रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 12 रैवन और बतखें // सुषमा गुप्ता

SHARE:

बहुत दिनों तक रैवन अकेला रहा। फिर वह अकेले रहते रहते थक गया और उसने शादी करने की सोची। यह पतझड़ के आखिरी दिनों की बात है कि रैवन ने देखा कि ...

image

बहुत दिनों तक रैवन अकेला रहा। फिर वह अकेले रहते रहते थक गया और उसने शादी करने की सोची।

यह पतझड़ के आखिरी दिनों की बात है कि रैवन ने देखा कि बहुत सारी चिड़ियें दक्षिण की तरफ उड़ी जा रहीं हैं। वे सब गरमी वाले देशों की तरफ जा रहीं थी। वह उड़ा और सीधा उनको रोकने के लिये उनके रास्ते में जा कर बैठ गया।

जब वह वहाँ बैठा हुआ था तो उसने देखा कि एक बहुत ही सुन्दर और नौजवान बतख उसकी तरफ चली आ रही है।

उसने उसको देख कर उसके पैरों की तरफ देखना शुरू कर दिया ताकि इस तरह वह उससे अपना मुँह छिपा सके ताकि वह यह न जान सके कि वह एक काला पक्षी था।

जब वह उसके पास आ गयी तो वह बोला - "कौन मुझसे शादी करना चाहता है? मैं बहुत ही अच्छा आदमी हूँ।"

वह बतख कुछ देर तक तो उसकी तरफ बिना ध्यान दिये इधर उधर उड़ती रही और रैवन उसकी तरफ देख कर आहें भरता रहा पर फिर वह बतख वहाँ से चली गयी।

तभी एक और चिड़िया वहाँ से उड़ी। रैवन उसको भी देख कर पहले की तरह से चिल्लाया पर वह भी उड़ गयी।

फिर कुछ और चिड़ियें आयीं और रैवन उनसे भी शादी करने के लिये कहता रहा पर किसी ने उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया।

वह इन्तजार करता रहा। काफी देर बाद एक बतख आयी और रैवन पहले की तरह से फिर चिल्लाया - "कौन मुझसे शादी करना चाहता है? मैं बहुत ही अच्छा आदमी हूँ।"

यह सुन कर उस बतख ने अपना मुँह रैवन की तरफ किया। इससे रैवन को लगा कि इस बार शायद उसका काम बन जायेगा। इस उम्मीद में उसका दिल बहुत ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा। पर वह बतख भी चली गयी और रैवन फिर वहीं का वहीं खड़ा देखता रह गया।

तभी एक दूसरा बतख परिवार उधर से गुजरा जिसमें दो माता पिता थे, उनके चार बेटे थे और एक बेटी थी। रैवन फिर चिल्लाया - "कौन है जो मुझसे शादी करना चाहता है?"

तुरन्त ही वह पूरा परिवार उसके सामने आ गया तो रैवन ने सोचा कि इस बार उसको पत्नी जरूर मिल जायेगी। उसने चारों तरफ देखा तो उसको पास में पड़ा सुन्दर सा एक छोटा सा सफेद पत्थर दिखायी दे गया जिसमें एक छेद था।

उसने उस पत्थर को उठा लिया और एक लम्बी घास की पत्ती तोड़ कर उसमें उसे पिरो कर अपने गले में लाकेट की तरह पहन लिया। यह करने के बाद उसने अपनी चोंच ऊपर की जिससे वह उसके सिर के ऊपर पहुँच गयी और वह एक जवान काला आदमी बन गया।

उसी समय उन बतखों ने भी अपनी अपनी चोंचें ऊपर खिसका दीं और वे भी सुन्दर इन्सान बन गये। यह देख कर रैवन उन लोगों की तरफ बढ़ा और उस लड़की की शक्ल देख कर बहुत खुश हुआ।

वह उस लड़की की तरफ गया और वह सफेद पत्थर उसको भेंट किया जिसको उस बतख ने तुरन्त ही अपने गले में पहन लिया। यह करके उसने रैवन को यह बताया कि उसने उसको अपना पति मान लिया है।

फिर सब लोगों ने अपनी अपनी चोंचें नीची कर लीं। इससे वे सब फिर से बतखें बन गये और दक्षिण की तरफ उड़ चले।

बतखों के पंख भारी थे और वे उनको धीरे धीरे हिला कर उड़ रहीं थीं जबकि रैवन के पंख बहुत बाहर को निकले हुए थे सो वह उनको उन बतखों के मुकाबले में ज़्यादा तेज़ी से हिला पा रहा था।

बतखों ने उसकी तरफ देखा तो वे उसके उड़ने के ढंग की तारीफ करती हुई बोलीं - "देखो तो वह कितना हल्के से और कितनी सुघड़ता से उड़ रहा है।"

यह सुन कर नयी दुलहिन बहुत खुश हुई कि उसके घर वाले उसके पति के उड़ने के ढंग की कितनी तारीफ कर रहे हैं।

लेकिन रैवन को इतना लम्बा और सारा सारा दिन उड़ने की आदत नहीं थी जैसी कि उन बतखों को थी सो वह बहुत जल्दी ही थक गया।

वह बोला - "हम लोगों को जल्दी ही किसी ऐसी जगह रुक जाना चाहिये जहाँ हम रात को आराम कर सकें।"

सारे बतख इस बात पर राजी हो गये। सो एक अच्छी सी जगह देख कर वे सब आराम करने के लिये रुक गये।

अगली सुबह सब बतखें तो अपनी यात्रा शुरू करने की वजह से बहुत जल्दी उठ गयीं पर रैवन बहुत देर तक सोता रहा। यहाँ तक कि पिता बतख को उसको झकझोर कर उठाना पड़ा।

वह बोला - "जल्दी उठो, जल्दी उठो। हमको यहाँ से जल्दी ही चले जाना चाहिये क्योंकि यहाँ जल्दी ही बरफ पड़ जायेगी। हम यहाँ देर तक नहीं रुक सकते।"

जैसे ही रैवन पूरी तरह जाग गया तो उसने बहाना बनाया जैसे वह भी जल्दी ही जाना चाहता हो जबकि ऐसा नहीं था। पर फिर भी पिछले दिन की तरह से उस दिन भी वह तेज़ी से उड़ता रहा और बतखों का समूह उसकी उड़ने के ढंग की तारीफ करता रहा, खास कर उसकी पत्नी।

वह अपने साथियों से आगे उड़ रहा था और उसकी पत्नी तो उसके उड़ने के ढंग की बहुत ही ज़्यादा तारीफ करती रही। ऐसा करते हुए वह अपने चारों भाइयों की तरफ देख लेती थी जिससे वे शरमिन्दा हो रहे थे। कुछ ही देर में वे रैवन से जलने भी लगे।

एक दिन वे समुद्र के किनारे रुके और वहाँ उन्होंने बैरीज़ खायीं जो वहाँ बहुत लगी हुईं थीं। फिर वे अपनी अपनी जगह देख कर सो गये।

सुबह सारी बतखें नाश्ता किये बिना ही उड़ने के लिये तैयार थीं पर रैवन को तो और बैरीज़ खानी थीं। पर पिता बतख ने कहा कि वे वहाँ और इन्तजार नहीं कर सकते थे और रैवन उनको मना नहीं कर सकता था। दुलहिन के भाइयों ने भी चुपचाप अपने पिता से वहाँ अब और न रुकने के लिये कहा।

उधर रैवन समुद्र के ऊपर से इतनी लम्बी उड़ान भरने से डरता था क्योंकि उसने पिता बतख को यह कहते हुए सुन लिया था कि हम इस समुद्र को पार करते समय बीच में केवल एक बार ही रुकेंगे।

समुद्र के बीच में एक टापू है वहाँ हम लोग थोड़ी देर रुक कर आराम करेंगे और फिर समुद्र के दूसरे किनारे की तरफ उड़ चलेंगे।

रैवन को यह कहते में शरम लगती थी कि वह समुद्र पार तक की इतनी लम्बी उड़ान नहीं भर सकता था सो वह कुछ नहीं बोला और वह भी उनके साथ ही उड़ लिया। वे सब उड़ चले।

बतखें सब धीरे धीरे उड़ती रहीं। काफी देर तक उड़ने के बाद रैवन उनसे पिछड़ने लगा। उसके बड़े बड़े फैले पंख दर्द करने लगे थे। पर बतखें सब आराम से और बिना थके उड़ रहीं थीं।

उधर पंखों के दर्द करने की वजह से अब उसकी उड़ान में भी वह बात नहीं थी जिसकी सारे बतख पहले तारीफ कर रहे थे। वह बहुत कोशिश करता उन बतखों के साथ उड़ने की पर वह उनसे ज़्यादा और और ज़्यादा पीछे रहता गया।

जब बतखों ने उसको अपने साथ नहीं देखा तो उन्होंने पीछे मुड़ कर देखा तो वह तो काफी पीछे रह गया था। दुलहिन के भाई बोले - "अरे हम तो समझ रहे थे कि वह बहुत हल्का है और चुस्त है पर वह तो हमसे बहुत पीछे रह गया।"

पिता बतख बोला - "ऐसा लगता है कि वह थक गया है। हमको उस पर ज़्यादा ज़ोर नहीं डालना चाहिये। मुझे लगता है कि हमको कहीं आराम करने के लिये रुक जाना चाहिये ताकि वह भी थोड़ा आराम कर सके।"

सारे बतख पानी के बहुत करीब आ कर उसमें डूब से गये और रैवन बड़ी मुश्किल से उड ़कर आता हुआ हाँफता हुआ सा उनकी पीठ पर आ कर गिर गया।

कुछ देर में जब उसकी साँस में साँस आयी तो वह अपने सीने पर एक हाथ रखते हुए बोला - "यहाँ पर मेरे एक बार एक लड़ाई में एक तीर का अगला हिस्सा रह गया था जो मुझे बहुत दर्द करता है इसी लिये मैं थोड़ा पीछे रह गया था।"

फिर उसने अपनी पत्नी का सिर अपनी छाती पर रखा और उससे कहा कि अगर वह चाहे तो वह भी तीर के उसके अगले हिस्से को उसकी छाती में महसूस कर सकती थी।

पर वहाँ अगर वह तीर का अगला हिस्सा होता तो वह बेचारी महसूस करती पर जब वहाँ कुछ था ही नहीं तब वह क्या महसूस करती पर हाँ उसने उसके दिल का ज़ोर ज़ोर का धड़कना जरूर महसूस किया।

लेकिन उस बेचारी ने कुछ कहा नहीं क्योंकि उसके भाई फुसफुसा रहे थे - "हमको इसकी तीर के अगले हिस्से के इसके दिल में रह जाने की कहानी पर विश्वास नहीं होता। कोई भी आदमी तीर का अगला हिस्सा इतने दिनों तक अपने दिल में लिये हुए कैसे रह सकता है?"

वे सब रास्ते में र्23 बार और रुके और वे जब भी रुके रैवन उनकी पीठ पर उसी तरीके से गिरा जैसे वह पहले गिरा था।

लेकिन जब उनको समुद्र का दूसरा किनारा दिखायी दिया तो पिता बतख बोला - "अब हम तुम्हारा इन्तजार नहीं कर सकते।" क्योंकि किनारा देख कर सब बतख वहाँ पहुँचने के लिये बेचैन हो रहे थे।

सो सब बतख उठे और तेज़ी से उड़ चले और रैवन पानी की तरफ नीचे और नीचे गिरता चला गया।

जब समुद्र की लहरें उसको छूने लगीं तो वह अपनी पत्नी से चिल्ला कर बोला - "अरे मेरा वह सफेद पत्थर तो मुझे वापस करती जाओ। वह मेरा जादुई पत्थर है। मेरा वह पत्थर फेंक दो मुझे।"

वह इसी तरह रोता रहा जब तक कि उसके पंखों की ताकत बिल्कुल खत्म नहीं हो गयी। फिर वह पानी पर तैरता रहा और उधर बतखों ने धरती पर कदम रखा।

उसने पानी पर से ऊपर उठने की बहुत कोशिश की पर उसके पंखों ने जवाब दे दिया और वह धरती के किनारे और समुद्र के बीच बहता रहा।

समुद्र की लहरें उसके ऊपर आती जाती रहीं और वह पानी में भीगता रहा। बड़ी मुश्किल से वह अपनी चोंच साँस लेने के लिये बाहर निकाल पा रहा था। काफी देर के बाद एक बड़ी लहर आयी और उसको किनारे पर छोड़ गयी।

जैसे ही उस बड़ी लहर ने उसको किनारे पर छोड़ा उसने अपने पंजे रेत में गड़ा दिये ताकि वह वापस उस लहर के साथ समुद्र में न जा सके। धीरे धीरे जब वह कुछ ठीक हालत में आया तब भी वह किनारे पर एक बहुत ही दुखी आत्मा की तरह पड़ा हुआ था।

धीरे धीरे वह झाड़ियों के पास पहुँचा। उसने अपना रैवन का कोट उतार दिया, अपनी चोंच ऊपर की और एक छोटा काला आदमी बन गया।

"ओह, आज से मैंने इन बतखों से हमेशा के लिये तौबा कर ली।"

पता नहीं वह बेचारा वापस भी अपने देश कैसे पहुँचा होगा? उफ रैवन की शादी ...

----

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 12 रैवन और बतखें // सुषमा गुप्ता
रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 12 रैवन और बतखें // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-Mr7aLg_zEVc/Wb-YkEKpieI/AAAAAAAA7Es/S0IhEZH8JxsRGz9647ZOMkz9un9vWZ9twCHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-Mr7aLg_zEVc/Wb-YkEKpieI/AAAAAAAA7Es/S0IhEZH8JxsRGz9647ZOMkz9un9vWZ9twCHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/09/2-12.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/09/2-12.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content