रैवन की लोककथाएँ - 2 - 4 सूरज की चोरी : // सुषमा गुप्ता

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अमेरिका के आदिवासियों की रैवन की एक और लोक कथा। दुनियाँ में लोग अब इतने अच्छे शिकारी होते जा रहे थे कि वे अब बहुत सारे जानवर मार लेते थे। इ...

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अमेरिका के आदिवासियों की रैवन की एक और लोक कथा। दुनियाँ में लोग अब इतने अच्छे शिकारी होते जा रहे थे कि वे अब बहुत सारे जानवर मार लेते थे।

इतने ज़्यादा अच्छे शिकारी कि इतने ज़्यादा जानवर तो रैवन इच्छा होने पर भी नहीं मार पाता था क्योंकि उसको हमेशा यही लगता था कि धरती पर बहुत सारे आदमियों के मुकाबले में जानवर कहीं कम न रह जायें।

इसलिये रैवन ने एक घास की टोकरी ली उसमें एक लम्बी रस्सी बाँधी और उसमें बैठ कर धरती के नीचे चला गया। वहाँ जा कर उसने दस रेनडियर पकड़े और फिर आसमान में चला गया।

अगली रात उसने वे रेनडियर धरती के एक गाँव के पास उतार दिये और उनसे कहा कि वे तेज़ी से धरती पर भाग जायें। फिर जिस किसी पहले मकान के सामने वे आयें उस मकान को तोड़ दें और उसमें रह रहे लोगों को खा लें।

रेनडियरों ने ऐसा ही किया। जो भी उनके सामने पहला मकान आया उन्होंने उसको तोड़ दिया और उसमें रह रहे लोगों को खा लिया और ऐसा करके वे आसमान में लौट गये।

अगली रात को वे फिर धरती पर आये और एक और मकान तोड़ कर उसमें रह रहे लोगों को खा गये।

गाँव के लोगों ने एक दूसरे से शिकायत की "अब हम क्या करें? अगर ये रेनडियर ऐसे ही आते रहे तो इस तरह से तो ये हम सबको खा जायेंगे।"

यह सुन कर तीसरे मकान में रहने वाला आदमी बोला - "मुझे मालूम है कि मुझे क्या करना है। अगली बार जब वे मेरे घर आयेंगे तो मैं अपने घर को हिरन की चर्बी से लेप दूँगा और उस चर्बी में सारे में खट्टी बैरी लगा दूँगा।"

अगली रात को जब रेनडियर तीसरे घर में आये तो उन्होंने उस घर को गिराने के लिये जब उसमें अपने दाँत गड़ाये तो उस पर लगी चर्बी और खट्टी बैरीज़ में उनके दाँत गड़ गये।

बस वे तो वहाँ से अपना सिर हिला कर इतनी तेज़ भागे कि उनके बड़े बड़े लम्बे दाँत गिर गये। हालाँकि उसके बाद उनके छोटे छोटे दाँत आ गये, जैसे कि उनके आजकल हैं पर फिर तबसे ये जानवर किसी को नुकसान पहुँचाने लायक नहीं रहे।

पर इससे रैवन का उद्देश्य तो पूरा नहीं होता था क्योंकि अभी तो केवल दो ही घर बरबाद हुए थे। और अभी तो गाँव में बहुत सारे लोग थे जिनको उसे बरबाद करना था।

रैवन बोला "अगर जल्दी ही इन आदमियों को जानवरों को मारने से न रोका गया तो वे उनको तब तक मारते रहेंगे जब तक सारे जानवर नहीं मर जायेंगे जिनको मैंने बनाया है। मेरा खयाल है कि अगर मैं इन लोगों से सूरज ले लूँ तो वे लोग अॅधेरे में हो जायेंगे फिर शिकार भी नहीं कर पायेंगे और मर जायेंगे।

सो उसने धरती से एक आदमी लिया और उसे आसमान में ले गया ताकि वह खुद आने वाली मुसीबत से बचा रहे। आसमान में पहुँच कर उसने उस आदमी से कहा - "तुम यहीं ठहरो तब तक मैं सूरज को ले कर आता हूँ।"

कह कर वह वहाँ से चला गया और सूरज को अपने खाल के थैले में रख कर उसको बहुत दूर ले गया जहाँ उसके माता पिता रहते थे। इससे सारी धरती पर अॅधेरा छा गया।

सूरज को अपने थैले में सावधानी से रखे रखे वह अपने पिता के गाँव में बहुत दिनों तक रहा। धरती के लोग इस समय में बहुत दुखी रहे क्योंकि वे सब अॅधेरे में ही रहे। वे ठीक से कुछ कर ही नहीं पा रहे थे।

उन्होंने रैवन की सूरज को लौटाने के लिये बहुत प्रार्थना की, उसको खाने और फ़र की कई भेंटें भी चढ़ायीं पर उसने सूरज वापस नहीं किया।

वे उससे सूरज की भीख माँगते रहे। आखीर में वे बोले - "हम लोग अब तक अॅधेरे में ही अपने भंडारघर और माँस ढूँढते घूमते रहे हैं। पर अब वे सब भी खत्म हो रहे हैं रैवन हमारी सहायता करो।

हमें रोशनी दो वरना हम लोग फिर भूख से मरने लगेंगे। कम से कम हमको थोड़े समय के लिये तो रोशनी दे दो ताकि हम और खाना ढूँढ सकें।"

यह सुन कर रैवन ने सूरज को एक हाथ में पकड़ा और धरती वालों को उसे दो दिन के लिये दिखा दिया। इस बीच में धरती के लोगों ने कुछ शिकार कर लिया।

दो दिन के बाद उसने फिर से उसको अपने थैले में रख लिया और धरती पर फिर से अॅधेरा छा गया।

धरती को अॅधेरे में डूबे हुए फिर से काफी समय बीत गया। लोग फिर भूखों मरने लगे तो उन्होंने फिर से रैवन से रोशनी देने की प्रार्थना की ताकि वे फिर से अपना खाना इकठ्ठा कर सकें।

रैवन ने फिर ऐसा ही किया। उसने कुछ समय के लिये धरती वालों को सूरज दिखा दिया और फिर उसको बन्द करके रख लिया। इस बीच वे अपना खाना इकठ्ठा कर लेते थे।

रैवन ने ऐसा कई बार किया।

आसमान के जिस गाँव में यह रैवन अपने माता पिता के साथ रहता था आसमान के उसी गाँव में रैवन का एक बड़ा भाई भी रहता था।

एक बार रैवन को लगा कि धरती के लोगों को अब तक ज़रूरत से ज़्यादा सज़ा मिल चुकी है और उसको उनके लिये काफी अफसोस भी हुआ। पर उसने इसके बारे में किसी से एक शब्द भी नहीं कहा। लेकिन उसने इस समस्या को हल करने की एक तरकीब सोची जो उसने किसी को नहीं बतायी।

कुछ समय बाद उसने बहाना बनाया कि वह मर गया है और उसका शरीर जैसा कि किसी के मरने पर किया जाता है एक ताबूत में बन्द करके कब्र में रख दिया गया।

जैसे ही लोग उसकी कब्र के पास से हटे वह अपनी कब्र से उठा और गाँव से थोड़ी दूर चला गया। वहाँ जा कर उसने अपना रैवन का चेहरा और कोट एक पेड़ पर छिपा दिया।

फिर वह एक छोटे लड़के का रूप रख कर अपने पिता के घर गया जहाँ वह इधर उधर खूब कूदता रहा और इतना कूदा कि उसके माता पिता उसको इस तरह कूदता देख कर बहुत खुश हुए और उसको बहुत चाहने लगे।


जब रैवन के भाई को लगा कि अब उसके माता पिता उसको बहुत प्यार करने लगे हैं तो एक दिन वह सूरज से खेलने के लिये रोने लगा।

वह तब तक रोता रहा जब तक कि उसके पिता ने थैले में से सूरज निकाल कर उसको नहीं दे दिया। पर फिर भी वह बराबर यह देखता रहा कि कोई वहाँ आया तो नहीं या फिर बच्चा ही घर के बाहर गया तो नहीं। और अगर ऐसा कभी हुआ भी तो उसने सूरज को फिर से थैले में रख दिया।

एक दिन वह बच्चा उस सूरज से घर में ही काफी देर तक खेलता रहा पर वह उसको बाहर ले जाने के मौके की तलाश में रहा।

जैसे ही उसने देखा कि अब उसे कोई नहीं देख रहा है तो वह सूरज को ले कर बाहर की तरफ भागा और सीधा उस पेड़ के पास पहुँचा जहाँ उसका रैवन का चेहरा और कोट रखे थे। उसने अपना रैवन वाला चेहरा लगाया, कोट पहना ओर वहाँ से उड़ लिया।

जब वह आसमान में बहुत ऊॅचा पहुँच गया तब उसने अपने पिता की बड़ी धीमी सी आवाज़ सुनी जो बहुत नीचे से आ रही थी - "सूरज को छिपाना मत। अगर तुम इसे वापस नहीं लाते तो कम से कम इसको थैले में से कभी कभी बाहर निकाल दिया करो।

अगर तुम्हें यह सूरज अपने पास ही रखना है तो रखो पर हमको हमेशा अॅधेरे में मत रखो।"

इतना कह कर पिता तो अन्दर घर में चला गया और वह लड़का फिर उस जगह को उड़ गया जहाँ सूरज को होना चाहिये था। वहाँ पहुँच कर उसने थैला नीचे रख दिया।

उस समय सुबह होने ही वाली थी कि उसने अपने आगे जाती हुई आकाश गंगा देखी तो वह उसके पीछे पीछे चल दिया और एक छेद के पास पहुँच गया जिसके चारों तरफ घास उगी हुई थी जो रोशनी में चमक रही थी।

उसने उसमें से थोड़ी सी घास तोड़ी और धरती के किनारे पर खड़े हो कर जब सुबह होने वाली थी तो उसको आसमान में अटका दिया। तबसे वह सुबह के तारे के रूप में वहीं अटकी हुई है।

फिर वह वापस गया और सूरज वाले थैले को फाड़ दिया। सूरज को उसने उसकी जगह पर रख दिया।

फिर उसको अपने पिता की यह बात ध्यान में आयी कि उसके पिता ने यह कहा था कि "धरती को हमेशा ही अॅधेरे में मत रखना उसको कुछ देर रोशनी में रखना और कुछ देर अॅधेरे में।"

उसने आसमान को धरती के चारों तरफ घूमने वाला बना दिया ताकि उसके साथ साथ सूरज और तारे भी घूमते रहें और धरती पर दिन और रात होते रहें।

फिर वहाँ से वह नीचे धरती पर वहाँ आया जहाँ धरती पर पहले लोग रहते थे और उनसे कहा - "मेरे चाचा रैवन तुम लोगों से बहुत नाराज हैं क्योंकि तुम लोग अपनी जरूरत से बहुत ज़्यादा जानवर मार रहे थे। इसी लिये उन्होंने तुमसे सूरज ले लिया था।

अब मैंने उसको वापस उसकी जगह में रख दिया है और अब उसे वहाँ से कोई नहीं हटा सकेगा।"

जब लोगों को यह पता चला कि उसने उनके लिये क्या किया है तो उन्होंने उसका बड़े प्रेम से स्वागत किया।

जब उसने लोगों के सिरों के ऊपर देखा तो उसको आसमान के बौनों का सरदार दिखायी दिया। उसने उस सरदार को पहचान लिया तो उससे पूछा - "तुम यहाँ नीचे क्या कर रहे हो?"

बौनों के सरदार ने जवाब दिया - "मैंने और मेरे कुछ लोगों ने सोचा कि हमारी थोड़ी जगह बदली हो जायेगी इसलिये हम लोग यहाँ कुछ दिनों के लिये रहने के लिये आ गये।"

"पर आदमी का क्या हुआ?"

रैवन लड़का बोला - "कौन आदमी? मैंने कभी उसके बारे में नहीं सुना।’

लोग बोले - "वह धरती का सबसे पहला आदमी था जो रैवन के साथ जाने तक यहाँ था। वह तब तक हमारा सरदार था जब तक वह रैवन के साथ गया।"

रैवन लड़का बोला - "मैं आसमान में जा कर उसको ढूँढने की कोशिश करूॅगा।" कह कर उसने ऊपर उड़ने की कोशिश की पर वह जमीन से बहुत थोड़ा ही ऊपर उड़ सका।

उसने कई बार ऊपर उड़ने की कोशिश की पर वह जमीन से बहुत थोड़ा ही ऊपर उड़ सका। वह आसमान में नहीं पहुँच सका।

जब उसको लगा कि अब वह आसमान में वापस नहीं जा सकता तो वह इधर उधर घूमता रहा और आखीर में एक ऐसी जगह आ गया जहाँ उन तीन आदमियों के बच्चे रह रहे थे जो एक मटर की बेल से नीचे गिर पड़े थे।

वहाँ आ कर उसने शादी कर ली और वह वहाँ बहुत समय तक रहा। उसके बहुत सारे बच्चे हुए जो उसी की तरह से रैवन थे और धरती के ऊपर उड़ सकते थे।

पर धीरे धीरे उनकी जादुई ताकतें खत्म होती गयीं। बाद में वे अपने चेहरे हटा कर आदमी नहीं बन सकते थे और फिर वे साधारण रैवन बन कर ही रह गये जैसे कि आजकल हम लोग उन्हें टुन्ड्रा और दलदल वाले मैदानों में घूमते देखते हैं।


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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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रचनाकार: रैवन की लोककथाएँ - 2 - 4 सूरज की चोरी : // सुषमा गुप्ता
रैवन की लोककथाएँ - 2 - 4 सूरज की चोरी : // सुषमा गुप्ता
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