गुरुवार, 23 अगस्त 2012

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -56- जसबीर चावला की कहानी : खंडित व्यक्तित्व

कहानी

खंडित व्यक्तित्व

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जसबीर चावला

अनमिका ने हाथ हिलाकर वेव किया. अवी ने भी एक हवाई चुम्बन उसकी और उछाल दिया, कार स्टार्ट की और ऑफिस को चल पड़ा. अनामिका गुनगुनाती घर के होम थिएटर में अल्लारखां और जाकिर हुसैन की तबले पर जुगलबंदी सुनने लगी.

अनामिका लेडी श्रीराम कॉलेज से अंगरेजी में एम. ए. सांस्कृतिक गतिविधियों में अव्वल. हर फन में माहिर. हर खेल को न केवल खेल ले, बल्कि उसकी बारीकियों को भी गहराई से जाने. एक ओर जहाँ दमदार अमेरिकी हाथों से खेले जाने वाले फुटबाल में रूचि ले वहीं इंग्लेंड के खिलाड़ी बेकहम की चर्चा कर ले. सचिन के बल्ले, सानिया मिर्जा ओर सायना नेहवाल के खेल की कलात्मकता पर बराबर प्रकाश डाल ले.

साहित्यिक अभिरुचियों की धनी, ललित कलाओं में गहरी पैठ. चित्र भी बना ले, नाटकों में भाग ले, कत्थक भी कर ले. कॉलेज के मंचों पर भाषण देने पर तो उसका जबरदस्त अधिकार था.

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रु. 15,000 के 'रचनाकार कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन' में आप भी भाग ले सकते हैं. पुरस्कार व प्रायोजन स्वरूप आप अपनी किताबें पुरस्कृतों को भेंट दे सकते हैं. अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2012

अधिक व अद्यतन जानकारी के लिए यह कड़ी देखें - http://www.rachanakar.org/2012/07/blog-post_07.html

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उसके घर का एक कमरा प्रतियोगिताओं से जीती हुई ट्राफियों, प्रश्स्तिपत्रों से भरा पड़ा था. सुन्दर, इकहरे बदन वाली अनामिका एक ओर जहाँ मदमस्त, अल्हड़ थी वहीं दूसरी ओर गंभीर तथा बिंदास भी. स्वाभिमानी ओर स्वनिर्णय लेने में सक्षम अनामिका से लड़के खोफ भी खाते थे ओर सम्मान भी करते थे. वह एक परिपूर्ण व्यक्तित्व की स्वामी थी.

अवी उसका पति एक मल्टीनेशनल कम्पनी में उच्चाधिकारी, मोटी तनखाह, जीवन के सारे सुख कदमों में. परवाह करने वाला पति. दोनों की शादी अरेंज्ड मेरिज थी. अवी का परिवार उसे देखने आया था. उसकी माँ ने पूछा था उसकी अभिरुचियाँ क्या हैं, अनामिका की माँ उसे उस कमरे में ले गई जहाँ विभिन्न गतिविधियों के फोटू प्रमाणपत्र टंगे थे. वे खुश हो गयी. कहने लगी उसे ऐसी ही बहू चाहिए. उनकी विवाहित बेटी नंदिता नृत्य कला में प्रवीण है ओर कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेती है.

विवाह पश्चात् अवी सिंगापूर हनीमून के लिए जाना चाहता था, पर प्रकृतिप्रेमी अनामिका ने भूटान का प्रस्ताव रखा. दोनों दिल्ली से विमान से

बागडोगरा पहुंचे. वहां भूटान के प्रवेश नगर फुत्शोलिंग ले जाने के लिए होटल ड्रुक की कार खड़ी थी. फुत्शोलिंग से पारो वेल्ली के रास्तें में चूखा हायड्रो प्रोजेक्ट, जहाँ विद्युत उत्पादन होता है- के पास से गुजरते हुए अवि ने उसे छेड़ा, 'मेरे प्रोजेक्ट की बिजली तो तुम हो'. अनामिका ने जवाब दिया - 'और तुम पॉवर हाउस'.

भूटान की पारो वेल्ली. दूर दूर तक पहाड़. घाटियों के बीच छोटा सा हवाई अड्डा जो बीस हजार फुट की ऊँची पहाड़ियों के बीच स्थित है. पारो

वेल्ली की जनसँख्या बीस हजार के लगभग है ओर पारो कसबे की और भी कम. एक छोटा सा उनींदा सा बाजार. थोड़े से तिब्बती संस्कृति से जुड़े सीधे सादे भूटानी भाषा बोलने वाले लोग. बाहरी अन्य संस्कृतियों से कटा भूटान ओर पारो. चारों ओर नीरवता तथा शांति. अवी अनामिका की पहली मंजिल पारो थी.

पारो में राष्ट्रीय संग्रहालय में उनकी लड़की गाईड के अलावा वहां कोई नहीं था. धीरे से बात करो वह भी तेज लगती थी. वह लडकी थोड़ी हिंदी जानती थी. सारा वातावरण प्रदूष्ण मुक्त साफ सुथरा.

स्थानीय लोगों से काम चलाने जितना संवाद, बाकी मौन. एक दूसरे पर अत्यधिक निर्भरता. हर बात ध्यान से सुनी जाती -जवाब दिया जाता.

अवी ने हंस कर अनामिका से कहा -'में समझ गया की तुम सिंगापूर की चमक धमक से दूर इस शांत सुरम्य स्थान पर क्यों आई हो जहाँ कोई किसी से बात करने के लिए भी तरस जाये, एक दूसरे पर इतनी निर्भरता, इतना परस्पर सहयोग, इतना विश्वास पारो में ही आ सकता था'.

अनामिका हंसकर आलिंगनबद्ध हो गई, बोली 'जानते हो भूटान संसार के निर्धनतम देशों में आता है लेकिन सुख ओर खुशी के इंडेक्स पर पहले स्थान पर है, जानते हो क्यों?

फिर खुद ही जवाब दिया-'यह देश भौतिकता की चकाचौंध से दूर है, आवश्यकताएँ कम से कम है, सुख का सम्बन्ध शरीर से ज्यादा दिल दिमाग से है'. ' ठीक कहती हो मेरी अर्थशास्त्री बीबी'- अवी ने जवाब दिया. दोनों को पारो की निर्जनता, नीरवता, शांति इतनी भाई की उन्होंने राजधानी थिम्पू जाना केंसल कर दिया. एक दूसरे को समझने ओर परस्पर निर्भरता के लिए शायद ऐसे स्थान बेहतर होते हैं.

अनामिका को ऐसा ही और क्षण याद हो आया, जब वे काहिरा में फ़राओ कोफू का पिरामिड, गीज़ा पिरामिड देखने गए. छः मिलियन टन पत्थरों से बने लगभग चार सौ पचपन फुट ऊँचे, प्राचीन सात आश्चर्यों में से एक में उसने अन्दर जाने का कहा. वे दोनों अँधेरी फट्टेनुमा सीडी से चारफुट ऊँची सुरंग से रेंगते- चलते किंग्स चेंबर तक गए. कभी अवी अनामिका का हाथ पकड़ लेता कभी छोड़ना पड़ता.

अनामिका ने कहा तुम तो हाथ छोड़ देते हो मान लो यह पिरामिड ढह जाये तो ? अवी ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया ओर कहा 'मैं

हर क्षण तुम्हारे साथ हूँ लोग कोफू को भूल जायेंगे याद करेंगे कि यह अनामिका अवी का पिरामिड है'.

अनामिका स्मृति के एक घेरे से बहार निकली और दूसरे में उलझ गई. विवाह हुए दो वर्ष हो गए थे. अभी तक गाड़ी पटरी पर ठीक चल रही थी. पर
इन दिनों निहारिका ने नोटिस किया की अवी के सोच और रुचियों में बदलाव आ रहा है. अनामिका जतिनदास के चित्रों से गहराई से अभिभूत थी. शहर की कला-वीथिका में उनके चित्रों की प्रदर्शनी में अनामिका को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. अवी ने वहां जाने से साफ मन कर दिया और क्लब चला गया, हालाँकि उस दिन क्लब जाना टाला जा सकता था. अनामिका के मन को ठेस लगी.

अनामिका देख रही थी की किसी पार्टी में आगे होकर अवी उसके विदुषी ओर सांस्कृतिक होने की घोषणा करता रहता है पर जब कोई ओर पुरुष या महिला उसकी प्रशंसा करते हैं तो अवी खिन्न सा हो जाता है.

शहर में विजय तेंदुलकर का नाटक 'घासीराम कोतवाल' प्रदर्शित हुआ. अनामिका ने दो टिकिट अवी से पूछकर मंगवाए थे. ऐन वक्त पर अवी दोस्तों के साथ गप लड़ाने कहीं ओर चला गया ओर अनामिका को खंडित मन से सहेली रूचि के साथ नाटक देखने जाना पड़ा.

शहर में हमेशा सांस्क्रतिक गतिविधियां होती रहती. अवी उनसे कन्नी काटने लगा. वह अनामिका को जिद कर पार्टियों, होटलों, क्लबों में घसीट लेता. उस दिन हद हो गई, अनुष्का शंकर का सितारवादन था. अवी उसे फिल्म ले गया.

अवी ने उसे कहा की उसकी बहन नंदिता अब डांस- वांस छोड़ चुकी है. माँ का नाम लेकर अक्सर वह उसकी अभिरुचियों की आलोचना कर देता ओर चाहता की वह वैसा करे जैसा माँ और वह चाहते हैं.

अनामिका को लगने लगा की उसके आसपास तंग घेरे बनते जा रहे हैं. लक्ष्मण रेखाएं खिंची जा रहीं हैं. निषेध के साईन बोर्ड चारों ओर टंग गए हैं और रास्ता अवी के बताये रास्ते पर ही जाता है. उसका खुद का वजूद समाप्त हो रहा है. परिपूर्ण व्यक्तित्व खंडित होकर पिघल रहा है. वह छोटी हो रही है. उसने कभी रूसो के कथन को पढ़ा था, पुरुष स्वतंत्र जन्म लेते हैं पर हर ओर बेडियों से जकड़े जाते हैं. उसे लगा कि पुरुषों  के स्थान पर आज  महिला ज्यादा सटीक होगा.


अनामिका सोचती है क्या वह भी शून्य हो जाएगी?

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