सहस्त्रार्जुन का नर्मदा जल प्रवाह रोकने पर रावण की पूजा भंग होना - आत्माराम यादव पीव

SHARE:

सहस्त्रार्जुन का नर्मदा जल प्रवाह रोकने पर रावण की पूजा भंग होना आत्माराम यादव पीव किसी युग-काल के नायक रहे व्यक्तित्व के जीवन में घटित कर...

सहस्त्रार्जुन का नर्मदा जल प्रवाह रोकने पर रावण की पूजा भंग होना

आत्माराम यादव पीव

किसी युग-काल के नायक रहे व्यक्तित्व के जीवन में घटित कर्म के पहलू सुख-दुख, पाप-पुण्य, धर्म-नियति, श्राप-वरदान ओर उनके पुरुषार्थ तथा उसकी कृपा के साक्ष्य, उस काल के नायक-खलनायक के व्यक्तित्व-कृतित्व के करणीय-अनुकरणीय चरित्र का सृजन करते है। ऐसे महान व्यक्तित्व के जीवन चरित्र की कथायेँ अनगिनत पीढ़ियों से चली आने की परंपरा भी समाज में है तो दूसरी ओर उनके जीवन की यथार्थ गाथायेँ ऋषि मुनियों के ग्रन्थों में प्रामाणिकता के साथ मिलती है लेकिन हम ही है जो समयाभाव के अभाव में रामचरित्र मानस, श्रीमदवाल्मीकि रामायण जैसे पवित्र ग्रन्थों की महानता तो स्वीकार कर लेते है लेकिन इनकी गहराई में छिपे काल ओर क्षैत्र के इन महानायकों के विराट-विपुल व्यक्तित्व के जीवन गाथा का पता लगाने में सदियों पीछे रह जाते है।

दसानन रावण ओर राजा सहस्त्रार्जुन के नाम से यह समाज भलीभाँति परिचित है किन्तु जहा राजा सहस्त्रार्जुन के आलोकिक दिव्यता का विशाल परिमाप को कुछेक वर्ग  ने उनके व्यक्तित्व से उनकी पहचान स्थापित करने के लिए उन्हे अधिग्रहित कर उनके साथ अन्याय किया है वही पर उनके अतुलित बल प्रदर्शन से किए गए असंभव कार्यों पर दृष्टि नही डाली है। ऐसे ही हैहय वंश में माहिष्मति नगरी के राजा; सप्त द्वीपेश्वर, सातों महाद्वीपों के राजा होने के कारण; दशग्रीव जयी, रावण को हराने के कारण और राजराजेश्वर, राजाओं के राजा होने के कारण सहस्रबाहु अर्जुन, सहस्रबाहु कार्तवीर्य या सहस्रार्जुन नाम से विख्यात महावली द्वारा  नर्मदा के विशाल वेग को अपनी भुजाओ से रोकने का उल्लेख आदिकवि वाल्मीकि जी द्वारा किया जाना ओर उस पौराणिक कथा को अगस्त मुनि के द्वारा भगवान श्रीराम जैसे श्रोता का सुनना अपने आप में अद्वितीय है।

महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण में नदियों में श्रेष्ठ नदी, नर्मदा को पवित्र नदी माना है जो इस धरती पर नदी संस्कृतियो को जन्म देने वाली ओर विंध्यपर्वत से बहती पश्चिम समुद्र में गिरती है। एक समय लंकापति रावण अपने मद में चूर्ण धरती के राजाओ को परास्त करते हुये स्वर्ग के सामान दिखने वाली माहिष्मती नगरी (वर्तमान नाम महेश्वर मध्यप्रदेश) पहुचा जहा हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन, जिनकी एक हजार भुजा होने से उंनका दूसरा नाम कार्तवीर्य अर्जुन व सहस्त्रबाहु अर्जुन भी था जो उस समय अपनी रानियो के साथ नर्मदा में जलक्रीडा कर रहे थे। रावण माहिष्मती नगरी में आकार बोला- “”कहा है यहा का राजा सहस्त्रबाहु””  उसको सूचित करो कि मैं रावण हूँ ओर युद्ध की लालसा लेकर युद्ध करने आया हूँ। राजा के मंत्रियो ने रावण को कहा कि हमारे राजा इस समय राजधानी में नहीं है, जबाब सुनकर रावण वहाँ से चला गया। रावण के पराक्रम का वर्णन अगस्तमुनि ने अयोध्यापति श्रीराम को सुनाया जिसे महर्षि वाल्मीकि जी ने  उत्तरकाण्ड के इकतीसवे व बत्तीसवे सर्ग में रहस्योदघाटन किया है कि सहस्त्रार्जुन ने अपने भुजबल से नर्मदा के प्रवाह को रोक दिया था जिससे जल पीछे कि ओर लौटने लगा जहा रावण नर्मदा के शीतल जल में स्नान कर नर्मदा तट की रेती पर शिव पूजा करने जा रहा था ओर तब उसकी पुजा सामग्री नर्मदा के उल्टे प्रवाहित जल में बह गई तो वह क्रुद्ध हो गया ओर सहस्त्रार्जुन से युद्ध करने चल पड़ा।

हर्षि वाल्मीकि जी ने दसानन रावण के द्वारा नर्मदा के पावन जल में स्नान करने ओर नर्मदा कि प्रशंसा का विस्तार से उल्लेख किया है। रावण ने नर्मदा स्नान ओर पुजा से पहले ही राजा सहस्त्रार्जुन को युद्ध की चुनौती दी थथी लेकिन उनके न मिलने से रावण लौट गया था। युद्ध से खाली लौटे रावण ने अपने पुष्पक विमान से नीचे पावन नर्मदा को देखा जो दसानन को विंध्याचल पर्वत के स्फटिक के समान चमकने वाली सेकड़ों श्वेत रंग के झरने से अट्ठहास करने वाली पर्वतश्रेर्णिओ के बीच अन्य नदियों के प्रवाहित दिशा के विपरीत पूर्वदिशा से पश्चिमदिशा की ओर प्रवाहित दिखी। पापमोक्षदायिनी नर्मदा के शीतल जल ने रावण का मनमोह लिया ओर उसका मन नर्मदा स्नान करने को लालायित हुआ।

महर्षि वाल्मीकि जी ने श्रीमदवाल्मीक रामायण के उत्तरकाण्ड पूर्वार्द्ध के एकत्रिंश: सर्ग: में इसका सुंदर चित्रण किया है कि –“” फुल्लद्रुमकृतोंत्त्सा चक्रवाक युगस्तनीस। विस्तीर्णपुलिनश्रोणी हंसावलि सुमेखलाभ॥22॥ पुष्परेणवनु लिप्तांगी जलफेनामलांशुकाम। जलावगाहसुस्पशार्न फुल्लोत्पलशुभेक्षणाम॥23॥“” अर्थात- मनमोहने वाली नर्मदा ने मानों सुंदरी कामिनी कि तरह कांति धारण कर ली हो ओर वहाँ पुष्पित वृक्ष नर्मदा के सुंदरतम आभूषण से लगे ओर चक्रवाक उसके कुच, विशालतट उसके नितंब ओर हंसपंक्ति उसकी करधनी जैसी शोभायमन हो रही थी। पुष्पपराग उसका अंगरास,जलफ़ेन उसका सफ़ेद पट, स्नान सुख नर्मदा का स्पर्शसुख ओर पुष्पित कमल ही मानो नर्मदा के नेत्र हो। “”पुष्पकादंववरुहांशु नर्मदाम सरिताम वराम। इष्टामित्र वराम नारीमवगाहदशानन:॥24॥

नर्मदा के मनोरम दृश्य देखकर रावण तुरंत पुष्पक से उतर गया ओर उत्तमा प्रियतमा किसी स्त्री कि तरह नदियों में श्रेष्ठ नर्मदा में स्नान के लिए मंत्रियो सहित मुनिसेवित नर्मदा के तट पर बैठ गया। इससे स्वमेव सिद्ध है कि नर्मदा शुरू से ही साधकों के लिए साधना का साक्षात स्वरूप ओर लोक संस्कृति की अधिष्ठात्री रही जो सभी को अपने तपोभूमि पर तृप्त करती आई है। कपिल धारा जलप्रपात के के कुछ आगे दूधधारा जलप्रपात स्थल को दुर्वासा ऋषि की तपोभूमि माना है जहा गुफा में ऋषियों द्वारा तपस्या की जाती रही है।

वाल्मीक रामायण में कई आलोकिक,अद्भुत प्रसंगों का आधिक्यतामयी वर्णन मिलता है जिसमें पुण्य सलिला माँ नर्मदा के जल की पावनता को लेकर गहन अंतर्दृष्टि का विवेचन रावण द्वारा करना सुखद जान पड़ता है। “”प्रख्याय नर्मदान सोहय गंगेयमिति रावण: । नर्मदा दर्शने हर्षमाप्तवान्स दसानन:॥26॥ नर्मदा के पावन जल में स्नान करने के बाद रावण ने नर्मदा को गंगा की तरह पवित्र मोक्षदायिनी बतलाकर नर्मदा के निसर्ग सौन्दर्य की प्रशंसा करते हुये नहीं आघाया ओर स्वीकार किया कि नर्मदा के दर्शन से उसको बहुत हर्ष हुआ है। नर्मदा स्नान के बाद रावण अपने महावली मंत्रियो प्रहस्त,महोदर, धुरमाक्ष, मारीच,सारण ओर शुक से बोला कि मुझसे भयभीत होकर पवनदेव नर्मदा के जल से स्पर्श कराकर शीतल सुगंधयुक्त वायु प्रवाहित कर मेरी थकावट दूर कर रहा है।

नर्मदा के प्रवाह कि ओर देखकर रावण कहता है कि मगरमच्छ ओर पक्षियो से युक्त यह मनोहारिणी नर्मदा, तरंगों से व्याप्त होने पर भी डरी हुई ललना के सामान दिखाई दे रही है। अनेक राजाओ से युद्ध के बाद तुम सभी के शरीर में रक्त लिपटा है तुम सब सुखदायिनी ओर कल्याणकारी नर्मदा के पावन जल में स्नान कर अपने पापों को बहा दो। तब तक मैं इस शारदीय ज्योत्स्ना के समान स्वर्णमयी प्रभा बिखेर रही रेती पर कपर्दी महादेवी की पूजा के पुष्प ओर भेंट सजाता हूँ। रावण के सभी महावलियों ने स्नान के बाद नर्मदा की रेती पर पुष्प का अम्बार लगा दिया जो किसी पहाड़ से कम नजर नही आ रहा था। पुष्प का अम्बार लगते ही रावण नर्मदा में स्नान करने ऐसे उतरा जैसे कोई मस्त हाथी उतरता  है । नर्मदा स्नान के बाद जल में ही रावण ने जपने योग्य उत्तम मंत्रोच्चार कर बाहर आया ओर गीले वस्त्रों को उतार कर सफ़ेद वस्त्र धारण कर पूजा के लिए स्थान निश्चिंत करने के लिए रावण ने हाथ जोड़े ओर पूजा के लिए स्वर्ण निर्मित शिवलिंग जो वे साथ रखते थे, उस शिवलिंग को नर्मदा कि रेती की वेदी बनाकर उस वेदी पर प्रतिष्ठित किया ओर स्थापित भक्तजनों के कष्ट हरने वाले, वरदानी, चंद्रभूषण श्री महादेव जी की सभी प्रकार से पूजा कर रावण शिवलिंग के समक्ष नर्मदा तट पर नाचने लगा।

उसी समय राजा सहस्त्रार्जुन अपनी अनेक रानियो के साथ नर्मदा में जलक्रीड़ा करते हुये अपनी हजार भुजाओं की ताकत को आजमाने का विचार कर नर्मदा कि जलधारा को अपनी भुजाओं के द्वारा रोकना शुरू किया ओर अपने शरीर को पर्वताकार कर नर्मदा के प्रबल वेग को रोक लिया । वाल्मीकि जी ने लिखा है कितासान मध्यगतों राजा रराज च तदार्जुन:।करेणुना सहस्त्रस्य मध्यस्थ इव कुज्जर:॥3॥ जिज्ञासु स तु वाहुनाम सहस्त्रस्योत्तम बलम। रुरोध नर्मदावेङ्ग्म बाहुभिव्र्रहूभिवृत:॥4॥ कार्तवीर्यभुजसंक्त तज्जलम प्राप्य निर्मलम। कुलोपहारम कुर्वाणम प्रतिस्त्रोत: प्रघावति॥ 5॥ जैसे ही राजा सहस्त्रार्जुन ने अपनी हजार भुजाओ को विस्तार देकर नर्मदा का जल प्रवाह रोका तो उससे जल उमड़कर पहले नर्मदा के तटो को डुबाने लगा फिर तटों के बंधों को लांघकर चारों ओर तबाही मचाने लगा। रावण शिवलिंग की पूजा में निमघ्न नाच रहा था ओर पुष्प आदि चढ़ा रहा था, उसने देखा कि उसके मंत्रियों द्वारा लगाए गए पुष्प उस उल्टे प्रवाह में बह गए । चारों ओर बाढ़ जैसे हालत बनते देख रावण कि पूजा में विघ्न उत्पन्न हो गया उसने नर्मदा नदी कि ओर घूर कर देखा जैसे इस प्रतिकूल आचरण के लिए वे ही दोषी हो?

रावण ने देखा कि पश्चिम कि ओर प्रवाहित नर्मदा तीव्र वेग से उल्टे पूरब दिशा कि ओर बहने लगी। कुछ समय बाद नर्मदा शांत होती चली गई ओर जो जल का प्रवाह पूरब कि ओर गया था वह वापिस पश्चिम कि ओर जाने लगा यह देख रावण ने अपने मंत्री शुक ओर सारण को इसका कारण जानने के लिए भेजा। शुक ओर सारण आकाश से उड़ते उड़ते पश्चिम दिशा कि ओर निकले दो देखा कि राजा सहस्त्रार्जुन अपनी रानियो के साथ जल क्रीडा करते हुये अपनी हजार भुजाओ से जल को रोक रहा है छोड़ रहा है। शुक ओर सारण ने यह दृश्य देखकर वापिस रावण को पूरा वृतांत सुनाया। चूकि रावण नर्मदा स्नान ओर पूजा से पहले युद्ध की इक्च्छा लिए राजा सहस्त्रार्जुन को चुनोती देने आया था लेकिन जब उसने राजा सहस्त्रार्जुन द्वारा अपना बल का प्रदर्शन नर्मदा के प्रवाह को रोकने का प्रमाण देखा तो उसकी युद्ध करने कि लालसा तीव्र बढ़ गई ओर वह महिष्मती नगरी के पास नर्मदा में जलक्रीड़ा कर रहे राजा सहस्त्रार्जुन को ललकारने लगा।

रावण ने माहिष्मती नागरी में प्रवेश करते ही उत्पात मचाया ओर चारों ओर प्रचण्ड धूल का गुब्बारा उठने लगा ओर रावण ने आकाश से घनघोर रक्त कि बरसात करके अपनी माया का प्रदर्शन किया। राजा सहस्त्रबाहु को उसके मंत्रियों ने सूचना दी तब उन्होने नर्मदा स्नान कर रही रानियो को नर्मदा जल से बाहर महल में भिजवा कर रावण कि ललकार का जबाव देने के लिए गदा हाथ मे लिए प्रलयकारी अग्नि के समान महाभयंकर रूप धारण कर भभक उठा ओर रावण के मंत्रियो ओर राक्षसों की माया को ऐसे काटने लगे जैसे सूर्य अंधकार को काटता है। सभी राक्षसों को बुरी तरह परास्त करने के बाद हजार भुजा वाले राजा सहस्त्रार्जुन ने बीस भुजावाले रावण कि चुनौती स्वीकार कि ओर फिर दोनों में भीषण महायुद्ध छिड़ गया। दोनों महाबली एक दूसरे पर गदा का प्रहार करते तो आकाश में बिजली चमक उठती थी तब राजा सहस्त्रार्जुन ने रावण कि छाती पर गदा का प्रहार किया किन्तु रावण वरदानी होने से उसकी छाती से लगने के बाद गदा दो दुकड़ों में विभक्त हो गई।चोट खा-खा कर जब रावण निस्तेज होने लगा तब राजा सहस्त्रार्जुन ने अपनी हजार भुजाओ में रावण को बांध लिया जैसे गरुण के आगे सर्प नतमस्तक हो जाता है वैसे ही रावण राजा सहस्त्रार्जुन के सामने परास्त हो उनके बंधन में कैद हो गया।

राजा सहस्त्रार्जुन ने रावण को बंदी बनाकर अपनी राजधानी ले आया। दशग्रीव रावण के बंदी होने से पूरे संसार में खलबली मच गई, देवताओं ने खुश होकर राजा कार्तवीर्य अर्जुन पर पुष्प वर्षा कि वही इन्द्र आदि प्रसन्न हुये किन्तु रावण के बंदी होने पर महर्षि पुलस्त्य का पुत्रस्नेह जाग गया ओर वे राजा सहस्त्रार्जुन के पास पहुचे। राजा ने महर्षि पुलस्त्य की अगवानी कि ओर उन्हे यथोचित सम्मान देकर उनकी पूजा अर्चना कर अपने एव अपने कुल का गौरव माना।

महर्षि पुलस्त्य ने अपने आने का कारण राजा सहस्त्रार्जुन को बताकर पहले कहा आपकी चारो युगों में कीर्ति बढ़ गई है जो आपने मेरे पौत्र रावण को जीत लिया है। पुत्रकस्य यश:पीतम नाम विश्रावित्म त्वया। मध्द्वाक्याघायच्या मानोघा मुञ्च दसानन॥16॥ पुलस्त्ज्ञानं पृगृहास्थ न किंचन वचोर्जुन। मुमौच वै पार्थिवेन्द्रों राक्षसेंदरम प्रहष्टवत॥ 17 ॥ महर्षि पुलस्त्य द्वारा राजा से रावण को छोडने का आग्रह करने पर राजा सहस्त्रार्जुन ने तत्काल रावण को कैद से मुक्त कर उल्टे उसका सत्कार किया ओर महर्षि पुलस्त्य के सामने अग्नि को साक्षी मान दशग्रीव रावण ओर राजा सहस्त्रार्जुन दोनों ने अपने मन को शुद्ध कर मित्रता कर ली। जिसे वाल्मीकि जी ने लिखा है – स त प्रमुच्य त्रिदशारिमर्जुन:। प्रपूज्य दिव्याभरणस्त्रगम्बरे॥ अहिंसक सख्यमुपेत्य साग्रिकम, प्रणम्य तं ब्रम्हसुतं गृयाहम ययों॥ 18॥

यह सारा प्रसंग अगस्तमुनि के मुख से सुनकर अयोध्यापति राजा राम ने के मन में कौतूहल पैदा होने लगा तब श्रीराम ने रावण के जीवन के ऐसे सारे प्रसंग सुनाने को कहा जो अगस्त मुनि ने एक एक कर सब श्रीराम को सुनाये। जिसमें नर्मदा जल प्रवाह को राजा सहस्त्रार्जुन द्वारा रोकने ओर रावण के नर्मदा स्नान कर नर्मदा तट पर शिवपुजा का विधान जैसे प्रसंग भी शामिल थे।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: सहस्त्रार्जुन का नर्मदा जल प्रवाह रोकने पर रावण की पूजा भंग होना - आत्माराम यादव पीव
सहस्त्रार्जुन का नर्मदा जल प्रवाह रोकने पर रावण की पूजा भंग होना - आत्माराम यादव पीव
https://1.bp.blogspot.com/-J14_qvVV3kA/XhyDctLQs6I/AAAAAAABQoA/Nr5qF9gdx54eellntOFzXeJMie1q-qFJQCK4BGAYYCw/s320/IMG_20191029_133317-760365.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-J14_qvVV3kA/XhyDctLQs6I/AAAAAAABQoA/Nr5qF9gdx54eellntOFzXeJMie1q-qFJQCK4BGAYYCw/s72-c/IMG_20191029_133317-760365.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2020/04/blog-post_636.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2020/04/blog-post_636.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content