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सोनिया श्रीवास्तव की कविता : निगाहें

कविता

निगाहें...............कफ़न

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-सोनिया श्रीवास्तव

किरणों ने पलकें झुकाई
झालारों में खुशियाँ जगमगाई
ढोल ने बधाइयाँ गाई
लो मेंहदी की रात आई
भोर हुई मेंहदी रंग लायी


हल्दी ने फिर दी छटाई
सबने मिल फिर परी सजायी
निशा ढली चांदनी संग बारात है आई
मेरी मौत पर सबने खुशियाँ मनाई


नमी लिए तारों की छाओं में
लाल कफ़न में लिपटी
मैं पिया के घर आई
हवन कुण्ड की आग्नि ने जो चिता जलाई


बस उम्र भर उसी में सुलगती रही
तुम तो एक मौत से डरते हो
मैं सफ़ेद कफ़न की
दूसरी मौत की राह तकती रही.

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