी थी अपने।
दिल अपना खूला है,
धीरे-से वो आती है॥
वे पल हमको लगते हैं,
जैसे कोई जन्नत है।
पागल हमको दुनिया कहती है,
हम सब उसके नाम करते हैं॥
आवाज उसकी सुनने को,
बेचैनी दिल में रहती है।
याद कर बीते पल को,
इन्तजार हम करते हैं।।

कभी बातें अपनी सुनते हैं,
लोग छिपकर कुछ देखते हैं।
जो सामने कुछ ना कहते,
फिर मीठी बातों में रस पाते।
फिर धोखे से वार करते हैं,
हमको ना वो कभी भाते हैं।।

लगती है भीड़ घनी,
जहाँ सब इकट्टे हैं।
फिर-फिर बीच उनके,
हम खोज करते हैं॥
दिल करता है आरती,
श्वाँसें भी जप करने लगी।
है कोई ना जगह ऐसी,
जहाँ पर वो ना रहती॥
पल-पल नाम तेरा ही पुकारते हैं
जब तक पिया तुमको ना देखते हैं।।

13.गीत-“कैसे ये हो रहा है?”
               रतन लाल जाट
कैसे ये हो रहा है?
बातें तो सब वही है।
जो बता रही है,
कब-से ही आँखें?
बताओ सजनी!
कैसे ये हो रहा है?

हर बेचैनी हमको सताती।
बड़ी मस्ती में है दिवानी॥
कौन आये, क्यों बदले?
रंग अपना, वो फिजायें॥
लगती है हसीन,
आज भी प्यारी है।
चाल उसकी मतवाली
पागल करती है॥

होगा क्या जब तू बनेगी?
एक राधा-सी प्यारी बाला।
वृन्दावन के महलों से आयेगी,
आवाज शहनाई प्रेम की बजती॥
उड़ रहा तूफाँ, काँटे घेरे रस्ता।
कैसे चलूँ, आ जा तू कृष्णा॥
रात सारी नीन्द ना आये,
बदल-बदल करवटें जगते हैं।

जगते हैं बसाने,
नैनों में अपने।
न मालूम कब आती,
धीरे-से मुरली बजाती॥
अधूरे ख्वाब, सपने में ही।
रह जाते, होते पूरे ना कभी।।
बता रही, आँखें तेरी
बसी है तुझमें, जिन्दगी मेरी
विरह-गीत भाया है,
हँसी तो पिया ने लुट ली है।
चैन ना वो कुछ देती है॥

14.गीत-“आज राखी का दिन आया”
                      रतन लाल जाट
आज राखी का दिन आया,
भैया को देख, बहिनां का मन हर्षाया।
मन-भावन सावन की छटा,
छायी हरियाली ने इसे बुलाया॥
ताल-तलैया, सरवर सबने,
मिलजुलकर गीत गुनगुनाया।
नाच रही सज-धजकर वसुधा………

अपने आँचल में खिले,
फूलों को चुन-चुनकर वो,
राखी बनाकर बुलाये,
आये जब भाई उसका वो॥
दौड़ा बादल, बहिनां की याद आ।
बहाते हुए अश्रु-नीर बरसा।
जैसे रिमझिम-रिमझिम हुई बरखा………

भैया मेरे, कंधों पर तेरे।
सारा भार मेरा है॥
स्नेह-सागर, दिल में भरे।
खुशी-से आज झूमे है॥
भैया की कलाई पर,
बाँधकर राखी।
बहिनां पावनता को,
सौ गुना बढ़ाती॥
भैया के दिल में,
प्यार उमड़ आया।
गालों पे हाथ रखके,
उसको विश्वास दिलाया॥
दिल के बंधन को,
दिल के प्यार से सजाया।
बहिनां ने भैया को,
स्नेह का अमृत लुटाया………

15.गीत-“तेरी-तेरी”           
       रतन लाल जाट
सुनली है तुमने, पुकार मेरी-मेरी।
भायी है मुझको दिल में, बातें तेरी-तेरी॥
करूँ हरदम मैं, पुकारें यही-यही।
चलें अब हम मंजिल पे क्यों नहीं-नहीं॥
चल-चल, ओ-२ हो-३

क्या ये खबर है?
प्यार का असर है॥
गम क्या तुमको, हम तो साथ हैं।
डर है क्या, हम एक ख्वाब हैं॥
कैसे कहूँ बता, तुझको बात प्यारी-प्यारी।
क्योंकि तुम ही हो, मेरी दिवानी-दिवानी…….

देखो, बदल गयी हैं ये फिजाएँ।
रगों में बस गयी मैं बन तेरी अदाएँ॥
कैसे हूँ मैं, कैसी है तू?
सुन लिया है तुमने सब यूँ॥
फिर क्यूँ है तू दूर खड़ी-खड़ी।
अब और ना जुदाई सही जाती-जाती………

16.गीत-“ढल जा रे, ढल जा”
                रतन लाल जाट
ढल जा रे, ढल जा।
सूरज मेरे, तू ढल जा॥
कब होये? रात अंधेरी।
पिया मेरा, कब आये री॥

ढल जा रे, ढल जा।
पल-पल मुझे तेरा,
जैसे बरस लगता।
टकटकी लगाये,
देख रही हूँ मैं।
चलना वो तेरा॥
ढल जा रे, ढल जा।
सूरज मेरे, तू ढल जा॥

लग रही है चाल,
धीमी-धीमी।
अब नहीं रूक सकती,
बस, इंतजार है यही॥
आगे न रूकूँ, होये कुछ भी।
दिल में मेरे, धड़कन हैं लगी॥
आग वो ऐसी, जली है यहाँ।
ढल जा रे, ढल जा।
सूरज मेरे, तू ढल जा॥

सुन ले, करती हूँ, मैं विनती।
रहम कर तू, कल आना जल्दी॥
अभी है मुझको जल्दी।
तुम भी करो कुछ जल्दी॥
कोई आ जायेगा,
तो हमें देख ले ना।
ढल जा रे, ढल जा।
सूरज मेरे, तू ढल जा॥

17.गीत-“पिय बिन दुःख नहीं”
                 रतन लाल जाट
पिय बिन, दुःख नहीं, कोई है सजन।
जग की, ना देखें-सुनें दर्द वो पल॥
अब रहती है, हमको चाहत।
बस तुम्हारी, ना किसी का गम॥

सुख से हमको, प्यार नहीं है।
तेरे दुःख को, अब झेलूँ मैं॥
मुझको लगता, तेरा जीवन।
बस तेरा, मेरा तो है दिल॥

बता! मैं दिवाना हुआ कैसे?
मुझको न था, मालूम ऐसे॥
प्रेम पंछी बनकर उड़ूँगा।
दिल खोकर नभ को देखूँगा॥
पिय-पिय, करता है प्यारा मन।
मन को ना मिले, चैन तुम बिन॥
पिय बिन दुःख नहीं कोई है सजन………॥

18.गीत-“प्रीत जगी मुझे उस दिन”
                 रतन लाल जाट
प्रीत जगी मुझे उस दिन।
चैन ना मिले एकपल॥
अब नाम तेरे जपकर।
रहे दुनिया से छुपकर॥
प्रेम-तपन में जलकर।
बन गया मैं दिलबर॥

धीरे-धीरे संग हवा के चल।
मन मेरे तू प्रेम-गीत गुनगुनाकर॥
सूरज के कदमों पर अब।
धरती अपनी पहरा देता चल॥

धरा बदले, रंग अपने।
आँधी चले, तूफां उठे॥
हम नित चाहें, बादल से कहें।
प्यारी धरती माँगे, पानी तू बरसा दे॥
कभी वो ना बुलाये।
बस, पुकार मेरी सुन ले॥
अपनों से रूठ चुकी है ये धरती अब।
पिया! अपने पिया से प्यार कर ले अब।।

निज प्रेम करते नहीं।
अपना कुछ है नहीं॥
तू रूलायेगी, गीत वियोग के गायेंगे।
हँसाना तुझको, मरके भी हम चाहेंगे॥
अपने कदम काँटों पर चले।
चरण पिया के लगते हैं प्यारे॥
चलें उनके आगे-आगे हम।
फूल बिछा अमृत से सींचे हम।।

उपवन अपना सूख जाये।
लेकिन महकना ना भूलें॥
कभी ना आये हमको।
सपना पिया का वो॥
कि उसका जल उठे उपवन।
तब कैसे पाऊँगा मैं एकपल?

19.गीत-“खत लिखा है।”
             रतन लाल जाट
खत लिखा है, मैंने यूँयूँ ही बैठे हुए।
खत में लिखूँ अपने, क्या दिल की बातें?
हवा डाकवाली आयी है।
इधर से उधर छायी है॥

उधर ही है शायद, मेरी पिया।
लिफाफे में बन्दकर, भेजूँ खत अपना॥
सौंपता हूँ अपने हाथों से, यह खत चूम-चूम।
ए हवा! तू उसके कदमों में, लेकर जा उड़-उड़॥
उड़ मेरे खत, जा तू पिया के घर रे

समझ ना पायेगी बातें वो।
बिन नाम लिखा है खत जो॥
फिर भी पहचान लेगी,
उसके नाम भेजा था कभी।
ए हवा! जाकर फेंक दे,
खत उसके तू आँगन में।
धूल-मिट्टी या कचरे के ढ़ेर में,
उठा लेगी वो उसको सुबह धीरे-से॥

जगमगाता, चमकता-सा खत मेरा।
हरकहीं से नजरें उसकी खींच लेगा॥
तब पिया पहचान लेगी,
खत उठाकर चूम लेगी।
पता है मुझको उसका,
बात सच्ची मैं कहता।
नहीं करता, कभी घंटी।
बज जाता फोन फिर भी॥
तब वो शरमाके, क्या बात मुझसे करे?
जब घर में हो मम्मी और पापा उसके॥

मिलन हमको कभी भाता नहीं।
देखते ही धड़कनें बढ़ जाती॥
आगे क्या हाल है? कहानी ये प्रेम की।
अधूरी हैं, कैसे वो? कब होगी पूरी॥
जब हम देखकर ही,
फेर लेते हैं चेहरे।
फिर कैसे बात होगी,
मिलन कुछ पल का है।
नयन लगाये हैं टकटकी,
होठों पर मुस्कान है॥
कहाँ रहती है प्यारी?
कहाँ मैं दिवाना रे?
क्या काम है मेरा?
राम जाने अपना रे?

20.गीत-“यादें”
       रतन लाल जाट
यादें, न जाने,
दिन इतने, छुपी थी कहाँ ये?
जो आज दिल से, निकलके,
आँखों में, बस गई है॥

हमको ना मालूम था,
इतने बरसों में।
क्या-क्या नहीं हम भूले॥
आज अवसर मिला,
तो फिर कैसे रूके?
दिल में बसी यादों ने
बंधन सारे तोड़ दिये॥
यादें न जाने………………

बस, आपकी बरसों पहले,
खींची थी जो तस्वीरें।
मेरी आँखों में,
एकबार फिर उभर आयी है॥
उनमें से कुछ यादें तो खट्टी हैं,
और कुछ यादें, मीठी भी हैं॥
मीठी यादें फीकी पड़ गयी।
खट्टी यादों का कड़वापन है बाकी॥
आज भी लगता है।
मुझको मधु-रस इनमें॥
यादें न जाने………………

यादें सँवारती जिन्दगी,
दुःख में भी सबको हँसाती।
मरते को देती हैं,
ये एक नई खुशी॥
सबकुछ बदल जाये,
ना जाने कौन सदा है?
कभी ना मरती है,
यादें तो चिर-स्थायी है॥
यादें न जाने………………

21.गीत-“वो मेरा अपना जादू है।”
                 रतन लाल जाट
वो मेरा अपना जादू है,
गीत मेरी साँसों का है।
इस जीवन की हरियाली में,
वो बरसने को है आये॥

सावन का मौसम है प्यारी,
गरज-गरजकर घन माला-सी।
आज मेरे गगन में छायी,
तू अमृत-धारा बरसाती॥
पिया छैल-छबीली दिवानी,
भँवरे-सा राग गुनगुनाती।
होली के मौसम में वो रानी,
मधुर-मधु रस दिल में भरती॥
पल में हमको कर दे पागल,
होश है हमको ना कुछ खबर।
उन्माद-सा होने लगा असर है,
मुश्किल हो गया यहाँ जीवन रे।

पल नहीं दूर हमसे जाती,
सपने में मुलाकातें होती।
बिन मिलन के नींद ना आती,
रो-रोकर रात गुजर जाती॥
अनजान रस्ते पर मिलती है,
रूप उसका प्यार दिखलाये।
अगले ही पल छिप जाती है,
तब हम उसी को खोजते हैं।।

किसको है पता? कहाँ जाऊँ?
कैसे पाऊँ, मैं उसको यूँ॥
दिल हमारे पलभर मिले थे,
कई जन्मों तक अब शिकवा है।
जूदा हुए बिना कैसा है?
संग-संग यहाँ मिलन प्यारे॥
मैं तेरा जादू हूँ यारा,
टूटता नहीं प्यार दिलों का।
बरसों बाद भी खुमारी है,
प्यार है पुराना, कैसे कहें?

22.गीत-“जाती इन गलियों को”
                  रतन लाल जाट
जाती इन गलियों को,
मैंने देखा था सूनी-सूनी।
कहाँ गई है खुशबू वो,
जो थी मधुर फूल-सी॥

क्यों चलूँ? अब अकेला,
पिया कहीं छोड़ चली।
सूनी-सूनी यह गली,
कभी जो महकती थी॥

पिया खड़ी-खड़ी सदा,
एकटक देखती थी।
मुझको हरपल वो,
आँखों में निहारती॥

शायद कैसे भूली वो,
दिल की प्यारी बातों को।
वापस आज थोड़ी-सी,
तुम याद कर लो भी॥

एकबार रौनक हो,
रंगीन गलियाँ अपनी।
मेरे दिल को लुभाये वो,
मिलन अपना सजनी॥

जाके पूछा है, लता से,
बता तू, वो होगी कहाँ?
थोड़ा-सा पता मुझे कभी,
धीरे-धीरे बता दे तू प्यारी॥

पीपल की शरण में,
रोज आती थी अकेली।
छाया तू, बुला उसको,
आये वो दौड़ी-दौड़ी॥

हमको मिलते थे कई,
छिप-छिपके अकेले ही।
देखकर निहारते नहीं,
जब वो ना मिल जाये कहीं॥

बीते दिनों की वो यादें,
  दिल में हम सँजोयें है।
जुदाई में है तन्हाई,
बाकी यही एक निशानी॥

रात को दिल जाग जा,
चल, उन गलियों में कहीं।
आज पिया को बुलाना,
पल मिलन का है यही॥

23.गीत-“संग-संग हैं।”
           रतन लाल जाट
संग-संग हैं, सब अपने जीवन में।
जन्म के संग देखो मरण है॥
रात हमको लगती है,
प्यारी अपनी शीतलता से।
दिन में धूप मिले हमको,
जलते रहें हम उसमें॥

कहीं फूल हैं ऊपर,
नीचे शूल भी हैं बिछे।
आँखों से बहते हैं अश्रु,
सुख-दुख दोनों साथ हैं॥
कभी स्नेह-बन्धन रूलाये।
तो कभी विरह-ज्वाला जलाये॥

कहीं शोक होगा किसी का,
तो कभी हर्ष भी हमको होगा।
बरसात का मौसम, फूल खिले हैं,
एकदिन झुलसेंगे, वो फूल जो हैं॥

कभी तो होती रोज मुलाकातें।
बिन माँगे होती प्रेम की बरसातें॥
कभी रोते हैं वियोगी-जन,
कई रातें बैठे-बैठे अकेले।
फिर भी मिलन ना,
एकपल कभी होता है॥

कभी संग बनता,
कभी संग छुटता।
कुछ पल है उजाला,
फिर यहाँ अंधियारा॥
चैन अब आता नहीं,
बढ़ रही बेचैनी है॥

पूण्यता का नाम है गंगा।
पाप भी आता है नहाने यहाँ॥
इस उथल-पुथल के बीच,
कभी था शासन शांति का।
लेकिन आज है भारी,
घनघोर युद्ध की बेला॥
दानवता के साये में अवतार होता है।
रामराज में ही तो शैतान पनपता है॥

ऊपर आसमां, नीचे धरती।
वो बरसता, तो ये तपती॥
पर्वतों की चोटी पर होगी,
कई सारी चीजें प्यारी।
गहरा सागर बहता है,
तल में छिपे मोती उसके॥

कभी अकाल होगा,
कभी बाढ़ आयेगी।
ज्वालामुखी नवनिर्माण करेगा,
भूकम्प से धरा फट जायेगी॥
आँधी के संग है तूफाँ,
शूल है फूल भी वहाँ।
जीवन संग मरण है,
आँखों में दोनों आँसू हैं।

24.गीत-“अब किसका करे इंतजार रे”
                     रतन लाल जाट
अब किसका करे, इंतजार रे?
मन करता है, जाऊँ उसके पास मैं॥
अब ना चैन आता है।
रो-रोकर जपूँ नाम तेरे॥

दिल देखे तुझको,
तुझको ही चाहे वो।
और कहे हरपल,
कुछ बातें और गम।
दिल में जली है आग ये,
मिलन से इसको तू बुझा दे।
जींऊँ-मरूँ मैं साथ तेरे,
कभी ना रहूँ अलग तुमसे रे॥

बस, जिन्दा है प्यार मेरा।
वो संग तेरे है सदा॥
प्यारी, मिल तू दिवाने को,
तरसे अकेले बिन तेरे वो।
इधर-उधर घुमे,
मगर कहीं मन नहीं लगे॥
आसमां पे देखे तो,
राह प्यार की नजर आये।
दिल की कलियों में उसके,
फँस गया भँवरे-सा मन ये॥
खुशबू बनकर जैसे वो,
उसमें घुलमिल गया है।

कब देखा है? और कहाँ?
जादू किसी ने, अब तक ऐसा॥
बिन सरोवर भरा है पानी।
बिन बादल चमकती है बिजली॥
दिन में छा जाये चाँदनी।
आधी रात को लगती गर्मी॥
होते ही अपना मिलन,
आयेंगे देखने को कल।
छा जायेगी खुशियाँ जीवन में,
जब साथ होगी दिवानी मेरे।
और सोने-सा दिन,
होगी चाँदी-सी रात रे।

25.गीत-“कोई-कोई तो दिल के साथ”
                      रतन लाल जाट
कोई-कोई तो दिल के साथ।
तो कोई है दिल के पार॥
जैसा रंग है, वैसी ही चाल।
जब दिल चाहे, तब हो प्यार॥
प्यार से मिलता है प्यार।
जग में देखो, सब में है प्यार॥

मिल जायेगा,
सभी नजरों में।
अपना वो प्यार,
जो दिल ने किया है॥
हर कोई धिक्कारे,
जिसको ना आये।
सच्चा प्यार करना,
जिन्दगी में किसी से॥
इस प्यार की राहें चलना आज।
बड़ा ही मुश्किल लगता है यार॥

दर्द भी मिलता,
प्यार में है रोना।
और देना पड़ेगा,
जीवन हमको अपना॥
करने वाले है,
जो प्यार के नाम धोखा।
गिर गये हैं,
वो सबकी आँखों से यहाँ॥
सबको देता है,
नई खुशी, अपना प्यार।
बिन प्यार के,
सूना है सारा संसार॥
अपने हो जाते हैं बेगाने यार।
फिर भी वो प्यार में हँसते हैं साथ॥

26.गीत-“आगे देखो तुम”           
              रतन लाल जाट
आगे देखो तुम जो,
गुजर गया है उसको भूलो।
अब आगे देखो-२
सामने है क्या, जान ले उसको।
फिर ना देखना, गुजर गयी बातें जो॥
अब आगे देखो-२

आ रहा है अब यहाँ,
एक नया जमाना॥
वो ला रहा है पास हमारे,
एक प्यार मधुर चमन-सा॥
अगर गुजर गया है बसंत तो।
छा जायेगी गगन में घटा वो॥
रिमझिम-रिमझिम बरसात हो।
आये उसके बाद बहार वो॥
अब आगे देखो-२

सावन आया है लेकर खुशियाँ।
सूखे आँगन को कर दिया हरा॥
आगे बताता हूँ बातें वो कई सारी।
जो जाते हुए सावन ने हमें लुटा दी॥
भीनी-भीनी शरद्, खिलते हुए कमल।
जाते-जाते दे गया, अपना संदेश-खत॥
कोई नहीं है अकेला,
सबका संग है पक्का।
कोई जायेगा तो,
फिर कोई आयेगा वो।
उसने कहा था,
आज हमने भी कहा है जो॥
अब आगे देखो-२

27.गीत-“कभी हम”
        रतन लाल जाट
कभी हम बातें करें।
कभी हम तुझे देखें॥
कभी हम, यादों में।
तेरी रहें खोये-खोये॥
या कभी, राहों में।
चलें हम अकेले॥

कभी आये रोना।
तो कभी हँस जाये,
कभी सपने सँजोते।
यादों में कभी आते॥
कभी हम आँखें बन्दकर,
चेहरा देखते हैं।
कभी हम बातें सुनकर,
अकेले मुस्कुराते हैं॥
तब ईश्क का ऐसा जादू छाये
  कि- पागल हम कब से जायें॥

जिन्दे हैं हम, बस तेरे लिए।
और मर भी गये तो तेरे लिए॥
प्यारी तुझको कहूँगा,
शातिर तू मुझको बताना।
आग मैं पी जाऊँगा,
चाहे तू कितनी भी जलना॥
कभी हम पूजा करें।
कभी हम वन्दन करें॥
कभी आगे-पीछे दौड़े तेरे।
तो कभी देख तुझे रूक जायें॥

लेकिन सब चाहें,
कुछ कह ना पायें।
कभी हम यूँ ही सुना करें बातें,
या कभी मिल जायें अनजाने॥
कभी हम वादा करें,
कभी हम ख्वाब देखें।
कुछ इरादे भी हैं अपने,
और कसमें भी निभा रहे हैं।।

28.गीत-“शाम कहे मुझको”
             रतन लाल जाट
शाम कहे मुझको,
तेरे प्यार की बातें।
सुबह उगता सूरज वो, 
खिला-सा चेहरा लागे॥
सोच लो तुम,
कौन है जो?
छाया है अपने,
दिल में वो॥
चाँद दिखलाता है तुझको,
नाम लिखते हैं तारे।
हलचल-सी मचाये वो,
तन की कोमलता है॥

भोर में ढ़लका था,
किरणों को छूते ही।
कलियों पे था जमा,
पानी बिखर गया री॥
जैसे आँसू है,
अपनी आँखों के।

बादल बीच गगन में,
चमकती है बिजली।
जैसे वो पास मेरे,
नैनां अपने झपकाती॥
लगता है तेरा,
रूप प्यारा मुझे।
जैसे वो एक फूल,
या सितारा है॥

शायद वो खुशबू है,
या कोमल कली।
देखते ही दिल खिल उठे,
जब बातें हो अपनी॥
चेहरा वो मुझमें,
छिपा था भीतर में।
दिल कह दे ना उसको,
अब वो बातें॥

धीरे-से गुनगुना,
उधर ना देख तू।
वो तेरी है सजना,
अपने को देख यूँ॥
कौन चाहे? सामने उसे।
दिल में वो फिर प्यार आये।।

29.गीत-"चलूँ मैं साथ तेरे”
             रतन लाल जाट
चलूँ मैं साथ तेरे,
थाम के बाहें।
जी लूँ मैं नाम तेरे,
या बस जाऊँ दिल में॥

कभी ना रहूँ मैं, तुम बिन अकेला।
जीऊँ तो तेरे लिए, वरना है मरना॥
हँसा दे तू मुझको,
कभी ना रूलाना है।
देखूँगा हरपल तुझको,
दिन-रात ना थकूँ मैं॥
चलूँ मैं साथ तेरे……………

कर लूँ वादा तुमसे,
दिला दे सारी कसमें।
मर जाऊँ मैं संग तेरे,
सब लुटा दूँ प्रिय मैं॥
चलूँ मैं साथ तेरे…………

30.गीत-“काश! मेरे जीवन में”
                रतन लाल जाट
काश! मेरे जीवन में,
तुम ना आते कभी।
तो फिर कहाँ होती?
रोज मुलाकातें अपनी॥
कैसे ये जिन्दगी,
अपनी शान बनती?
और कैसे हम जीते?
चैन से यह जिन्दगी?
नैनों से बरसात ना होती।
जूबां पे बात कभी ना बनती॥
आँखों से ज्योति ना जलती।
श्वाँसें फिर क्यों मचलती? …………

कैसे दुनिया कहती?
छुप-छुपकर पागल।
इधर-उधर की बातें,
वो बताती कब?
तू अच्छी, मैं बुरा।
एक प्यारी, दिवाना दूजा॥
आवारा ये बादल लगते,
और लगती गलियाँ सूनी।
सपने हमको रोज डराते,
यादें रह जाती अधूरी॥
नींद हमारी ना जागे,
रात क्या दिन में भी…………

ना हम हँसते,
ना हम रोते।
ना जीना प्यारा लगता,
ना ही चाहते मरना।
प्यार में ना जीते-मरते हम,
तो क्यों बनते प्रेमी पागल?
धरती से आसमां,
और स्वर्ग भी लगता।
मुझको है बेगाना॥
चैन ना मिलता एकपल भी,
जब तू ना मुझको मिलती…………

31.गीत-“सुरीली आँखों वाली”
               रतन लाल जाट
सुरीली आँखों वाली, है वो मेरी दिवानी-३॥
पास जाऊँ उसके, दिल मेरा धड़के।
चलते हुए देखूँ, तो होश मेरे उड़े॥

वो सुर-नगर में रहने वाली।
मैं हूँ गाँव का एक देहाती॥
होंठ उसके माँगे दिल आजा,
घने उलझाये बाल वो बाला।
अलबेली मद-मस्त हवाओं में,
नाच दिखाती है वो जोरों-से॥
सज-धजके, बन गयी है।
सुरीली आँखों वाली, प्यारी-प्यारी सजनी॥

लगता है मुझको,
उसमें थोड़ा-सा नशा।
और नींद में उसको,
अलसायी पलकों से देखा॥
आँखें बन्दकर आँखें देखी।
दिल में बसायी है दिल्लगी॥
सीने में, आग लगी है।
सुरीली आँखों वाली, जब से तू आयी।।

बादल-सी बनकर,
गगन में वो सैर करती।
सूखी धरती पर,
जल-धार वो बरसती॥
सच्ची प्रेम-कहानी हमको,
दुनिया ने बतलायी थी।
लेकिन दिल को ना भायी वो,
उसने दुनिया को झूठी मानी थी॥
बिश्वास ना कर पाया,
जग की बातों में।
दिल दे बैठा हूँ,
सुरीली आँखों वाली, तुझे एकपल में ही।।

नींद में बुलाया,
तो सपने में आयी।
अपने दिल की बात उसको,
मैंने धीरे-से बतायी॥
सच्चे दिल की बात वो,
मान गयी सजनी।
भूल कर बैठा था मैं,
खुद मैंने ही कसम खायी॥
चुराने की ताक में,
संग वो रहने लगी।
दिल चुराकर आत्मा को जगाके,
दिवाना कर गयी मुझको सजनी॥
अपने सुन्दर जहां में,
खिलते हैं फूल प्यारे।
सुरीली आँखों वाली, खुशबू भरी है जिन्दगी।।

एक खिलौने-सा दिल है अपना।
आँचल में उसके जो फेंक दिया॥
ना उसको मालूम था,
हमने भी ना कुछ सोचा था।
प्यार की बातों में,
खो गया जहां ये।
सुरीली आँखों वाली, प्यार से मिलती खुशी।।

32.गीत-“यादों के मेले में”
             रतन लाल जाट
यादों के मेले में, दिल मेरा घुमता है।
तो कभी इस दिल में, प्यार उमड़ता है॥
और ना जाने कब? यहाँ कितने आते-जाते?
यादों के मेले में…………………………………………॥

हँसी आती है कुछ पल।
फिर रोता है ये दिल॥
कभी बहारों का मौसम,
तो कभी आँधी-तूफान है॥
यादों के मेले में…………………………………………॥

यादों के सामने, कोई दूर है नहीं।
यादों में किसी से, मिलना मुश्किल भी नहीं॥
एकपल में, बरसों पुरानी यादें जो,
आँखों में छा जाती है॥
यादों के मेले में…………………………………………॥

यहाँ कोई ना है मरता,
चाहे बीत जाये सदियाँ।
लेकिन कोई मरे तो,
जिन्दा होके भी वो लगता है मरा॥
अमर नाम हो जाये,
कुछ काम ऐसा करें।
बार-बार ना मिले यारों,
यह जीवन अनमोल है॥
यादों के मेले में…………………………………………॥

33.गीत-“माँ अपनी, पिता अपने”
                रतन लाल जाट
माँ अपनी, पिता अपने।
पिता ने माँगी, है दुआएँ॥
मैया ने जन्म दिया है।
ममता से पाला है॥

तब सिर था आसमां से ऊँचा।
खुशी से फूले नहीं समाये थे पिता॥
कैसे आये पल-पल?
कितने प्यारे हैं ये पल।
अब बदली, रूत हैं कैसे?
माँ अपनी, पिता अपने……….॥

लाख बचाकर पिता ने कमाया।
अपना था सब हमको लुटाया॥
मैया ने खिलाया अच्छा जो था।
खुद ने खाया झूठा वो तुम्हारा॥
बेटे तू बड़ा होकर नाम करना।
बन श्रवण-पूत सेवा करना॥
पिता ने कहा, माँ ने चाहा।
बेटा हमको जान से चाहेगा
हमसे दूर कभी ना,
तू कहीं जाना रे।।

माँ अपनी, पिता अपने……….॥

बातें ना सुनता वो पिता की।
माँ भी रहती है अब अकेली॥
कौन सुध लेता हमारी है?
चलो, अब भी हमको कमाना है॥
हाँ, तुम रोटी बनाना।
पानी भरके मैं लाऊँगा॥
मैया का स्नेह गँवाया।
प्यार किसी से झूठा करने लगा॥
पिता से नाता तोड़ा।
भाई-बहनों से अलग रहने लगा॥
कैसे कहूँ कहानी, और क्या गुजरे।
माँ अपनी, पिता अपने……….॥

34.गीत-“अच्छे बनकर रहना”
                रतन लाल जाट
अच्छे बनकर रहना, मेरे प्रिय तुम।
सच्ची कहना, बातें दिल की हरदम॥
पास रहूँगी तुम्हारे, जब रानी-सी मुझको रखोगे॥

बात तेरी लगने लगी है,
मुझको इतनी प्यारी रे।
कभी ना सताऊँगा,
ना कभी रोना तुम……॥

फिर एकबार सोच लो।
प्रेम नाम को जान लो॥
नाम कितना प्यारा है?
कर लो ना भरोसा,
दिल की बातों पे तुम……॥
 
हमने भी चाहा।
सच्चा ही प्यारा॥
जान तुमको कहते।
तो जान दे देंगे॥
प्यार ना चाहता है,
कभी ना करना बुरा रे।
दिल से कहती हूँ,
मेरे पिया हो तुम……॥

विश्वास दिलाते हैं सबको।
सच्चा जग का नजारा वो॥
लग रहा है, अब मुझको।
छूती ये किरणें, सूरज को॥
आसमां से चाँद बरसाता चाँदनी।
आओ ना अब आओ तुम……॥

कीचड़ में पलकर, काँटों से टकराकर।
रंगीन-खुशबू वाले, खिले हैं कमल।
करने लगी है भरोसा।
रात काली-काली भी अपना॥
अब टिमटिमायेंगे सितारे।
अंधेरा ना हो जाये॥
सुन्दर-सुन्दर जहाँ में,
गीत सरगम सुनायेंगे।
सबको अपना दो प्यार तुम……॥

35.गीत-“वो प्यारा है।”
         रतन लाल जाट
वो प्यारा है, मेरा यारा।
बातों में उसको ही पाया॥
दिल अपना लुटाया,
और सदा ही चाहा।

‘वो चाहने लगी,
कहने लगी मुझको प्यारा।
दिल से अपना मान लिया।
उसने आकर हमसे प्यार किया॥’

रब को कहते हैं, बातें अपने दिलों की।
सच्चा प्यार तू है, आज चलो मेरे संग ही॥

‘संग तेरे चलकर जायेंगे,
जग छोड़कर रब को पायेंगे।
जो कहेगा हमको दिवाना,
प्यार सच्चा वो पायेगा।’

ऐसा चैन देना,
दिलों को सदा।
प्यार हमारा जिसे,
याद करे जहां॥
‘आँखों में छाया है प्यार,
बातों में भया है प्यार।
रब ने भी कहा है प्यार,
दिल में भी बसा है प्यार॥’


जीत ली है जंग हमने,
दुनिया के हाथों प्यार की।
चलें सबको आज बताने,
हरपल की वो कहानी।
'जिसकी तू है दिवानी।
नाम तेरे है, वो सारी॥
सार उसका तू है,
भाव जाने दिल मेरा ये।’

तू लिखने वाला है,
इस जग की निराली बातें।

'पावनता की कहानी,
गीत अपने गुनगुनती।
है तेरे मेरे दिलों की,
हरपल बात वो निराली॥’
जग प्यारा है, खुशबू में एक नशा।
सारा जहाँ करता है,
हम दिवानों को प्यारा।।

36.गीत-“ए हमसे दूर रहना”
             रतन लाल जाट
ए हमसे दूर रहना,
मुझको तू ना छूना।
बचकर हमेशा रहना,
मिलेगी वरना सजा॥
आँखें बचाकर रहना,
नजरें मुझ पर ना लगा।
ए हमसे दूर रहना…………………

‘सजना बनकर आऊँगी,
तेरे प्यार की दिवानी।
ऐसा जादू चलाऊँगी,
भनक ना चल पायेगी॥’

‘दिल को छू जाऊँगी,
यादों में बस जाऊँगी।
ए दिवाने, मैं तेरी सजनी,
लाख छिपकर रहना तू कहीं॥
मैं खोज लूँगी जहाँ तू होगा॥’
ए हमसे दूर रहना………………

वादा ना करूँगा मैं,
कसम नहीं दिलाऊँगा तुझे।
सपने मत देखना,
झूठे ख्वाब ना रखना।

‘मैं हूँ नशा,
होश तू खो देगा।
चख ले ना,
बस, एकबार ये मजा॥’
ए हमसे दूर रहना………………….

‘फिर टिकटकी लगायेगा,
पास मेरे दौड़ आयेगा।
रातों में नीन्द ना आयेगी,
सपनों में आकर दूँगी जगा॥’

संग ना चाहूँगा,
पल ना जीऊँगा।
कभी ना मैं संग तेरे,
बंद कर दे कारावास में।
‘लाखों देखे तुम जैसे,
इधर-उधर हर गली में।
पागल बनके वो आवरा,
खोजा करते हैं सारा जहाँ।
ए हमसे दूर रहना…………………

कौन मिले उसको,
किस्मत में कहाँ वो?’
झूठी-झूठी बातें करने लगी,
देखा होगा किसी को॥
मुझे ना ठग पाओगी,
समझता हूँ मैं छल-धोखा।

धोखेबाज है तू,
तेरा संग ना चाहूँ।
बच गयी रे, अच्छा हुआ
न जाने कैसी भूल हो जाती।
हाय रे, गँवा देती दिल अपना ॥’
ए हमसे दूर रहना…………………

सोच-समझकर पास आना।
ऐसा ना चल पायेगा॥
रहोगी दिन कितने दूर हमसे?
जवानी गुजर ना जाये कहीं ऐसे॥
कह रहा है जहाँ सदियों से।
पल ना कर पायेगा अब असर ये॥
बता जरा जबाव मेरा।
कब चाहा? सजनी ने प्यार तेरा॥
माँगते हैं, किस्मत समझना।
प्यार तुझको मिल जायेगा॥
ए हमसे दूर रहना…………………

37.गीत-“आ जा, मेरी जान-जान”
                 रतन लाल जाट

आ जा-२ मेरी जान-जान।
श्वाँसें जपे, तेरा नाम-नाम॥

आँखें देखे, देखे वहीं।
दिल माँगे, प्यार-प्यार॥
आजा………………………

दिल के तू पास है,
ना जाने कितनी?
कितनी तुमसे उम्मीदें,
हमने है लगायी॥
लगायी सीने से तुझको,
दिल के भीतर से भी।
और भीतर बसी है जान
आजा………………………

कहने को हैं कई बातें,
हैं कितने अरमान भी।
अरमान ही छाये हैं,
धरती-आसमां हरकहीं॥
बीच धड़कन में तू,
तू ही है मेरी जान।’
आजा………………………

सपने हम देखते हैं,
देखते हैं आँखों में।
आँखों में जो प्यार है,
वही प्यार हम माँगें॥’
माँगें जिन्दगी के संग सरजमीं,
सरजमीं से भी है प्यार
आजा………………………

दिल कहता है प्यारी,
धड़कन भी है बुलाती।
बुलाती है तमन्ना,
तमन्ना यही है हमारी॥
‘तू अपनी जिन्दगी का सिंगार कर
  यकीन तू कर प्यार में दे देंगे जान
आजा………………………

38.गीत-“कब रात ढ़ल जाये?”
              रतन लाल जाट
कब रात ढ़ल जाये?
कब तक आस लगाये?
हमको प्यार मिल जाये।
जब सूरज उग आये॥

कब हवा बदल जाये?
कब अपना संगी आये।
एक-दूसरे से मिलाये तो,
हवा बसन्ती कहलाये वो।

कब बादल छा जाये?
कब दिन रात बन जाये?
अपने मिलन से सदियों दूर हो जाये,
तब फूटकर बादल करे बरसातें।
कब रात ढ़ल जाये?
कब तक आस लगाये?

न जाने कौन हमको मिला दे,
सूखते गुलशन को लहरा दे।
न जाने कहाँ हम चल दें,
खिलती कली सुगन्ध खो दे॥

अचानक आकर तूफान कर दे।
मिट्टी की मजारों को मिट्टी रे॥
उस दिन क्या हो जाये?
सदियों हम मिल ना पायें॥
बस, मिलते ही जुदा हो जायें।
कब रात ढ़ल जाये?
कब तक आस लगाये?

दिल अपना टूट जाये,
आँसू अपने ना रूके।
दिन-रात अपनी वो,
याद में गुजरें॥
कोई अपना हमको ना लगे।
प्यार भी आग बन जलाये।।
कब रात ढ़ल जाये?
कब आस लगाये?

39.गीत-“आसमां”
        रतन लाल जाट
आसमां, आसमां, आसमां
जमीं से ऊपर देखूँ आसमां।
कुछ ना माँगे, सबको ही चाहे
आसमां, आसमां, आसमां

बुलाती उसे, धरती जो प्यारी।
करता हसरतें, सबकी वो पूरी॥
यही कहानी तेरी आसमां
आसमां, आसमां, आसमां

देता है तुझे, सजती वो जिन्दगी।
कर दे बरसात, दे धूप भीनी- भीनी॥
कर दे चारों ओर उजाला
आसमां, आसमां, आसमां

फ्रिक वो करता,
ना किसी को सताता।
चुपके-चुपके वो करता,
अपनों पे गुस्सा॥
  आसमां, आसमां, आसमां

जादू उसका बोले,
धक-धक सब करे।
तूफान और बिजली,
ज्वाला के संग आँधी।
चलते हुए वो नाचे,
उसके ईशारों पे।
वो है सबका, सबसे ऊँचा।
आसमां, आसमां, आसमां
  
40.गीत-“मतलब ना तेरा”
             रतन लाल जाट
मतलब ना तेरा,
है उसे तेरे जिस्म का।
सदियों ना वो संग,
बस है कुछ पल का॥
कोई देखे, पीछे वो तेरे दौड़े।
रूक जा, तू देख वो क्यों आये॥
मतलब ना तेरा……………………
क्या पता? कब हो जाये? प्यास उसकी पूरी।
मिट्टी तेरी बनाके, कर दे वो तुझे जमीं॥
वो लुट ले जायेगा,
सजा-धजा रूप तेरा।
मतलब ना तेरा……………………
मत छूने दे, संग ये मारेगा।
रहो बचके, तुम हो नगीना॥
उगल तू विष अपना।
कर दे तू नाश उसका॥
मतलब ना तेरा…………………
चल प्यारी, संभलके।
जाल फैला, वो फँसाने।
तुमको कर लेगा, वो वश में॥
सजग हो, आँखें खोल देना।
मतलब ना तेरा…………
हर इंसान हो गया है स्वार्थी।
क्या करे? भला वो अजनबी॥
मानव का धर्म कहीं जा छूपा।
जन्मों कौन थामे, हाथ तेरा सजना॥
मतलब ना तेरा ……………………….

41.गीत-“सरजमीं से सरजमीं पे”
                 रतन लाल जाट
सरजमीं से सरजमीं पे,
पसर गई है पुरवाई।
हरकहीं छायी है,
घनी वो हरी चटाई॥

अगर रब्बा कर दे,
हमारा मिलना।
दिल से दिल में,
कहीं एक पल का॥
ना करना हमको,
ऐसे कोई शिकवे।
प्यार बदल गया रे
कि- दिल मचल गया कहीं।
सरजमीं से सरजमीं पे ……………………

अब छलकेगा गहरा सागर।
लहरायेगी लहर बनके साजन॥
नैनां कर देंगे, बौछारें सावन की।
बिजली बन चमकेगी, आँखों से ज्योति॥
शाम पड़ी दिल में, अब होगी बेचैनी।
श्वाँसें भी अपनी, घनघोर गरजेगी॥
सरजमीं से सरजमीं पे…………………

फिर न जाने, आगे क्या होगा रे?
कहीं वो चलें, कहीं हम चले जायें॥
दिल में अब यहीं लगी है आशा अपनी।
प्यार की प्यार से होगी मुलाकातें वो अधूरी॥
सरजमीं से सरजमीं पे……………………………

कभी तो आयेगी अपनी बारी।
सदियों जलायी रखूँगा मैं बाट उसकी॥
एकदिन वो होगी, अपनी साधना होगी।
तब सामने वो मेरे आकर अवतार लेगी॥
सरजमीं से सरजमीं पे……………………………

42.गीत-“शिकवा”
         रतन लाला जाट
शिकवा, शिकवा, शिकवा।
एक शिकवा है तुमसे मेरा॥

“बता, बता, बता।
कहानी अपने प्यार की।
निशानी हम दिवानों की॥”

बस, एक बात कहनी है।
तुमको हाँ भरनी है॥

बात, मैं समझ ना पायी।
होश भी अपना खो बैठी॥
यह सब क्या है क्या?
शिकवा, शिकवा, शिकवा।”

यूँ दिन कितने रह पायेंगे?
हम मिलकर भी घबारायेंगे।॥

मुझे भी सुनना वो कहानी।
जो जानता है दिल मेरा भी॥
सुना, सुना, सुना।
शिकवा, शिकवा, शिकवा।

जाने सारा जहाँ,
क्या मैं बताऊँ।
दिल ने जो भी कहा,
सब तेरे दिल को सुनाऊँ॥”
ना रे, ना ना ना
शिकवा, शिकवा, शिकवा।

“क्यों, क्यों, क्यों?
कहने को आये पल।
लम्बे दिनों के बाद॥”
फिर क्या आयेगा?
दुबारा ऐसा नजारा।
शिकवा, शिकवा, शिकवा॥

“वो शिकवा, है मुझसे, ऐसा तेरा क्या?
मुझको भी, है तुमसे, वो ही शिकवा॥”

वाह, वाह, वाह।
बातों में तू फूर्तीली।
संग मेरे भी तू छायी॥
अब कहाँ जाऊँ?
तेरी-मेरी।
है एक-दूजे से,
कुछ खट्टी-मीठी॥
बात कहूँ, सुनो।
संग मेरे चलो॥
जाकर हम करें
आज उसको अपना शिकवा ।
सच कहती,
रब को भी है मंजूर ना।
अब करेगा जरूर वो फैसला।
शिकवा, शिकवा, शिकवा।।

43.गीत-“धीरे-धीरे आया रे”
               रतन लाल जाट
धीरे-धीरे आया रे,
दो दिलों में दिवानापन।
दिवानेपन का नशा ये,
छाया है आशिकाना बन॥

जादू चला आशिकों के बीच धीरे-धीरे।
फिर जल्दी-जल्दी में, बन गये प्रेमी नये॥
वो ही प्यार, दिखे सब ओर।
प्यार ही, ढ़के हैं धरती-आसमां छोर॥

हरकहीं वो मिलते दोनों,
चलते हुए दौड़ लगाते।
सपनों में मिलते,
ख्वाबों में चाहते॥
दिल की पुकार ये,
करती है कम।
धीरे, धीरे आया रे…………………॥

संग रहकर संगी ने,
तब उसको बना ली संगिनी।
संगिनी भी रहने लगी,
अब साथ-साथ उसके ही॥
सब जने कहने लगे,
उनको सजनी-सजन।
धीरे, धीरे आया रे…………………॥

पक्का-पक्का जुड़ गया रिश्ता।
अपने को कसमों में बाँध लिया॥
अब ना छूटे कोई।
रोज मुलाकातें होती कई॥

एकदिन वो दोनों, साथ थे सोये कहीं।
नींद ना एक-दूजे को थी आयी॥
एकपल को भी चैन नहीं।
रात सारी गुजर गई॥
रचा ली थी शादी उन्होंने,
अगली सुबह जल्दी उठकर।
धीरे, धीरे आया रे…………………॥


अब आता है स्वामी उसका,
होले-से उसको कुछ कहे।
साथ जीयेंगे, हम साथ मरेंगे,
अब हम दोनों, एक बन गये हैं॥
जिसके लिए कब-से?
दिवाना था दिल?
धीरे, धीरे आया रे…………………॥

44.गीत-“साजन! राहें देखे तेरी सजनी”
                   रतन लाल जाट
साजन! राहें देखे तेरी सजनी।
ढ़लकी बून्दें उसके आँसू की॥
आहें भरे तेरी, गीत यही गाती।
बीते पल की, अब याद सताती॥

आँचल है उड़ाती, बाँहों में भरके तेरी ओर।
आज है बुलाती, तुम्हें वो दिल के छोर॥
पगली बनकर रहती है, भूल चुकी वो सुध-बुध अपनी।
पिय-पिय जपती रहती है, दिन-रात जैसे हो कोयल कोई॥
काली-काली है, तेरे प्यार में काली।
जलकर दिवानी, हो गई वो मतवाली॥
साजन! राहें देखे तेरी सजनी……………॥

आँखों में देखें वो चेहरा।
तो फिर याद आये वादा॥
इधर-उधर दौड़े, हजारों के बीच ढ़ूँढ़े।
वियोग में आज वो, राहें तेरी चले॥
मौन रहकर दिल से भी कहें कुछ बातें।
हरदम देती है मधुर उपालंभ तुझे॥
कहाँ जायेगी? तुम बिन वो अकेली।
कौन कहेगा? दिल से उसको सजनी॥
साजन! राहें देखे तेरी सजनी……………॥

जब प्यार था, तब कुछ था नहीं।
दिवाना वो था, आशिकी तू नहीं॥
चाहत उसको थी, दूर तू रही।
मुश्किल से अब ये प्यास जगी?
साजन! राहें देखे तेरी सजनी……………॥

कभी नींद उसे ना आती।
आये नींद तो सपना बन तू जगाती॥
अब वो ना जगे, बेगाना है।
सच्चे प्यार में, वो दिलबर है॥
प्यार लौटा दे, सपना कर सच्चा।
आज धरती पे, उसको मिल जा॥
दिल में आकर दिल तू बस जा।
एक ही अग्नि अब अपने में जल जा॥
सपना है यही, पूरा करो तुम ही।
सजी-धजी धरती, अमर आसमां को बुलाती॥
साजन! राहें देखे तेरी सजनी……………॥

45.गीत-“मेरी रानी”
           रतन लाल जाट
मेरी रानी, तू धरती जितनी प्यारी है।
तारों के बीच, चमकते दो नैन तुम्हारे॥

मेरी रानी, लिख दूँ नाम तेरा।
सारे आसमां में, इतना बड़ा॥
कि- देखता रहे सारा जहां।
सीखे वो भी प्यार करना॥

उसमें है इतनी शक्ति,
मरते को जिन्दा वो कर दे।
तब पानी को बना दे,
धधकते हुए अंगारे………॥

आग जलेगी, तो मैं जम जाऊँगी।
हवा आयेगी, तो घबराये मेरा जी॥
नजर आये पिया,
जैसे कि- सारा जहाँ।
सभी बन्द है तुझमें,
सबको है तूने छिपाया॥
रानी मैं तेरी, तू है राजा।
राजा तुम, बात बताना।
कहाँ रानी है?
राजा तो नहीं मैं………॥

मेरी रानी, तू कहाँ है?
लगे बड़ा मुश्किल।
छिपी है गगन में,
चाँदनी-सी सुन्दर।
सोना बन चमकी।
सूरज की रोशनी॥
अपने संग किरणें,
ऐसे तू लगती है………॥

फूलों की तू कलियाँ,
धरती पे है आसरा।
मौत ही जीवन है,
जूदा होकर फिर मिलना।
होता है दुख कितना?
देखूँ प्यार की राहें………॥

मैं भूला-भटका,
बता दे, तू रस्ता।
काँटों में लगे कोमलता।
विष को चख लूँ अमृत-सा॥
मेरी रानी, तेरी खुशी
खुशी है नशा भी यहाँ।
दोस्ती में रहता है,
थोड़ा-सा शिकवा॥
लेकिन तू एक दोस्त,
मेरी रानी प्यारी रानी है………॥

46.गीत-“बिना देखे"
              रतन लाल जाट
बिना देखे, हमसे मिले बिना।
आकर गये, तुम बोले ना॥
जाते हुए भी इशारा।
तो कर देते यारा॥

दिल में मेरे, एक यही तड़प है।
जो दिल को, रात-दिन जलाये॥
जब तक वापस आओगे ना।
तुम बिन हाल मेरा है बुरा॥

ना हमको कुछ कहा था।
ना हमने कुछ पूछा था॥
ऐसी गलती कर दी क्या?
जो नाराज गये कहाँ?

अपनों को कहकर ना।
यूँ कहीं दूर चले जाना॥
देखो, मेरे सजना!
अच्छा नहीं लगता॥
लेकिन हम मिलेंगे, एकदिन है भरोसा।
मिलन दिल का दिल से तो हो रहा॥

47.गीत-"दुनिया बदल देंगे”
              रतन लाल जाट
दुनिया बदल देंगे,
हम सब मिलके।
छोटी-छोटी बातें सुझाके,
सबका जीवन सजायें॥

चाहे पाप कितना भी छोटा क्यों ना हो?
झूठ के कभी ना होते हैं पाँव चलने को॥
झूठ एकदिन तो मिटना है।
सच आगे उसको झूकना है॥
सच का दामन हम थामें।
परचम अपना लहरायें॥

कितनी गहरी है जड़ मुश्किलों की?
शाखा भी फैली है इसकी बहुत बड़ी॥
लेकिन बाकी काम हम सबको करना है।
आज ही उखाड़ देंगे जड़-मूल से॥
मेरे संग आ जाओ।
हाथ मिलाके चलो॥
मंजिल अपनी दूर है।
लेकिन ना डरो देखके॥

48.गीत-“चल, मेरे दिवाने तू”
               रतन लाल जाट
चल, मेरे दिवाने तू, चलना ना रूक रे।
इस गली से आगे, और भी बढ़ रे॥

चलना ही जब तुझको है मिला।
और मौका भी है तो चख ले मजा॥
बून्दें ये गिर रही है पसीने से।
लग रहा बरसात गर्म मौसम में॥
तुम हो अपनी धून के दिवाने।
चल, मेरे दिवाने तू ……………….

लेकिन यह ना भूलना,
एकदिन शाम ढ़लेगी।
गुजरेगी रात अँधेरी,
खोजना राह अपनी।।
इस अंधेरे में कहीं।
होगी रोशनी जुगनू की।।
छाया है घना कोहरा,
धुँध भी पड़ेगी।
तुम ना ठिठुरना,
याद रखना यह बात रे॥
चल, मेरे दिवाने तू ……………….

आगे जब कभी आसमां से,
बरसेगी ज्वाला आग बनके।
तब पत्थर-सा रहना,
कहीं पिघल नहीं जाना है॥
आँखों में नजर आ रही रूलाई।
लेकिन ये आँखें हैं चमकती हुई॥
अभी तो रात भी अँधेरी है।
लेकिन कुछ घड़ी की देरी है॥
हो जायेगा जब भोर का उजाला,
तब मिलना आ तुम हमसे।
चल, मेरे दिवाने तू ……………….

पतझड़ है, बसंत भी आयेगा।
जेठ जलेगा, तो सावन भी बरसेगा॥
खड़े रहना तुम, आधी रात को।
राह दिखायेंगे तारे भी तुमको॥
मगर जब थक-सा गया पथिक है।
तो समझो मुश्किल उजाला है॥
चल, मेरे दिवाने तू ……………….

49.गीत-“कितनी अजब प्रेम-कहानी”
                 रतन लाल जाट
नैनों में आँसू है,
जबसे मिला हूँ तुमसे।
एक धारा-सी तुम,
बहती हो मेरे दिल में॥

प्रेम की पावन-मूर्ति,
तू दुनिया है मेरी।
मेरे मन-मंदिर में बैठी,
दिल करे पूजा-आरती॥
श्वाँसें जपती है माला।
आँखें खोजती है यहाँ-वहाँ॥
दिल कोशिश बार-बार करता है।
आना चाहे मिलने को तुमसे॥

यह दिल मरके भी,
साथ तुम्हारा छोड़े नहीं।
संग तेरे चला आयेगा,
नरक छोड़के ये धरती॥
जितना प्यार जालिम है।
दिल उतना ही पागल है॥

कई बरस गुजर गये।
फिर भी प्यार जिन्दा है॥
मौत भी डर के मारे,
पास आती नहीं इसके।
कुछ भी कर लो,
आज भी जिन्दा प्यार है॥

दो सच्चे प्रेम-यारों के तन,
अलग-अलग रहते हैं।
उतने ही उन दोनों के दिल,
मिलकर एक हो जाते हैं॥
रोती थी वो, जी मेरा घबराता।
जलता था मैं, उठती उसमें ज्वाला॥
जो सोचते है, अपने मन में।
सपना वो ही आता है नींद में॥

कितनी अजब प्रेम-कहानी।
लोगों को देख आ जाती हँसी॥
मिलकर भी बिछुड़े,
यार मालूम होते हैं।
बरसों जुदाई झेलके,
चोली-दामन का साथ हैं॥

राधा-कृष्ण की प्रेम-लीला थी।
जो आज कहीं दिखती है नहीं॥
दो सच्चे यार एक-दूजे से,
कभी मिल नहीं पाते हैं॥
मालूम उसको, देखना हमको,
कब और कैसे मिलते हैं।
धरती पे तो मिल ना पायेंगे,
पर अम्बर में मिलना होना है॥

50.गीत-“नारायण अपने अजब से”
                    रतन लाल जाट
उदित-उदित-उदित हो,
नारायण अपने अजब से।
पूर्वांचल दिशा में,
भानू का उजाला है॥

इस हिन्दुस्तान में,
ऐसा जादू छाया।
चारों दिशाओं में,
आज वो गूँज रहा॥

अपनी पताका फैलाके धरती-आसमां।
नारायण ने ऐसा नाम किया अमर है……॥

उनके कंठ में है एक जादुई छड़ी।
जिसको सुनने आती है भीड़ बड़ी॥
इतने है उदित अपने प्यारे।
नारायण को भी हैं वो दुलारे॥
राग उनका सुनने को,
दिन-रात बेचैन रहते हैं।
गहरी नींदों में भी,
करते रहते इंतजार हैं……॥

सपनों में गूँजे, उनकी आवाजें।
सुनने को हम, दिल अपना लुटा दें॥
पास उनके मस्ती झूमती है।
आनन्द सदा ही बरसता है॥
खुशियों का सागर भी नित बहता है।
गीत नारायण के सुनाते उदित हैं……॥

तभी सुनकर दौड़े आते हैं,
हवा के संग पंछी प्यारे।
भारत की पावन धरा पे,
गान नारायण का सुनने॥
उदित-उदित-उदित हो,
नारायण अपने अजब से।
पूर्वांचल दिशा में,
भानू का उजाला है……॥

51.गीत-“आजा मेरे, पास-पास तू”
                 रतन लाल जाट
आजा मेरे, पास-पास तू।
तेरा मैं, साथ-साथ चाहूँ॥

रब कर दे, मिलन अपना।
तो धरती पे हो जाये स्वर्ग-सा॥
दुनिया में मिलना, हमारा हो जाये।
तो एक सितारा, बन वो जगमगाये॥
दिन-रात तेरे, नाम-नाम जपूँ।
दिल से बस तुझको पुकारुँ॥

तपता सूरज, अपनी किरणों को,
प्रेम-पिया धरती के, द्वार भेजे वो।
कुंकुम लीपे आँगन में,
खड़ी सिन्दूरी माँग बिखेरे॥
जलकर मैं प्रेम-ज्योति फैलाऊँ।
तेरे मन को सुहाना कर दूँ॥

तुम देखो, आँखें गगन की।
मैं निहारूँ, नयन तेरे ही॥
बाहें फैलाओ, फिर भी मैं दूर-दूर जाऊँ।
मेरे हाथों के बंधन में, तुम्हें आज फँसाऊँ॥

तेरे आँचल की हवा जो,
मेरे दिल में तूफान मचाये।
मेरी श्वाँसें उगलती आग जो,
एक घर्घर-नाद सुनाये॥
प्यारी-प्यारी आँखों से,
बरसती धारा अश्रु।
मेरे अन्तस की,
नदियाँ-सागर छलके क्यूँ॥

फिर भी तुम ना बहना,
उमड़ती लहरें रूक जाना।
मैं मर जाऊँ, तुम रहो।
साथ तुम्हारे, प्यार हो॥
अब हमने सोचा है सुन ले तू।
जान ले ये बातें मेरी जान तू।।

52.गीत-“नैनां तेरे पास हैं।”
              रतन लाल जाट
नैनां तेरे पास हैं।
आँसू की बरसात रे॥
कलियाँ खिली पंक में,
महकी-महकी सौरभ है॥

नींद को भी प्यार तुमसे,
जो सपने में भी साथ तेरे।
मेरा दिल करता पुकारें,
फिर भी दिल क्यों ना सुनता है?
आँखें बिखेरे जादू,
कैसे मैं समझूँ।
बातें तेरी भूला दूँ कैसे,
दूर जाऊँ क्यों तुमसे?

जब चाहूँ, तब पाऊँ।
फिर ना मिलती है क्यूँ?
दिल में है आग जली,
जब तुमको पास देखी।
मैं रोया, तू रोयी,
दुनिया की हँसी ना रूकी॥
मार देगी, तुमको अकेली।
दुनिया है छल-बल वाली॥
बहकी तू, बातों में खोयी है।
अब जाग जा, कब से सोयी है?

पपीहा बोले तुमको प्यारी,
कोयल भी कूकने लगी।
और लगी सावन की झड़ी,
नदियाँ भी रो-रो उमड़ने लगी॥
तुझे सजाने को खड़ी,
बुलाती सरजमीं है।
आसमां से हुई, बरसात घनी
कोमलता छायी, पावनता को छूती है॥

दिल से जुड़ा, प्यार ना छूटे।
जली ये अग्नि, कभी ना बुझे॥
खोया-खोया दिल, तुमको कुछ पूछे।
प्यार होगा आज या कल रे?
बनकर प्यारी, सुन्दर धरती के जैसे।
पिया आसमां को, छोड़ पायेगी कैसे?

53.गीत-“सूरज चम-चम चमके”
                रतन लाल जाट
सूरज चम-चम चमके।
दिल में हलचल हुई है॥
एक रोशनी-सी छायी है,
जब मिलन अपना हुआ है॥

दिल खोलके हमने,
उसे बसाया धीरे-से।
प्यार के मिलने से,
दिल में छाया नशा है॥

ऊपर देखूँ गगन,
नीचे है अवनि।
अपना बसेरा करके,
उड़ रहे हैं खग भी॥
पंछी कलरव करते हैं,
ऐसी धूनें गूँजती है॥

पेड़ों से फल गिरते हैं,
बागों में फूल खिलते हैं।
लायी खुशबू पवन है,
नदियाँ गीत गाती है॥

इधर दौड़ूँ उधर-से।
आगे फिर प्यार मिले॥
पीछे अपने कौन देखे?
जब सामने अपने पिया है॥

चिन्ता तेरी उसको है,
अपनी हर राहें वो सजाये।
आँखें उसकी खूलते ही,
नींद जब अपनी टूटे॥

जगकर हम याद करें,
सपना उसको आये।
मिलन दिल से दिल का है,
बातें प्यार की आँखें बतलाये॥
होंठ मुस्काये, क्षणभर गाल खिल जाये।
हँसी ऐसी आये, सारे संसार में गूँजें॥

हँसते हुए गाते,
नाचते-से खेलते।
जाता अस्ताचल में,
प्यारा भानू अपनों से।
कहता कुछ नहीं बातें,
मगर प्यारी लगती हमें॥
रोकने को उसे दौड़ें,
आगे जा वो छुप फेंके।
मेरी ओर ऐसा जादू रे॥

चाहत मुझको थी इतनी।
मिलने को मैंने, बाँहें फैलायी॥
जलती अग्नि में तम-तम करता।
दिल को छू गया वो तोहफा॥
लेकर उसको हुई खुशी,
थोड़े पल थे, अब वहीं जमीं।
होश आये, सपने टूटे।
यादें रही, वादे गये॥

54.गीत-“पलभर तेरे मिलन से ही”
                 रतन लाल जाट
पलभर तेरे मिलन से ही,
हम जी लेंगे उम्र सारी।
आँखों की देखकर ज्योति,
दुनिया में पा लेंगे खुशी॥

एकपल के मिलन से।
दिन दो गुजर जायेंगे।।
एकदिन मिलन से चैन होगा।
अगला दिन इन्तजार में कट जायेगा॥
एक रात सपना हम देखेंगे तभी।
अगली निशा विरह में जलायेगी।

होंठ हिलकर यदि
एक शब्द से डरायेंगे।
तो बदले में माला प्यार की,
अधर जपते रहेंगे॥
एकपल याद तुम्हें आयेगी।
भूल से ना चाहकर भी॥
फिर बरसों याद करेंगे,
तुझे भूलाने के बाद भी॥

तन से सटकर, दिल में बसकर,
उलफत से दूर, प्यार की गहराई।
उथले मन की तरंगों में,
निवास है आत्मा के बीच कहीं।

55.गीत-“अपने दिल से”
            रतन लाल जाट
अपने दिल से,
इस दिल को।
यूँ मत निकालो॥
तुमसे रहकर दूर,
यह दिल जायेगा टूट।
तेरा आसरा छोड़कर,
तड़पते हुए वो
मर जायेगा देखो॥

आपका इसके हाथों,
गुनाह क्या हो गया?
जो तुम इस दिल से,
तुम दिल अपना दूर रखे हो॥

दिल दूर रहकर भी,
छूट ना पायेंगे वो।
हरघड़ी अपनों की,
पुकार करते रहेंगे वो॥

ये दिल, उस दिन ऐसे मिले।
जैसे बरसों बाद आज ही मिले।।
जब इसको बुलाया,
अपने में छिपाया तो।
बन गया रिश्ता
अपने दिल का वो॥

56.गीत-“नफरत भरी, अदाएँ तेरी”
                रतन लाल जाट
नफरत भरी, अदाएँ तेरी।
इस प्यार को, बदल ना पायेगी॥

उदास-उदास, चेहरे का रंग।
करता है बेचैन, मुझको हरदम॥
चाहता है दिल, पिया हो सुखी।
फिर क्यों लगती है, वो दुखी॥

सुना दे, बातें इसे।
अपने दिल की, आज रे॥
दुख तुझे बुलाता हूँ।
आजा, ना सता,
मेरी पिया को तू॥
कर दे खुशी, भर दे सुख उसमें ही।
सुन मेरी अधूरी बातें, कहनी जो थी॥

मैं समझाता, पिया को खटकता।
ऐसा काँटा, जो कभी उपजा था॥
अब चुभता है, शूल-शूल-शूल।
जब तुझको देखूँ मैं, भूल-भूल-भूल॥
तू दिल को भेदती है,
जहाँ अपना प्यार छुपा है।
मत भेद, रूक जा रे शूल।
मैं उसका, जिसका है वो रूप॥
देखो, उधर मेरी पिया है खड़ी।

57.गीत-“वो तेरे प्यार में”
              रतन लाल जाट
वो तेरे प्यार में,
ज्वाला विरह की जलाये।
बस, तुझको ही देखे
तुझमें ही खो जाये॥

दिन में ना रूके,
रात भी ना चूके।
बस, तुझको ही चाहे॥
आसमां में पुकारे।
धरती पे तुझे खोजे॥
तेरे प्यार में, वो जलता रहे
ऐसी आग धधके, जान भी ले।
वो तेरे प्यार में……………

तू रहे बचके,
वो चाहे तुझे।
रहती खुशी से,
करती दुखी रे।
माँगता है प्यार,
ना मिलता प्यार।
बनकर भिक्षुक फैलाये झोली।
कितने द्वार फिरे, पर है खाली॥
कोई दूसरा ना भर सके,
वो भिक्षा तेरे आँचल में।
जो उस कंगाल को,
मालामाल कर दे।।
वो तेरे प्यार में……………

58.गीत-“जग की रीत बुरी है प्यारे”
                 रतन लाल जाट
देखी है हमने, जग की रीत बुरी है प्यारे-२
बिन चाहत प्रेम मिले, चाहत से विरह जले।
बिन ख्वाब कोई मिले, ख्वाबों में जो भी है॥
उसके प्रेम से, जिन्दगी सँवर जाये।
सींचकर नैनों से, फूल हमने खिलाये॥
अब आकर कोई उन फूलों को तोड़ जाये।
पत्थर-सा वो कोमलता को ना देख पाये॥

आँखें अपनी सजनी को निहारे।
वो कहीं और चल दे आगे॥
कहना कुछ दिल चाहे।
लेकिन कैसे उसको सुनाये?

दिल अपना जले,
आग किसी को सताये।
दिवानी किसी की,
दिल कोई लगाये॥

जिनकी समझ में,
कुछ आता नहीं है।
दिल होते हैं कितने?
इनको कौन बताये?
प्यार कितनी बार होता है?
आज मुझे कौन बताये?

59.गीत-“अब आ रहा है, अंत किसी का।”
                              रतन लाल जाट
अब आ रहा है,
अंत किसी का, दौड़ा-दौड़ा।
अब लग रहा है,
समय बचा है बस थोड़ा-थोड़ा॥
फिर सबकुछ कहाँ?
और क्या होगा?
शायद अपना निशां,
बच पायेगा यहाँ॥

जिन्दगी के लम्हों,
जरा सोच-समझकर
आगे गुजरो।
हँसती फिजाएँ,
लेकिन रूलाये।
ओ मेरी जिन्दगी,
तू क्यों बदल रही?
कुछ समझ में ना,
दिल को आ रहा।
अब अन्दाज अपना,
विफल हो रहा-हो रहा॥

अब लग रही है,
बातें भी मुश्किल।
इस कहानी का,
अंत है निकट॥
मत जला, अग्नि-विरहा,
दिल दूर पिया क्यों हो गया?
अब ना हम यहाँ हैं,
लेकिन छाया सता रही है।
ना डर किसी से,
जहां भी छूट रहा है॥
और हम हो रहे हैं, खुद से जुदा-जुदा।

60.गीत-“प्यार में आँसू हैं।”
             रतन लाल जाट
प्यार में आँसू हैं,
देखो, ये मोती दिल के।-२

दिल की खुशियाँ बढ़ जाती है,
हसीन लगती दुनिया सारी है।
जब हो जाता है,
प्यार किसी से-२॥
प्यार में आँसू हैं……………
उस प्यार में हँसी है,
दर्द के संग प्यास है।
और भी है, नयी-नयी उमंगें-२॥
प्यार में आँसू हैं……………
प्यार तो कभी दूर जाये नहीं।
चाहे हम जिन्दगीभर मिले नहीं॥
एकदिन प्यार मिलाये,
मौत को भी रखे वो रोके-२।
प्यार में आँसू हैं……………
प्यार एक मासूम बच्चे-सा है।
प्यार बहुत ही भोला-भाला है॥
प्यार हसीन है, प्यार जन्नत है-२।
प्यार में आँसू हैं……………

61.गीत-“बिन प्यार के अटकी है जान”
                     रतन लाल जाट
बिन प्यार के, अटकी है जान।
सब मिल गये, पर नहीं है यार॥
दुनिया की दौलत,
प्यार से है कम।
इस प्यार के पीछे,
चलते हैं सब॥
प्यार ही जिन्दगी है,
इसी से खुशी और सब मान।
बिन प्यार के अटकी है जान………

प्यार है अमर नाम,
कभी ना माने वो हार।
जन्मों तक मेरे यार,
ये प्यार करे तेरा इंतजार।
बिन प्यार के अटकी है जान…………

62.गीत-“तुम्हारे ही ख्यालों में”
                 रतन लाल जाट
तुम्हारे ही ख्यालों में,
हम हैं खोये-खोये-२
आँखें बन्द करके,
जब हम लगे सोने।
तो तुम्हारी ही तस्वीरे,
हमको नजर आये-आये॥

ऐसा लगता है जैसे तुम,
इस रात हो बस मेरे संग।
और मैं तुमसे सारी बातें,
कहता हूँ दिल खोलके।
इस वक्त ऐसा लगा रहा है,
जैसे तू दूर नहीं, पास है मेरे-मेरे॥

दिल में हो तुम,
दुनिया भी तुम।
बस,मैं हूँ तुम्हारा,
कह दो तुम अपना।।
चाहे यहाँ हो तुम, चाहे वहाँ।
सब जगह पर है, साथ अपना॥
जागे-जागे या सोये हुए,
हम हैं संग अपने-अपने॥

63.गीत-“चाहे सूली पे चढ़ा दो।”
                रतन लाल जाट
चाहे सूली पे चढ़ा दो,
या गोली लगा दो।
दुनिया छुड़ा दो,
मुझको भी मिटा दो॥
लेकिन ये दिल,
कभी बदल नहीं सकता।
अपना है अन्दाज,
वो भूल नहीं सकता॥
दिल कोई ऐसी चीज नहीं,
कि- जब चाहो, उसे मिटा दो।
लगता है यह एक खेल सबको,
लेकिन देखो, दिल का राज समझो॥

एक नजर में दिल,
अपने को पूछे बिन।
किसी और के नाम।
कर चुका है जानो-तन॥
मुड़के भी पीछे ना देखे।
एकपल भी आगे ना सोचे॥
खुद जान लुटा दे,
सबसे रण ठान ले।
लेकिन अपने प्यार को,
भूल नहीं पाता है वो॥
एकबार किया है जो,
वादा हर हाल में निभाये वो।

64.गीत-“दिवानी बोले”
         रतन लाल जाट
दिवानी बोले, मैं जाऊँ रे सिटी-सिटी।
आ गयी बात सुनके, मुझको भी पिटी-पिटी॥
सिटी में जाकर देखा,
हरतरफ है दिवानगी।
मन खोया-खोया,
फिर भी झूमती है खुशी॥

कहीं मोटर-गाड़ी की कतारें।
तो कहीं चौखट पर दुकानें॥
कोई आया है घुमने,
कोई आया मजबूरी में॥
कोई पैसा लुटाता,
कोई पैसा कमाता।
फिर भी सब समझे,
खुद को होशियार बड़ा।
रंग-बिरंगे नजारे,
करते हैं बेचैन मुझे।
बाहर-से बातें मीठी,
चेहरा जान-बुझ हँसे॥
मगर दिल में तो,
एक चाल नयी।
लोगों को फँसाने का,
है एक जाल यही॥

ऊपर तो मस्ती है,
अन्दर एक तड़प-सी।
मगर दिवाने कहें किसको?
सच्चा दिल तो है नहीं॥
कपड़े-लते, जूते-चप्पल ले लो।
खुशबू वाले फूल, ताजे फल देखो॥
ऐसा कह-कहकर सब लुभाते हैं।
जैसे-तैसे अपना काम बनाते हैं॥
ऊँची-ऊँची इमारतें,
कहीं हैं झुग्गी-झोपड़ी।
बड़े-बड़े अमीर है,
तो कहीं बेदर्द गरीबी॥

सब अपने में मगन है,
अपनों का ख्याल नहीं।
रिश्ते हैं नाम के,
इनका कोई सार नहीं॥
यह देखकर बोली दिवानी,
चलो यहाँ से, मुझको रूकना नहीं।
मैंने कहा धीरे-से
हाँ, चलना है साँस घुटने लगी॥

65.गीत-“जब अपना कोई पराया बन जाये।”
                           रतन लाल जाट
जब अपना कोई पराया बन जाये।
प्रेम के बदले वो दुश्मनी से पेश आये॥
तब अपने दिल पर क्या गुजरे?
एक दुनिया कुछ पल में मिट जाये॥

अपनों का विश्वास खोना।
प्रेम के बदले नफरत झेलना॥
ऐसे हाल में हो कोई बेगाना।
तब उसको कैसा शूल चूभे..........

अपने सपनों पे, बरस जाये पानी।
सवेरे ही दिन, रात बन जाये घनी॥
जब लगे हमको, वो कसमें झूठी।
तब अपने इरादे भी मिट्टी हो जाये………….

ऐसे में दिल का विश्वास,
अपना यह प्यारा संसार।
रब से अपनी मन्नत पर,
वो अपनी किस्मत को कोसे…………

66.गीत-“दुनिया में बिन माँगे”
               रतन लाल जाट
दुनिया में बिन माँगे,
कुछ मिलता है नहीं।
किसी को देखें,
मगर वो देखता है नहीं॥
चाहत हम रखते हैं,
चाहने वाला कोई नहीं।
दुनिया में बिन माँगे,
कुछ मिलता है नहीं।

प्यार माँगे बस प्यार,
दिल के बदले दिल।
यार तो अपने यार,
पराये हैं सब अनजान॥
देखो, इस दुनिया की,
अजब ये कहानी।
मौत माँगो तो मिले नहीं,
प्यार करो तो प्यार नहीं॥
दुनिया में बिन माँगे,
कुछ मिलता है नहीं।

अपने भी हैं, पराये भी हैं।
अच्छे-से हैं, बुरे भी हैं॥
दिलवाले हैं, दगाबाज भी हैं।
ऐसी कोई जगह नहीं,
जो यहाँ हैं वहाँ नहीं॥
दुनिया में बिन माँगे,
कुछ मिलता है नहीं।

हमनें प्यार में जीना चाहा।
प्यार कहाँ था? नफरत का साथ मिला॥
अपनों ने पराया तो समझा ही।
संग उन्होंने दिखावा किया दोस्ती॥
दुनिया में बिन माँगे,
कुछ मिलता है नहीं।

67.गीत-“सर कहते हैं बच्चों से”
                रतन लाल जाट
सर कहते हैं बच्चों से,
दुनिया में बड़ा नाम करना।
तुमसे सीखे हर कोई,
ऐसा प्यारा काम करना॥

यहाँ अपना ऐसा नाम,
लिखकर तुम जाना।
रचना वो नया इतिहास,
याद करे उसे जमाना॥
सर कहते हैं बच्चों से,
दुनिया में बड़ा नाम करना।

बच्चे मेरे टेलेन्ट है,
उनके जैसा ना ब्रिलियेन्ट है।
वैरी नाइस वो वैरी हैप्पी,
ऐसा नहीं जो करे बराबरी।
बच्चों का मन है सच्चा,
सभी दिलवालों ने कहा।
सर कहते हैं बच्चों से,
दुनिया में बड़ा नाम करना।

मानाकि दुनिया एक गुलशन है,
बच्चे इस गुलशन के सुमन हैं।
इनकी खुशबू में एक जादू है,
आता है रब को भी मजा।
सर कहते हैं बच्चों से,
दुनिया में बड़ा नाम करना।

68.गीत-“नाचो, गाओ”
          रतन लाल जाट
नाचो, गाओ, मौज मनाओ।
हँसते हुए, सबको गले लगाओ॥

जिन्दगी थोड़ी है,
प्रीत तुम कर लो।
ना झगड़ा, ना बैर-भाव,
आपस में कभी रखो॥
सबको अपना संगी बनाओ।
दिल से दिल तुम मिलके,
भगवान से दुआ माँगो॥………………

एकदिन ये खेल रूकना है,
अंत हमारा पक्का है।
कठिन डगर पार करके,
वहाँ हमें जाना है॥
साथ हमारे ना कुछ आना है।
बस, ये प्यार ही बाकी रहना है॥
जीवन अनमोल है,
इसको पहचान लो।
हरपल अपने मन में,
रब का तुम नाम लो॥……………

आज हमारे हाथों से,
करना है कुछ काम वो।
जो दुनिया याद करे,
कई हजारों सदियों॥………………

69.गीत-“तू ऐसा मस्त-मस्त दिवाना बन”
                       रतन लाल जाट
तू ऐसा मस्त-मस्त, दिवाना बन।
फिदा हो तुमपे, आशिकी जानेमन॥

वो खुद आये मिलने को,
और कहे प्यार करने को।
जो कभी ना हुआ हो,
अब करके दिखाना है वो॥
तू ऐसा मस्त-मस्त, दिवाना बन।

वो मिला उसी को है,
जिसे दिल से बुलाया है।
धड़कन में बस जाये तो,
दिल की जान बन आये वो॥
ऐसा मस्त-मस्त, दिवाना तू बन।

आँखें दूर ना जाये,
चैन उस बिन ना आये।
विरह उसके मिलन से,
आग दिल में जलाये॥
जब दिवाना देखे,
तो पागल बन जाये।
ख्वाबों में उसको,
चाह अपनी बना लो॥
तू ऐसा मस्त-मस्त, दिवाना बन।

70.गीत-“कभी सपने में भी”
              रतन लाल जाट
कभी सपने में भी,
सोचा था ना ऐसा कभी।
ऐसे हालात में जिन्दगी,
कभी अपनी गुजरेगी॥

एकदिन अपना प्यार ही,
दुनिया अपनी उजाड़ देगा।
इन हसीन नजारों को,
वो काँटों में बदल देगा।
और सुखद दिन को,
दुखी रातों में ढ़ाल देगा॥
ना सोचा कि-
इतना दुनिया बदल जायेगी

चेहरे पे हँसी और
निशान हैं आँसुओं के।
नजर अब हमको
आने लग गए हैं॥
देखो, अपनी तरफ,
बातें वो बीत गयी।
दिल अपना रूलाकर,
मुसाफिर बना गयी॥

71.गीत-“बस, चाहत यही रखे हैं।”
                  रतन लाल जाट
बस, चाहत यही रखे हैं।
हम आपसे, हम आपसे॥
आ जा, हम करें इन्तजार तेरा।
खड़े-खड़े निहारें रास्ता॥

यदि मिल जाये हमें तू।
बदल जाये दुनिया पल में यूँ॥
हरकहीं गुलशन खिल जाये।
प्यार में खुशियाँ छा जाये॥
तब आँखों में आकर बसना है।
अपने गुजरे वो सपने सजाने॥
बस, चाहत यही रखे है………….

72.गीत-“हर बुराई”
       रतन लाल जाट
हर बुराई, जगाती है नफरतें।
जग में ना, वो किसी को पसन्द है॥

मत छूना, आती है वो छूने के लिए।
छोड़ पल्ला, मत फंसना उस बंधन में॥
हर गन्दगी से, दिल अपना घबराये।
और देखो, कितना तन को सताये॥
हर बुराई……………………॥

कई रंगों में, सनी है, लिपी है।
वो बुराई है सब बदबू मारे॥
मानव को बेकाबू कर दे।
दानवता ही सबमें भर दे॥
वासना जहर है,
गुस्सा नाश है।
झूठ चोरी है,
सब लगते रोग बुरे॥
हर बुराई……………………॥

ना लोभ जगाओ,
ना किसी से मोह बनाओ।
घृणा-ईर्ष्या,
सब पनपाते बुराईयाँ।
इन सबके कारण है,
जग दुख की नैया॥
कगार उसको दिखाये,
प्यार जिसका सच्चा है।
सागर से, उस पार,ले वो जाये॥
हर बुराई…………॥

73.गीत-“आधे-अधूरे ख्वाब दिल में”
                    रतन लाल जाट
आधे-अधूरे ख्वाब दिल में।
फिर कैसे मिले, मंजिल तुझे?

ना चाहत उसकी, एकपल भी।
डगर है काँटों से भरी हुई॥
कैसे पार हो?
यह ना खबर है॥
किस्मत मानकर जिसको हम चलते हैं।
सचमुच किस्मत ही वो बन जाती है॥
आधे-अधूरे ख्वाब दिल में।
फिर कैसे मिले, मंजिल तुझे?

जब उठकर चलने लगें,
तब याद आये मंजिल हमें।
कुछ पल पहले, कहीं और थे।
अब हम इसको, चाहने लगे॥
मंजिल तुमको, पास अपने।
कैसे बुलायेगी, सबसे आगे॥
आधे-अधूरे ख्वाब दिल में।
फिर कैसे मिले, मंजिल तुझे?

आँखों में वो नहीं,
धड़कन भी ना कहती।
बातें उसको सच्ची,
जो अपने में हैं छुपी॥
तब कोरे वादों की,
लग जाती झड़ी है।
आधे-अधूरे ख्वाब दिल में।
फिर कैसे मिले, मंजिल तुझे?

74.गीत-“तू कहीं, मैं कहीं”
            रतन लाल जाट
तू कहीं, मैं कहीं।
बढ़ने लगी, है दूरी॥
दिल से जूड़ी,
मुलाकातें छुटी॥

जैसे फूलों की सौरभ,
सूरज की निकली किरण।
दूर जाने लगी,
हमसे टूट रही।
नींव हैं जो इमारत की॥…………

आसमां से धरती,
दूर जाने लगी।
जैसे मंदिर में मूरत,
सितारों की चमक॥
बादल बिन पानी,
नाव बिन नदी।
बिन मौत जिन्दगी,
वो अमर भी है नहीं॥………

दीपक से ज्योति,
अलग ही रहती।
बिन नाम ये कहानी,
धरती के संग जिसकी।
सोच लो, सोच लो।
फूलों में रहती। कौन है वो?
देखो, कहाँ से?बरखा आयी।
इधर-उधर है नहीं, आसमां से कहीं॥
तू कहीं, मैं कहीं…………

75.गीत-“जब प्यार हो जाता है।”
                रतन लाल जाट
जब प्यार हो जाता है,
तब ऐसा लगने लगता है।
जैसे वो अपनी जिन्दगी है,
या संग जन्मों का नाता है॥
जब प्यार हो जाता है……………

जबकि सबको यह पता है,
हम तो कल ही मिले थे।
उसके पहले तो अनजाने थे,
ना हम एक-दुजे को जानते थे।।
जब प्यार हो जाता है……………

बस, हम दिल को,
यह विश्वास दिलाते।
कि- हम एक-दूजे को,
बरसों से जानते हैं॥
जब प्यार हो जाता है……………

इस प्यार के बाद,एकपल भी,
चैन हमको आता है नहीं।
दिल में सताती है उसकी यादें,
और बन जाती हैं सपनों-सी रातें॥
जब प्यार हो जाता है……………

76.गीत-“तू एक मुन्नी है”
           रतन लाल जाट
तू एक मुन्नी है, गुड़िया है।
नन्ही-सी, एक कली है॥

फूलों-सी कोमल, तुझमें सुगन्ध।
तेरे आसपास, महकते हैं सब॥
ऐसी ही रहना, कभी ना बदलना।
रंग अपना, रूप अपना ना बदलना॥
तुझे चाल-चलन, सब यही रखना है
तू एक मुन्नी है……………………

कोई यह ना कहे
कि- मुन्नी बदल गई।
वो नटखट-शातिर बन गई॥
यह हम ना कभी सुनना चाहेंगे।
तुझे अपने सपनों-सी बनायेंगे॥
एक नई राह देखना,
तू उस पर चलना।
आगे निकल नाम करना,
कि- सब याद करे।
यही सपना शेष,
  मेरे जीवन का है॥
तू एक मुन्नी है……………………

जब तुम मेरा सपना साकार करोगी,
तब खुशी खूब झूम उठूँगा मैं।
ऐसा जो तुम काम करोगी,
वो सबको याद दिलाऊँगा मैं॥
तू एक मुन्नी है……………………

77.गीत-“हाल हम दोनों का”
             रतन लाल जाट
हाल हम दोनों का, एक जैसा है-२
मिलने को दिल की धड़कन।
मचा रही है एक हलचल।।
मेरे दिल में, तेरे दिल में।
हम दोनों के दिलों में, तड़प है॥

अब याद आ रही है,
इस वक्त हम मिलते थे।
लेकिन अब दिल को पता है,
मिलना नामुमकिन अपना है॥

मेरी आँखों में, चेहरा छाया है तुम्हारा।
देखूँ मैं हरकहीं, कोई नजर ना आया।।
यह सबको अजब लगता है।
हाल मेरा कैसा, कोई ना समझता है॥

शायद तुमको यह दर्द जला रहा।
कि- मैं तुझको भूल एकपल याद ना कर रहा॥
लेकिन सच तो यह है कि
दर्द यही मुझको भी जला रहा है।
हाल हम दोनों का, एक जैसा है।

78.गीत-“दिल को मालूम”
            रतन लाल जाट
दिल को मालूम, तेरी धड़कन।
तुम कहाँ, है मुझको पता।
जब याद करो, तो याद आये।
हँसो, खेलो या नाचो,
वो सब मुझको मालूम है॥

तुम जितना चाहे,
दिल उतना ही चाहे।
हम-तुमको खबर है,
बाकी तो अनजाने॥
अब हम दोनों दूर हैं।
मगर दिल अपने, करीब हैं॥

अब कहूँ मैं, तेरे दिल की बातें।
सुनो तुम मुझे, जानो वो सच्ची है॥
यकीन मुझको, है तेरे दिल पे।
कि- यह दिल कितना प्यारा है॥
मेरी धड़कन को यह मालूम है,
तुमको भी क्या यह खबर है?

79.गीत-“जब तुम मेरे सामने हो”
                रतन लाल जाट
जब तुम मेरे सामने हो,
तब मैं सारे गम भूल जाऊँ।
बस, इतना ही नहीं सुनो,
सुध-बुध मैं अपनी भूल जाऊँ॥

एक ऐसी दुनिया में,
फिर चला जाता हूँ।
जिसे सब कहते हैं स्वर्ग,
लेकिन मैं उसको क्या कहूँ?

स्वर्ग में सब खुश रहते हैं,
एक-दूजे से कोई मतलब नहीं।
लेकिन यहाँ तो ऐसा स्वर्ग है,
हम मिलके भी दूर होते नहीं॥
चाहे तन मिले या हम बिछुड़ जायें।
मगर दिल तो अपने मिले हैं॥
जन्मों से, सदियों से,
वो कभी ना भूल पाऊँ।

जब भी हम मिलते हैं,
तब ऐसा लगता है।
जैसे कहीं हम मिले थे,
आज वापस मिलन हुआ है॥
तो फिर मैं क्यों
शिकायत कोई करूँ?
जब तुम मेरे सामने हो………॥

80.गीत-“जब बातें हुई तुमसे”
            रतन लाल जाट
जब बातें हुई तुमसे,
तब चैन आया दिल को।
इतनी खुशी हुई कि-
जैसे तू मिल गई मुझको॥

जिस वक्त मैं बातें करने लगा।
तो कुछ मालूम ना चला॥
और दिन ढ़ल गया क्यों?
अब तक जी ना भरा वो॥

अगर तुमसे मिलूँ, तो दिन ढ़ल जाये।
मगर मुझको तो मिलना, कम ही नसीब है॥
यह सब अजीब है, इस प्यार में देखो।
यकीन ना आये, मगर यही है सच तो॥

ऐसा लगा, जैसे दिल को ठण्डक मिल गई।
पहले जल रहा था, अब तो कली खिल गई॥
खुशबू अपने प्यार की,
चारो तरफ फैल गई।
इतनी दूरी है,
मगर दिल में है बरसाने को॥

81.गीत-“आज कुछ पल का मिलन हुआ”
            रतन लाल जाट
आज कुछ पल का मिलन हुआ।
तो यह दिल कई दिन तड़पेगा॥
कभी वो भूल नहीं पायेगा।
इस मिलन कई बार रोयेगा॥

मिलन से पहले,
सबकुछ ठीक था।
दूर रहकर भी जैसे-तैसे दिन,
काट रहे थे यहाँ॥
लेकिन आज इस मिलन से।
दिल में एक आग लगी है॥
इस धधकती ज्वाला में,
हम दोनों तड़पेंगे।
जब तक अपना, मिलन ना होगा।
फिर भी जी करेगा, अपना मिलन हो ना॥
क्योंकि मिलने के बाद यहाँ।
फिर बिछुड़के हमको तड़पना पड़ेगा॥

अकसर यह सब ठीक है,
मगर कब दिल ने कहा है?
हमको कभी नहीं मिलना।
दूर से ही हो जाये गुजारा॥
ना यह तुमको संभव, ना ही मुझे है।
हम तड़पेंगे, फिर भी मिलते रहेंगे॥
रब करे कि- हम कभी हो ना जूदा।
मिलते-बिछुड़ते हुए सदियों मिलना॥

82.गीत-“बच्चों! तुम्हारी याद में”
                 रतन लाल जाट
बच्चों! तुम्हारी याद में,
रोना होगा मुझको।
जीना होगा मुझको।।
बच्चों! तुम्हारी याद में,
जिन्दगी का गुजारा है।
दिल में तुम्हें बसाया है।।


महीना है छुट्टियों का,
दिल में दर्द बड़ा।
कैसे दूर रहूँगा,
तुम बिन मैं अकेला॥
बताओ, दिन अपना
कैसे गुजरेगा?

मेरे प्यारे बच्चों!
आओ, दिल में बसा लूँ।
बस, छुपाके मैं तुमको,
आँखें अपनी बन्द कर लूँ।
तुम्हारे सिवा ना अब मैं,
किसी को देखूँ॥
जान से तुम प्यारे हो।
बात यह सच्ची मान लो॥

ऐसा कोई पल नहीं,
जब तुम्हारा खयाल नहीं।
बस, तुम मेरे सपने हो
और तमन्ना जीवन की।
तुम्हारे ही कंधों पर हो,
मेरी सारी जिम्मेदारी॥
और कर सकता हूँ क्या बोलो?

83.गीत-“ए दिल तुझको कोई माने ना”
                      रतन लाल जाट
ए दिल तुझको,
कोई माने ना, समझे ना।
अपने जैसा तू सबको क्यों मानता?

तेरी अलग पहचान है,
तू बड़ा ही गंभीर है।
सबकुछ सह सकता है,
धोखा पसंद ना करता है॥
तेरी बातें ना समझ आती है।
सब अलग-अलग सोचते हैं॥
मगर कुछ भी वो,
कभी जान पाते हैं ना

रोना है अकेले,
दुख सताये सबके।
करना तू कोशिश,
जीत तुम्हारी है।
और दिलों की दुआ,
मिल ही जाती है॥
और अपके सपने,
तुम्हारे हाथों में।
जब तू उनको
कभी पहचाने।।
सब तेरा साथ निभायेंगे।
यह सपना सँजोये रखेंगे।।
ना डरना, तू हिम्मत रखना॥

84.गीत-“न जाने कहाँ हमनें"
                रतन लाल जाट
न जाने कहाँ हमनें?
दिल खो दिया।
जब दिल को खोया,
तब फिर मालूम हुआ
कि- सचमुच हमने दिल खो दिया।।

हाँ, जहाँ भी मिला था,
इस दिल को ठिकाना-
वहीं यह खो गया॥
और इस दिल ने,
लगाया डेरा अपना।
अपने को खोके,
वो कहीं बस गया।
न जाने कहाँ हमने,
दिल खो दिया॥

सबको अपने जैसा जाना,
किसी से भेद ना किया।
बस, दिल की पुकारें सुन,
यह उन पे मर गया॥
अपने को बदले में,
क्या मिला?
ऐसा तो कभी सपने में भी,
ना सोचा था॥


इस दिल ने बहुत सहा।
लेकिन किसी को ना कुछ कहा॥
जब रहा ना गया,
एकपल भी, तो रोने लगा।
मगर पास खड़े दिलों को,
यह मालूम तक ना चला॥

सबकुछ सच्चा था इसको प्यारा।
किसी का कभी वादा ना तोड़ा॥
कभी मजाक में दिल ना दुखाया।
इस दिल ने, ऐसा और गुनाह क्या किया?
न जाने क्यों हमनें? दिल खो दिया।॥

85.गीत-“कहाँ होगी तू?”
            रतन लाल जाट
कहाँ होगी तू? क्या करती होगी?
मेरे दिल में, हरपल है यही बेचैनी॥

मगर क्या करूँ? मैं तुमसे दूर हूँ।
अब कैसे आऊँ? मेरे पास नहीं तू॥
ओ प्रिय! बताओ इतना।
तुम कैसी हो? सच कहना॥
क्या तुम्हें भी, याद सता रही?
या बस, प्यार तड़पा रहा मुझे ही॥

मैं जैसे भी हूँ,
पर तुम अच्छी रहना।
जलता हूँ मैं दिन-रात,
मगर तू यादें सँजोना॥
अपना खयाल रखना,
मुझे अपना समझना।
ऐसा ना करना कहीं,
कि- तेरे दिल में,
मेरी जगह कम हो ना कभी॥

ओ मेरे रब्बा! पुकार मेरी सुन लो ना।
उसको ना सताना, वो प्यार है अपना।
बस, मुझको सताना॥
इतना तुम बताना कि
वो बस है तो अच्छी॥

दिल को पूछता हूँ,
मगर कुछ ना बताता।
लगता है कि- दोनों दिल हैं एक ही,
तो फिर हाल उसका भी होगा यही॥

86.गीत-“रोज सुबह उठकर"
                रतन लाल जाट
रोज सुबह उठकर, करूँगा मैं दुआ।
रब से बस तुम्हारी,
कि- वो तुमको दे सफलता॥
नाम करो तुम अपना।
पहचाने सारी दुनिया॥
देखके सबकुछ रहेगा।
ना ठिकाना, मेरी खुशी का॥

क्योंकि तुम मुझको,
इतने प्यारे हो।
देखो, तुम ही मेरी एक दुनिया हो॥
और इस दुनिया को छोड़के,
तुमसे दूर रहूँ मैं कैसे?
ऐसा ना देखूँ, कभी सपने भी।
बस, यही है आरजू मेरी॥
अपने लिए नहीं, मैं कुछ माँगूंगा।
रब से लम्बी उम्र तेरी सदा॥

87.गीत-“जब मिलने को आये थे।”
                  रतन लाल जाट
जब मिलने को आये थे,
तुम पास मेरे।
तब से बस गये,
दिल में एक ख्वाब बनके॥

लेकिन आज ऐसा दिन आया है।
जिसे सोच दिन-रात तड़पता हूँ मैं॥
इस जुदाई के अवसर पर,
दिल में मचल रही है हलचल।
आज अपने मिलन का वो दिन,
आँखों में आ रहा है नजर॥
जो भी अपनी यादें हैं,
आज वो ताजा हो गयी हैं।
जब मिलने को आये थे,
तुम पास मेरे।।

कैसा हाल मेरा है?
कुछ कहा नहीं जाता।
तुम बताओ, हाल अपना,
सबकुछ मैं जान लूँगा॥
दिल को भीतर तक,
रोना ही आ रहा है।
इस सूखे नैनों से,
झरना बहता ही जा रहा है॥
जब मिलने को आये थे,
तुम पास मेरे।।

रूकने का नाम नहीं,
मरने पर भी चैन नहीं।
अब कहो, इस मिलन ने
दिल को कर दिया टुकड़े-टुकड़े।
लेकिन सच तो दिल से पूछो,
आज कितना आग में जल रहा है॥
जब मिलने को आये थे,
तुम पास मेरे।।

88.गीत-“मिलना-बिछुड़ना किस्मत का खेल है।”
                        रतन लाल जाट
मिलना-बिछुड़ना, किस्मत का खेल है।
जब तक हम साथ, सबकुछ ठीक है॥
मगर जब भी तुम ना मिलते।
तो रोग बुरा लग जाता है॥

इस रोग का कोई इलाज नहीं,
यह कोई साधारण रोग है नहीं॥
अगर तुम मिल जाओ,
तो हम ठीक हो जायेंगे।
वरना ऐसा बुरे हाल है,
कि- कहना मुश्किल है॥
और कैसे लिखूँ मैं?
शब्द नहीं पास में॥

तुम खुद सोचना,
अपने दिल को पूछना।
क्या गुजरती है?
जब हम मिलके,
वापस मिल नहीं पाते हैं।
जुदाई में अकेले ही रहते हैं॥
एक तरफ यादें, हमको जगाती।
और पिछले सपने दिखाती॥
तो दूसरी तरफ, इस जुदाई में।
एक-एक दिन करके,
बड़ी मुश्किल से कटते हैं॥

यह सोचके अफसोस है,
मिलन के दिन, पल में बीत जाते हैं।
कैसे दिन बीता, रात गुजरी,
यह भी मालूम ना चलता है॥
मगर अब ऐसा लगता है।
दिन यह है एक नहीं,
महीना पूरा लगता है।।
रात भी तो घनी अंधेरी
और लम्बी लगने लगी है।
चाँद है मगर चाँदनी ना देखी।
सितारों ने भी टिमटिमाना,
बन्द कर दिया है।
अब बताओ तुम ही,
दिन कैसे गुजारूँ मैं?
सच कहता हूँ बात ये
अब मरना भी मुश्किल है।

सोच लो, हाल मेरा
है तुमसे भी बुरा।
दिल मिलने की सोचे तो,
बस, इतना कह देना।।
मिलन हुआ जो हमारा,
वही नसीब की बात है।
मिलना-बिछुड़ना, किस्मत का खेल है।
जब तक हम साथ, सबकुछ ठीक है॥

89.गीत-“हरपल याद सताती है।”
                  रतन लाल जाट
हरपल याद सताती है।
खुद को भूल जाती है॥
बस, सपने सँजोते हैं,
पर मिलते नहीं हैं॥

बस, जागे-जागे, सोये-सोये।
दिन-रात तुम्हें ही सोचते हैं॥
आँखों की बन्द दुनिया में,
पागल-से खोये रहते हैं॥
मानो तू कहीं आसपास ही है।
हर बार दिल कहता यही है॥
अकेले में हो या साथ सबके।
फिर भी दिल नहीं लगता है॥

डर कोई अब है ना,
बस, एक तू ही है।
गम नहीं अब चाहे,
सबकुछ छोड़ देंगे।।
एक ही दिल और
जान भी एक है।
तो फिर कैसे?
हम एक-दूजे से दूर हैं॥

धरती पे तू नाचती दिखे।
आसमान में तू परी-सी लगे॥
मगर अपने सिवा कोई ना जाने।
क्योंकि हम दोनों ही हैं दिवाने॥
इसीलिए तो कहते हैं।
तुम बिन मर जायेंगे॥

90.गीत-“यादों का नहीं, कोई मौसम है।”
                     रतन लाल जाट
यादों का नहीं, कोई मौसम है।
और ना ही यादें, कभी रूकती है॥
दिन हो या रात, हम जागे हो या सोयें।
लेकिन यादें सदा ही, जागी रहती हैं॥
फिर क्या है साल? क्या सदी है?
युगों-युगों की यादें, आज भी जिन्दी हैं॥
यादों का नहीं, कोई मौसम है।
और ना ही यादें, कभी मिटती है॥

देखो, किसी की याद में रोते हैं।
तो कितने दर्द को कैसे सहते हैं॥
यादें एक तस्वीर पुरानी है।
जो रोज नजर आती है॥
यादों का नहीं, कोई मौसम है।
और ना ही यादें, कभी मिटती है॥

कोई मर जाता है।
लेकिन यादें अमर कर देती है॥
अगर किसी को,
याद ना आये तो।
जिन्दा होकर समझो,
मर गया है वो॥
इसलिए यादें आती है।
कुछ दिल को सुकून देती है।।
यादों का नहीं, कोई मौसम है।
और ना ही यादें, कभी मिटती है॥


91.गीत-“अभी तो आया है”
                रतन लाल जाट
अभी तो आया है, नया-नया खुमार।
क्योंकि हुआ है, पहला-पहला प्यार॥
दिन चार गुजरे हैं,
अभी तो सब बाकी हैं॥
आँखों में जूनून-सा,
दिल में बेकरारी है।
पागलपन इतना,
तो सोचे, फिर कैसे?
अभी मालूम नहीं कि दिन है या रात
अभी तो आया है, नया-नया खुमार

प्यार में मिला लो, आँखें अपनी।
फिर बता दो, दिल की बातें सारी॥
एक-दूजे को पहचान लो।
प्यार को जिन्दगी बना लो॥
लोग भी सहम गये, देखके तुमको।
प्यार में क्या होता है, जान गए वो॥
इतने मत हो मदहोशी में पागल
अभी तो आया है, नया-नया खुमार

मिलना होगा, तो जुदाई भी झेलना।
मगर जुदाई में, तुम कभी ना रोना॥
हँसते रहना, तुम प्यार में जीना।
थोड़ी आग है और जलजला भी होगा॥
जब तूफान आयेंगे, तो बादल भी साथ होंगे।
बादल आयेंगे, तो पानी बरसेगा मिटेगी प्यास
अभी तो आया है, नया-नया खुमार

जब प्यार होये, तो दिल भी जाने।
कैसे पल महकते, वो स्वर्ग-से लगते॥
और क्यों हमको? यह पल रूलाते॥
सब कुछ होता है, प्यार में।
देना है, लेना है, इस प्यार में॥
प्यार के बदले में दिल ओ जान
अभी तो आया है, नया-नया खुमार

प्यार करनेवाले, पागल-प्रेमी ना सोचते हैं।
ऐसी बातें वो कभी सपने में ना देखते हैं॥
लेकिन जब हकीकत ऐसा हो जाये।
तब उनको सब ये मालूम चल जाये॥
क्या ईश्क होता है?
छोड़ो ये बातें।
यही सब कहते हैं,
मगर वो भूल जाते कि-
प्यार जीवन में है सबसे बड़ा उपहार
अभी तो आया है, नया-नया खुमार

92.गीत-“सब प्यार-प्यार करते हैं।”
                  रतन लाल जाट
सब प्यार-प्यार करते हैं।
प्यार का मतलब ना जानते हैं॥
जिसने प्यार का मतलब जान लिया।
वो बन गया है सच एक दिवाना॥
प्यार में जीना मुश्किल होता।
जब प्यार ही जिन्दगी बन जाता॥

सब प्यार के दिवाने,
भूल जाते हैं।
देखा होगा वो
बदल जाते हैं॥
उस प्यार के वास्ते,
सब कुर्बान कर देते हैं।

इसका स्वाद, कोई समझे ना।
चखने पर ही, मालूम होता॥
क्योंकि जिसने चख लिया,
वो इसे भूल कभी ना पाता।
और जन्मों-जन्मों का,
रहता है अपना नाता॥
प्यार करने वाले,
कैसे दो धार पर चलते हैं।

93.गीत-“याद आये हैं मुझको”
                 रतन लाल जाट
याद आये हैं मुझको,
बचपन के वो दिन।
आज जब मैंने देखे,
नन्हें-कच्चे आम।
जो थोड़े खट्टे हैं,
मगर बड़े ही अच्छे हैं।
अजब हैं उनका स्वाद,
आज भी है मुझको याद।

इस बसंत के मौसम में
और भी मैंने देखे हैं।
लाल-लाल फूल पलाश के,
जो होली की याद दिलाते हैं॥
जब मैं छोटा था,
हम सबका एक टोला था।
उस टोली के बच्चे हम,
फूलों से बनाते थे रंग।

फिर उस रंग से भरते,
हम पिचकारी में मिलके।
और रंग उड़ेलते लोगों पे।।
एक-एक रूपया लेकर
बड़े खुश होते थे हम।

देखो, आज वापस वो याद आयी है।
उन दिनों की, जो बीत गयी बचपन में॥
आँखों से झलक रही, तस्वीर वो पुरानी है।
मगर यहाँ तो मैं, अकेला ही देख रहा हूँ।
बाकी सब कहाँ है? वो बदल गये हैं क्यूँ?
और एक-दूजे से, हो गये हैं अलग।
ना जाने वो, हम मिल पायेंगे कब?

94.गीत-“हर इंसान की चाहत का"
                     रतन लाल जाट
हर इंसान की चाहत का, कोई तो मोल होता है।
इस दुनिया में, सच्चा प्यार बड़ा अनमोल होता है॥

कोई किसी से कम नहीं,
चाहे कितना भी छोटा हो?
कोई ना कोई तो बात है,
जो करती है अलग औरों से।
जिसके बल पर सबका नाम चलता है॥

देखा है किसी ने, आज तक दुनिया में।
जिसको रब ने सबकुछ दिया है॥
या रब ने किसी का सबकुछ लुटा है।
इस दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं है॥

किसी को आसानी से मिला, तो किसी को नहीं।
किसी के हाथ थोड़ा, तो किसी पास ज्यादा ही॥
मगर देखा नहीं, एक जैसा विधान कहीं है।
और कुदरत भी ऐसा करता नहीं है॥

95.गीत-“एक तमन्ना, अपने दिल की”
                    रतन लाल जाट
एक तमन्ना, अपने दिल की।
पूरी करना, तुम सभी॥
याद रखना हमको, ना भूलना कभी।
नाम करना हमसे ज्यादा, होगी खुशी॥
एक तमन्ना अपने दिल की……………

बस जाते-जाते, माफ करना हुई जो गलती।
इस अवसर को, अपने दिल में पनाह दे सभी॥
एक तमन्ना अपने दिल की………………….

हमने सँजोंये हैं, सपने कई।
तुम सब मिल करना पूरे ही॥
एक तमन्ना अपने दिल की………………….

कुछ यादें खट्टी हैं, कुछ यादें मीठी।
लेकिन कुछ शिकवा ना करना कभी॥
आँखों में आँसू होंठो पर है मुस्कान प्यारी।
एक तरफ दुःख तो साथ है अपने सुख भी॥
एक तमन्ना अपने दिल की………………….

मिलके फिर जूदा होना,
जग का अटल नियम है।
आये हो तुम यहाँ,
तो एक दिन विदा होना है॥
लेकिन ऐसे जाओ कि-
पीछे तुम्हारे ही निशान पर चलें सभी॥
एक तमन्ना अपने दिल की………………

96.गीत-“यह क्या हो गया?”
              रतन लाल जाट
यह क्या हो गया?
होश मेरे उड़ गये।
जब मैंने ये सुना
कि- तुम अब बदल गये॥

ऐसा लगा जैसे, सारे संसार में।
हो गयी है, उथलपुथल ये॥
यह क्या हो गया?……………….

मेरा सपना टूट गया,
दिल बेगाना हो गया।
एक गुलशन-सा मौसम,
आज उजड़ गया है॥
यह क्या हो गया?……………….

यदि एक सपना होता,
तो देख करके जाग जाता।
लेकिन अब जिन्दा रहना
मुश्किल हो गया है॥
यह क्या हो गया?……………….

97.गीत-“सपनों के शहर में”
              रतन लाल जाट
सपनों के शहर में,
चाँदनी एक रात है।
उस रात के आलम में,
घुमें-फिरें, रूकें-देखें॥

वो सपनों का शहर
और उस शहर की दिवानगी।
आये मुझको नजर,
कई यादें और चेहरे भी॥
लेकिन देख वो भागे,
मेरे आगे और पीछे।
रूके ना वो कभी
बस, जिंदगी चल रही है॥

ऊँचे इरादे, कई सारी तमन्ना।
बड़े लोग हैं, प्यारी सजना॥
चारों तरफ रंगीन नजारा।
फुर्सत नहीं देखे कोई बेचारा॥
सबको होड़ लगी है,
आँख बन्दकर दौड़ते हैं।

किसी को ना मालूम।
कोई है क्यों गुमसुम॥
चाहे जो करें,
कोई ना रोके।
प्यार का मतलब,
सबके लिए अलग।
दुख हैं इस बात का हरपल।
कि- आज नहीं लोगों में दिल॥
फिर क्यों हम चाहते हैं,
सपनों के शहर में दिलबर॥

98.गीत-“दिल मेरा है जला”
               रतन लाल जाट
दिल मेरा है जला,
आग का बन गया एक गोला।
क्योंकि इस दिल ने,
सहा है बहुत ही धोखा॥

फिर भी आज तक है जिन्दा।
इसमे अब तक प्यार है बचा॥
लेकिन अब ना, कभी ये दिल जलता।
दिल मेरा है जला,
आग का वो बन गया, एक गोला॥

जो इस दिल के पास आये।
वो जलके राख हो जाये॥
इस दिल का प्यार देखो,
कि- यह कितना सच्चा है?
अब ना दिल जले,
दूसरों को जला दे।
जरा सोच-समझके,
आना दिल के पास में॥
दिल को चाहत है, अब कोई ना।
दिल के संग जो आये, उसे दे वफा॥
दिल मेरा है जला,
आग का वो बन गया, एक गोला।

99.गीत-“हर रोज हम मिलते हैं।”
                 रतन लाल जाट
हर रोज हम मिलते हैं।
कुछ बातें भी करते हैं॥
तब जाकर दिल को चैन आये।
और दर्द भी कुछ कम होता है॥

लेकिन अब याद करके, उन दिनों को।
जी मेरा घबराता है, दिल भी धड़कता वो॥
जब हम ना मिलेंगे,
एक लम्बी जुदाई में।
और याद सतायेगी,
हरपल एक-दूजे की॥
उस हाल में, इस दिल को
कितना दुख होगा?
क्या हम ये जानते हैं?

इस दिल को शायद यही चिन्ता है।
कि- उस दिल को चैन क्यों ना है॥
लेकिन सच तो यह है कि-
उस दिल को तेरी ही चिन्ता है॥
जब तक एक-दूजे का मिलन नहीं होता है।
बताओ उस रोज कितना दुख होता है

दिल को ना यह खबर है,
वो तो बड़ा ही भोला है।
कच्चा है जो सच्चा है,
तभी तो दिल का रिश्ता जोड़ा है॥
आगे क्या होगा?
यह भी ना सोचा।
दिल मासूम, दिल पागल है।
एक बच्चे से भी छोटा है॥

100.गीत-“किसी के वास्ते”
              रतन लाल जाट
किसी के वास्ते,
किसी की श्वाँस पे
हम जीयें या मरें।
दिल को ना इसका,
थोड़ा भी डर है॥

दिल तो जी-जान से,
है हरदम उसी में।
दिल पे यह असर है,
इस दोस्ती के वास्ते॥

तभी तो ना खबर है,
अपनी भी कुछ जिन्दगी है।
ऐसी है यह दोस्ती,
जिसकी ही कमी है।

इस दोस्ती के खातिर,
जान अपनी लगाकर।
हम किसी के वास्ते,
दिन-रात ना सोते।

यह दोस्ती तो ऐसा बंधन है।
जो कभी ना टूटे और छूटे॥
ऐसी दोस्ती, हमने देखी।
चाँद की सितारों से,
फूलों की खुशबू से।
और झरने की सागर से,
बादल की बिजली से॥
आसमां की धरती से,
आत्मा की परमात्मा से।
ऐसी प्यारी दोस्ती है॥

101.गीत-“एकदिन मुझको शरारत सुझी”
                      रतन लाल जाट
एकदिन मुझको शरारत सुझी।
मैंने उनके प्रेम की जाँच की॥
कितना प्रेम करते हैं बच्चे?
सागर का नीर भी कम लगे॥

उनका मन कोमल है,
दिल उतना ही सच्चा है।
लेकिन यह मत सोचना कि-
वो सिर्फ स्नेह ही पाते हैं॥
अपने नेह की, एक बूंद के बदले में।
वो सारा प्रेम-सागर अर्पित कर देते हैं॥

रोना-हँसना, बच्चों के लिए खेल है।
रूठ जाना, मान लेना, यह आसान है॥
बच्चों को चिन्ता ना कोई डर है।
जीवन में खिलना-मुस्कुराना,
उनकी अलग पहचान है॥

यह सबकुछ मैंने जाना,
फिर अपने दिल को पूछा-
चल, बच्चों से दोस्ती कर ले।
बस, संसार में यही सच्चे हैं॥

102.गीत-“याद आये मुझको”
                रतन लाल जाट
याद आये मुझको,
जीवन के हर मोड़ पे।
आँखों में छाये हैं,
वो जाने-पहचाने चेहरे॥

किसी की आवाज प्यार दे।
किसी की सूरत पे प्यार आये॥
कभी ऐसा भी होता है,
कोई हमको अजबलगता।
लेकिन उसमें है प्यार भरा॥
किसी की बात, किसी की चाल।
किसी का रूप, किसी का रंग।
और क्या न जाने?
मेरे दिल में रहता है॥

सब ऐसे बस गये
दिन और रात जैसे
मेरे दिल के पास है।
जो अपने वश में कर मुझको,
दूर कहीं अलग हो गये हैं॥
शायद वो अब देख रहे कि-
मेरा स्नेह सच्चा या झूठा है।
इसीलिए तो प्रेम-निकष पर,
मुझको बार-बार परख रहे हैं॥

103.गीत-"हँसके जीना सीखा"
               रतन लाल जाट
जिसने अपने जीवन को, हँसके जीना सीखा।
जीवन में वो, ना कभी किसी दुख-दर्द से हारा॥

रो-रोकर किसने क्या पाया है ?
जो अपना था, वो भी खोया है।
जीवन का गान हँसने में,
उसी का सार खिलने में।
जिन्दगी एक फूल-सी,
उतनी ही कोमल-प्यारी।
लेकिन फूलों के संग है सदा,
डाल-पत्ती, काँटों से वो भरी यहाँ॥

पल-पल रंग बदलती,
कदम-कदम यूं मचलती।
भीनी-भीनी हवा महकी,
तन-मन को भायी जिन्दगी।
कब जिन्दगी बदल जाये?
यह ना किसी को खबर है॥
जिन्दगी दो पल की,
जो आज मिली है यहाँ।

आज जी लो मेरे संग,
भूला दो सारे गम।
जो मिल गया,
उसी में सब्र करो।
हद से आगे ना,
कभी तुम बढ़ा करो॥
हाय-हाय छोड़ो, राम-नाम भजो।
मेरे संगी, ओ हमजोली यारा।
बात यह मान लो ना॥

104.गीत-“इस दुनिया में कितने दिखावे हैं?”
                           रतन लाल जाट
इस दुनिया में कितने दिखावे हैं?
जो हर बात के लिए साक्षी बनाते हैं॥
कोई ना कोई निशानी,
अपने पास रखते हैं॥
लेकिन क्या यह सच है?
वो कुछ कर पाते हैं॥

इस दुनिया के दिखावों से,
सच्चाई का कोई नाता नहीं है।
यह दुनिया दिखाई देती अलग है,
और अन्दर से कुछ और है॥

प्यार करो तो दिल से करन।
नाता तुम आत्मा से जोड़ना॥
तन का क्या है भरोसा?
कब वो मिट्टी में मिल जायेगा?
देखो, यह दिल तो सच्चा है,
कभी नहीं करता धोखा है।

इस दिल की यादें,
कभी ना मिटती है।
तस्वीर टूट जाती,
निशानी गुम जाती है॥
लेकिन दिल में बसी यादें।
मरने के बाद भी रहती है॥

कब देखोगे? तुम पलटकर एलबम के पन्नों को।
जब चाहो, अपने दिल की किताब खोलके देख लो॥
यह एक क्षण में ही, बरसों की तस्वीरें हमको दिखा देगी।
जो तस्वीरें हैं एलबम की, वो कुछ समय बाद पुरानी हो जाती।।
लेकिन यदि एकबार,
दिल से किया है एतबार।
तो अंतिम सांस तक,
रहती है याद।
दिल से प्यार करना है।
दिल में बसाये रखना है॥
रखना नाम जुबां पे।
मिलना आँखें मूँदके॥

ना किसी को किसी से,
कोई शिकवा हो।
अपनी प्रेम-कहानी,
कभी खत्म ना हो॥
बस, उस दिल की,
इस दिल को खबर है।
इसके अलावा सारी,
दुनिया बेखबर है॥

105.गीत-“बच्चे कितने प्यारे?”
               रतन लाल जाट
बच्चे कितने प्यारे?
सारे जहां से वो न्यारे॥
मन प्यारा, तन प्यारा।
जहाँ जाते लगता सब प्यारा॥

बच्चों के संग खेलो, दिल लगाके।
ऊपर से डंडा दिखाओ, डर के वास्ते॥
बच्चों का मन कोमल,
तन भी है फूल कमल।
सार-संभाल इनकी,
करनी हमको पूरी है।

यदि पँखुड़ियाँ कुम्हला जाये।
तो भीनी खुशबू खो जाये॥
बच्चों के संग अच्छे रहना।
हरबुराई से उनको दूर रखना॥
बच्चे कल के सपने,
आने वाली तस्वीर हैं।
वो उमंगों का तूफान है,
जो हवा में उड़ान भरे॥
वो आसमां लाँघ जायें।
पाताल को भी नाप लें॥

बच्चों के संग भगवान है,
पाप से वो हैरान है।
हरबुराई का अंत वे,
सच्चाई के साथ है॥
बच्चों को प्यार से कहना।
अपनी बात जबरन ना थोपना॥
उनके कोमल दिल को ना बेधना।
ऐसे बाण तुम कभी ना छोड़ना॥
बच्चे ही चमन,
उनसे ही खुशबू।
वो ही मधुकर,
जो गुनगुनाते हैं॥

106.गीत-“ओ मेरी माँ!”
            रतन लाल जाट
घर के बाहर बच्चा,
बैठा है अकेला।
टकटकी लगाये,
द्वार पे निहारे।
माँ के आने का रस्ता॥

‘कब माँ आयेगी?
मेरी माँ कब आयेगी?’
बस, यही एक बात वो,
बार-बार कहे सबको।
रातभर माँ! तेरे बिना,
नींद मुझको आती है ना।

‘माँ आयेगी, तब खाना खाऊँगा।
पापा! साथ आपके ना सोऊँगा॥
बिन माँ के, लगता है घर सूना-सूना।
रोटी तो छूट गई, अब पानी भाये ना॥’
‘घर के बाहर ही बैठा रहूँगा।
जब माँ आयेगी, तब कदम रखूँगा॥

माँ! तुम बिन डर लगता है,
कौन मुझ पर प्यार लुटाता है।
सब मेरी तरफ ऐसे देखते हैं,
जैसे कोई पराया हूँ मैं॥’
‘माँ! ओ मेरी माँ!
तुम आ जाओ वरना
घर के बाहर ही बैठा।
मैं बिस्तर डालके
सोया रहूँगा।
रातभर मैं,
रोता ही रहूँगा॥’

‘इन्तजार में आने तक, राह तुम्हारी सजाऊँगा।
जब तुम आ जाओ, तो मेरे लिए खिलौने लाना॥
और कभी भूल ना जाना, एक डिब्बा मिठाई का।
माँ! ओ मेरी माँ! ओ मेरी माँ!’……………………………

107.गीत-“कोई काम कर लो भैया!”
                     रतन लाल जाट
कोई काम कर लो भैया!
दुनिया में नाम कमाओ अपना।
ओ भैया, ओ भैया!

दुनिया बड़े मतलब की है।
हर चीज से कोई तो नाता है॥
चाहे वो कितनी भी, छोटी हो क्यों ना?
लेकिन रहती है, जरूरत उसकी हमेशा॥…………

काम है सबको प्यारा,
पीछे इसकेसारा संसार चलता।
हमको प्यार मिलता,
धन-दौलत और ऐशो-आराम होता॥…………

काम का नाम है,
काम ही जिन्दगी।
बिन काम किसी से,
कोई मतलब है नहीं॥………………………

108.गीत-“कोई मेरी दिवानी है।”
                  रतन लाल जाट
कोई मेरी दिवानी है।
वो बड़ी मस्तानी है॥
भला कैसे हम जाने?
कहानी उसकी अजब है॥

वो लड़की बड़ी प्यारी लगती।
बात उसकी मेरे दिल को भाती॥
याद मुझको सारी रात सताती।
शुरू हो गयी एक नयी जिन्दगी है॥…………….

कोई उसको देखकर अपना,
तन-मन भी भूल जायेगा।
एक उसमें ही वो दिवाना,
अरमां अपने मान बैठा है………………

यूँ लगता है मुझको,
जैसे मेरा सपना वो।
बिन उसके जीना,
बड़ा मुश्किल लगता।
सीने में धड़कन,
उसकी सरगम है।
श्वाँसें मेरी बस,
नाम उसका जपती है॥…………

आँखों में हरकहीं,
तस्वीर वो नजर आती।
चाल उसकी है निराली,
सूरत भी है भोली-भाली॥
ना कोई चिन्ता उसको,
बस, अपने में मस्त वो।
प्यारी है सारी दुनिया को,
लेकिन दुनिया से वो न्यारी है॥………….

109.गीत-“मान ले बात वो”
              रतन लाल जाट
मान ले बात वो,
दुनिया सच कहती।
बाद में पछताएगा,
फिर याद आयेगी॥

जो कोई चलती राहों में मिल जाता है।
तो कद्र उसकी कोई नहीं करता है॥
जो चीज मिली है,
उसका अपमान ना कर।
वो भी बड़े काम की है,
यूँ गुमान ना कर॥
एकदिन गुमान मिट जायेगा।
थोथा है सब उड़ जायेगा॥
सत्य जो होगा, बचेगा वही।
बात यह मान लो आज ही।।

तेरे लिए है वो,
एक जादू की छड़ी।
सारी दुनिया पागल हो,
उसके पीछे है पड़ी॥
एक तुझको ही,
वो दिवाना समझती।
कुदरत का कमाल है,
प्यार करते हैं जिसे कभी।
मिलता है उसे प्यार नहीं॥

इन्तजार करते हैं जिसका।
वो कभी इन्तजार नहीं करता॥
सपना हम सँजोंये हैं जिसका।
वो कभी पूरा होने नहीं देता॥
सच बड़ा ही कड़वा है,
झूठ उतना ही चिकना।
प्यार एक नशा है,
दिल उसमें पागल है॥
यह तन एक मंदिर है,
सुबह-शाम करो पूजा।
वो नाम जपे हरघड़ी,
जीवनभर भूलता नहीं॥

110.गीत-“छम-छम करती, कोई दिवानी”
                     रतन लाल जाट
छम-छम करती, कोई दिवानी।
दिल में यूँ, रूक-रूक आतीती॥
उसने धीरे-से बतलायी थी।
एक अजब-सी कहानी॥
जो समझ में ना आयी।
लाख कोशिश करने पर भी॥
लेकिन आज वही कहानी।
बन गयी है जिंदगी।……………

सच कहता है तू,
तेरे लिए मैं हूँ।
आकर मुझको,
बना ले अपनी।
वरना छिप-छिपके,
तलाश करनी होगी॥

तू खूब ढूंढेगा, फिर भी मिलूँगी ना।
सोच ले, करना है क्या?
मेरे संग जीना है या मरना॥
अगर साथ निभाना है,
जन्मों-जन्मों का।
तो हाथ मेरा थाम ले,
कभी छूट पाये ना॥
बस, तेरे लिए हूँ,
मैं सच कहती।

एक छोटी-सी बात,
जिन्दगी सारी बदल दे।
कोई सोच ना सके,
यह कैसे हो गया है?
चाहे कोई कितना ही भारी हो?
मैं कर लूँगी वश में उसको॥
यही तो बात समझ में ना आती।
कुदरत ने ऐसी क्या है शक्ति दी?
जो हमको ना मिली,
खेर, नसीब तुमको थी।

फिर भी सोच ले, बात है वही।
जो पहले थी, आज भी है वही॥
पल भर में ना बदलना,
चाहे मौसम बदल जाये।
जमाना है शातिर बड़ा,
यूं जीने नहीं देगा॥
फिक्र ना करो, देखना है हमको।
आगे होगा क्या? कौन जीतेगा यहाँ॥
जिसमें दम है, चलता है जादू उसका ही।
कदम-कदम पर वो, दिखाता ताकत अपनी॥

111.गीत-“मंजिल! ओ मंजिल!”
                रतन लाल जाट
मंजिल! ओ मंजिल!
आगे-आगे चलती है।
आ रहा, दौड़ता,
तेरे पीछे-पीछे मैं॥

अब छूकर तुझे पा लूँगा।
पाने को हूँ मैं कब से खड़ा?
मंजिल! ओ मंजिल!

नीन्दों में थी तू, सपना मेरा।
जिन्दगी में यूँ, गीत है ऐसा॥
जिसे गाया करता हूँ,
साँझ-सवेरे हरपल मैं।
मंजिल! ओ मंजिल!

सपना तेरा आँखों में,
बसा है मेरे दिल में।
मिल गयी, कितनी मुश्किल से।?
अब तू मेरी है।।
मंजिल! ओ मंजिल!

112.गीत-“देखो, कुदरत का कमाल”
                   रतन लाल जाट
देखो, कुदरत का कमाल,
कब क्या हो जाये?
चलती नैया मंझधार,
अपनी रूक जाये।।

मेरे रब्बा! कौन दिलाये?
इंसान को विश्वास तेरा॥
तू दिन को रात में बदल दे,
सपना पल में साकार कर दे।
खायी लाँघने से पहले,
कुआँ कोई खुद जाये॥
देखो, कुदरत का कमाल,
कब क्या हो जाये?

बीच रस्ते में खड़ा,
राहगीर सोचता है क्या?
मौत है सामने,
भूल सब वो जाता।
पल भर में वो,
हिम्मत अपनी हार जाये॥

113.गीत-“तुमसे मिलने को चला मैं आया।”
                         रतन लाल जाट
तुमसे मिलने को चला मैं आया।
पार करके मुश्किल सारा जहां॥
मेरे सपनों की राहों में खड़े।
पर्वत बड़े-बड़े कई सारे पसरे॥

सपनों की दुनिया में मैंने,
प्रेम की शक्ति अजमायी है।
पर्वतों को कूद गया, चुटकी में,
सागर को लाँघ गया, शक्ति से॥

जहाँ मेरी जिन्दगी है।
कैसे ना पहुँचता मैं॥
रोक सके, ऐसी ना कोई ताकत है।
प्रेम से बड़ा, दुनिया में कोई नहीं है॥

जिसका प्यार सच्चा है।
रहती है उसमें धड़कनें॥
मरने का डर नहीं है।
क्योंकि प्यार ही जिंदगी है॥

पिया है जादूगरनी,
मैं भी हूँ कम नहीं।
वो सारा जादू है,
मेरी बन्द मुठ्ठी में॥
अब तुम ना जाओगे।
मुश्किल ही बचना है॥

जब रोने को दिल करता है।
तो आँखें बरसात करती है॥
आग मेरे दिल में जलती।
ज्वाला भीतर में तेरी॥
सारी रात नीन्द ना आये।
आँखों में बस तू ही है॥
तेरे दिल की बातें।
साँसें मेरी पुकार करे॥

यदि तू चाहती है, मुझको मारना।
मरने से निडर हो, आज मैं आया॥
गोली चला देना तू, मंजूर है।
पर प्यार भूलना, मुश्किल है॥

प्यार की दुनिया से तू अनजानी।
क्या होती है ईश्क में दिवानगी?
आँखें बन्द करके देखो,
दिल में बसे प्यार को।
कठिन डगर में साथ,
अंत तक अपना है।
जब तक तू मेरी,
चाँद-सूरज हैं अपने॥

114.गीत-“ए मन! तू कितना पागल है?”
                      रतन लाल जाट
ए मन! तू कितना पागल है?
जो कुछ ना तेरा अता-पता है॥
न जाने तू, कब कहाँ लग जाये?

बिन सोचे-समझे,
इस तरह तेरा लगना।
पहले-पहल लुभाता है,
फिर बुरा हाल होता।
यह तुझको मालूम नहीं,
दुनिया कितनी झूठी है?
ए मन! तू कितना पागल है?
जो कुछ ना तेरा अता-पता है॥

मधु की आशा में,
तू गया था पल में उड़के॥
अब वहाँ मधु नहीं,
हालाहल की बूंदें हैं॥
और तू चाहता है,
पान उसका करना।
जरा कुछ सोचो,
मतलब मेरी बात का॥
अब तू वहाँ न जाना,
दिल मसोसकर रह जाना।
सोचना-समझना पहले,
फिर दिल लगाना है॥

जो तुझको भाये,
उसको तू भाये।
दोनों एक-दूजे को चाहे,
तो पक्की कसम निभायें॥
वरना आजकल के वादे,
लगते हैं कोरे धोखे।
झूठी कसमें ही बार-बार
हरकहीं खायी जाती है॥

115.गीत-“पहला प्यार”
           रतन लाल जाट
पहला प्यार तू, मैं तेरा दिवाना।
तेरे ही पीछे, दिन-रात हूँ लगा॥
कितनी मुश्किल से रोका था?
अपनी जान समझ कभी छूया ना॥

कुछ दिन बीते थे, पागल हवा चली।
बहका था कोई, जादू-सी घटा छायी॥
उलझन बन गई, तेरी फिरकी।
होश खो गये, अनजाने सभी॥
सारे जहां से बैर हो गया।
फिर भी खबर नहीं है पिया॥

दिल से रिश्ता है अपना।
एक डोर में बंधी आत्मा॥
एक चले, तो आये दूसरा।
तू रूके, तो मैं भी आऊँ यहाँ॥
दिवानी का नाम प्यारा।
करता है कमाल बड़ा॥

एक को छोड़ा, दूसरा पकड़ा।
किसी को बातों में ललचाया,
तो कभी आँखों से धमकाया॥
कोई छूने को आया तन।
तो फट गया उसका मन॥
किसी को हँसी मिलती है यहाँ।
तो कोई रोता हुआ वापस जाता॥

वो ना रोयी थी,
उसदिन के बाद कभी।
जब गाल पर उसके,
थप्पड़ एक प्यारी पड़ी॥
उसकी हँसी, आहट उसकी।
और उसकी मुस्कान से।
वो लहराता दुपट्टा,
भीगा बरसात में।
उसमें से झरती बून्दें,
मानो वो प्रेम-मधु है॥
पास उसके, है कोई ना।
मेरे सिवाय, किसी को पता ना॥

वो मधुर सपने, अजब इस लोक में।
ये सपने एकपल में ही बदल गये॥
अब यादें ही बच गई हैं।
बीती बहारें बन रह गई हैं॥
कौन दिवानी तेरी?
और तू है किसकी?
पहला प्यार मैं,
पहली दिवानी तू है॥
बातें मेरी सोच अब,
सच कहता है दिल॥
पहला प्यार सबसे अच्छा लगता है।
यादें उसकी आँखों में सदा रहती है॥
श्वाँसें अपनी वफा की माला जपती है।
दिल में प्यारी मूरत उसकी रहती है॥
पहले प्यार की धधकती ज्वाला।
खूमार उसका जीवन में चढ़ गया॥
अब तो पहरा है यादों का,
जो कभी नहीं है रूकता॥

कितने ही मिले थे?
लेकिन हमें याद नहीं।
हजारों छुट गये थे,
उससे भी ज्यादा खोये हैं॥
लेकिन तेरा-मेरा पहला प्यार।
सदियों है धरती-अम्बर के पार॥
जन्मों-जन्मों तक,
साथ रहेंगे हम॥
और रस्में प्यार की नहीं भूलना।
चाहे फिर मिलना हो या ना॥

116.गीत-“वो मानव-देवों का युग था”
                     रतन लाल जाट
वो मानव-देवों का युग था।
जिनका बुरा सपना भी न था॥
और आज खुली आँखों से।
इस युग में कत्ल जा रहा है॥

बेटा समझता है, खुद को बाप से बढ़कर।
और बहू माँ के सामने, रहे सास बनकर॥
भाई अपने ही भाई को समझता दुश्मन।
दो बहिनों में होता है हंगामा झगड़ा जैसे सौतन।।
कभी पति छोड़कर बीवी को,
भाग जाता हैं लेकर किसी को॥
तो कभी देखकर मौका बीवी,
पति को लुटकर नौ-दो ग्यारह हो जाती॥
कोई अच्छा हो या सच्चा,
लोग कहते हैं उसको बुरा।
जहाँ पाप-झूठ का हो बोलबाला,
वहीं मिलती हैं सौ-सौ खुशियाँ॥
मालिक करे चोरी-डकैती,
और सीखाये औरों को ईमानदारी।
खुद खाये-पीये, दूसरों को छुड़ाये॥
ऐसा जमाना आ गया,
हम मानव बन गये रूप दानव का।
वो मानव-देवो का युग था………………

आज कल दोस्ती नाम रह गयी।
  हो जाती है जन्मों की दुश्मनी।।
मालिक सेवक को सौंपकर खजाना,
यदि बेखबर हो सो जाता।
तो सेवक इसी ताक में रहता है,
जीती मक्खी निगल जाता है॥
एक अनजाने को, लोग समझकर भगवान
खुद समर्पित हो जाते थे आदर-सेवा के साथ।
आज अपना चिर-जान से प्यारा सखा,
मन ही मन खोजता है दूर जाने का बहाना॥
वो मानव-देवो का युग था…………………

चींटी को ठोकर ना मारते थे,
अब हाथी को भी अनदेखा करते हैं।
पाप-पुण्य मिलता था अगले जन्म में।
अब सुबह का बोया, शाम को पक जाता है॥
बातें ये सच्ची है,
आँखों से देखी है।
विश्वास ना हो,
तो बताओ, दिखाऊँ मैं॥
पता नहीं, अम्बर कैसे खड़ा है?
क्यों नहीं फट रही आज धरती है।
धीरे-धीरे पास आ रहा,
दौड़ते हुए विनाश यहाँ॥
वो मानव-देवो का युग था…………………
                     
117.गीत-“दुआ है ऐसी दवा”
              रतन लाल जाट
दुआ है ऐसी दवा,
उसके आगे कोई ना बड़ा।
दुआ में है वो दम,
जो मुर्दे में डाल दे जीवन नया।।

दुनिया में ऐसी,
कोई चीज है नहीं।
जो दुआ से कभी,
हासिल ना हो सकती।।
यदि कोई सच्चे दिल से,
करता है दुआ।
तो संजीवन बन जाती
अपने लिए दुआ॥

दुआ से समन्दर लाँघ,
द्रोणागिरि उठा लिया।
या मंगल की धरती पे,
बसने को ठान लिया॥
वो सब सुन लेता।
मन से की गयी दुआ॥

दुआ! तेरे आगे,
झूक गया, सारा जहां ये।
हर मुसीबत से,
छुटकारा तू दिलाती है॥
दवा का असर कम ना होता।
दुआ! तू है एक अचूक दवा॥

118.गीत-“ए मेहनत करने वाले”
                  रतन लाल जाट
ए मेहनत करने वाले!
सफलता तेरे पाँव चूमे॥
तू कर्म अपना करता चल,
तन-मन लगाके।
मंजिल खड़ी है,
तेरे आगे-पीछे॥

कठिन डगर में तू चल,
इन काँटों से कभी ना डर।
कहीं फूल-बगियों में जाकर,
तू ऐश-आराम ना कर॥
जिसको तुझे पाना है।
उसके साथ डटा रहे॥
आधी रात को सपने में,
कभी ना तू भूल उसे॥
ए मेहनत करने वाले!
सफलता तेरे पाँव चूमे॥

जिन्दगी में वो सपने सच्चे हैं।
जो खुली आँखों से देखे जाते हैं॥
जिसे पूरा करने को नींद ना आये।
ऐसा ही कहा था, किसी ज्ञानी ने॥
सपना सच करना, दूर की कौड़ी लगता।
फिर भी जो लड़ता, वो जीत ही जाता॥
जो गिरके भी वापस उठकर चल दे।
तो मंजिल खुद चलकर हौसला बढ़ाये॥
ए मेहनत करने वाले!
सफलता तेरे पाँव चूमे॥

119.गीत-“साँच को कभी आँच नहीं”
                   रतन लाल जाट
साँच को कभी आँच नहीं।
जो डरता और मरता नहीं॥
वो किसी के आगे कभी।
एकपल भी झूकता नहीं॥

उसमें ऐसा दम है,
जो सबसे लड़ता है।
झूठ को दफन करके,
बल अपना दिखाता है॥
सत्य अटल है, सबको पसंद है।
जिसकी चाहत है, हर दिल में।।
सबकी कामना करता है पूरी।
पलभर भी न्याय में देर नहीं॥
साँच को कभी आँच नहीं।
जो डरता नहीं, मरता भी नहीं॥

120.गीत-“आज मेरे यार ने”
               रतन लाल जाट
आज मेरे यार ने, वो काम किया है।
इस दिल को खुशियों का, पैगाम दिया है॥
मेरे यार तूने, ऐसा नाम कमाया।
कल होगा वो, एक इतिहास नया॥
आज…………………………………………………॥

खुशी के मारे, आँसू भर आये।
बाँहों में भरने को, हाथ फैलाये॥
मेरे यार तूने, कमाल कर दिया है।
जो आज यह दिल, प्यार से भर गया है॥
आज…………………………………………………॥

नाम लूँगा मैं बस तुम्हारा, ऊँचा करके सिर अपना।
अच्छे काम सबके दिलों में, हँसी-खुशी ही बढ़ाते॥
तू करते रहना दिन-रात और भी काम प्यारे।
सारे जग पे मेरे यार! सिर्फ तुम्हारा नाम छाये॥
आज……………………………………………………॥

121.गीत-“प्रेम का मतलब तो यही होता है।”
                          रतन लाल जाट
प्रेम का मतलब तो यही होता है।
अगर वो मौत भी अपनी बन जाता है॥
तो भी हमको नाता यह नहीं तोड़ना है।
प्रेम का मतलब तो यही होता है॥

जो हरदम अपने को रूलाता है।
उसको हँसाने में सारा जीवन लगाना है॥
हम उसकी याद में आँसू बहायें।
पर उसके अश्रु-मोती ना ढ़ूलकने देना है॥
चाहे अपना सबकुछ उजड़ जाये।
उसकी जीवन-बगिया लहराये॥
यही हमेशा हम सोचा करें।
चलते रहें काँटों-भरी राहें॥
उनके लिए हमको, फूल ही खिलाना है।
प्रेम का मतलब तो यही होता है……………॥

जिन्दगी है कुछ पल की।
प्रेम बिना है कुछ नहीं॥
मिलन से पहले कुछ ना था।
तभी तो हम हँसके मिलते हैं सदा॥
मिलन के बाद भी, विरह के संग प्रेम है।
जो कभी ना कभी तो मिलकर रहते हैं॥
प्रेम का मतलब तो यही होता है……………॥

122.गीत-“जो भी बोलते हो"
               रतन लाल जाट
जो भी बोलते हो, बोलने से पहले सोच लो।
करो कोई काम उससे पहले दिल को पूछ लो॥
बात यह मन में तुम गाँठ बाँध लो।
वादा जो करो तो निभाना है यारों॥

लोग करते हैं बातें बड़ी-बड़ी।
पर बातों से भूख नहीं मिटती॥
बातें करो ऐसी, जो सिर-पैर वाली हो।
बात अटल है, निभाना है पूरी उसको॥
सच बोलो, हम कहते हैं करना है वो।
जब यकीन करो, तो अच्छा लगता है तुमको॥
जो भी बोलते हो, बोलने से पहले सोच लो।
ऐसा काम मैं कर सकूँगा क्या? दिल से पूछ लो॥

123.गीत-“कभी तूफान उठे”
               रतन लाल जाट
कभी तूफान उठे, कभी आँधी मचल जाये।
लेकिन हमको नहीं डिगना है, इनके आगे॥
मजबूत बनके मुकाबले को,
हम पूरी तरह तैयार रहें।
मन में ठान लो, बात यह,
असम्भव कुछ नहीं है॥

एक-एक पल गिनके, जी लो तुम कुछ घड़ी।
फिर ना जाने कब बुझ जाये? बतियाँ जीवन की॥
बिन तेल आग के ये बत्तियाँ कैसे जलेगी?
आज हो रहा है, वो होता रहेगा आगे भी॥
संभलके बचा ले, तू अपने को औरों से।
हमको ना मालूम है, कब क्या हो जाये?

ऊपरवाले नीचे आयेंगे,
नीचे वाले ऊपर जायेंगे।
कहना यह थोड़ा मुश्किल है,
लेकिन लगता सच है॥
सुनी हुई बातें, झूठी हो सकती है।
जो आँखों के सामने घटित सच वही है।।

124.गीत-“कभी किसी की राह मत देखना”
                         रतन लाल जाट
कभी किसी की राह मत देखना।
तुम अपने दिल को समझ लेना॥
दिल जो जाने, वह सच्चा है?
लोग जो कहें, वह झूठा है॥

दिल थोड़ा-सा पागल और है दिवाना।
चाहत की मस्ती में कहीं खो जाता॥
इस पार से उस पार
जाये वो दिन-रात
हँसी-खुशी से
रंगीन सपने लेके
मगर लौटे बेचैन हो
फिर पछताता है।

कोई समझाये, तो बुरा लगता है।
कड़वी बातें, दिल को कभी ना भाये॥
जिसकी चाहत है दिल में,
दिल उसी के वास्ते जीये-मरे॥

वो तैयार है, कुछ भी करने को।
हमेशा जिंदा है, जीत देखने को॥
इसी एक राह पर, वो चलता है बरसों।
आँखें धुँधला गयी, पर नहीं रूकारूका है वो॥
अब हुआ मालूम, दिल सच कहता है।
अनजाने में पता नहीं क्या हो जाता है?

125.गीत-“जब मुश्किल हो जाये”
                  रतन लाल जाट
जब मुश्किल हो जाये।
कोई बात गले पड़ जाये॥
तो ऐसे हाल में, कोई क्या करे?
जब मुश्किल हो जाये॥

हम कुछ ना कर पाते हैं।
बस, उसके वश में हो जाते हैं॥
जीना-मरना सब छोड़ देते हैं।
जब मुश्किल हो जाये॥

हम अपना सबकुछ भूलके,
यादें वो संजोने लगे।
जिसकी तमन्ना सबको है,
बस, दिल उसी की तलाश करे॥

देखी हमने सच्ची यह कहानी है।
जो कितनी सच्ची और प्यारी है?
ऐसी बातें और कहाँ मिलती है?
धरती-अम्बर से दूर नहीं स्वर्ग है।।

126.गीत-“अब हमको ना है कोई चिन्ता”
                       रतन लाल जाट
अब हमको ना है कोई चिन्ता।
ना ही है प्यार पाने की तमन्ना॥

अब हम कभी रस्ता ना देखेंगे।
बस, अपनी ही डगर निहारेंगे॥
मंजिल पे खिला फूल नहीं हैं।
तो काँटों भरी डगर में तो बाकी है॥
जो साथ आये, वो घुलमिल जायेगा।
जैसे चाँद अपनी चाँदनी से मिला।

उड़ते पंछी कोटर में कब बसते हैं?
जहाँ भी मिल जाये बसेरा, वही घर है॥
मिल जाते, झूण्ड बनाके।
एक साथ कहीं उड़ चलते।।
जहाँ सबको चोंच भरके
मिलता है दाना-तिनका

भँसरे-सा गुनगुनाते हैं एक राग हम।
बरसात में नाचते मोर जैसे चलें हम॥
कोयल-सा मीठा गीत गुनगुनायें।
जुगनू बन राह और को दिखायें॥
ऐसे दिवाने हम,
अपने हाल में मस्त।
डर है ना कोई गम,
खुशियों का अलग ही मजा

127.गीत-“इन्तजार करना”
              रतन लाल जाट
इन्तजार करना, ओ मेरी सजना।
इन्तजार का फल, है बड़ा ही मीठा॥
ओ मेरी सजना।
अब कुछ देर है ना॥

इन्तजार किया है,
कुछ दिन और हैं।
बरस गुजर गये,
अब गिने पल हैं।।
फिर भी याद तुमको आयेगी।
तू रोना नहीं, ओ मेरी रानी॥
रोने से कुछ नहीं मिलता।
अपना है वो भी खो जाता॥

आज तक किसी ने नहीं पाया है।
कभी किसी को बिना इन्तजार के॥
बेचैनी बढ़ जायेगी, सपने भी बिखर जायेंगे।
हँसी-खुशी मिट जायेगी, फिर भी मिलेंगे॥
तेरा हँसता-खिला चेहरा होगा,
आँखों में झलकता, प्यार मेरा।
होंठों पे देखूँगा रस टपकता,
गाल पे निशान चुम्बन का॥

हाथों में मेहन्दी लगाना,
माँग में अपने सिन्दुर भरना।
बाजू में हो कंगना,
और कानों में झूमका।
पैरों में पायल, बजेगी छम-छम।
माथे पे बिन्दिया, नाक में मोती चम-चम॥
ऐसा प्यारा रूप अपना, तू मत ना खोना।
कभी रंग इसका, फीका पड़ जाये ना॥

एक ना एकदिन, खुलेंगे बन्द दरवाजे।
आधी रात में, उग आयेगा चाँद भी ये।।
और पूर्वांचल में टिम-टिम करता सूरज।
प्रकाश अपना फैलायेगा गगनमण्डल।।
धरती अपनी झूम उठेगी,
नयी खुशियाँ भर जायेगी।
बीती बातें, लेकर चली निशा।
उगा है दिन रोशनी नयी फैला॥

128.गीत-“पैसा बहुत कमाया है"
                 रतन लाल जाट
पैसा बहुत कमाया है,
एकपल चैन ना आया है।
हाल कोई उनसे पूछे,
कि और क्या-क्या पाया है?

लोग पैसों पर सोते हैं,
फिर भी नींद ना आती है।
पैसा बहुत प्यारा है,
फिर क्यों दिल में तड़प है?

पैसा सबको गुलाम बनाता।
पल भी आजादी नहीं देता।
अपने दिल का सुकून भुला,
वो सपने अलग दिखाता॥
यदि पैसा है मेहनत से कमाया।
तो आपको निश्चित ही चैन मिलेगा॥
लेकिन गलत राह पर मिला खजाना है।
तो मिट्टी के ढ़ेले से कीमत नहीं ज्यादा है॥

पैसे ने दूर सबको दिया,
घर पल में उजाड़ दिया।
दिल का प्यार छिन्न लिया,
और क्या-क्या करवाया?
पैसा नाम है स्वार्थ का,
परमार्थ है केवल सपना।
मेहनत से जीने वालों का,
काम मुश्किल हो जाता॥
इस पैसे के पीछे,
किसने क्या नहीं खोया है?

कितने हैं पैसे की चाहत में?
जिन्होंने ठुकराया हैं अपनों को।
ऐसी दौलत से क्या प्यार करना?
जो मानव को बनाती है हैवान यहाँ॥
दौलत वह है, जिस पर अपना जोर चले।
जब हम चाहें मुश्किल समय काम आये॥

संभल जाओ, धन के पीछे मत भागो।
इसे शासन नहीं सेवा भाव सिखाओ।।
नेक काम में साथ दे।
कभी की जान ना ले, जीवन दे।।


129.गीत-“अब इन्तजार में कितना सहेंगे हम?”
                           रतन लाल जाट
अब इन्तजार में कितना सहेंगे हम?
आँसू ना रूकते, धड़कती है धड़कन?
जैसे आज ही हमको, छोड़ना पड़ेगा सब।
मानो नहीं बचा है एकपल भी जीवन॥

अब हम दिन कितने और रहेंगे इन्तजार में?
कुछ भी खबर मिलती नहीं, फिर क्या कहें?
चाहते हैं हम जीना चैन से,
मगर हालात अब बदतर है।
दिन-रात खोये रहते हैं,
न जाने क्या सपने सँजोंते हैं?

मगर रात ढ़लते ही, धड़कनें बढ़ जाती।
कुछ चैन मिलता नहीं, आ जाती बेहोशी॥
अब समझ में कोई बात नहीं आती है।
बात है अजब-सी, जो कभी ना भाती है॥

कोई आकर इस घड़ी,
विश्वास नहीं दिलाता है।
थोड़ा धीरज बँधाकर,
कोई राह दिखाता है।।

इस उम्मीद पर चलता है।
कभी नहीं थकना है॥
ना किसी से अपना शिकवा है।
कहानी अपनी दिल में बसाना है॥

इस इन्तजार में एक दर्द है।
जिसका कोई इलाज नहीं है॥
बस, अन्दर ही अन्दर जलें।
पीड़ा कभी कोई ना समझे॥

फिर कैसे समझाऊँ मैं?
मुझको भी समझ ना आये॥
दर्द मेरा आकर कौन बाँटे।
जो दुःख में भी हँसा दे॥

कभी किसी के सामने,
लाचार नजर ना आये।
अभी मैं जीऊँ या मरूँ,
पर इन्तजार ना कर पाऊँ॥
ऐसी एक चिंगारी जली है,
जो कभी ना बुझती है।।

130.गीत-“जब हम मिलकर”
                रतन लाल जाट
जब हम मिलकर बिछुड़ रहे थे।
उस वक्त दिल अपने रो रहे थे॥
लेकिन तुम खुद को रोके हुए थे।
ताकि यह खबर मुझे ना चले॥

कुछ दूर आगे चलकर,
फिर देखा मैंने मुड़कर।
रोते-रोते ही निहारकर,
तुझे देखा जी भरकर॥
यह बात तुमको मालूम ना थी।
जान जाते पर कुछ पाते नहीं॥
इसीलिए तो चलते हुए, यूँ ही तुमनें मुस्कुराया।
ताकि जाते हुए भी मैं, हँसता ही रहूँ अकेला॥
यह सच्ची बात, अब दिल जान गये हैं

इस दिल की तड़प, जलाती है उस दिल को।
उस दिल की रौनक, नचाती है इस दिल को॥
एक दिल का हाल जानता है दिल दूजा।
दूजा दिल आने वाले कल को देखते हैं अपना॥
मिलन के बाद, होता है सच्चा प्यार।
प्यार के साथ, आ जाती है एक बहार॥
यादों के रास्ते पर, आ मिलते हैं वादे।
वादे अपने प्यार को, सलामत रखते हैं॥
फिर भी अपना विश्वास है।
दुबारा हमको मिलना है॥
चाहे धरती-अम्बर छोड़ दें।
लेकिन मिलेंगे नये संसार में॥

131.गीत-“ए मन मेरे”
           रतन लाल जाट
ए मन मेरे, तू कितना पागल है?
जो बार-बार, यहीं-कहीं फिरता है॥
तुझे ऐसा क्या हो गया है?
शायद खूमार कोई चढ़ा है॥

ए मन मेरे, तू उड़ मत रे।
गगन यह खूला-खूला।
रूक तू देख जरा॥
कितना दूर फैला है जाल यहाँ?
अब कौन बुलाये और जायें कहाँ?
अब तो उड़ जा, इस छोर से उस छोर।
धरती-आसमां, चाँद-तारे सबको छोड़॥
जो अपने हैं, वो ना सताते हैं।
बाकी सब चैन से, जीने ना देते हैं॥

तू कभी ना सुनता है।
आँखों तुम्हारी अँधी हैं॥
जहाँ नहीं जाना, वहीं तू जाता।
हँसने की बातों पे, तू खूब रोता है॥
तू कदम अपने वापस खींच ले।
लगता है आगे कोई पाताल है॥
कहीं गहरा है सागर-सा।
तो कहीं भूधर है खड़ा॥
आँधी चले, तूफान उठे।
कुछ भी हमें, खबर ना लगे॥
सब एक ही कैद में बंद हैं।
छुड़ाने वाला अब कौन है?

132.गीत-“मेरे बच्चे अमन प्यारे”
           रतन लाल जाट
मेरे बच्चे अमन प्यारे,
तुम हो फूल हजारे।
घर-घर से, आकर जगमगाते,
और हम ढ़ूँढ़ते, भगवान कहाँ है?

तुम ऐसी खुशबू हो।
जो ना मिले स्वर्ग को॥
इतने सच्चे हो दुनिया में,
और कोई नहीं हैं तुम जैसे।

बचपन में लगते हैं।
कान्हा के जैसे प्यारे॥
जब हम ढ़ूँढ़े कहीं तो,
सूरत वो नहीं मिलती है॥
आ जाओ, मेरी बाँहों में।
तुम्हें चूम लूँ, जी भरके॥

जो भी कहना है रब से।
वो सुनेंगे, तुम्हारे मुख से॥
बच्चा-बाल रूप है।
साक्षात भगवान है॥
मैं घुलमिल जाऊँ संग तुम्हारे।
जीवन सारा यूँ ही गुजर जाये॥

तुम ऐसा राग गुनगुनाते हो।
मानो सुर सातों बज उठे हो॥
तुम उतने ही कोमल हैं।
जितने कि फूल-कली हैं॥

जीवन तुम्हारा हरा-भरा।
स्वर्ग को भी लहरा देता॥
ये खुशबू, ये चमन।
ये कली, ये बहार॥
दुनिया में और नहीं।
ऐसा बाग कोई कहीं॥
रहकर मैं साथ तुम्हारे।
करूँगा दर्शन भगवान के॥
प्यारे, सच्चे, अपने बच्चे।
सदा ही रहें, आगे-पीछे॥

हम ना होंगे जूदा कभी।
करेंगे बातें मीठी-मीठी॥
सच होंगे, सपने अपने।
ख्वाब और इरादे भी पूरे॥
वो ना छूते हैं कभी,
झूठ का दामन।
ना देखा आँखों से कभी,
ऐसा कोई दुष्ट-स्वप्न॥
इसीलिए हँसते हैं, रोते हैं।
फिर भी अच्छे लगते हैं॥

133.गीत-“बुलाया माँ भारती ने”
               रतन लाल जाट
रातें अँधेरी, खुला आसमां।
सागर की लहरें और आँधी-तूफां॥
आया था वो जिसे,
बुलाया माँ भारती ने।
और माँगा था धरती ने,
तो भेज दिया प्रभु ने॥

मेरे जहां का, वो सूरज ऐसा।
जो आ गया, गोदी में मैया॥
हँसता-सा, टिमटिमाता।
वो एक था उजियारा॥
रूप कहूँ या तेरी छाया।
कुछ अधूरा काम करने भेजा?

वो रहता है सबको, अपने में छिपाके।
पूजते हैं धरती-आसमां नित उसे॥
यह सारा वतन है उसका।
फैले पंक बीच वो खिला॥

चाहत है सबको तेरी।
आँचल फैला माँ बुलाती॥
कैसा है तू? कितना प्यारा?
लाडला अपना, माँ भारती ने पाला॥

चलती नाव में डेरा था,
उठते तूफान ने आ घेरा।
देखें गगन को धरती,
घनघोर बरसे मेघा॥

सत्य को चाहने वाला।
प्यारी है उसको अहिंसा॥
वाणी फैलाती है करूणा।
आँखें दिखाती है दया॥
लोभ-लालच से तोड़ नाता।
वतन को आपस में जोड़ा॥

134.गीत-“जब हमको समय मिला था”
                     रतन लाल जाट
जब हमको समय मिला था,
तब हमको वो ना मिली थी॥
अब वो चाहती है मिलना,
लेकिन हम ना मिलते कभी॥
 
आखिर ऐसा क्यों हुआ?
साथ अपने मजाक ऐसा।
जबकि अब हम मिलते ना।
बस, आलम है जुदाई का॥
अब रह-रहकर यादें वो,
आँखों में बीते सपने दिखलाती॥
जब प्यार हुआ था उन दिनों,
वो हम पर खिल-खिल हँसती॥

ऐसा मैं दिवाना था, जो कब रूकता?
हरपल उसकी यादो में खोया रहता॥
रो-रोकर तुम्हारी यादों में,
आँसू खूब बहाये हैं।
अब क्यों आकर कहते सभी?
कि- बार-बार रोती है वो भी॥

अब वो इन्तजार करती है।
लेकिन तू ना उसे मिलता है॥
अपने दिल से वो पुकारती है।
दिल तेरा अब क्यों ना सुनता है॥ 
कैसे मिलूँ मैं? कहाँ वो है?
अब क्यों रोये? ऐसी वो कौन है?
जो उसको रूलाता था कभी।
उसको अब जानता हूँ मैं नहीं॥

वो किसकी यादों में जिन्दा है?
वो तो कब के भूल गये॥
दिल में सँजते ख्याब है।
अब दिन में देखते सपने॥
अपने दिलों की वो बातें,
किसी को समझ ना आती थी।
लेकिन हम समझाया करते थे,
अपनी वो सारी कहानी॥

135.गीत-“दिल दिवाना दिल आशिकी को”
                       रतन लाल जाट
दिल दिवाना, दिल आशिकी को कहता है कुछ बातें।
देखो, नीलगगन के सितारे, चन्दा को कितने चाहते हैं?
वो सुनहली किरणें, सूरज को क्यों है घेरे?
बताओ, नहीं तो आज तुमको मेरी कसम है॥

दिल दिवाने की बातों से,
आशिकी का दिल डगमगाया।
वो कहना और चाहती थी,
लेकिन कह कुछ और दिया॥

इधर बातें सुनने को दिवानी के पास आया वो।
उस पागल दिवाना का दिल कहीं खो गया, देखो॥
अब दिल दिवाना पूछे, अपनी आशिकी से।
क्या मेरे प्यार को, कहीं देखा है तूने?

नहीं, मेरा प्यार अभी तो था यही
देखते हो कि- वो गुम हो गया कहीं॥
मेरा पिया तो अम्बर है,
मैं उसकी धरती हूँ।
चाँद जैसा रूप है,
कली-सी कोमल हूँ॥
पता नहीं है वो सितारा कहाँ है?
प्रकाश उसका कहाँ जगमगा रहा है?
सुनकर एक-दूजे की बातें।
आँखें उनकी लग गयी बरसने।।

बस, फिर होंठ हिल रहे थे।
आवाज छुप गयी कहाँ जाने?
और आँखें पूछने लगी दिल से।
बता, अपना प्यारा मित कहाँ है?
वादें क्यों करते हैं?
ख्वाब जो बन जाते हैं॥
अपने कोमल इरादे,
अब बुरे लगते हैं।।
दोनों ही पागल हैं।
जी रहे किस बैचैनी में।।

136.गीत-"रब्बा ओ रब्बा”
             रतन लाल जाट
रब्बा ओ रब्बा,
मैं कभी ना चाहता।
सूरत अपनी,
उसको दिखाना॥

मेरी इस हालत का
अन्दाज लगा लेना॥
बस, इतना-सा रहम
मुझ पर कर देना॥

लेकिन एक रूप उसका।
प्यासी आँखों को दिखाना॥
कहीं ऐसा ना हो,
मैं निहारते-निहारते यहाँ,
उसमें कहीं खो जाऊँ ना।

देखते रहूँ उसको,
मरते दम तक मैं।
अगले जन्म भी
साथ कभी ना छोड़ूँ मैं॥
दर्शन उसके साथ तुम्हारे,
आखिर साँस तक होते रहे।
अब कभी ना मैं रोऊँ।
ना कभी उसे रोता देखूँ॥
देखो, अपनी आँखें,
प्यार चमकती रहे।।

137.गीत-“दिल तो ना देंगे”
               रतन लाल जाट
दिल तो ना देंगे, अब हम किसी को।
लेकिन दिल चुराने की, होगी कोशिश तो॥
तब नाम दिवाने का मिलेगा मुझको। 
इस जहां में अपने जैसा कोई ना हो।

प्यार का तूफां,
विरह की ज्वाला॥
मैं हूँ ऐसा,
आशिक तुम्हारा॥
जो कभी आयेगा,
वो मुझे चाहेगा।
कौन है दुनिया में,
जो बस अपने हैं?
दिल मेरा चुराया है।
अब क्यों ना तू चाहे?
मैं तुझको पुकारूँ,
तू क्यों ना मेरी सुने॥
कहाँ है तू? छिपके ले जाये क्यों?
अब यूँ, कभी ना रूलाना है मुझको॥

ऐसे बादल जो कभी ना बरसे।
चाहे तुम बरसाओ नयन अपने॥
फिर भी आये वो रूलाने को।
कहीं छिप-छिपके मुझको॥
तेरे प्यारे नैनों का काजल।
अलकों की लटकती उलझन॥
प्रेम-बत्ती जलाये मेरा बदन।
तभी तो जल रही है अगन॥
दिल कौन देता है?
पागल है जो।
बातें सच्ची कहके
दिल चुराये वो॥

अब ना होता है वैसा।
जो पहले कभी होता था॥
बातें भी बदल गई,
प्रेम-कहानी मिट गई।
अब और क्या कहें?
तोड़ दी सारी कसमें॥
दिल से बुलाने, चाहे उसको।

फिर भी ना सुने बात किसी की।
बस, अच्छी लगे अपने ही दिल की॥
नाम उसका ले-लेकर रहे खुद अकेले।
और न जाने क्यों ये दिल उसे पुकारे?
दिल तो ना देंगे, अब हम किसी को।
लेकिन दिल चुराने की, कोशिश होगी वो॥
मैं जलकर प्रेम दिवाना।
प्रेम का ही पुजारी बन गया॥
जपता हूँ दिन-रात एक माला।
जो कभी ना थमती है पल ना॥
अब देखना, आगे क्या होता?
वो हमको चाहेगी कुछ कहना॥
बाट जोये प्रेम की, राहें देखें तो।
प्यार दिल से एकपल ना मिटे वो॥

138.गीत-“दिल तुम्हें कह रहा”
               रतन लाल जाट
दिल तुम्हें कह रहा,
कि तुम बन जाओ ना।
मेरी धड़कन, मेरा प्यार,
हो जाऊँ मैं, तेरा दिलदार॥

एक तुम्हारी प्रेम-पताका,
उड़ती रहे मेरे जीवन में।
उसे छूने को नित उड़ूँ,
मैं इस ऊँचे गगन में॥
चाहूँ तुमको निहारना,
और राहों में देखना।
बस, हरदम चाहते रहना,
बाहों में तुमको भरना॥

दिल की बातें,
कहूँ तेरे कानों में।
आज तू सुन ले,
बातें मेरी जी भरके॥
ओ! प्यारे चमन,
खुशबू अपनी लौटा दो।
उसके लिए पागल,
बहके हुए हम तो॥
तुमसे मिलने को गगन,
प्रेम-बरसात कर रहा।

बुलाता हूँ तुमको मैं,
ले-लेकर तेरा ही नाम।
कब आओगे तुम?
मिलने को मेरे साथ॥
अपने प्यार की कसमें सारी
निभाना तुम मरने के बाद भी
तुम बिन मर जाऊँ,
एकपल भी चैन ना आये।
हरपल इन्तजार करूँ,
कब मुझको मिले प्यार तेरा?

139.गीत-“अब मत आना रे”
              रतन लाल जाट
तुझको ना बुलाये, दिल मेरा कभी।
अब मत आना रे, तू भूलकर भी॥
दिन-रात दिल मेरा, तेरी पुकार करे।
मगर तू बहरा, कभी ना सुनना रे॥
अब इन्तजार कर-करके,
बुझ गयी घड़ियाँ मिलन की।
अब आस लगाना,
पागलता के सिवा और क्या होगी?

ना रूकते हैं अश्रु कभी,
दिन-रात नैन बरसे रे।
दिल ना थमेगा,
माला प्यार की वो जपे रे॥
कहीं तू इस दरिया में बह ना जाये कभी।
देखकर प्यार तेरा वापस लौट ना आये कहीं॥

भरे उजियारे में, छा गया है अँधेरा।
कहीं आकर तू, खो ना जाये यहाँ॥
अपनी राह मत भूलना।
किसी से प्यार करना॥
कहीं ऐसा ना हो रे।
कि- भूल जाये तू वो बातें सारी।
कौन थी वो? ध्यान रखना उसका ही।।

अब ना वो जान-पहचान है।
बस, अपना एक अधूरा प्यार है॥
अकेला ही दीप जलता।
पतंगा तो कब-से उड़ रहा?
यदि पास वो आये,
तो जलकर राख हो जाये।
अब ना चाहत है कोई।
अपने अधूरे प्यार की॥

140.गीत-“चल-चल तू खेल”
              रतन लाल जाट
चल-चल तू खेल, दिल अपना लगा।
सारे जहां के संग, मस्ती ऐसी लुटा॥
अम्बर को पड़ भी जाते हैं लाले,
स्वर्ग को भी है इस बात की हैरानी।
ऐसी मस्ती है खेल में,
स्वर्ग में भी नहीं होगी॥

धरती के प्यारे, सब वतन मिलके।
आपस में खेलते हैं, खेल निराले॥
  इस खेल-खेल में, परायापन खो गया।
भेदभाव और दूरियाँ, मिट गयी यहाँ?

किसी से ना कोई शिकवा।
हार-जीत दोनों देती है मजा॥
धन का गुलाम हो ना खेलना।
बस, वतन का नाम है करना॥

141.गीत-“धीमा-धीमा”
          रतन लाल जाट
धीमा-धीमा चलना है।
जिन्दगी का स्वाद चखना है॥
धीमा-धीमा, धीमा-धीमा……………………

किसी के संग ना रूकना।
बस, तू चलना धीमा-धीमा॥
धीमा-धीमा चलना है।
जिन्दगी का स्वाद चखना है॥
धीमा-धीमा, धीमा-धीमा…………………….

प्यार करते रहना,
अपनों से मिलना।
राहों पे चलना,
बस, धीमा-धीमा॥
धीमा-धीमा चलना है।
जिन्दगी का स्वाद चखना है॥
धीमा-धीमा, धीमा-धीमा…………………

किसी की आस ना करना।
अपनों से दूर ना रहना॥
नहीं तो मुश्किल हो जाता।
जब सागर सीमा लाँघ जाता॥
धीमा-धीमा चलना है।
जिन्दगी का स्वाद चखना है॥
धीमा-धीमा, धीमा-धीमा………………….

धीमी-धीमी देखो,
नदियाँ बहती है।
सागर से मिलने को,
इन्तजार में धीरे-धीरे॥
धीमा-धीमा चलना है।
जिन्दगी का स्वाद चखना है॥
धीमा-धीमा, धीमा-धीमा……………….

किसी बात की, जल्दी ना करना कभी।
हो जाता है हल्ला, जब बात बिगड़ जाती॥
धीमा-धीमा चलना है।
जिन्दगी का स्वाद धीमा है॥
धीमा-धीमा, धीमा-धीमा…………….

कानों में कहना है,
आँखों से छूना है।
दिल के कहने से,
हमें कुछ करना है॥
धीमा-धीमा चलना है।
जिन्दगी का स्वाद धीमा है॥
धीमा-धीमा, धीमा-धीमा………………………

142.गीत-"दिल मेरा घबराने लगा”
                   रतन लाल जाट
दिल मेरा घबराने लगा।
हुई मन में एक चिन्ता॥
अब कैसे संभालूँ अपने को?
रोक ना सकूँ खुद को॥
जाऊँ तो मैं जाऊँ कहाँ?
अब मेरा यहाँ है क्या?

लेकिन मालूम ना किसी को,
यहाँ कोई नहीं है ऐसा वो।
अब उसके सिवाय मुझको,
एकपल भी नहीं जीना हो॥
चाहे कुछ भी होगा।
मरना भी पड़ जायेगा॥

रहूँ मैं खोया-खोया,
पागल-सा एक बेगाना।
पूछे कोई मुझसे हाल अपना,
मगर तुम-सा कोई नहीं यहाँ॥

143.गीत-“कॉलेज के बाहर”
              रतन लाल जाट
कॉलेज के बाहर, बैठकर हम।
इन्तजार करें कि- कब आओगे तुम?
जब तुम आओगे,
तब ही हम जायेंगे।

गार्डन में बैठेंगे,
चाय-नाश्ता करेंगे।
थोड़ा नाच-गान करके,
घर अपने लौट जायेंगे॥

जब हम घर चलेंगे,
तो कैसे जुदा होंगे।
सारी रात इन्तजार में कटेगी फिर।
मिलेंगे जल्दी होते ही सुबह॥

कॉलेज तो एक नाम,
पढ़ने-लिखने का नहीं काम।
वरना है यहाँ अब,
हँसी-खुशी का राज॥

ये दिन जीवन में बार-बार
नहीं मिलेंगे हमको यार।
जी भरके जी लो आज
मिलन के पल बचे हैं चार॥

144.गीत-“प्यार में अकेले ही”
               रतन लाल जाट
प्यार में अकेले ही बातें की जाती है।
दूर रहकर भी मुलाकातें हो जाती है॥
बिन कहे सारा हाल समझ आता है।
सपने में ख्वाब नजर आने लगता है॥

हकीकत है यह प्यार की कहानी।
प्यार ही जाने कोई समझे नहीं॥
कैसे दिन गुजरता है और रात कटती?
कितना सताती है हरपल याद उसकी?
जो दुनिया से दूर जाकर रोते हैं।
बस, उसमें ही एक दुनिया देखते हैं॥

श्वाँसें अपनी उसकी धड़कन से चलती।
उसकी हँसी अपनी दुनिया को सजा देती॥
बिन उसके स्वर्ग भी बेगाना लगता है।
उसके जीते जी हमको भी जीना है॥

प्यार से ही दुनिया चलती है।
दोस्ती में सबकी आत्मा मिलती है॥
रब को भी ये कहानी
बड़ी प्यारी लगती है।
तभी तो रिश्तों से ही
तकदीर अपनी सजती है॥

145.गीत-“बरसों के बाद”
             रतन लाल जाट
बरसों के बाद भी उसको देखा,
तब भी अपना दिल धड़का था।
क्यों? मेरी समझ में यह नहीं आया।
तुमको मालूम हो तो बताओ ना॥

‘क्या बताऊँ? कुछ कहा नहीं जाता।
अब कहना भी मुझको तुमसे है क्या?
तुम्हें देखते ही मेरे,
होश उड़ जाते हैं।’
सोच रहा हूँ मैं,
ऐसा तो हाल मेरा है।
तुम कैसे सुन लेती हो?
मेरे दिल की धड़कनें॥
कब मेरे दिल में आ,
सारी बातें जान ली बता॥

‘आज देखा मैंने अपने ही नैनों को।
जो दूर रहकर भी देख लेते तुमको॥
मैं सोचती थी कि- नयन मेरे
तुमको डरायेंगे।
लेकिन ये शातिर तो
तेरे ही हो गये हैं॥’
तेरे इन नैनों ने दिल की,
बता दी है मुझको बातें सारी।
सारा जहां ढ़ूँढ़ लिया।
पर कहीं ना मिला तेरे जैसा॥

‘देखती हूँ मैं रातभर तेरे ही सपने।
शायद ही तेरा अन्दाज सच्चा है॥’
जिस दिन होगी तू मेरी, मैं तेरा।
दिल में दिल अपना खो जायेगा॥

‘ये नयन वो चेहरा जब देखेंगे।
तब मेरा ही सपना हम पायेंगे॥’
अब रूको, कुछ ना बोलो।
एक बात कहूँ, जरा सुनो॥
सच है क्या? आज मैं बताऊँगा॥

‘नहीं, सुन ली मैंने कब-से ही?
सारी बातें तेरे इस दिल की॥
अब और बताओगे क्या?
सारी हकीकत मैं जान गया॥’

146.गीत-“वो चेहरा”
        रतन लाल जाट
वो चेहरा, जिसकी श्यामलता।
वो आँखें, जिनकी मदमस्ती,
कोयल-सी है वाणी उसकी॥

वो लम्बा-पतला छरहरा बदन।
यहीं-कहीं लगता है सयानापन॥
चाल में ताल है।
हाल में मस्त है॥
काल से ना डरे,
बस, खोयी है धुन में॥
सारा जहां है उसका,
लेकिन वो जहां में अकेली।
पगली है वो खुद नहीं,
औरों को घायल कर देती॥

कुछ ना समझे वो,
हम पर करे ईशारे।
वरना सात जन्मों तक
मिलना ही मुश्किल है॥
लेकिन थोड़ी-सी,
है भोली-भाली।
वो अलबेली,
वो मस्तानी।।
धरती से अम्बर तक
है नटखट बड़ी॥
वो राधा होकर कृष्णा
या है अप्सरा स्वर्ग की॥
वो आशिकी है मेरी।
जो दुश्मन बनी जान की॥

उस जैसी मैं खोजूँ कहाँ?
हर डगर लगती है सूनी।
हर गाँव और शहर मैं गया,
फिर भी वो छाया मिली नहीं॥
रब सदियों तक उसको,
आँखों में मेरे बसा दे।
खूब जलाया है दिल,
चाहे तो और जला दे॥
पिया! तू मेरी पिया!
सारे जहां में अकेली।।

147.गीत-“खुश रहो, कुछ करो”
                रतन लाल जाट
खुश रहो, कुछ करो,
मानव तुम जग में।
जो भी करो, अच्छा करो,
दिल की आवाज सुन ले॥
तुम ना सोचो कि-
हम जो करें, उसे कोई ना देखे।
लेकिन जग में एक वो
सच्चा है, जो सबको ही देखे॥

एक वो जगता है, तो कभी ना सोता है।
हमेशा आँखें उसकी, हमको देखती है॥
वो आँखें कितनी प्यारी है?
जो सब ही जानती है।
लेकिन वो सामने आके,
छिपकर सबको देख लेती है॥

साथ किसी का निभाओगे,
तो वो भी सदा साथ देगा।
आँसू पोंछोगे किसी के,
तो आँखों को खुशी वो देगा॥
यह सबकुछ काम तेरे,
देखकर होती खुशी है।

ना डरना कभी किसी से।
क्योंकि वो अपने साथ है॥
फिर क्यों आज हम रूके हैं।
सर्द-गर्म हवाओं को देखके॥
चलो, उस रस्ते पर,
जहाँ अपनी मंजिल है।
और आगे बढ़ो,
काँटों भरी डगर में।।

जो देता है खुशियाँ सभी को,
तो फिर भला क्यों दुखी है वो?
ऐसा कहीं हमने देखा नहीं है,
जो सुख देकर दुख पाता है॥
खुश रहो, कुछ करो,
मानव तुम जग में।

148.गीत-“दो चोटी वाली”
            रतन लाल जाट
दो चोटी वाली, संग अपने आती।
कभी वो रूकती, हमको चलाती॥

मन में वो यूँ, रह-रहकर सोचती।
संग मैं ना गयी, तो आज क्या बीतेगी?

लेकिन रोक ना पाती, कभी वो अपने को।
चलकर खुद आ जाती, धीरे-धीरे पगली वो॥
दुप्पटा उड़ाती-सी, इंतजार में मुझको देखती।
पीपल की छाया में, लगाते हुए टकटकी॥

तब देखकर उसे पागल मैं हो जाता
कहीं वो मुझको देख ना ले, छुप जाता
फिर उड़ाता मैं कागज रंग-बिरंगे।
जो छन-छनकरके गिर नीचे आते॥
धीरे-धीरे उसके आँचल में ही।
जैसे प्रेम-खत हैं मेरे वही॥

जो कभी कदम उसके चुमते।
तो कभी आँचल में छुपते॥
और पास आकर वो अपनी।
बातें कहना शुरू कर देती।।

फिर क्या कहना?
एक-दूजे को।
कजरारे नैन उसके,
हलहल मचाते दिल में॥
हाल एक-दूजे का पलभर में ही
दिल ही दिल में जान जाते तभी॥

149.गीत-“क्या तेरी बात का जादू?”
                    रतन लाल जाट
क्या तेरी बात का जादू?
सारी रात अकेला मैं जागूँ॥
बात तेरी कानों में,
गूँजे सदा ही मेरे।

क्या हाल है?
क्या बताऊँ मैं?
कुछ बोल सकता नहीं।
कोई समझता है नहीं॥
बस, आँखें में ही नजर आते।
वो पल, जब हम मिले थे॥

जिन्दगी को, किसी की तलाश है।
नैनों में, बस तेरा ही प्यार है॥
इस प्यार के नाम पर
चलता है सारा संसार
प्यार के बिना इस दुनिया में,
जिन्दगी नरक बन जाती है।

स्वर्ग की मस्ती भी,
नरक-सी लगने लगती।
यही बात मुझको,
समझ में आती नहीं।।
बताओ, मेरी पिया तुम्हें,
यह सब मालूम ह॥

150.गीत-“मेरी आँखों में है वो तस्वीरें”
                     रतन लाल जाट
मेरी आँखों में है वो तस्वीरें,
जो आज उभर आयी।
हमने कभी खींची ना है,
बस, अपनेआप ही खींच गयी।
यहीं बात सोचकर मुझको,
आज रूलाती है वो।

क्या करूँ? इन यादों में।
अपना एक इतिहास है॥
और अब वही यादें,
मेरा सपना बन गयी हैं।
हाय! क्या करूँ? यादों का,
जो मुझसे कभी दूर ना जाये॥

जिसको मन्त्र पढ़ाने मैं गया।
उसने मन्त्र मुझ पर अपना चलाया॥
जाने हमारे मन में था क्या?
रिश्ता नया हमारे बीच जुड़ गया।।
उस रब की कसम है।
हमारे मन में कुछ नहीं है॥
बस, दिल का नाता है।
बिना इसके जीना अधूरा है॥

बीती कुछ यादें आँखों से,
आँसू की दो बुन्दें ढ़ुलकाये।
तो कभी खट्टी-मीठी बातें,
प्यार का एक सागर बहाये॥
हमने साथ मिलकर जाना।
एक-दूसरे को खूब परखा।।
आज हम दिलों में दर्द लिए।
क्या कभी जुदा हो सकेंगे॥

मेरे दिल में एक सपना है।
उसमें प्यारा संसार बसा है॥
बस, यही मेरी तमन्ना है।
इनसे ही जीवन बना है॥

हैं ऐसी बातें कभी मुझको स्वीकार नहीं।
जो अच्छा करने के बजाय बिगाड़ती॥
इसीलिए तो आज आँखें,
आधी रात होने पर भी ये।
नींद से निडर होके,
यादों की बारात सजा रही है॥

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जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: हिन्दी गीत विविधा भाग 1 : रतन लाल जाट
हिन्दी गीत विविधा भाग 1 : रतन लाल जाट
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