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देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–5 : 2 शापित रानी का महल // सुषमा गुप्ता

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2 शापित रानी का महल [1] बहुत पुरानी बात है कि एक शहर में एक बूढ़ी विधवा रहती थी। जो सूत कात कर अपना गुजारा करती थी। उसके तीन बेटियाँ थीं। वे ...

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2 शापित रानी का महल[1]

बहुत पुरानी बात है कि एक शहर में एक बूढ़ी विधवा रहती थी। जो सूत कात कर अपना गुजारा करती थी।

उसके तीन बेटियाँ थीं। वे भी सूत कातती थीं। हालाँकि वे तीनों रात दिन अपने-अपने चरखों पर लगी रहती फिर भी वे एक सैन्ट भी नहीं बचा पाती थीं क्योंकि उस कताई से वे केवल उतना ही कमा पाती थीं जिससे उनका रोज का खर्चा चल जाये।

एक दिन वह बुढ़िया बहुत बीमार हो गयी। उसको बहुत तेज़ बुखार आ गया और तीन दिन बाद तो वह बस मरने वाली ही हो गयी।

उसने अपनी तीनों रोती हुई बेटियों को बुलाया और कहा — “बेटी रोओ नहीं। कोई यहाँ हमेशा के लिये नहीं रहता। मैं तो काफी दिन ज़िन्दा रह कर अपनी काफी ज़िन्दगी जी चुकी। अब मेरा मरने का समय आ गया है।

मेरा दिल तो केवल इसलिये रोता है कि मैं तुम लोगों को इतना गरीब छोड़ कर जा रही हूँ। पर मुझे इस बात की खुशी है कि क्योंकि तुम लोग अपनी कमाई करना जानती हो इसलिये तुम लोग किसी तरह से अपने आपको सँभाल लोगी। कम से कम भूखी नहीं मरोगी। मैं भगवान से प्रार्थना करूँगी कि वह तुम्हारी सहायता करे।

जो कुछ दहेज में मैं तुम्हारे लिये छोड़ कर जा रही हूँ वह हैं ये तीन रुई के गोले। वे तीनों गोले आलमारी में रखे हैं।” यह कह कर उसने अपनी आखिरी साँस ली और इस दुनिया से चली गयी।

कुछ दिनों बाद वे तीनों लड़कियाँ आपस में बात कर रही थीं — “इस रविवार को ईस्टर रविवार है और हमारे पास एक अच्छे ईस्टर खाने के लिये कुछ भी नहीं है।”[2]

सो सबसे बड़ी वाली लड़की मैरी[3] बोली — “मैं अपने धागे का गोला बेच दूँगी और उसके आये पैसे से ईस्टर के लिये खाना खरीदूँगी।”

ईस्टर की सुबह उसने अपने धागे का गोला उठाया और उसको बेचने के लिये बाजार चल दी। उसके हाथ का कता हुआ धागा बहुत बढ़िया था सो वह बहुत अच्छे दामों में बिक गया। उस पैसे से उसने डबल रोटी, बकरे की एक टाँग और एक बोतल शराब खरीदी और घर की तरफ चल दी।

जब वह घर आ रही थी तो एक कुत्ता उसके पीछे दौड़ पड़ा। उसने उसके हाथ में लगी वह बकरे की टाँग और डबल रोटी तो मुँह में दबोच ली और शराब की बोतल नीचे गिरा दी।

नीचे गिरते ही वह बोतल तो टूट गयी और बकरे की टाँग और डबल रोटी ले कर वह कुत्ता वहाँ से भाग गया। वह लड़की तो डर के मारे हक्का बक्का सी रह गयी। वह तुरन्त ही वहाँ से घर भाग गयी।

जब वह घर आयी तो उसने अपनी बहिनों को बताया कि उस दिन उसके साथ क्या हुआ था। सो उस दिन उनको ब्राउन डबल रोटी के कुछ टुकड़े खा कर ही सन्तुष्ट रह जाना पड़ा।

अगले दिन बीच वाली लड़की रोज़[4] बोली — “आज मैं देखती हूँ कि वह कुत्ता कैसे परेशान करता है?” सो उस दिन वह अपना सूत ले कर बाजार गयी।

उसका सूत भी अच्छा कता हुआ था सो उसको भी अपने सूत के बहुत अच्छे पैसे मिले। उसने भी अपने पैसों से बकरे का कुछ माँस, डबल रोटी और शराब की एक बोतल खरीदी और घर की तरफ चल दी।

इस लड़की ने मैरी के रास्ते को छोड़ कर अपने घर के लिये एक दूसरा ही रास्ता लिया। पर वह कुत्ता तो इस रास्ते पर भी उसके पीछे भागा। उसने इस लड़की का भी बकरे का माँस और डबल रोटी अपने मुँह में दबा ली और शराब की बोतल नीचे गिरा कर तोड़ दी और माँस और डबल रोटी ले कर भाग गया।

रोज़ मैरी से ज़्यादा हिम्मत वाली थी सो वह उस कुत्ते के पीछे भागी पर वह कुत्ता तो उससे कहीं तेज़ भाग रहा था सो वह उसका पीछा बहुत देर तक नहीं कर सकी और कुछ ही देर में थक कर वापस घर आ गयी। उसने भी हाँफते-हाँफते अपनी बहिनों को बताया कि उस दिन उसके साथ क्या हुआ था।

उस दिन भी उन लोगों को ब्राउन डबल रोटी ही खानी पड़ी। उस दिन सबसे छोटी लड़की नीना[5] बोली — “कल मेरी बारी है। कल मैं जाऊँगी और देखती हूँ कि वह कुत्ता मेरे साथ भी ऐसा ही करता है क्या।”

सो अगली सुबह नीना ने अपने सूत का गोला लिया और अपनी दोनों बहिनों के जाने के समय से बहुत पहले ही घर से बाजार के लिये निकल पड़ी।

वहाँ उसने भी अपना सूत बहुत अच्छे दामों पर बेचा और बहुत सारा खाने का सामान खरीदा और एक तीसरे रास्ते से घर की तरफ चल दी।

कुछ दूर चलने के बाद उसके पीछे भी एक कुत्ता आया। उसने भी नीना के हाथ में लगी शराब की बोतल गिरा कर तोड़ दी और बाकी का सामान ले कर भाग गया।

नीना उसके पीेछे पीछे भागी और भागती ही रही। भागते भागते वह एक महल के पास आ गयी जहाँ आ कर वह कुत्ता गायब हो गया।

उसने सोचा कि अगर मुझे कोई इस महल के अन्दर मिलता है तो मैं उसको बताऊँगी कि एक कुत्ता तीन दिन से हमारा खाना ले कर भाग रहा है और फिर मैं उससे अपने खाने का बदला लूँगी।

यह सोच कर वह उस महल में अन्दर घुसी और उसके रसोईघर तक आ पहुँची। वहाँ आग जल रही थी और बरतनों में खाना पकाया जा रहा था।

एक जगह बकरे की टाँग भूनी जा रही थी। नीना ने एक बरतन का ढकना उठा कर उस बरतन में झाँका तो उसने देखा कि उसमें तो वही माँस पक रहा था जो उसने अभी थोड़ी देर पहले ही खरीदा था और दूसरे बरतन में बकरे का माँस था।

फिर उसने रसोईघर की एक आलमारी खोली तो देखा कि उसमें तीन डबल रोटियाँ रखी हुई थीं।

फिर वह महल देखने चली गयी। वह सारे महल में घूम ली पर आश्चर्य की बात कि उसको उस महल में एक भी आदमी दिखायी नहीं दिया। पर वहाँ खाने के कमरे में एक मेज पर तीन आदमियों के लिये खाना लगा था।

नीना ने अपने मन में सोचा “लगता है कि यह खाना तो केवल हमारे लिये ही लगा है और वह भी हमारे ही खरीदे हुए खाने से। अगर मेरी बहिनें यहाँ होती तो मैं यहाँ अभी अभी खाना खाने बैठ जाती पर अब मैं क्या करूँ।”

उसी समय उसने सड़क पर जाती हुई एक गाड़ी की आवाज सुनी तो उसने खिड़की से बाहर देखा। उसने उस गाड़ी चलाने वाले को पहचान लिया।

उसने उस गाड़ीवान से कहा कि वह उसकी बहिनों से जा कर कह दे कि उनकी छोटी बहिन नीना यहाँ महल में उनका इन्तजार कर रही थी। उनके लिये यहाँ बहुत बढ़िया खाना लगा रखा है। सो वे तुरन्त ही यहाँ चली आयें।

उस गाड़ीवान ने उसकी बहिनों को जा कर नीना का सन्देश दिया तो वे दोनों वहीं आ गयीं। नीना ने उन दोनों को बताया कि उसके साथ क्या क्या हुआ।

फिर वह बोली — “चलो खाना खाते हैं। अगर इस घर के मालिक आ जाते हैं तो हम उनसे कह देंगे कि हम तो केवल अपना ही खाना खा रहे हैं।”

उसकी बहिनें उतनी बहादुर तो नहीं थीं जितनी नीना थी पर इस समय तक उनको भी भूख लग आयी थी सो वे सब वहाँ उस मेज पर खाना खाने बैठ गयीं।

अभी वे मेज पर बैठी ही थीं कि लड़कियों ने देखा कि अचानक बाहर अंधेरा हो आया था। उस महल की खिड़कियाँ बन्द होने लगीं और उसमें लगे लैम्प जलने लगे। वे अभी उनकी तारीफ ही कर रही थीं कि उनका खाना अपने आप आ गया और मेज पर लग गया।

नीना ने खाना खाने से पहले प्रार्थना की — “जो भी हमें हमारा यह खाना परस रहा है और जिसने हमें खाना बनाने से बचाया हम उसका धन्यवाद करते हैं।”

फिर वह अपनी बहिनों से बोली — “आओ बहिनों खाना शुरू करते हैं।” और उन्होंने बकरे की टाँग खानी शुरू कर दी।

नीना की बहिनें तो डर के मारे सुन्न सी हो गयी थीं। वे बड़ी मुश्किल से खाना खा पा रही थीं और वे सारी शाम एक दूसरे को ही देखती रहीं क्योंकि उनको लग रहा था कि वहाँ कभी भी कहीं से भी कोई भी बड़ा सा राक्षस आ सकता था।

पर नीना बोली — “अगर वे हमको यहाँ खाना खिलाना नहीं चाहते थे तो वे हमारे लिये न तो खाना पकाते, न हमें खाना परसते और न ही हमारे लिये लैम्प जलाते।” पर उसकी बहिनें उसके इस विचार से राजी नहीं थीं।

खाना खाने के बाद जल्दी ही उनको नींद आने लगी तो नीना उनको महल में ले गयी। वहाँ वे सब एक ऐसे कमरे में आ गयीं जहाँ तीन बिस्तर लगे हुए थे सो नीना बोली “चलो सोया जाये।”

उसकी बहिनें बोलीं — “नहीं नहीं। हम लोगों को अपने घर चलना चाहिये। यहाँ तो हमको बहुत डर लग रहा है।”

नीना ने हँस कर कहा — “तुम लोग तो बहुत ही डरपोक हो। देखो न हम लोग यहाँ कितने आनन्द से हैं और तुम लोग यहाँ से जाना चाहती हो। मैं तो सोने जा रही हूँ तुमको अगर आना हो तो तुम भी आ जाना।”

वह उनको दोबारा सोने के लिये कहने ही वाली ही थी कि उन्होंने सीढ़ी के नीचे से एक आवाज सुनी — “नीना, मुझे ज़रा रोशनी तो दिखाना।”

यह सुन कर नीना की बहिनें तो डर के मारे जम सी गयीं — “हे भगवान हम पर दया करो। यह कौन हो सकता है? नीना, मत जाना वहाँ। पता नहीं कौन है वहाँ।”

नीना बोली — “मैं तो जाऊँगी।”

कह कर उसने एक लैम्प उठाया और सीढ़ियों से नीचे की तरफ जाने लगी। वह नीचे उतरी तो एक कमरे में आ गयी जिसमें एक रानी एक कुरसी पर जंजीरों से बँधी बैठी थी। उसके मुँह कान और नाक से लपटें निकल रही थीं।

रानी उन लपटों के बीच में से ही बोली — “सुनो नीना, क्या तुम अपनी किस्मत बनाना चाहोगी?”

“हाँ हाँ क्यों नहीं।”

“तब तुमको अपनी बहिनों की सहायता लेनी पड़ेगी।”

“मैं उनको बता दूँगी।”

रानी फिर बोली — “तुम लोगों को कुछ अजीब-अजीब चीज़ें करनी पड़ेंगी और ध्यान रखना कि अगर तुम डर गयीं तो तुम मर जाओगी।”

नीना बोली — “मैं उनको वैसे कामों को करने के लिये किसी तरह से मना लूँगी जो उनको करने के लिये जरूरी होंगे।”

रानी फिर बोली — “बहुत अच्छे। तो देखो, वे तीन बक्से खोलो। उन सब में रानियों वाले कपड़े और गहने रखे हैं। मैं एक बार शहर के एक नौजवान से प्रेम करने लगी थी और उसी की वजह से मैं आज इस नरक में हूँ।

उसने जो भी कुछ मेरे साथ किया गलत किया। वह किसी दूसरी लड़की से शादी करना चाहता था। अब मैं यह चाहती हूँ कि वह भी मेरे साथ इस नरक को सहे। उसके साथ न्याय करने का यही एक तरीका है।

तुम कल मेरे कपड़े पहनना। अपने बाल भी वैसे ही बनाना जैसे मेरे बने हैं और हाथ में एक किताब ले कर बाहर छज्जे की दीवार के सहारे झुक कर खड़ी हो जाना।

एक निश्चित समय पर वह नौजवान यहाँ आयेगा और तुमसे पूछेगा — “मैम, क्या में आपके पास आ सकता हूँ?” तो तुम उसका जवाब देना “हाँ।”

और तब तुम उसको कौफी के लिये बुलाना और उसको जहर मिली कौफी का यह प्याला दे देना। जब वह मर जाये तो उसको यहाँ नीचे ले आना। फिर यह आलमारी खोलना और उसको इस आलमारी के अन्दर फेंक देना। और फिर उसके चारों तरफ चार मोमबत्ती जला देना।

मैं बहुत अमीर थी। यह मेरी चीज़ों की लिस्ट है जिनको तुम मेरे नौकरों से ले सकती हो जो आज कल मेरी हर चीज़ चुराने पर लगे हैं।”

यह सुन कर नीना सीढ़ियों से ऊपर गयी और अपनी बहिनों को जा कर सब कुछ बताया कि उसने सीढ़ियों के नीचे क्या-क्या देखा और बोली — “तुम लोग कसम खाओ कि तुम मेरी सहायता करोगी नहीं तो फिर भगवान ही तुम्हारी सहायता करें।”

उसकी दोनों बहिनों ने वायदा किया कि वे उसकी सहायता जरूर करेंगी।

अगली सुबह नीना उस मरी हुई रानी की तरह तैयार हुई और वहाँ जैसे रानी ने बताया था हाथ में किताब ले कर छज्जे की दीवार के सहारे झुक कर खड़ी हो गयी।

जल्दी ही उसको घोड़े की टापों की आवाज सुनायी पड़ी और एक नौजवान घोड़े पर सवार वहाँ आया। उसने नीना की तरफ देख कर उसको नमस्ते की। नीना ने भी अपना सिर हिला कर उसकी नमस्ते का जवाब दिया।

उस नौजवान ने पूछा — “क्या मैं आपके पास आ सकता हूँ मैम?”

नीना बोली — “यकीनन।”

वह नौजवान अपने घोड़े पर से उतरा और महल की सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर आ गया।

नीना ने कहा — “चलो, हम लोग साथ बैठ कर कौफी पीते हैं।”

वह नौजवान बोला — “खुशी से।”

नीना ने उसको एक प्याले में जहरीली कौफी डाल कर दे दी। वह नौजवान उस कौफी को पीते ही मर गया। नीना ने फिर अपनी दोनों बहिनों को बुलाया और उनसे कहा कि वह उसके शरीर को नीचे ले जाने में उसकी सहायता करें पर उन्होंने मना कर दिया।

नीना बोली — “अगर तुम लोगों ने मेरी सहायता नहीं की तो मैं तुम लोगों को यहीं मार दूँगी।”

इस पर वे डर गयीं और उस नौजवान के शरीर को नीचे ले जाने में नीना की सहायता करने में लग गयीं। नीना ने उस नौजवान का सिर पकड़ा और उसकी बहिनों ने उसके पैर और तीनों उसको खींचते हुए नीचे आलमारी के पास ले गयीं। उस आलमारी के चारों तरफ चार मोमबत्ती लगी हुई थीं।

उसकी बहिनें तो यह सब देख कर काँपने लगीं और उस नौजवान के शरीर को वहीं छोड़ कर भागने ही वाली थीं कि नीना बोली — “तुम भाग कर तो देखो। फिर तुम देखना कि मैं तुम्हारे साथ क्या करती हूँ।”

उसके बाद उसकी बहिनों की वहाँ से भागने की हिम्मत ही नहीं पड़ी।

नीना ने वह आलमारी खोली तो उसमें वह आग की लपट वाली रानी एक सोने के सिंहासन पर बैठी थी। उन्होंने उसके प्रेमी को उसके पास ही रख दिया।

रानी ने भी उसको हाथ से पकड़ कर अपने पास बिठा लिया और बोली — “आओ मेरे पास नरक में आओ, ओ नीच आदमी। अब तुम मुझे छोड़ कर कहीं नहीं जा सकोगे।”

इसके साथ ही वह आलमारी एक बहुत ज़ोर की आवाज के साथ झटके से बन्द हो गयी और गायब हो गयी।

यह सब देख कर नीना की बहिनें तो डर के मारे बेहोश सी हो गयीं। नीना उनको किसी तरह होश में लायी और उनको उस घटना के धक्के से बाहर निकाला।

फिर उन्होंने उस रानी का खजाना नौकरों से लिया और वे दुनिया की सबसे ज़्यादा अमीर लड़कियाँ हो गयीं।

clip_image004कुछ साल बाद नीना की दोनों बहिनों की शादी हो गयी और उसने उनकी शादी में इतना अच्छा दहेज दिया जैसे किसी राजकुमारी की शादी में दिया जाता है। बाद में उसकी अपनी भी शादी हो गयी और वह भी एक रानी की तरह रही।



[1] The Palace of the Doomed Queen (Story No 93) – a folktale from Siena area, Italy, Europe.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin in 1980.

[2] Easter Sunday – the day Jesus was resurrected after his crucifixion on Friday (Good Friday),

[3] Mary – name of the eldest girl

[4] Rose – the name of the middle girl

[5] Nina – the name of the youngest girlsrc="https://lh3.googleusercontent.com/-PjF1dOKZB8A/V0WA1RvSMHI/AAAAAAAAt38/7SKvFeWw83k/clip_image004_thumb.jpg?imgmax=800">

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,86,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी 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पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,305,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1879,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,675,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,51,साहित्यिक गतिविधियाँ,180,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,51,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–5 : 2 शापित रानी का महल // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–5 : 2 शापित रानी का महल // सुषमा गुप्ता
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रचनाकार
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