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व्यंग्य - कंप्यूटरजी को एक ख़त...

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प्रिय श्री कंप्यूटरजी

- गोपाल चतुर्वेदी

प्रिय श्री कंप्यूटरजी,

परलोकीप्रसाद का सादर वंदे स्वीकार हो.

आगे समाचार यह है कि परमेश्वर की कृपा से यहाँ सब आनंद-मंगल है. ऐसी ही कामना आपके लिए भी है. भारत ज्योतिष संघ ने अपनी साधारणसभा की अत्यावश्यक बैठक में यह निश्चय किया है कि मैं आपसे तत्काल संपर्क करूं. आपको पत्र लिखने के मूल में विशुद्ध ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' की भावना है. जैसा आपको विदित है, भारत अर्वाचीन और आधुनिक जीवन-शैली के सह-अस्तित्व का सबसे सशक्त उदाहरण है.

दिल्ली में जहाँ एक ओर परांठेवाली गली है, वहीं चाइनीज भोजन के पाँच-सितारा रेस्तरां भी हैं. कहीं कैबरे चल रहा है, कहीं कथा. तकनीकी कारखानों की आधारशिला भी शुभमुहूर्त के समय पूजा-पाठ के बाद, नारियल फोड़कर रखी जाती है. यह मिली-जुली संस्कृति हमारी सबसे महत्वपूर्ण धरोहर है. हजारों वैज्ञानिकों का अथक परिश्रम और लगन इसके लिए जिम्मेदार है, साथ ही हम पंडितों का संस्कार-प्रेम भी.

हाल ही में हमारे शांतिप्रिय देश में एक रक्तहीन क्रांति हुई है. नई सरकार और नए नेतृत्व का प्रादुर्भाव हुआ है. सुना है, इसमें आपकी बहुत चलती है. प्रत्याशियों के चयन से लेकर उनकी विजय तक पर आपका अदृष्ट प्रभाव है. ऐसे हमारे वर्ग ने भी हर आमचुनाव में यही काम सफलतापूर्वक अंजाम दिया है. हमारे नियत क्षेत्र में आपके अचानक प्रवेश से हमें आशंका है कि कहीं इस देश की मिश्रित सांस्कृतिक विरासत पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.

सदियों से हम निर्धन और धनवानों में समान रूप से आशा बांट रहे हैं और सटोरियों में नंबर. हमारी दरें देनेवाले की क्षमता के आधार पर लचीली अर्थात् समाजवादी है. समय के साथ हम भविष्यवक्ताओं, तांत्रिकों और पूजा-पाठियों का विशिष्ट वर्ग बन गया है. ऐसे में हमारा एकमात्र लक्ष्य जनता की सेवा है. संभव है, आप भी लोक कल्याण की भावना से प्रेरित होकर हमारे देश में पधारे हों. यदि ऐसा है तो आपकी उपस्थिति से हमें कोई एतराज नहीं. ‘अतिथि देवो भव'. आपका हम हृदय से स्वागत करते हैं.

जरूरी सिर्फ यह है कि हम व्यर्थ की पेशेवर प्रतियोगिता में न उलझें. एक डॉक्टर कभी भी दूसरे की भांजी नहीं मारता. एक के पास रोगी फंसा तो वह अपनी फीस सीधी कर दूसरे डॉक्टर के पास उसे अवश्य भेजता है. बहाना खून की जाँच का हो या एक्सरे का. यदि मरीज संपन्न हो तो चार-पाँच चिकित्सकों की टोली उस पर शोध करने लगती है. यह अपने पेशे के प्रति निष्ठा और सहयोगी भावना का आदर्श उदाहरण है. हमें भी ऐसा ही पारस्परिक सहयोग और सौहार्द बढ़ाना चाहिए. हम भी तो हम-पेशेवर लोग हैं. डॉक्टरों की आपसदारी श्लाघनीय और अनुकरणीय है. इससे आप भी पनपेंगे और हम भी फूलेंगे-फलेंगे. हमारा महत्व हमारे प्रतीक होने में है. हम अंजान आगत के, अज्ञान के जानकार होने का दम भरते हैं, आप तथ्यों के ज्ञान से भगवान होने का भ्रम. कभी-कभी आप जब वर्षा की भविष्यवाणी करते हैं तो दिन-भर सूरज चमकता है.

हमने अष्टग्रह योग में प्रलय की आशंका व्यक्त की. पर भारत को विनाश से बचाना था. निरंतर पूजा-पाठ से आसन्न संकट को टाल भी दिया. इसी कारण अलग-अलग हम आधे-अधूरे हैं. सिर्फ आपसी सहयोग से पूरे हो सकते हैं. मेरा विनम्र सुझाव है कि हम लोग आपस में अपने प्रभाव-क्षेत्र बांट लें और अपने निर्धारित दायरों में बिना समय खोए, कार्यरत हो जाएँ.

यों भी आप गरीबों की पहुँच के बाहर हैं. उनकी समस्याएँ और भाषा समझने के लिए हमारा अनुभव आवश्यक है. ऐसे देश का जन साधारण जीवन की कटु वास्तविकताओं से त्रस्त है. उसकी सेवा हम बेहतर कर सकते हैं, क्योंकि आप तथ्यों की नीरस गिनती गिनाते हैं जबकि हम सपने भुनाते हैं. इस परिप्रेक्ष्य में मेरा सुझाव है कि आप दफ़्तरों की देखभाल करें या प्रबंधकों और उनकी संस्थाओं की. व्यक्ति की उलझनें हम सुलझा लेंगे. यदि आप मेरे विचार से सहमत हों तो जन्म-पत्री बनाने और भविष्यफल देने का कार्य तत्काल रोक दीजिए. यह आपकी असाधारण प्रतिभा का सरासर दुरूपयोग है. अपने प्रस्तावित बंटवारे के अनुसार व्यक्ति हमारे हिस्से आते हैं और संस्थाएँ आपके.

मैं बहुत सोच-विचार के पश्चात् इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि भारत की शहरी जनता क्रिकेट और राजनीति में बराबर की रूचि लेती है. दोनों अनिश्चय के खेल हैं और शायद यही उनकी लोकप्रियता का रहस्य हो. पता नहीं कब कपिलदेव बाहर हों और अब्दुल गफ़ूर अंदर. भारत ज्योतिष संघ भारतवाषियों के यह दोनों प्रमुख मनोरंजक शौक आपको सौंपने को प्रस्तुत है. आप ही अपनी असामान्य प्रतिभा से पता लगा सकते हैं कि क्या भारतीय क्रिकेट का भविष्य भी प्रमुख विरोधी दलों के समान है और अब अगले पाँच वर्ष तक जीत की आशा व्यर्थ है?



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जहाँ तक राजनीतज्ञों का प्रश्न है, हमें सम्मिलित प्रयास करना चाहिए. प्रजातंत्र में स्वस्थ विरोध का होना आवश्यक है. इस संदर्भ में हम विरोधी नेताओं को निराश न होने देने का जिम्मा लेते हैं. प्रधान-मंत्री के करीब होने के कारण सत्ता पक्ष आपका दायित्व है. उनकी नियति के निर्णय की जैसी सूचना आप देंगे, हम उनका वैसा ही भविष्य बताएंगे. यह ‘चढ़ावा' भी अच्छा खासा देते हैं. जो भी मिलेगा, उसमें फ़िफ़्टी-फ़िफ़्टी पक्का रहा. फ़ायदे के सौदे का बराबर बंटवारा करने के प्रस्ताव को आप हमारी नेकनीयती का सबूत मान सकते हैं. यकीनन आप हमारे मित्रता के बढ़े हाथ को स्वीकार करेंगे. यह निर्विवाद है कि पढ़े लिखे लोग आपकी बौद्धिक प्रतिभा के कायल हैं. हमारी सरकार भी आपको आधुनिक प्रगति का पर्याय मानती है. पर भारत गांवों में बसता है. जनमानस में स्थापित होने के लिए आपको हमारी सहायता की आवश्यकता है. यदि आप हमसे सहयोग करे तो हम पूरे देश में आपका डंका बजवा देंगे. भारत ज्योतिष संघ हर गांव में एक कंप्यूटर-मंदिर बनवाने को प्रस्तुत है. लोग आज जैसे हनुमानजी की शरण में जाते हैं, वैसे ही आपके दर्शन को जाएंगे. मन्नतें मानेंगे, चढ़ावा चढ़ाएंगे. हमारा पुजारी प्रसाद पाएगा. नाम आपका, नामा हमारा! आप करोड़ों देवताओं की श्रेणी में आ जाएंगे.

हमारे देश में बरसात में बाढ़ अनिवार्य है और गर्मियों में सूखा. वर्षा कितनी होनी चाहिए, सामूहिक भविष्य के दायित्व के अंतर्गत आप निर्धारित करेंगे. कृषि मंत्रालय को दिए गए आपके आंकड़ों को पूजा-पाठ-हवन आदि से हम सच करेंगे. देश की तरक्की ऐसे ही टीम-वर्क पर निर्भर है. आप हमारी ओर से प्रधानमंत्री को सुझाव दे सकते हैं कि आपको देश में लाने में जितनी विदेशी मुद्रा खर्च होगी, हम अर्थात् ज्योतिषियों, तांत्रिकों और पंडितों को बाहर भेजकर कमाई जा सकती है. जैसा आप जानते ही हैं, अधिकतर पाँच सितारा होटलों में एक ज्योतिषी रहता है. सब विदेशी पर्यटक उसके आगे हाथ फैलाते हैं. यदि हम विदेशों में भविष्य बताने के कैंप लगाएँ तो कमाई की कल्पना की जा सकती है. देश का भविष्य बन जाएगा, अपना और आपका भी. हमारे पास देश की प्रगति की कई योजनाएं हैं. गैस कांड और जासूसी न दोहराई जाए इसकी भी. हम सरकार के साथ अवैतनिक सलाहकार के रूप में जुड़ने को तैयार हैं. सब सरकारी कर्मचारियों की कुंडली बाँचेंगे और पाप ग्रहवालों की छुट्टी करवा देंगे. आम शिकायत है कि सरकारी नौकर कार्यकुशल नहीं हैं. यदि चयन में हमें शामिल किया जाए तो हम जन सेवा की भावना से ओतप्रोत लोगों को छांट देंगे. शुभ ग्रहों से प्रभावित व्यक्ति क्या खाक जन-सेवा करेंगे.

आप विश्वास मानिए, ऐसे लोकोपयोगी कार्यों के लिए हमारी सेवाएँ निःशुल्क उपलब्ध हैं. यदि आप हमसे सहयोग करना चाहते हैं तो सूचित करें. शुभ मुहूर्त में हम साथ बैठकर विचार-विमर्श कर सकते हैं.

उत्तर की प्रतीक्षा में,

आपका हमपेशा

परलोकीप्रसाद

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साभार- दुम की वापसी - व्यंग्य संकलन, गोपाल चतुर्वेदी, प्रकाशक - प्रभात प्रकाशन, चावड़ी बाजार दिल्ली 110006.

1 टिप्पणियाँ

  1. बेनामी8:31 am

    ताली बजा कर इस लेख की तारीफ करता हूं.

    "हमारा महत्व हमारे प्रतीक होने में है. हम अंजान आगत के, अज्ञान के जानकार होने का दम भरते हैं, आप तथ्यों के ज्ञान से भगवान होने का भ्रम."

    पूरे लेख में कई सुंदर पंक्तियां बड़ी सहजता से पिरोई गयी हैं.एक सकारात्मक लेख जो हल की तलाश कर रहा है केवल मुसीबतों का पिटारा नहीं खोल रहा है!

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