शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

अखिलेश श्रीवास्‍तव की 2 कविताएँ - हे राम, मसाला क्रिकेट और मासूम लड़कियाँ

हे राम

हर युग में लिए अवतार तुम्‍हीं, क्‍यों भूले हो कलियुग को।

हर युग में तुम्‍हारी लीला है, क्‍यों भूल गए इस युग को॥

 

राम तुम्‍हीं हो श्‍याम तुम्‍हीं, हर रूप तुम्‍हारा जान लिया।

चाहे जितने भेष बदल लो, हम ने तुम्‍हें पहचान लिया॥

 

अपने जन को रुला गए, गोकुल से मथुरा गमन हुआ।

तुम्‍हीं तो रोते फिरते थे, जब सीताजी का हरण हुआ॥

 

नैनों के बाण चलाकर तुम, ब्रज गोपिन को तड़पाए।

वो भी तीर तुम्‍हारे थे, रावण जिससे सद्‌गति पाए॥

 

त्रेता और द्वापर से ज्‍यादा, काम मिलेगा ये वादा है।

कंस पूतना रावण की, कलियुग में संख्‍या ज्‍यादा है॥

 

अब आना तो सजग रहना, कि कहाँ घर बार ठिकाना है।

अयोध्‍या में कहाँ जन्‍म लिए थे, यह भी तुम्‍हें बताना है॥

 

मसाला क्रिकेट और मासूम लड़कियाँ

 

क्रिकेट की मंडी भारत है, हर क्रिकेटर यहाँ बिकाऊ है।

जिसकी बोली लग जाती , वो करता म्‍याऊं -म्‍याऊं है॥

 

नीलाम हुए पशुओं जैसे , पैसे ने किया सब को मजबूर।

जिसने खरीदा मालिक है, क्रिकेटर गुलाम बंधुआ मजदूर॥

 

अच्‍छा हुआ मौजूद न थे, नीलामी स्‍थल पर क्रिकेटर।

ठोंक बजाकर देखे जाते , कौन सी नस्‍ल के हैं क्रिकेटर॥

 

नीलाम होने वाले खुश हैं, जो बिका नहीं उसको गम है।

ईमान धर्म, भगवान है पैसा, जितना मिले उतना कम है॥

 

देसी विदेशी सारे क्रिकेटर, अपना हुनर दिखलाएंगे।

मासूम और मजबूर लड़कियां, आईपीएल में नचाएंगे॥

 

आईपीएल अरबों का खेल है, कमी नहीं है धन की।

जीत पे ज्‍यादा पैसा है, और कीमत है हर रन की॥

 

क्रिकेट बोर्ड पैसे का दीवाना , खेल भावना कोसों दूर।

कीमत के पट्‌टे गले में बांधे , क्रिकेटर लगते हैं लंगूर॥

 

आईपीएल के हर सर्कस में , लंगूरों को मिलेगा चान्‍स।

हर चौके छक्‍के पर देखो , अर्ध नग्‍न गोरी का डान्‍स॥

 

देश के सारे प्रमुख मुद्‌दे, कुछ दिन तो भूल हम जाएंगे।

मसाला क्रिकेट और चियर गर्ल्‍स से, अपना जी बहलाएंगे

 

विवेकानंद नगर मार्ग -3 धमतरी (छत्तीसगढ़)

सम्‍पर्क 07722&232233 @09406016503

1 blogger-facebook:

  1. बडे भाई, दोनो कविताये मज़ेदार हैं, मज़ा आ गया !!!

    सच कहा है---
    नीलाम होने वाले खुश हैं, जो बिका नहीं उसको गम है।
    ईमान धर्म, भगवान है पैसा, जितना मिले उतना कम है॥

    उत्तर देंहटाएं

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