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बगिया....

बगिया


- कुसुम लता त्यागी

बगिया में कोयल कूके है ,

कुहु कुहु ओहो कुहु कुहु

ये मंत्र कानों में फूंके है ,

तु ही तु है ओहो तु ही तु है


आकाश में पंछी डोले हैं ,

फुर फुर फुर ओहो फुर फुर फुर

संगीत मिलन का बोले है ,

तू ही तू है ओहो तू ही तू है


पपिहा ये बूंद को तरसे है ,

कहे पिया पिया ओहो पिया पिया

ये तुझसे मिलन के नगमें हैं ,

कहे मोरा जिया ओहो मोरा जिया


फूलों पर भौंरे गूंजे हैं ,

गुन गुन गुन ओहो गुन गुन गुन

ओंकार की सुन्दर की गूंजें हैं ,

सुन सुन सुन ओहो तू भी तो सुन


आकाश में बादल गरजें हैं ,

उमड़ घुमड़ ओहो उमड़ घुमड़

वो भी तो पी से मिलने का ,

सुर है सुन्दर ओहो अति सुन्दर


बादल से पानी बरसे है ,

छम छम छ म ओहो छम छम छम

भक्तिन देवालय जाए है ,

कहे थम थम थम ओहो थम थम थम

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चित्र : रवि

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