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देवेन्द्र पाण्डेय की कविता मेरी श्रीमती का प्रश्न पत्र

कविता

-देवेन्द्र पाण्डेय

-सारनाथ-वाराणसी।           

                   मेरी श्रीमती

प्रश्न-पत्र  गढ़ती  रहती है  वह मुझसे लड़ती रहती है।

मुन्ना क्यों कमजोर हो गया   शानू को कितना बुखार है।
राशन-पानी खतम हो गया  अब किसका कितना उधार है॥

दफ्तर से जब घर जाता हूँ वह मुझको पढ़ती रहती है।

सब्जी लाए भूल गए क्या चीनी लाए भूल गए क्या।
आंटा चक्की से लाना था खाली आए भूल गए क्या॥

मुख बोफोर्स बना कर मुझ पर बम-गोले जड़ती रहती है।

प्रश्नों से जब घबड़ाता हूँ  कहता अभी थका-मांदा हूँ।
कहती कैसे था सकते हो तुम नर हो मैं ही मांदा हूँ॥

मुझको ही झुकना पड़ता है वह हरदम चढ़ती रहती है।

पूरे घर की  शान वही है  हॉं  मेरी भी  जान वही है।
हीरो-होण्डा दिल की धड़कन चेहरे की मुस्कान वही है॥

बन कर शतरंगी रंगोली आंगन में कढ़ती रहती है।

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