शुक्रवार, 27 अक्तूबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–5 : 1 सेब वाली लड़की // सुषमा गुप्ता

देश विदेश की लोक कथाएं — यूरोप–इटली–5 :

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इटली की लोक कथाएं–5

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संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

Cover Page picture: A Canalway from Venice, Italy

Published Under the Auspices of Akhil Bhartiya Sahityalok

E-Mail: sushmajee@yahoo.com

Website: http://sushmajee.com/folktales/index-folktales.htm

Read More such stories at: www.scribd.com/sushma_gupta_1

Copyrighted by Sushma Gupta 2014

No portion of this book may be reproduced or stored in a retrieval system or transmitted in any form, by any means, mechanical, electronic, photocopying, recording, or otherwise, without written permission from the author.

Map of Italy

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विंडसर, कैनेडा

मार्च 2016

Contents

सीरीज़ की भूमिका 4

इटली की लोक कथाएँ5

1 सेब वाली लड़की

2 शापित रानी का महल

3 चौदह

4 क्रिस्टल का मुर्गा

5 जमीन और पानी पर चलने वाली नाव

6 जूं की खाल

7 तीन अनारों से प्यार

8 खाल की बीमारी वाला आदमी

9 तीन अन्धी रानियां

10 एक आँख

11 नकली नानी

12 चमकती हुई मछली

13 मिस उत्तरी हवा और मिस्टर ज़ैफिर

14 महल का चूहा और खेत का चूहा

15 पागल़ चालाक और कांटा

16 पहली तलवार और आखिरी झाड़ू

17 मिसेज़ लोमड़ी और मिस्टर भेड़िया

18 पांच रोग

सीरीज़ की भूमिका

लोक कथाएं किसी भी समाज की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा होती हैं। ये संसार को उस समाज के बारे में बताती हैं जिसकी वे लोक कथाएं हैं। आज से बहुत साल पहले, करीब 100 साल पहले ये लोक कथाएं केवल ज़बानी ही कही जातीं थीं और कह सुन कर ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दी जाती थीं इसलिये किसी भी लोक कथा का मूल रूप क्या रहा होगा यह कहना मुश्किल है।

आज हम ऐसी ही कुछ अंग्रेजी और कुछ दूसरी भाषा बोलने वाले देशों की लोक कथाएं अपने हिन्दी भाषा बोलने वाले समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से बहुत सारी लोक कथाएं हमने अंग्रेजी की किताबों से, कुछ विश्वविद्यालयों में दी गयी थीसेज़ से, और कुछ पत्रिकाओं से ली हैं और कुछ लोगों से सुन कर भी लिखी हैं। अब तक 1200 से अधिक लोक कथाएं हिन्दी में लिखी जा चुकी हैं। इनमें से 400 से भी अधिक लोक कथाएं तो केवल अफ्रीका के देशों की ही हैं।

इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि ये सब लोक कथाएं हर वह आदमी पढ़ सके जो थोड़ी सी भी हिन्दी पढ़ना जानता हो और उसे समझता हो। ये कथाएं यहाँ तो सरल भाषा में लिखी गयी है पर इनको हिन्दी में लिखने में कई समस्याएं आयी है जिनमें से दो समस्याएं मुख्य हैं।

एक तो यह कि करीब करीब 95 प्रतिशत विदेशी नामों को हिन्दी में लिखना बहुत मुश्किल है. चाहे वे आदमियों के हों या फिर जगहों के। दूसरे उनका उच्चारण भी बहुत ही अलग तरीके का होता है। कोई कुछ बोलता है तो कोई कुछ। इसको साफ करने के लिये इस सीरीज़ की सब किताबों में फुटनोट्स में उनको अंग्रेजी में लिख दिया गया हैं ताकि कोई भी उनको अंग्रेजी के शब्दों की सहायता से कहीं भी खोज सके। इसके अलावा और भी बहुत सारे शब्द जो हमारे भारत के लोगों के लिये नये हैं उनको भी फुटनोट्स और चित्रों द्वारा समझाया गया है।

ये सब कथाएं “देश विदेश की लोक कथाएं” नाम की सीरीज़ के अन्तर्गत छापी जा रही हैं। ये लोक कथाएं आप सबका मनोरंजन तो करेंगी ही साथ में दूसरे देशों की संस्कृति के बारे में भी जानकारी देंगी। आशा है कि हिन्दी साहित्य जगत में इनका भव्य स्वागत होगा।

सुषमा गुप्ता

मई 2016

इटली की लोक कथाएं–5

इटली देश यूरोप महाद्वीप के दक्षिण पश्चिम की तरफ स्थित है। पुराने समय में यह एक बहुत ही शक्तिशाली राज्य था। रोमन साम्राज्य अपने समय का एक बहुत ही मशहूर राज्य रहा है। उसकी सभ्यता भी बहुत पुरानी है – करीब 3000 साल पुरानी। इसका रोम शहर 753 बीसी में बसाया हुआ बताया जाता है पर यह इटली की राजधानी 1871 में बना था। इटली में कुछ शहर बहुत मशहूर हैं – रोम, पिसा, फ्लोरैन्स, वेनिस आदि। यहाँ की टाइबर नदी बहुत मशहूर है। यूरोप में लोग केवल लन्दन, पेरिस और रोम शहर ही घूमने जाते हैं।

रोम में कोलोज़ियम और वैटिकन अजायबघर सबसे ज़्यादा देखे जाते हैं। पिसा में पिसा की झुकती हुई मीनार संसार का आदमी द्वारा बनाये गये आठ आश्चर्यों में से एक है। इटली का वेनिस शहर नहरों में बसा हुआ एक शहर[1] है। इस शहर में अधिकतर लोग इधर से उधर केवल नावों से ही आते जाते हैं। यहाँ कोई कार नहीं है कोई सड़क पर चलने वाला यातायात का साधन नहीं है, केवल नावें हैं और नहरें हैं। शायद तुम्हें मालूम नहीं होगा कि असल में वेनिस शहर कोई शहर नहीं है बल्कि 118 द्वीपों को पुलों से जोड़ कर बनाया गया है इसलिये ये नहरें भी नहरें नहीं हैं बल्कि समुद्र का पानी है और वह समुद्र का पानी नहर में बहता जैसा लगता है।

इटली का रोम कैसे बसा? कहते हैं कि रोम को बसाने वाला वहाँ का पहला राजा रोमुलस था। रोमुलस और रेमस दो जुड़वाँ भाई थे जो एक मादा भेड़िया का दूध पी कर बड़े हुए थे। दोनों ने मिल कर एक शहर बसाने का विचार किया पर बाद में एक बहस में रोमुलस ने रेमस को मार दिया और उसने खुद राजा बन कर 7 अप्रैल 753 बीसी को रोम की स्थापना की। इटली के रोम शहर में संसार का मशहूर सबसे बड़ा कोलोज़ियम[2] है जहाँ 5000 लोग बैठ सकते हैं। पुराने समय में यहाँ लोगों को सजाएं दी जाती थीं।

इटली में ही वैटीकन सिटी है जो ईसाई धर्म के कैथोलिक लोगों का घर है पर यह एक अपना अलग ही देश है। वहाँ इसके अपने सिक्के और नोट हैं। इसकी अपनी सेना है। पोप इस देश का राजा है। इसका अजायबघर बहुत मशहूर है। यह संसार का सबसे छोटा देश है क्षेत्र में भी और जनसंख्या में भी – 842 आदमी .4 वर्ग मील के क्षेत्र में बसे हुए।

इटली की बहुत सारी लोक कथाएं हैं। इटली की सबसे पहली लोक कथाएं 1550 में लिखी गयी थीं। इतालो कैलवीनो[3] का लोक कथाओं का यह संग्रह इटैलियन भाषा में 1956 में संकलित करके प्रकाशित किया गया था। इनका सबसे पहला अंग्रेजी अनुवाद 1962 में छापा गया। उसके बाद सिलविया मल्कही[4] ने इनका अंग्रेजी अनुवाद 1975 में प्रकाशित किया। फिर मार्टिन ने इनका अंग्रेजी अनुवाद 1980 में किया। ये लोक कथाएं हम मार्टिन की पुस्तक से ले कर अपने हिन्दी भाषा भाषियों के लिये यहाँ हिन्दी भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है कि ये लोक कथाएं तुम लोगों को पसन्द आयेंगी।

इतालो ने इस पुस्तक में 200 लोक कथाएं संकलित की हैं। हमने उन 200 लोक कथाओं में से 125 लोक कथाएं चुनी हैं। फिर भी क्योंकि वे बहुत सारी लोक कथाएं हैं इसलिये वे सब पढ़ने की आसानी के लिये एक ही पुस्तक में नहीं दी जा रही हैं। इससे पहले हम इटली की लोक कथाओं के चार संकलन[5] प्रकाशित कर चुके हैं जिनमें हमने वहाँ की क्रमशः 15, 17, 10 और 11, यानी 53 लोक कथाएं प्रकाशित की थीं। तुम सब लोगों को यह जान कर प्रसन्नता होगी कि वे सभी पुस्तकें बहुत पसन्द की गयीं।

तो अब यह प्रस्तुत है तुम्हारे हाथों में इटली की लोक कथाओं का पाँचवाँ संकलन – “इटली की लोक कथाएं–5”। इस संकलन में हम वहाँ की नम्बर 85 से 126 तक की 18 लोक कथाएं प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि यह पाँचवाँ संकलन भी तुम लोगों को पहले चार संकलनों की तरह ही बहुत पसन्द आयेगा और मजेदार लगेगा।

1 सेब वाली लड़की[6]

एक बार एक राजा और एक रानी थे जो इसलिये बहुत दुखी रहते थे क्योंकि उनके कोई बच्चा नहीं था। रानी बराबर पूछती रहती — “मेरे भी उसी तरीके से बच्चे क्यों नहीं होते जैसे इस सेब के पेड़ के ऊपर सेब लगते है?”

clip_image008 सो हुआ यह कि एक दिन बजाय एक लड़के को जन्म देने के उस रानी ने एक सेब को जन्म दिया। पर यह सेब दुनिया के सब सेबों से ज़्यादा लाल और ज़्यादा सुन्दर था। राजा ने उस सेब को एक सोने की तश्तरी में रख कर अपनी बालकनी में रख दिया।

राजा के महल की सड़क के दूसरी तरफ भी एक राजा रहता था।

एक दिन वह दूसरा राजा अपनी खिड़की में खड़ा बाहर देख रहा था तो उसने देखा कि उसके सामने वाले राजा की बालकनी में एक बहुत ही सुन्दर नहायी धोयी लड़की खड़ी अपने बालों में कंघी कर रही थी। वह लड़की सेब जैसी गोरी और गुलाबी थी।

उसको देख कर तो उसका मुँह खुला खुला रह गया और वह उसकी तरफ देखता का देखता रह गया।

clip_image010पर जैसे ही उस लड़की को यह लगा कि कोई उसको देख रहा है तो वह वहाँ से भागी और तश्तरी में रखे सेब के अन्दर जा कर गायब हो गयी।

राजा को तो उससे पागलपन की हद तक प्यार हो गया था। सो उसके दिमाग ने कुछ काम किया और वह सड़क पार करके उस दूसरे राजा के महल की तरफ चल दिया। वहाँ जा कर उसने महल का दरवाजा खटखटाया तो रानी ने दरवाजा खोला।

राजा बोला — “रानी जी आप मेरे ऊपर एक कृपा करें।”

रानी बोली — “कहिये। पड़ोसी ही पड़ोसी के काम आते हैं।”

राजा बोला — “आपकी बालकनी में जो सेब रखा है वह आप मुझे दे दें।”

रानी बोली — “राजा साहब क्या आप जानते हैं कि आप क्या कह रहे हैं? मैं उस सेब की माँ हूँ और आपको पता होना चाहिये कि मुझे उसके लिये कितना इन्तजार करना पड़ा।”

पर राजा को तो ना सुनना नहीं था इसलिये सेब के माता पिता को उस सेब को उस दूसरे राजा को देना ही पड़ गया ताकि पड़ोसियों में आपस में सम्बन्ध अच्छे रह सकें।

इस तरह वह राजा उस सेब को ले कर अपने घर आ गया और उसको ले जा कर सीधा अपने कमरे में चला गया। वहाँ उसने उस तश्तरी को अपने कमरे की एक मेज पर रख दिया। उसके नहाने धोने के लिये सब कुछ बाहर रख दिया।

अब वह लड़की रोज सुबह उस सेब में से नहाने और अपने बाल ठीक करने के लिये उस सेब में से निकलती और वह राजा उसको देखता रहता।

बस यही था जो वह सेब में से बाहर निकल कर करती थी। न तो वह कुछ खाती थी और न कोई बात करती थी। बस केवल नहाती थी और अपने बाल बनाती थी और फिर सेब के अन्दर चली जाती थी।

यह राजा अपनी सौतेली माँ के साथ रहता था। उसकी माँ को कुछ शक हुआ जब उसने देखा कि उसका बेटा लगातार अपने कमरे में अकेले ही रह रहा था। कहीं बाहर निकलता ही नहीं था।

उसने सोचा “चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े पर मुझे यह जरूर मालूम करना है कि मेरा बेटा अपने कमरे में अकेला बैठा-बैठा क्या करता रहता है।”

उसी समय किसी और राजा ने उनके राज्य पर हमला कर दिया सो उस राजा को लड़ाई के लिये जाना पड़ गया।

जब उसको अपना सेब छोड़ना पड़ा तो उसका दिल टूट गया। उसने अपने एक बहुत ही भरोसे के नौकर को बुलाया और उससे कहा — “मैं अपने कमरे की चाभी तुम्हारे पास छोड़े जा रहा हूँ। ज़रा ध्यान रखना कि कोई मेरे कमरे में न जाने पाये।

रोज उस सेब वाली लड़की के लिये पानी और कंघा बाहर रख देना और इस बात का भी ध्यान रखना कि उसको और भी जो चाहिये वह उसको मिल जाये। और हाँ भूलना नहीं कि वह मुझे सब बताती रहे।”

हालाँकि यह गलत था क्योंकि वह तो कभी बोली ही नहीं थी पर राजा ने सोचा कि नौकर को यह झूठ बताना जरूरी था।

“अगर मेरे पीछे उसका बाल भी बाँका हुआ तो मैं तुमको जान से मार दूँगा।”

नौकर बोला — “आप बिल्कुल बेफिकर रहिये, राजा साहब। मैं अपनी तरफ से उनकी बहुत अच्छी तरह से देखभाल करूँगा।”

जैसे ही राजा चला गया उसकी सौतेली माँ ने अपनी हर कोशिश की कि वह राजा के कमरे में घुस जाये पर उसको मौका ही नहीं मिला।

एक बार उसने नौकर की शराब में अफीम मिला दी और जब वह उसको पी कर सो गया तो उसने उसके पास से राजा के कमरे की चाभी चुरा ली।

फिर उसने राजा के कमरे का दरवाजा खोला और अपने बेटे के इस अजीब से बरताव को जानने के लिये उसका सारा कमरा उलट पुलट कर दिया ताकि उसको यह पता चल जाये कि वह ऐसा क्यों कर रहा था।

पर जितना वह ढूँढती थी उतना ही उसको कुछ नहीं मिल पा रहा था। बहुत सारी साधारण चीज़ों में उसको केवल एक ही अलग सी चीज़ दिखायी दी, और वह था एक शानदार सेब जो एक सोने के कटोरे में रखा था।

उसको लगा कि शायद यही सेब होगा जिसके बारे में वह हमेशा सोचता रहता होगा।

रानियाँ हमेशा ही एक छोटा सा चाकू अपने कपड़ों में छिपा कर रखती हैं सो उसने अपना वह चाकू निकाला और उस सेब को चारों तरफ से गोदना शुरू किया।

उसके सेब को हर गोदने से खून की एक धारा सी बह निकली। यह देख कर सौतेली माँ डर गयी और उस सेब को वहीं छोड़ कर वहाँ से भाग ली। चाभी उसने नौकर की उसी जेब में रख दी जहाँ से उसने निकाली थी।

जब नौकर की आँख खुली तो उसको तो पता नहीं था कि क्या हुआ। वह राजा के कमरे में गया तो देखा कि वहाँ तो सारी जगह खून बिखरा पड़ा था।

उस बेचारे के मुँह से निकला — “उफ, अब मैं क्या करूँ?” और वह भी वहाँ से भाग लिया। वहाँ से भाग कर वह अपनी एक चाची के पास गया जो एक परी थी और उसके पास बहुत तरीके के जादुई पाउडर थे।

उसने जब जा कर अपनी उस चाची को अपना सारा किस्सा सुनाया तो उसने दो जादुई पाउडर मिलाये – एक तो उन सेबों के लिये जिन पर जादू किया गया होता है और दूसरा उन लड़कियों के लिये जिन पर जादू किया गया होता है।

उसने उन दोनों पाउडरों को मिलाया और उस पाउडर को नौकर को दे कर कहा कि वह जा कर उसको सेब के ऊपर छिड़क दे।

नौकर भागा भागा आया और वह पाउडर उसने उस सेब पर छिड़क दिया। सेब टूट कर खुल गया और सेब में से वह लड़की बाहर निकल आयी। पर उसके सारे शरीर पर पट्टियाँ बँधी थीं और कई जगह प्लास्टर बँधा था।

राजा घर आया तो वह लड़की पहली बार उससे बोली — “क्या तुम विश्वास करोगे कि तुम्हारी सौतेली माँ ने मेरे सारे शरीर पर चाकू मारे?

पर तुम्हारे नौकर ने मेरी बड़ी सेवा की जिससे मैं ठीक हो सकी। मैं 18 साल की हूँ और एक जादू में थी। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी पत्नी बन सकती हूँ।”

“अरे यह तुम क्या कहती हो कि मैं पसन्द करूँ तो? मैं तो कब से तुमसे शादी करना चाहता हूँ।”

बस फिर क्या था दोनों तरफ से शादी की तैयारियाँ शुरू हो गयीं और दोनों की शादी हो गयी।

दोनों महलों में खूब आनन्द मनाया। इस आनन्द मनाने के समय में केवल एक ही आदमी नहीं था – और वह थी राजा की सौतेली माँ।

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[1] City of Canals

[2] Colosseum

[3] “Italian Folktales: collected and retold by Italo Calvino. Translated by George Martin. San Diego, Harcourt Brace Jovanovich, Publishers. 1980. 300 p.

[4] Sylvia Mulcahy

[5] “Italy Ki Lok Kathayen-1” – 15 folktales (No 1-18), by Sushma Gupta in Hindi languge

“Italy Ki Lok Kathayen-2” – 17 folktales (No 19-40), by Sushma Gupta in Hindi language

“Italy Ki Lok Kathayen-3” – 10 folktales (No 41-61), by Sushma Gupta in Hindi language

“Italy Ki Lok Kathayen-4” – 11 folktales (No 62-84), by Sushma Gupta in Hindi language

[6] Apple Girl (Story No 85) – a folktale from Italy from its Florence area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin in 1980.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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