सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–3 : 4 कूटू // सुषमा गुप्ता

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एक बार शाम के समय तीन पसीने से तर धूल से भरे हुए लोग रास्ता भूल गये। घूमते घूमते वे एक गांव में आये। उस समय वहाँ के लोग अपने अपने आँगन में अपने खेती की उपज में से दाने निकाल रहे थे। उनकी भूसी अभी भी हवा में उड़ रही थी।

वहीं पर एक स्त्री भी दानों में से भूसा उड़ा रही थी। उन तीनों ने उस स्त्री से पूछा — “मालकिन। क्या आप हमको आज रात भर ठहरने की जगह देंगी?”

वह स्त्री एक विधवा थी। उसने उनको अन्दर बुलाया, खाना खिलाया और कहा कि वे भूसा रखने की जगह में सो सकते थे अगर वे यह वायदा करें कि वे उसको अगले दिन उसका अनाज ठीक करने में सहायता कर देंगे तो। और वे तीनों सोने चले गये।

अगले दिन दिन निकालने के समय जब पीटर ने मुर्गे के बाँग देनी की आवाज सुनी तो बोला — “उठो अब हमें उठना चाहिये। हमने उसका खाना खाया है तो हमें उसका काम भी करना चाहिये।”

जीसस बोले — “चुप रहो और सो जाओ।”

पीटर ने करवट बदली और सो गया। वे वापस सोये ही थे कि वह विधवा हाथ में एक डंडी ले कर वहाँ आयी और बोली — “क्या तुम लोग यह सोचते हो कि तुम लोग मेरा खाना खा पी कर और यहाँ सो कर जजमैन्ट डे[1] तक काम करने से बच जाओगे? चलो उठो मेरे काम में मेरी सहायता कराओ। चलो उठो।”

कह कर उसने पीटर की पीठ पर एक डंडी मारी और वहाँ से तूफान की तरह चली गयी। पीटर अपनी पीठ सहलाता हुआ जीसस से बोला — “आपने देखा कि मैं कितना ठीक था? चलिये अब तो उठिये और काम पर चलिये नहीं तो वह स्त्री हम सबको मारेगी।”

जीसस ने एक बार और कहा — “चुप रहो और सो जाओ।”

“यह तो बहुत अच्छा है। पर अगर वह फिर से वापस आयी तो वह तो मुझे ही मारेगी न।”

जीसस बोले — “अगर तुम एक स्त्री से डरते हो तो तुम इधर आ जाओ और जौन[2] को उधर सोने दो।”

सो उन्होंने आपस में अपनी जगह बदल ली और वे तीनों फिर से सो गये – पहले जीसस बीच में पीटर और तीसरे नम्बर पर जौन। कुछ देर में वह स्त्री हाथ में अपनी डंडी ले कर फिर वहाँ वापस आयी और चिल्लायी — “अरे तुम लोग अभी तक उठे नहीं?”

न्याय से सबको मारने के लिये अब की बार उसने बीच वाले आदमी को मारा। यह फिर पीटर था क्योंकि अब वह जौन की जगह लेटा हुआ था।

पीटर कराहता हुआ बोला — “यह क्या बात है कि हमेशा मैं ही पिटता हूँ।”

उसको शान्त करने के लिये जीसस ने अब की बार उसकी जगह अपनी जगह से बदल ली और उससे कहा कि अब वह सबसे ज़्यादा सुरक्षित जगह पर सोया हुआ था। उसके बाद वे सब फिर सो गये।

जब उन तीनों में से कोई भी उस स्त्री की सहायता के लिये नहीं पहुँचा तो वह स्त्री फिर से अपनी डंडी ले कर वहाँ आयी और बोली — “तुम लोग तो उठ ही नहीं रहे हो। अब की बार तुम्हारी बारी है।”

और पीटर एक बार फिर से पिट गया क्योंकि वह जीसस की जगह सो रहा था।

अब की बार वह भूसे में से बाहर निकल आया और बोला — “मालिक को कहने दो जो वह कहते हैं अब मैं यहाँ नहीं रुक रहा।”

कह कर वह बाहर आँगन में भाग गया और जा कर उस स्त्री से उसका काम ले लिया और उससे दूर जा कर उसका काम करने लगा।

कुछ देर बाद जीसस और सेन्ट जौन आये और उन्होंने भी पीटर के साथ काम करवाना शुरू कर दिया। पर जीसस ने दूसरों को चुप रहने का इशारा करते हुए कहा — “मुझे एक जलती हुई लकड़ी चाहिये।”

उनको एक जलती हुई लकड़ी ला कर दे दी गयी। जीसस ने उस लकड़ी से उस काम करने की जगह में चारों तरफ आग लगा दी। सारा भूसा जल कर खाक हो गया।

तुम क्या सोच रहे हो कि सारा अनाज और भूसा या और भी जो कुछ वहाँ पड़ा था वह सब जल कर खाक हो गया और वहाँ आग बुझने के बाद केवल राख ही रह गयी?

नहीं नहीं। ऐसा नहीं था। वहाँ तो अब उसका सब अनाज ठीक से बन गया था। भूसा आदि सब अलग अलग हो गया था और अनाज अलग हो गया था।

उन तीनों ने उस स्त्री के धन्यवाद का भी इन्तजार नहीं किया और वे उसके आँगन से निकल कर अपने रास्ते चले गये।

पर उस स्त्री ने जो अभी भी मजबूत और लालची थी वहाँ का सारा फर्श साफ किया अनाज के दाने तौले और वहाँ के फर्श में फिर से आग लगा दी पर इस बार तो आग की लपटों ने उसका सारा अनाज पौप कौर्न की तरह से भून कर रख दिया।

वह स्त्री बेचारी रोती हुई उन तीनों खानाबदोशों को पकड़ने के लिये गॉव के बाहर दौड़ गयी। कुछ देर में ही उसने उनको पकड़ लिया और उनके पैरों में गिर पड़ी और अपनी घटना बतायी।

क्योंकि वह सचमुच में ही पछता रही थी इसलिये जीसस ने पीटर से कहा — “जाओ और इस स्त्री का जितना सामान बचा सकते हो उतना सामान बचाओ और इसको दिखादो कि बुराई के बदले अच्छाई कैसे की जाती है।”

सेन्ट पीटर उसकी काम करने की जगह पहुँचा और वहाँ जा कर उसने क्रास का निशान बनाया। आग बुझ गयी और भुना हुआ अनाज फिर से अनाज के रूप में बदल गया।

जो अनाज काला पड़ गया था या बेशक्ल का हो गया था या टूट गया था या अनाज की तरह दिखायी नहीं देता था वह सारा अनाज पीटर के आशीर्वाद से सब सामान्य अनाज में बदल गया।

बाकी बचे छोटे नुकीले टुकड़े काले कूटू के दानों में बदल गये। धरती पर ये पहले कूटू के दाने थे।

Names of Jesus’ 12 Apostles –

1. Simon Peter (brother of Andrew) - He was active in bringing people to Jesus – Bible writer

2. James (son of Zebedee and other brother of John) also called James the Greater

3. John (son of Zebedee and brother of James) – Bible writer

4. Andrew (brother of Simon Peter) – He was active in bringing people to Jesus

5. Philip od Bethsaida

6. Thomas (Didymus)

7. Bartholomew (Nathaniel) – He was one of the disciples to whom Jesus appeared at the Sea of Tiberias after his Resurrection. He was witness of the Ascension

8. Matthew (Levi) of the Capernaum

9. James (son of Alphaeus), also called “James the Lesser” Bible writer

10. Simon the Zealot (the Canaanite)

11. Thaddaeus-Judas (Lebbaeus) – brother of James the Lesser and brother of Matthew (Levi) of the Capernaum

12. Judas Iscariot who also betrayed him

The New Testament says the end of only two Apostles – Judas who betrayed Jesus and then killed himself; and James the son of Zebedee who was executed by Herod.


[1] Judgment Day – it is the final and eternal judgment by God of the people in every nation resulting in the glorification of some and the punishment of others.

[2] John is the name of another disciple of Jesus. See the names of Jesus’ disciples’ names in the end of this tale.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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