गुरुवार, 5 अक्तूबर 2017

इटली की लोक कथाएँ–2 : 9 – एक देश जहाँ कोई कभी नहीं मरता // सुषमा गुप्ता

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एक दिन एक नौजवान बोला — “ऐसी कहानी जिसमें हर कोई मर जाता है मुझे अच्छी नहीं लगती। मैं किसी ऐसे देश में जाना चाहता हूँ जहाँ कोई कभी नहीं मरता।”

उसने अपने माता पिता, चाचा ताऊ और सब भाइयों को विदा कहा और फिर घर छोड़ कर ऐसे देश की तलाश में चल दिया जहाँ कोई कभी नहीं मरता। वह कई दिनों और कई महीनों तक चलता रहा।

उसे रास्ते में जो कोई भी मिलता वह उन सबसे पूछता कि क्या वे उसको कोई ऐसी जगह बता सकते हैं जहाँ कोई कभी न मरता हो पर किसी को भी ऐसी किसी जगह का पता नहीं था जहाँ कोई कभी न मरता हो।

एक दिन उसको एक बूढ़ा मिला जिसकी सफेद दाढ़ी उसकी छाती तक आ रही थी। वह पत्थरों से भरी एक गाड़ी खींच रहा था। उस नौजवान ने उससे भी पूछा — “क्या आप मुझे कोई ऐसी जगह बता सकते हैं जहाँ कोई कभी न मरता हो?”

वह बूढ़ा बोला — “अगर तुम मरना नहीं चाहते तो मेरे साथ रहो। जब तक मैं यह पूरा का पूरा पहाड़ एक एक पत्थर करके यहाँ से हटा नहीं लूँगा तब तक तुम नहीं मरोगे।”

“ऐसा करने में तुम को कितना समय लगेगा?”

“कम से कम 100 साल तो लग ही जायेंगे।”

“पर उसके बाद तो मुझको मरना ही पड़ेगा न?”

“यकीनन तुमको मरना पड़ेगा। सभी को मरना पड़ता है। क्या 100 साल तुम्हारे लिये काफी नहीं हैं?”

“नहीं, यह जगह मेरे लिये नहीं है। मैं तो कोई ऐसी जगह ढूँढ रहा हूँ जहाँ कोई कभी न मरता हो।”

सो उसने बूढ़े को विदा कहा और आगे चल दिया। कुछ महीने चलने के बाद वह एक जंगल में आ निकला। वहाँ उसको एक और बूढ़ा मिला जिसकी सफेद दाढ़ी पेट तक आ रही थी।

वह एक कुल्हाड़ी से उस बड़े जंगल के पेड़ों की बेकार वाली शाखें काट रहा था। उसको उस जंगल के सारे पेड़ों की इसी प्रकार शाखें काटनी थीं।

उसने उससे भी पूछा — “क्या आप मुझे कोई ऐसी जगह बता सकते हैं जहाँ कोई कभी न मरता हो?”

वह बोला — “क्या तुम मरना नहीं चाहते? अगर ऐसा है तो तुम मेरे साथ रह जाओ। जब तक मैं इस जंगल के ये पेड़ ठीक करता रहूँगा तब तक तुम्हारी जान को कोई खतरा नहीं है।”

“यह काम कितने दिनों में हो जायेगा?”

“लग जायेंगे करीब 200 साल।”

“पर इतना समय तो मेरे लिये काफी नहीं है। मुझे तो आप कोई ऐसी जगह बताइये जहाँ कोई कभी न मरता हो।”

“क्या इतना समय तुम्हारे लिये काफी नहीं है? कितना जीना चाहते हो? थक जाओगे जी जी कर।”

“नहीं नहीं, मुझे तो ऐसी ही जगह चाहिये जहाँ कोई कभी न मरता हो।” इतना कह कर वह फिर आगे चल दिया।

कुछ महीने चलने के बाद वह एक समुद्र के किनारे पहुँच गया। वहाँ उसको एक और बूढ़ा मिला जिसकी दाढ़ी घुटनों तक लम्बी थी।

उसने उससे भी पूछा — “क्या आप मुझे कोई ऐसी जगह बता सकते हैं जहाँ कोई कभी न मरता हो?”

वह बूढ़ा बोला — “अगर तुम मरने से डरते हो तो मेरे साथ रहो। देखो उस बतख को देखो। जब तक वह सारे समुद्र का पानी न पी ले तब तक तुम्हारी ज़िन्दगी को कोई खतरा नहीं।”

“सारे समुद्र का पानी पीने में इसको कितना समय लगेगा?”

“करीब करीब 300 साल।”

“पर उसके बाद तो मुझे मरना ही पड़ेगा न?”

“और इससे ज़्यादा तुम क्या उम्मीद रखते हो? तुम और कितना ज़्यादा जीना चाहते हो? जी नहीं पाओगे।”

“नहीं नहीं, यह जगह मेरे लिये नहीं है। मुझे तो वहाँ जाना है जहाँ कोई कभी न मरता हो।”

सो वह फिर अपने सफर पर चल दिया। एक शाम वह एक बहुत ही शानदार महल के पास आया। वहाँ उसने उस महल का दरवाजा खटखटाया तो एक बूढ़े ने दरवाजा खोला जिसकी दाढ़ी उसके पैरों तक आ रही थी।

उसने उस नौजवान से पूछा — “ओ नौजवान, तुम क्या खोज रहे हो? मैं तुम्हारी क्या सेवा कर सकता हूँ?”

“मैं एक ऐसी जगह ढूँढ रहा हँू जहाँ कोई कभी न मरता हो।”

“तो तुम समझ लो कि तुमको वह जगह मिल गयी है। यह वही जगह है जहाँ कोई कभी नहीं मरता।”

यह सुन कर वह आदमी बहुत खुश हुआ कि आखिर उसकी मेहनत सफल हो गयी और उसको ऐसी जगह मिल गयी जहाँ कोई कभी न मरता हो।

वह उस आदमी से बोला — “आखिर इतना चलने के बाद मुझे वह जगह मिल ही गयी जिसकी मुझे तलाश थी। पर क्या आपको यकीन है कि मैं अपने आपको आपके ऊपर थोप नहीं रहा हूँ?”

“ओह नहीं नहीं, बिल्कुल नहीं। मुझे तुमको अपने साथ रख कर बड़ी खुशी होगी।” कह कर वह बूढ़ा उसको अपने महल के अन्दर ले गया और उसको आराम से ठहराने का इन्तजाम किया।

सो वह नौजवान उस बूढ़े के साथ उस महल में रहने लगा। वह वहाँ पर एक बहुत ही अमीर आदमी की तरह रहता था। साल पर साल बीतते गये। इतनी जल्दी और इतने आराम से उसका समय बीतता चला गया कि उसको समय का पता ही नहीं चला कि कब सदियाँ गुजर गयीं।

एक दिन उसने उस बूढ़े से कहा — “इस धरती पर इससे अच्छी कोई जगह नहीं पर फिर भी मैं अपने परिवार के पास कुछ समय के लिये उनसे मिलने के लिये बस यह देखने के लिये जाना चाहूँगा कि वे लोग कैसे रह रहे हैं। सब लोग ठीक हैं या नहीं।”

बूढ़ा बोला — “तुम किस परिवार की बात कर रहे हो? तुम्हारे आखिरी रिश्तेदार को मरे हुए तो कई सदियाँ गुजर गयीं।”

“पर मैं फिर भी वहाँ जाना चाहूँगा। अपने जन्म की जगह देखने के लिये। हो सकता है कि मुझे वहाँ पर मेरे उस आखिरी रिश्तेदार के कोई बेटे या पोते मिल जायें।”

बूढ़ा बोला — “अगर तुम वहाँ जाने की जिद कर ही रहे हो तो जाओ। तुम मेरी घुड़साल में जाओ और वहाँ से मेरा सफेद वाला घोड़ा उठाओ। यह घोड़ा हवा की चाल से भागता है। वह तुमको तुम्हारी जगह जल्दी ही पहुँचा देगा।

पर मेरी एक बात ध्यान से सुनो। अगर एक बार तुम उस पर सवार हो जाओ तो किसी भी, किसी भी हालत में उस पर से उतरना नहीं वरना तुम वहीं उसी जगह और उसी समय मर जाओगे।”

“ठीक है।” कह कर वह उस बूढ़े की घुड़साल में गया और उसका वह सफेद घोड़ा उठाया जिसकी वह बूढ़ा बात कर रहा था। उसके ऊपर उसने जीन कसी और उस पर बैठ गया। उसके बैठते ही वह घोड़ा हवा से बातें करने लगा।

वह उस जगह से गुजरा जहाँ उसको वह बतख वाला बूढ़ा मिला था। वहाँ जहाँ पहले समुद्र था अब वहाँ एक बहुत बड़ा घास का मैदान था। उसके किनारे पर हड्डियों का एक छोटा सा ढेर पड़ा था – यह उसी बूढ़े की हड्डियों का ढेर था।

वह नौजवान उस ढेर को देख कर बोला — “देखो तो ज़रा, इस बेचारे बूढ़े की क्या हालत हुई। मैंने अक्ल्मन्दी का काम किया न, जो मैं यहाँ नहीं रुका नहीं। नहीं तो अब तक तो मैं भी कब का मर चुका होता। चलो आगे चलता हूँ।”

वह आगे चलता रहा और फिर वह वहाँ आया जहाँ कभी एक बड़ा सा जंगल हुआ करता था। जहाँ उस बूढ़े को अपनी कुल्हाड़ी से हर एक पेड़ की बेकार वाली डंडियाँ काटनी थीं।

वहाँ अब कोई भी पेड़ नहीं रह गया था और वहाँ की जमीन इतनी सूखी और नंगी पड़ी थी जैसे रेगिस्तान।

यह देख कर उस नौजवान के मुँह से निकला — “अरे यह सब यहाँ क्या हो गया। मैं कितना ठीक था कि मैं यहाँ नहीं रुका नहीं तो मैं भी बहुत पहले ही मर गया होता जैसे कि इस जंगल का यह बूढ़ा।”

वह वहाँ से भी गुजरा जहाँ पहले एक बहुत बड़ा पहाड़ खड़ा था जिसमें से एक बूढ़ा एक एक पत्थर उठा कर ले जा रहा था। वहाँ तो अब सारी जमीन ही चौरस हो गयी थी।

उसको देख कर उसके मुँह से निकला — “अच्छा हुआ जो मैं यहाँ भी नहीं रुका। यहाँ भी रुक कर मैंने कुछ अच्छा नहीं किया होता।”

वह नौजवान आगे और आगे चलता गया। आखिर वह अपने शहर पहुँच गया जहाँ उसका जन्म हुआ था और उसके सगे सम्बन्धी रहते थे। पर यह क्या? वह जगह तो इतनी बदल गयी थी कि वह उसको पहचान ही नहीं सका।

न केवल उसका घर ही चला गया था बल्कि वह सड़क भी नहीं थी जिस पर उसका घर था। वहाँ उसने अपने रिश्तेदारों के बारे में पूछा पर उस नाम के परिवार का तो कभी किसी ने नाम भी नहीं सुना था।

और बस। यहीं उसकी यात्रा का अन्त था। उसने निश्चय किया कि उसको अब तुरन्त ही वापस अपने महल चले जाना चाहिये। सो उसने अपना घोड़ा घुमाया और महल की तरफ चलना शुरू किया।

वह अभी आधे रास्ते ही गया होगा कि उसको एक गाड़ी वाला मिला जिसकी गाड़ी पुराने जूतों से भरी हुई थी और उस गाड़ी को एक बैल खींच रहा था।

गाड़ी वाला उस आदमी को देख कर बोला — “जनाब मेरी यह गाड़ी ज़रा कीचड़ में फँस गयी है। क्या आप एक मिनट के लिये घोड़े से उतर कर मेरी इस गाड़ी को यहाँ से निकालने में मेरी सहायता करेंगे?

मैं बहुत देर से किसी को अपनी सहायता के लिये देख रहा हूँ पर इधर से मुझे कोई जाता आता ही दिखायी नहीं दिया। बड़ी देर के बाद अब आप मिले हैं इसी लिये मुझे यह प्रार्थना आपसे करनी पड़ी। अगर आप मेरी सहायता करा देंगे तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी।”

नौजवान कुछ सोचता रहा तभी वह गाड़ी वाला फिर बोला — “मेहरबानी करके मेरी सहायता कीजिये। जैसा कि आप देख रहे हैं मैं यहाँ पर अकेला हूँ और अब रात भी होने वाली है। अगर अभी आपने मेरी सहायता नहीं की तो में यहाँ रात भर के लिये अकेला पड़ा रह जाऊँगा।”

उस नौजवान को उस गाड़ी वाले पर दया आ गयी और वह घोड़े पर से उतर गया। उसने अभी अपना केवल एक ही पैर जमीन पर रखा था और दूसरा अभी भी घोड़े पर था कि उस गाड़ी वाले ने उसको उसकी बाँह पकड़ कर खींच लिया।

और बोला — “आखिर मैंने तुमको तुम्हारे घोड़े पर से उतार ही लिया न। क्या तुमको मालूम है कि मैं कौन हूँ? मैं मौत हूँ। इस गाड़ी में तुम इन पुराने जूतों को देख रहे हो न?

ये वही जूते हैं जिनको पहन कर मैं तुमको पकड़ने के लिये तुम्हारे पीछे भागता रहा हूँ। आज तुम मेरे हाथ लगे हो जिसके हाथों से अब तक कोई नहीं बच सका।”

जैसे ही उस गाड़ी वाले ने उसको घोड़े से खींचा उसका दूसरा पैर भी जमीन पर आ गया और वह तुरन्त ही मर गया।

सो उस नौजवान को भी मरना ही पड़ा जो बेचारा अपना कितना समय और मेहनत लगा कर एक ऐसी जगह की तलाश कर सका जहाँ कोई कभी नहीं मरता। फिर भी उसको मरना पड़ा जैसे और सब लोग मरते हैं।


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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया इटली की बहुत सी अन्य लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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