रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 11 रैवन और कौए का पौटलैच // सुषमा गुप्ता

साझा करें:

रैवन स्कागिट नदी के देश में बहुत ऊॅचे पर रहता था। वह बहुत ही आलसी था। गरमी के मौसम में जब सारे जानवर जाड़ों के लिये अपना अपना खाना इकठ्ठा कर...

image

रैवन स्कागिट नदी के देश में बहुत ऊॅचे पर रहता था। वह बहुत ही आलसी था। गरमी के मौसम में जब सारे जानवर जाड़ों के लिये अपना अपना खाना इकठ्ठा करने में लगे रहते तो वह चट्टान से पेड़ों के तनों पर और पेड़ों के तनों से चट्टान पर कूदने का आनन्द लेता रहता था।

जब कभी उसका भाई कौआ उसको गिलहरी की मिसाल दे कर उससे यह कहता कि उसको गिलहरी की तरह रहना चाहिये तो रैवन बस हॅस देता पर उसने कभी भी उस समय के जाड़े के मौसम के लिये अपने खाने की कोई तैयारी नहीं की जब वहाँ की सारी जमीन बरफ से ढक जाती।

पर अब रैवन मुश्किल में था। जाड़ा आ गया था, चारों तरफ घुटनों तक ऊॅची ऊॅची बरफ पड़ी हुई थी और उसको भूख लग रही थी। उसको खाना पसन्द भी बहुत था। अब वह किसी ऐसे साथी को तलाश कर रहा था जो उसे अपना खाना दे सके।

उसको नर गिलहरी का ध्यान आया सो वह गिलहरी के पास पहुँचा। उसके पास बहुत सारी पाइन फल की गिरी रखी थीं और उसने और भी बहुत सारा खाना अपने घर में चारों तरफ छिपा रखा था।

वह एक पुराने फ़र के पेड़ में रहता था। रैवन ने उसके घर पहुँच कर उसके घर में झाँका और बड़ी नम्रता से उससे उसको थोड़ा सा खाना देने की प्रार्थना की।

पर जैसी कि गिलहरी की आदत थी उसने उसको डाँट दिया - "तुमने गरमी के मौसम में तो कभी काम किया नहीं और जाड़ों के लिये कुछ बचाया नहीं और साथ में मेरा मजाक भी बनाया। तुम इसी काबिल हो कि तुम भूखे रहो।"

रैवन तब भालू के पास गया पर भालू तो अपनी गुफा में खर्राटे मार कर सो रहा था। उसको तो जगाना भी मुश्किल था। रैवन ने उसकी गुफा में खाना तलाश करने की कोशिश की पर सारा खाना तो भालू पहले ही खा चुका था और अब वह वसन्त आने तक सोता ही रहेगा।

अब रैवन क्या करे? वह बहुत भूखा था। कौन ऐसा हो सकता था जो उसको खाना दे सके? सारे जानवर या तो गिलहरी की तरह बहुत ही कंजूस थे और या फिर भालू की तरह सो रहे थे और या फिर ठंड की चिड़ियों की तरह दक्षिण की तरफ चले गये थे। तब उसको ध्यान आया अपने भाई कौए का, वह उसको अपना खाना जरूर दे देगा।

यह सोच कर रैवन कौए के घोंसले की तरफ चला। वहाँ जा कर कौए से बोला - "कौए भाई, चलो तुम्हारे आने वाले पौटलैच के बारे में कुछ बात करते हैं।"

कौआ बोला - "पौटलैच? कैसा पौटलैच? मैंने तो अभी पौटलैच के बारे में कुछ सोचा ही नहीं है।"

रैवन ने उसके जवाब को अनसुना करते हुए उससे पूछा - "पर हर कोई तुम्हारे पौटलैच के बारे में बात कर रहा है।क्या तुम वहाँ गाना नहीं गाओगे?"

"गाना?" कौए ने यह तो कभी सोचा ही नहीं था कि कोई उसके गाने को सुनना भी पसन्द करता है। जबकि उन दिनों कौए की आवाज ऐसी नहीं थी जैसी कि आज है। उन दिनों वह बहुत मीठी हुआ करती थी और वह बहुत सुरीला गाना गाता था।

रैवन कौए के पौटलैच के बारे में ही बात करता रहा। वह बोला - "तुम तो बहुत हुनर वाले हो। तुम्हारी आवाज कितनी मीठी है। यदि तुमने अपने पौटलैच में गाना नहीं गाया तो सारे लोग बहुत निराश होंगे।"

कौआ बोला - "लेकिन कौन सा पौटलैच? कैसा पौटलैच? क्या तुमको वाकई मेरा गाना अच्छा लगता है?"

रैवन बोला - "हमें तुम्हारा गाना बहुत अच्छा लगता है कौए भाई। इस जाड़े ने तो सारे जंगल को ठंड में जमा रखा है और हम भी जाड़े में ठिठुर रहें हैं और भूखे हैं। तुम्हारा गाना हमें इस ठंड और भूख को कुछ देर के लिये भूलने में हमारी सहायता करेगा।

अब तुम खाने का इन्तजाम करो और मैं तुम्हारे पौटलैच के लिये मेहमानों को बुला कर लाता हूँ। खाना बनाते समय तुम अपने गाने का अभ्यास भी कर सकते हो।"

कह कर रैवन तो चला गया मेहमानों को बुलाने और कौए ने जो खाना जाड़ों के लिये इकठ्ठा करके रखा था उसको बनाना शुरू कर दिया।

कौए की गाना गाने की हिचक अब जा चुकी थी और जैसे जैसे वह खाना बना रहा था वह अपने गाने का अभ्यास भी करता जा रहा था। जैसे जैसे वह दावत और अपने गाने के बारे में सोच रहा था वह बहुत ही खुश हो रहा था।

उधर रैवन सब जानवरों को कौए की पौटलैच की दावत के लिये बुलावा देता घूम रहा था। बीवर, मरमौट और भालू तो सो रहे थे और रोबिन और बतख दक्षिण की तरफ चले गये थे।

सबको बुलाते समय वह उनसे कह रहा था - "तुम मेरे पौटलैच में जरूर आना। मैंने उसकी तैयारी में बहुत मेहनत की है। रैवन के पौटलैच में बहुत सारा खाना होगा।

कौआ खाना बनाने में मेरी सहायता कर रहा है और वह गाना भी गायेगा। दावत में फ़र्न की जड़ें होंगीं, जंगली आलू होंगे, सूखे बेर होंगे, मछली होगी, माँस होगा। मेरे पौटलैच में जरूर आना बड़ा आनन्द रहेगा।"

रैवन ने गिलहरी को अपने पौटलैच में नहीं बुलाया क्योंकि उसने उसको खाना देने से मना कर दिया था पर बाकी सब जानवरों को बुलाया।

सबको बुलावा देने के बाद जब वह कौए के पास लौट कर आया तो उसने देखा कि कौआ तभी भी खाना बनाने और गाना गाने के अभ्यास में लगा हुआ था।

रैवन ने उसे बताया - "सारे जानवर आ रहे हैं इसलिये तुमको सबके लिये ठीक से खाना तैयार कर लेना चाहिये। वे सब दूर दूर से आयेंगे तो भूखे होंगे। तुम्हारा गाना भी बहुत अच्छा है इसलिये तुम्हारा पौटलैच भी बहुत ही बढ़िया रहेगा।"

सारे जानवर आने लगे और रैवन ने उन सबका अपने पौटलैच में स्वागत किया। उन जानवरों में हिरन था, पहाड़ी बकरा था, चूहा था, खरगोश था। सारे मेहमानों को बिठाया गया और खाना लाया गया।

कौआ भी बैठा और वह अपना खाना शुरू करने ही वाला था कि रैवन ने खाना खाने से पहले उससे गाना गाने की फरमायश की। उसने कौए से कहा - "कौए भाई, भरे पेट गाना गाने से ठीक नहीं रहता। तुम खाना खाने से पहले अपना गाना सुनाओ।"

सो कौए ने खाना छोड़ कर गाना गाना शुरू कर दिया। जब भी वह एक गाना गा कर बीच में रुकता तो रैवन उसको फिर और गाना गाने के लिये उकसाता और कौआ फिर से गाना गाने लग जाता।

उसके मेहमान भी जो उसके खाने से अपना पेट भरने में लगे हुए थे उन्होंने भी कौए से गाना गाने की बार बार जिद की। वह इतने सारी फरमायशों को ना नहीं कर सका और इस तरह कौआ गाना गाता ही चला गया - एक के बाद एक।

कौए को गाना गाते गाते सारा दिन बीत गया और रात हो गयी। उसकी आवाज फटने लगी और अब वह केवल काँव काँव ही कर पा रहा था।

जैसा कि पौटलैच का रिवाज था बचा हुआ खाना सारे मेहमानों ने ले लिया और उसे अपने घर ले गये। रैवन ने भी अपना हिस्सा उठाया और अपने घर चला गया।

कौआ वहाँ सफाई ही करता रह गया और अब उसके लिये वहाँ खाने के लिये कुछ भी नहीं बचा था।

कौए ने सोचा कि अब वह आगे भूखा नहीं रहेगा क्योंकि और जानवर भी उसको अपने पौटलैच में बुलायेंगे। क्योंकि वहाँ का ऐसा ही रिवाज था कि जो जानवर जिसके घर पौटलैच खा कर जाते थे वे उस जानवर को बदले में अपने घर की दावत में बुलाते थे।

कौआ सारा जाड़ा इन्तजार करता रहा परन्तु उसको किसी भी जानवर का बुलावा नहीं आया।

जानते हो ऐसा क्यों हुआ? ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि हर जानवर तो रैवन के पौटलैच में आया था कौए के पौटलैच में नहीं। इसी लिये जब भी किसी ने पौटलैच किया तो उसने रैवन को बुलाया, कौए को नहीं।

इस तरह रैवन तो फिर कभी भूखा रहा नहीं और कौए को फिर कभी खाना मिला नहीं।

इधर कौआ सारे जाड़े भूखा ही रहा और उसकी आवाज भी इतना गा गा कर इतनी ज़्यादा खराब हो गयी थी कि उसकी वह सुरीली आवाज फिर कभी वापस नहीं आयी। वह सारे जाड़े लोगों के घरों में खाना माँग माँग कर ही गुजारा करता रहा।

इसी लिये आज भी हम कौए को लोगों के घरों में खाना माँगते हुए और काँव काँव करते हुए पाते हैं।

----

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

---***---

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|नई रचनाएँ_$type=complex$count=8$page=1$va=0$au=0

|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

|हास्य-व्यंग्य_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=1$au=0

|कथा-कहानी_$type=blogging$count=8$page=1$va=1$au=0$com=0$src=random

|लघुकथा_$type=complex$count=8$page=1$va=1$au=0$com=0$src=random

|संस्मरण_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$va=1$com=0$s=200$src=random

|लोककथा_$type=blogging$au=0$count=5$page=1$com=0$va=1$src=random

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3822,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,335,ईबुक,191,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2762,कहानी,2094,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,485,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,49,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,234,लघुकथा,816,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,307,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1905,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,642,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,685,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,54,साहित्यिक गतिविधियाँ,183,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,66,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 11 रैवन और कौए का पौटलैच // सुषमा गुप्ता
रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 11 रैवन और कौए का पौटलैच // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-TEt83H_PUJo/Wb-X6SmwnJI/AAAAAAAA7Eg/5moLq7NuYIA-CfYbjFBeadQPC6_zsZChQCHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-TEt83H_PUJo/Wb-X6SmwnJI/AAAAAAAA7Eg/5moLq7NuYIA-CfYbjFBeadQPC6_zsZChQCHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2017/09/2-11.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/09/2-11.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ