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पति परमेश्वर...


हास्य-व्यंग्य कविता

- रामेश्वर कांबोज 'हिमांशु'

पति परमेश्वर रहा नहीं ,
पति बना पतंग ।

दिन भर घूमे गली-गली,
बनकर मस्त मलंग ॥

घर में आटा दाल नहीं,
नहीं गैस नहीं तेल ।

पति चार सौ बीस हैं ,
घर को कर दिया फ़ेल ॥

सुबह घर से निकल पड़े,
लौटे हो गई शाम ।

हम घर में घु्टते रहे
छीन लिया आराम ॥

खाना अच्छा बना नहीं ,
यही शिकायत रोज़ ।

पत्नी तपे रसोई में ,
करें पति जी मौज़ ।

एक बात सबसे कहूँ ,
सुनलो देकर ध्यान ।

पति परमेश्वर रहा नहीं ,
पति बना शैतान ॥

पति दर्द समझे नहीं ,
पति कोढ़ में खाज ।

पत्नी का घर-बार है ,
फिर भी पति का राज॥

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संपर्क:

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

प्राचार्य केन्द्रीय विद्यालय हज़रतपुर फ़ीरोज़ाबाद (उ.प्र.) 283103
mobile -09319805777

2 टिप्पणियाँ

  1. वाह! बढियां है. आप सर हमेशा की तरह इस बार भी अच्छी कविता/व्यंग्य लाये हैं.
    धन्यवाद.

    जवाब देंहटाएं
  2. अब हम क्या बोले? आप तो खुद सत्यवादी है।

    जवाब देंहटाएं

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