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रैवन की लोककथाएँ - 2 - 5 रैवन और बेचारी चिड़ियाँ : // सुषमा गुप्ता

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एक बार रैवन ने यह घोषणा की वह एक दावत दे रहा है। इस दावत के लिये वह समुद्र से एक बहुत बड़ी सालमन मछली ले कर आया और बार बार चिल्लाता रहा - "मेरे प्यारे भानजो, भतीजो और मेरे पोतों। मुझे तुम्हारी सहायता की जरूरत है। हम एक दावत दे रहे हैं।"

जैसे ही उसने उन सबको बुलाया तो सब तरह के रंगों और शक्लों की चिड़ियाँ वहाँ आ आ कर इकठ्ठा होने लगीं। वहाँ लाल पीली कत्थई काली नीली सभी रंगों की सैंकड़ों चिड़ियाँ थीं जो रैवन की सहायता करने आयी थीं।

रैवन ने वहाँ एक गड्ढा खोदना शुरू किया और चिड़ियों से कहा - "जब तक मैं गड्ढा खोदता हूँ तुम लोग कुछ बन्द गोभी के पत्ते और कुछ समुद्र की घास सालमन को लपेटने के लिये ले आओ। और तुम लाल और पीली चिड़ियो, आग जलाने के लिये कुछ लकड़ी इकठ्ठी कर लाओ।"

सारी चिड़ियें सब सामान ले आयीं और कुछ ही देर में रैवन के पास वह सब सामान था जो उसे चाहिये था। पर जब सारी चिड़ियें लकड़ियाँ ले ले कर आ रही थीं तब तक शाम हो चुकी थी और वे सब अपनी लम्बी उड़ान से थक भी बहुत गयी थीं।

रैवन बोला - "तुम लोगों को आने में बहुत देर हो गयी। इतनी देर में तो कोई हमारी सालमन ही चुरा कर ले गया और खा गया।" बेचारी चिड़ियें बहुत थकी थीं सो आग के पास बैठ कर वे बिना कुछ खाये ही वहीं सो गयीं।

सारी चिड़ियों में एक ब्ल्यू जे चिड़िया थी जो रैवन की बहुत ही प्यारी पोतियों में से एक थी।

उसने उसे बुलाया और कहा - "आ जा मेरे पास बैठ ताकि मैं तेरे बालों में कंघी कर सकूँ।"

सो ब्ल्यू जे रैवन के पास आ कर बैठ गयी। रैवन ने उसके बालों में कंघी की और फिर उसके बाल बाँध दिये। जब वह उसके बाल बाँध रहा था तो वह सालमन के कुछ टुकड़े जो उसने बचा कर रखे थे उसको खिलाता जाता था।

इसी लिये ब्ल्यू जे के सिर के पीछे वाले हिस्से में पंख लगे रहते हैं।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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