भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोड

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भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोड

- बालेन्दु शर्मा दाधीच

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास और सुधार की निरंतर प्रक्रिया चलती रहती है और इसी संदर्भ में पिछले कुछ वर्षों से सूचनाओं के भंडारण की एक आधुनिकतम पद्धति लोकप्रिय हो रही है जिसे यूनिकोड कहते हैं। यूनिकोड के माध्यम से पहली बार सूचना प्रौद्योगिकी पर अंग्रेजी की अनिवार्य निर्भरता से मुक्ति की संभावनाएं दिख रही हैं क्योंकि यह पद्धति एक आम कम्प्यूटर को विश्व की सभी भाषाओं में काम करने में सक्षम बना सकती है। जाहिर है, आईटी के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को विकसित होते देखने की आकांक्षा रखने वाले लोग यूनिकोड में छिपी संभावनाओं को देखकर उत्साहित हैं क्योंकि कई दशकों के बाद अब हम बिना अंग्रेजी जाने कंप्यूटर की क्षमताओं का प्रयोग करने की स्थिति में आ रहे हैं। मीडिया में कम्प्यूटर टेक्नॉलॉजी की असंदिग्ध रूप से महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए कहा जा सकता है कि वह भी आने वाले कुछ वर्षों में इस काल-विभाजक परिघटना से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता।

हालांकि यूनिकोड है तो सिर्फ डेटा के स्टोरेज संबंधी एनकोडिंग मानक, लेकिन इसके प्रयोग से कंप्यूटरों की कार्यप्रणाली और उनके इस्तेमाल के तौर-तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है क्योंकि डेटा ही कंप्यूटरों के संचालन का केंद्र बिन्दु है। भले ही हम कंप्यूटर का किसी भी काम के लिए प्रयोग करें, मसलन लेखन कार्य के लिए, ध्वनि रिकॉर्डिंग के लिए या फिर वीडियो प्रोसेसिंग के लिए, हमें इसके लिए कंप्यूटर को या तो कुछ सूचनाएं प्रदान करनी पड़ती हैं (जैसे टाइपिंग के माध्यम से या रिकॉर्डिंग के जरिए) या फिर हम कुछ सूचनाएं कंप्यूटर से ग्रहण करते हैं (मसलन पहले से रिकार्डेड वीडियो को देखना या पहले से मौजूद फाइलों को खोलना)। इन्हें क्रमश: इनपुट और आउटपुट के रूप में जाना जाता है। इन दोनों प्रक्रियाओं में जिन सूचनाओं (डेटा) का प्रयोग होता है उसे कंप्यूटर पर अंकों के रूप में स्टोर किया जाता है क्योंकि वह सिर्फ अंकों की भाषा जानता है, और वह भी सिर्फ दो अंकों- 'शून्य' तथा 'एक' की भाषा। इन दो अंकों का भिन्न-भिन्न ढंग से पारस्परिक बाइनरी संयोजन कर अलग-अलग डेटा को कंप्यूटर पर रखा जा सकता है। मिसाल के तौर पर 01000001 का अर्थ है अंग्रेजी का कैपिटल ए अक्षर और 00110001 से तात्पर्य है 1 का अंक।

अक्षरों या पाठ्य सामग्री और कंप्यूटर पर स्टोर किए जाने वाले बाइनरी डिजिट्स के बीच तालमेल बिठाने वाली प्रणाली को एनकोडिंग कहते हैं। एनकोडिंग टेबल के माध्यम से कंप्यूटर यह तय करता है कि फलां बाइनरी कोड को फलां अक्षर या अंक के रूप में स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाए। किस एनकोडिंग में कितने बाइनरी अंक प्रयुक्त होते हैं, इसी पर उसकी क्षमता और नामकरण निर्भर होते हैं। उदाहरण के तौर पर अब तक लोकप्रिय एस्की एनकोडिंग को 7 बिट एनकोडिंग कहा जाता है क्योंकि इसमें हर संकेत या सूचना के भंडारण के लिए ऐसे सात बाइनरी डिजिट्स का प्रयोग होता है। एस्की एनकोडिंग के तहत इस तरह के 128 अलग-अलग संयोजन संभव हैं यानी इस एनकोडिंग का प्रयोग करने वाला कम्प्यूटर 128 अलग-अलग अक्षरों या संकेतों को समझ सकता है। अब तक कंप्यूटर इसी सीमा में बंधे हुए थे और इसीलिए भाषाओं के प्रयोग के लिए उन भाषाओं के फ़ॉन्ट पर सीमित थे जो इन संकेतों को कंप्यूटर स्क्रीन पर अलग-अलग ढंग से प्रदर्शित करते हैं। यदि अंग्रेजी का फ़ॉन्ट इस्तेमाल करें तो 01000001 संकेत को ए अक्षर के रूप में दिखाया जाएगा। लेकिन यदि हिंदी फ़ॉन्ट का प्रयोग करें तो यही संकेत ग, च या किसी और अक्षर के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

यूनिकोड एक 16 बिट की एनकोडिंग व्यवस्था है, यानी इसमें हर संकेत को संग्रह और अभिव्यक्त करने के लिए सोलह बाइनरी डिजिट्स का इस्तेमाल होता है। इसीलिए इसमें 65536 अद्वितीय संयोजन संभव हैं। इसी वजह से यूनिकोड हमारे कंप्यूटर में सहेजे गए डेटा को फ़ॉन्ट की सीमाओं से बाहर निकाल देता है। इस एनकोडिंग में किसी भी अक्षर, अंक या संकेत को सोलह अंकों के अद्वितीय संयोजन के रूप में सहेज कर रखा जा सकता है। चूंकि किसी एक भाषा में इतने सारे अद्वितीय अक्षर मौजूद नहीं हैं इसलिए इस स्टैंडर्ड (मानक) में विश्व की लगभग सारी भाषाओं को शामिल कर लिया गया है। हर भाषा को इन 65536 संयोजनों में से उसकी वर्णमाला संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार स्थान दिया गया है। इस व्यवस्था में सभी भाषाएं समान दर्जा रखती हैं और सहजीवी हैं। यानी यूनिकोड आधारित कम्प्यूटर पहले से ही विश्व की हर भाषा से परिचित है (बशर्ते ऑपरेटिंग सिस्टम में इसकी क्षमता हो)। भले ही वह हिंदी हो या पंजाबी, या फिर उड़िया। इतना ही नहीं, वह उन प्राचीन भाषाओं से भी परिचित है जो अब बोलचाल में इस्तेमाल नहीं होतीं, जैसे कि पालि या प्राकृत। और उन भाषाओं से भी जो संकेतों के रूप में प्रयुक्त होती हैं, जैसे कि गणितीय या वैज्ञानिक संकेत।

यूनिकोड के प्रयोग से सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि एक कंप्यूटर पर दर्ज किया गया पाठ (टेक्स्ट) विश्व के किसी भी अन्य यूनिकोड आधारित कम्प्यूटर पर खोला जा सकता है। इसके लिए अलग से उस भाषा के फ़ॉन्ट का इस्तेमाल करने की अनिवार्यता नहीं है क्योंकि यूनिकोड केंद्रित हर फ़ॉन्ट में सिध्दांतत: विश्व की हर भाषा के अक्षर मौजूद हैं। कंप्यूटर में पहले से मौजूद इस क्षमता को सिर्फ एक्टीवेट (सक्रिय) करने की जरूरत है जो विंडोज एक्सपी, विंडोज 2000, विंडोज 2003, विंडोज विस्ता, मैक एक्स 10, रेड हैट लिनक्स, उबन्तु लिनक्स आदि ऑपरेटिंग सिस्टम्स के जरिए की जाती है। विश्व भाषाओं की यह उपलब्धता सिर्फ देखने या पढ़ने तक ही सीमित नहीं है। हिंदी जानने वाला व्यक्ति यूनिकोड आधारित किसी भी कम्प्यूटर में टाइप कर सकता है, भले ही वह विश्व के किसी भी कोने में क्यों न हो। सिर्फ हिंदी ही क्यों, एक ही फाइल में, एक ही फ़ॉन्ट का इस्तेमाल करते हुए आप विश्व की किसी भी भाषा में लिख सकते हैं। इस प्रक्रिया में अंग्रेजी कहीं भी आड़े नहीं आती। विश्व भर में चल रही भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी का यह अपना अलग ढंग का योगदान है।

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यूनिकोड आधारित कम्प्यूटरों में हर काम किसी भी भारतीय भाषा में किया जा सकता है, बशर्ते ऑपरेटिंग सिस्टम या कंप्यूटर पर इन्स्टॉल किए गए सॉफ्टवेयर यूनिकोड व्यवस्था का पालन करें। मिसाल के तौर पर माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस संस्करण, सन माइक्रोसिस्टम्स के स्टार ऑफिस या फिर ओपनसोर्स पर आधारित ओपनऑफिस.ऑर्ग जैसे सॉफ्टवेयरों में आप शब्द संसाधक (वर्ड प्रोसेसर), तालिका आधारित सॉफ्टवेयर (स्प्रैडशीट), प्रस्तुति संबंधी सॉफ्टवेयर (पावर-प्वाइंट आदि) तक में हिंदी और अन्य भाषाओं का बिल्कुल उसी तरह प्रयोग कर सकते हैं जैसे कि अब तक अंग्रेजी में किया करते थे। यानी न सिर्फ टाइपिंग बल्कि शॉर्टिंग, इन्डेक्सिंग, सर्च, मेल मर्ज, हेडर-फुटर, फुटनोट्स, टिप्पणियां (कमेंट) आदि सब कुछ। कंप्यूटर पर फाइलों के नाम लिखने के लिए भी अब अंग्रेजी की जरूरत नहीं रह गई है। यदि आप अपनी फाइल का नाम हिंदी में 'मेरीफाइल.डॉक' भी रखना चाहें तो इसमें कोई अड़चन नहीं है। इंटरनेट पर भी अब यूनिकोड का मानक खूब लोकप्रिय हो रहा है और धीरे-धीरे लोग पुरानी एनकोडिंग व्यवस्था की सीमाओं से निकल कर यूनिकोड अपनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। गूगल, विकीपीडिया, एमएसएन आदि इसके उदाहरण हैं जिनमें हिंदी में काम करना उसी तरह संभव है जैसे कि अंग्रेजी में। यूनिकोड आधारित भारतीय भाषाओं की वेबसाइटों की विषय वस्तु (कॉन्टेंट) सर्च इंजनों द्वारा भी सहेजा जाता है यानी विश्व स्तर पर उनकी उपस्थिति और दायरा बढ़ता है। फिलहाल सर्च इंजनों पर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं की वेबसाइटों की स्थिति दयनीय है क्योंकि हर वेबसाइट में अलग-अलग फ़ॉन्ट का इस्तेमाल होने के कारण सर्च इंजनों के लिए उनकी विषय वस्तु को समझना संभव नहीं है। यूनिकोड के प्रयोग से यही काम उनके लिए बहुत आसान हो जाता है।

यूनिकोड आधारित वेबसाइटों या पोर्टलों को देखने के लिए पाठक के पास संबंधित फ़ॉन्ट होने की अनिवार्यता भी नहीं है। अगर कोई वेबसाइट यूनिकोड में है तो उसे विश्व में किसी भी स्थान पर फ़ॉन्ट डाउनलोड किए बिना न सिर्फ देखा जा सकता है बल्कि उसके लेखों को अपने कंप्यूटर पर सहेजा भी जा सकता है। डाइनेमिक फ़ॉन्ट नामक टेक्नॉलॉजी के जरिए यह सुविधा सीमित अर्थों में पहले भी मौजूद थी लेकिन कंप्यूटर पर सहेजे गए लेख तभी पढ़े जा सकते थे यदि कंप्यूटर में संबंधित फ़ॉन्ट मौजूद हो। अब यह सीमा नहीं रही।

कंप्यूटर अब अंग्रेजी का मोहताज नहीं रहा और इसीलिए यूनिकोड ने उसकी सम्पूर्ण कार्यप्रणाली भी बदल दी है। डेटा के भंडारण के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग और प्रस्तुति के तरीके भी बदल गए हैं। चूंकि यूनिकोड सोलह बिट की एनकोडिंग व्यवस्था है और विश्व के अधिकांश सॉफ्टवेयर पुरानी एनकोडिंग व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गए थे इसलिए ऐसे सॉफ्टवेयर यूनिकोड टेक्स्ट को समझ नहीं पाते। नतीजतन विश्व भर में सॉफ्टवेयरों को यूनिकोड समर्थन युक्त बनाने की प्रक्रिया चल रही है। किसी कंप्यूटर पर यूनिकोड का पूरा लाभ लेने के लिए न्यूनतम आवश्यकता है ताजातरीन विन्डोज, लिनक्स या मैक ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग। चूंकि इन ऑपरेटिंग सिस्टम्स के संसाधनों की अपनी जरूरतें हैं इसलिए इस बात की काफी संभावना है कि संबंधित कम्प्यूटर कम से कम पी-4, 2 गीगाहर्त्ज श्रेणी का हो और कम से कम 40 जीबी हार्ड डिस्क और 256 एमबी रैम (रैंडम एक्सेस मेमरी) से युक्त हो। इन्हीं कारणों से यूनिकोड की ओर प्रस्थान करने में कुछ आर्थिक बिंदुओं पर विचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

(बालेंदु शर्मा दाधीच, प्रभासाक्षी.कॉम से सम्बद्ध हैं)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. 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श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर 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रचनाकार: भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोड
भूमंडलीकरण में आईटी का योगदान है यूनिकोड
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