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आज का लतीफ़ा

चुटकुला # 008

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सरप्राइज़ पार्टी

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राज सारा दिन अपने व्यवसाय में व्यस्त रहता था.. रुपया कमाने के लिए आखीर मेहनत तो करनी ही होती है - वह अपनी बीवी से कहा करता था जिसे राज अकसर समय नहीं दे पाता था और इसी वजह से अकसर वह शाम और देर रात तक अपने क्लाएंटों में उलझा रहता था .

राज के जन्म दिन पर उसकी बीवी ने उसे बढ़िया, सरप्राइज़ पार्टी देने की सोची. बेचारा राज व्यवसायिक दायित्वों के चलते मौज मस्ती का भी समय जो नहीं निकाल पाता था. राज पूछता ही रहा कि कहां चल रहे हैं पार्टी के लिए मगर उसकी बीवी ने अंत तक नहीं बताया, जब तक कि वे पार्टी स्थल पर पहुँच नहीं गए.

उसकी बीवी ने एक बढ़िया, आलीशान, स्ट्रिपटीज़ डांसबार में उसके लिए पार्टी का आयोजन किया था.

डांसबार में प्रवेश के समय ही दरबान ने एक कड़क सैल्यूट, भरपूर मुस्कान के साथ - ठोंका ओर बोला हैलो मिस्टर राज, आज मिज़ाज कैसे हैं आपके?

उसकी बीवी थोड़ी चकित सी हुई, पर उसने सोचा कि क्लाइंटों के साथ कभी आए होंगे यहाँ.

बार में ड्रिंक के बीच हलाकान होते उसके पति के पास एक बार बाला आई और अपनी बाहों को राज के गले में डाल कर बोली हाय हैंडसम, आज क्या बात है मूड उखड़ा है?

जैसे तैसे राज ने उस बार बाला से जान छुड़ाया तो एक दूसरी बार बाला आई और उसके गाल चूमकर बोली हाय डार्लिंग व्हाट अबाउट टुडे?

उसकी बीवी जो रोने रोने को थी अचानक सुबकियाँ लेते बाहर भागी. सामने स्टैंड पर जो टैक्सी दिखी उस पर सवार हुई और घर चलने को कहा. पीछे से राज भी दौड़ता हुआ आया और बगल में बैठकर उसे समझाने का प्रयत्न करने लगा. परंतु उसकी बीवी का रोना रुक ही नहीं रहा था.

इतने में टैक्सी ड्राइवर बोला ऐसा लगता है मिस्टर राज, आज आपका पाला किसी मूडी लड़की से पड़ गया है.

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चुटकुला # 009

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परिवार में सबकुछ

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एक सभागार में अखंड रामायण का पाठ किया जा रहा था. शाम का समय था श्रद्धालुओं की भीड़ लगी थी और सभागार में तिल रखने को जगह नहीं थी.

पाठ चल रहा था-

 
सुनहु नाथ कह मुदित बिदेहू। ब्रह्म जीव इव सहज सनेहू।।
पुनि पुनि प्रभुहि चितव नरनाहू। पुलक गात उर अधिक उछाहू।।

फ़िल्मी धुनों पर रामायण की पाठों के बीच अचानक एक घनघोर गर्जना हुई और एक चमत्कार हो गया.

एक राक्षस प्रकट हो गया था वहाँ. लपलपाती, आग उगलती जिव्हा और खून से सने उसके लंबे नुकीले दाँत उसे भयानक बना रहे थे.

सभागार में भगदड़ मच गई.

जिसे जैसी जगह दिखी भाग निकला. सेकेण्डों में सभागार खाली हो गया. पुजारी जिसके निर्देशन में पाठ किया जा रहा था, भागने वालों में प्रथम था.

परंतु एक व्यक्ति निर्विकार बैठा हुआ था.

राक्षस गरजते हुए उसके पास पहुँचा और पूछा तुम जानते नहीं मैं कौन हूँ?

उस व्यक्ति ने कहा हाँ मैं जानता हूँ तुम कुम्भीपाक नर्क के राक्षस हो.

राक्षस ने गरजते हुए, आग उगलते हुए फिर पूछा तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता?

उस व्यक्ति का जवाब था नहीं, बिलकुल नहीं.

राक्षस का गुस्सा आसमान पर था देवता भी तुम्हारी रक्षा नहीं कर पाएंगे मूर्ख! ये बता तुझे मेरा भय क्यों नहीं है?

उस व्यक्ति ने उसी शांति से जवाब दिया मैं पिछले पच्चीस वर्षों से शादीशुदा हूँ.

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2 टिप्पणियाँ

  1. पहला लतीफ़ा - आय्न रैण्ड की एक कहानी भी है इस तरह की।

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  2. लतीफ़ों का यही तो मजा है.

    सुने-सुनाए हजार बार दोहराए - परंतु कहने सुनने का नया अंदाज चुटकुलों में नया मजा देता है.

    जवाब देंहटाएं

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