रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

बगिया....

बगिया


- कुसुम लता त्यागी

बगिया में कोयल कूके है ,

कुहु कुहु ओहो कुहु कुहु

ये मंत्र कानों में फूंके है ,

तु ही तु है ओहो तु ही तु है


आकाश में पंछी डोले हैं ,

फुर फुर फुर ओहो फुर फुर फुर

संगीत मिलन का बोले है ,

तू ही तू है ओहो तू ही तू है


पपिहा ये बूंद को तरसे है ,

कहे पिया पिया ओहो पिया पिया

ये तुझसे मिलन के नगमें हैं ,

कहे मोरा जिया ओहो मोरा जिया


फूलों पर भौंरे गूंजे हैं ,

गुन गुन गुन ओहो गुन गुन गुन

ओंकार की सुन्दर की गूंजें हैं ,

सुन सुन सुन ओहो तू भी तो सुन


आकाश में बादल गरजें हैं ,

उमड़ घुमड़ ओहो उमड़ घुमड़

वो भी तो पी से मिलने का ,

सुर है सुन्दर ओहो अति सुन्दर


बादल से पानी बरसे है ,

छम छम छ म ओहो छम छम छम

भक्तिन देवालय जाए है ,

कहे थम थम थम ओहो थम थम थम

**-**


चित्र : रवि

.

.

1 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.