इथियोपिया की लोक कथाएँ - 2 // 11 सोना उगलने वाला गधा // सुषमा गुप्ता

SHARE:

बच्चो इथियोपिया में एक प्रान्त है सिडामो। वहाँ की जमीन बहुत उपजाऊ है। वहाँ की मिट्टी काली है और वहाँ हमेशा हरियाली छायी रहती है। कहते हैं कि...


image

बच्चो इथियोपिया में एक प्रान्त है सिडामो। वहाँ की जमीन बहुत उपजाऊ है। वहाँ की मिट्टी काली है और वहाँ हमेशा हरियाली छायी रहती है।

कहते हैं कि एक बार सिडामो का एक आदमी बाजार से एक बोरा अनाज खरीद कर लाया। उसको मालूम नहीं था कि उसके बोरे में एक छोटा सा छेद भी था सो धीरे धीरे करके उसके बोरे का करीब करीब सारा अनाज रास्ते ही में बिखर गया।

जब वह घर पहुँचा तो उसने दुखी मन से अपना वह बचा हुआ अनाज अपने अनाज भंडार में रख दिया।

पर जब वह अगले दिन सुबह जागा तो क्या देखता है कि पिछले दिन जहाँ जहाँ अनाज बिखरा था वहाँ वहाँ वह अनाज उग आया है और वह इतना ऊँचा बढ़ गया है कि अब उसे कहीं कोई रास्ता नहीं सुझाई पड़ रहा है।

वह बेचारा आदमी उसी उगे अनाज के जंगल में बाहर जाने का रास्ता ढूँढते ढूँढते मर गया।

[ads-post]

तो ऐसा है वह सिडामो प्रान्त और ऐसे हैं वहाँ के लोग। वहाँ की जमीन तो इतनी ज्यादा उपजाऊ है पर लोग बहुत आलसी हैं।

उसी प्रान्त के पड़ोस के एक शहर में एक व्यापारी रहता था। उसने इस जगह के बारे में ऐसी कहानी सुनी तो उसने सोचा कि वह वहाँ जा कर अपनी दूकान लगायेगा।

वह वहाँ आया, उसने अपनी दूकान लगायी और कुछ ही समय में बहुत अमीर हो गया क्योंकि वहाँ के लोग अनाज उगाने की बजाय उसे बाजार में खरीदना ज़्यादा पसन्द करते थे।

पर वह व्यापारी इतना ज़्यादा पैसा होने के बावजूद भी खुश नहीं था क्योंकि वह देखता था कि इतनी सुन्दर उपजाऊ जमीन इन आलसी लोगों की वजह से बेकार हो रही है।

इसके अलावा उसने यह भी देखा कि वह अच्छी या बुरी जैसी भी चीज़ अपनी दूकान पर बेचने के लिये लाता वह बिना किसी परेशानी के बिक जाती।

इस बात से उसको अपने व्यापार में कोई मजा नहीं आ रहा था। कई बार उसने वहाँ के लोगों को समझाया कि तुम लोग ऐसा क्यों करते हो परन्तु उनकी समझ में कुछ आता ही नहीं था।

जब तक वह जवान था व्यापार के सिलसिले में वह इधर उधर दूसरे देशों में जाता भी रहता था परन्तु बूढ़ा होने पर तो उसको वहीं रहना पड़ता, उन्हीं बेवकूफ और आलसियों के बीच।

एक दिन उसको उन आलसी लोगों को सबक सिखाने की एक तरकीब सूझी। उसने अपना एक बहुत ही बूढ़ा और बीमार गधा लिया, उसके मुँह में उसने सोने के तीन सिक्के रखे और उसको बाजार में बेचने के लिये ले आया।

उसने कहना शुरू किया - "आओ आओ, ओ सिडामो के लोगों यहाँ आओ और देखो मैं तुमको एक तमाशा दिखाता हूँ।

तुम जानते ही हो कि मैं कितना बूढ़ा हूँ और अमीर भी। मेरे मरने के दिन अब करीब आ रहे हैं और इतना धन मैं अपने साथ तो ले जा नहीं सकता इसलिये मैं तुम लोगों को बताना चाहता हूँ कि मैं इतना अमीर कैसे बना।

तुम लोगों को यह भी मालूम है कि मैंने कभी हल नहीं चलाया, कभी फावड़ा नहीं चलाया पर फिर भी मैं अमीर हूँ क्योंकि मेरे पास यह गधा है, सोना उगलने वाला गधा।"

यह सुन कर तो उस व्यापारी के चारों तरफ भीड़ लग गयी। व्यापारी फिर बोला - "देखो लोगों ध्यान से देखो। अगर मुझे सोने की जरूरत होती है तो बस मैं इस गधे की पूँछ ऊपर नीचे हिलाता हूँ और यह गधा मुझे सोने के सिक्के दे देता है।"

यह कह कर उस व्यापारी ने लोगों के सामने ही उस गधे की पूँछ को ऊपर नीचे किया और अपना हाथ गधे के मुँह पर रख दिया। देखते देखते गधे ने सोने का एक चमचमाता सिक्का व्यापारी के हाथ पर उगल दिया। सारे लोग यह देख कर आश्चर्यचकित रह गये।

तभी व्यापारी ने कहा - "अगर तुम लोग यह अपने आप करके देखना चाहो तो करके देख सकते हो।"

कई बेवकूफ लोग गधे की पूँछ की तरफ दौड़े पर एक अक्लमन्द आदमी गधे के मुँह की तरफ बढ़ा और अपना हाथ उसके मुँह पर लगा दिया। बेवकूफों ने गधे की पूँछ हिलायी और गधे ने तुरन्त ही उस अक्लमन्द आदमी के हाथ पर वैसा ही सोने का एक चमचमाता सिक्का उगल दिया।

एक अक्लमन्द आदमी चिल्लाया - "आश्चर्य, इस जानवर को तो मैं खरीदूँगा।"

व्यापारी बोला - "जनाब इतनी जल्दी नहीं। मैं इस गधे की बोली लगाता हूँ और फिर जो भी इसके सबसे ज़्यादा दाम लगायेगा यह गधा मैं उसी को बेचूँगा। यह तो व्यापार है न?"

व्यापारी ने बोली लगायी। उस अक्लमन्द जमींदार तथा उसके एक अमीर भाई ने अपनी सारी सम्पत्ति के बदले में उस गधे को सबसे ज़्यादा दाम लगा कर खरीद लिया।

अब व्यापारी तमाशा देखने के लिये दूर खड़ा हो गया। जमींदार अपने भाई से बोला - "पहले हम इस गधे से इसके लिये दी गयी कीमत तो वसूल कर लें।"

जमींदार के भाई ने उसकी पूँछ हिलायी और गधे के मुँह से तीसरा और आखिरी सोने का सिक्का भी जमींदार की हथेली पर आ गिरा। वह सिक्का उसने भीड़ में खड़ी एक गरीब औरत को दे दिया।

जमींदार बोला - "भाई, अब मैं यह खाली थैला इस गधे के मुँह के आगे लगाता हूँ और तुम उधर से गधे की पूँछ हिलाओ।" उन दोनों ने वैसा ही किया परन्तु काफी देर तक पूँछ हिलाने के बाद भी सोने का एक भी सिक्का गधे के मुँह से बाहर नहीं आया।

वहाँ खड़े सभी लोगों ने अपनी अपनी कोशिश की परन्तु कोई भी गधे के मुँह से सोने का सिक्का बाहर नहीं निकाल पाया। यह सब देख कर दूर खड़ा व्यापारी हँस पड़ा।

व्यापारी की इस हँसी पर जमींदार बहुत चिल्लाया। भीड़ इकठ्ठी हो गयी। जमींदार बोला - "तुमने हमें धोखा दिया है। कोई छोटा मोटा धोखा होता तो हम सह लेते परन्तु यह तो बहुत बड़ा धोखा है।"

व्यापारी बोला - "मैंने तुमको कोई धोखा नहीं दिया। जैसे हर चीज़ में एक भेद छिपा होता है वैसे ही इस गधे में भी एक भेद छिपा हुआ है। अगर तुम इस भेद को जान जाओगे तो यह गधा फिर से सोना उगलेगा।"

जमींदार गिड़गिड़ाया - "हमें वह भेद जल्दी बताओ आखिर हमने यह गधा पैसे दे कर खरीदा है।"

व्यापारी मुस्कुरा कर बोला - "तुम लोगों ने केवल गधा खरीदा है वह भेद नहीं। तुम लोगों को वह भेद जानने के लिये 100 सोने के सिक्के और देने पड़ेंगे।"

जमींदार दुखी हो कर बोला - "पर अब हमारे पास और सोना नहीं है। हमने तो अपना सारा सोना तुमको दे दिया। तुम हमको वह भेद बता दो तो हम वे 100 सोने के सिक्के तुमको गधे से उगलवा कर दे देंगे।"

व्यापारी बोला - "यह नहीं हो सकता। सिक्के तो तुमको पहले ही देने पड़ेंगे।"

इस पर दूसरे दो और अमीर आदमियों ने जमींदार और उसके भाई की सहायता करने का वायदा किया, इस शर्त पर कि वे भेद जानने के बाद गधे से उगले सोने को उनसे बाँट लेंगे।

व्यापारी सोना लेने के बाद बोला - "वह भेद कोई खास तो नहीं है, सीधा सा है। गधे से सोना उगलवाने के लिये गधे के मुँह में सोना रखना पड़ता है। देखो यह कैसे होता है।"

ऐसा कह कर उसने गधे के मुँह में दो सोने के सिक्के रख दिये। उसके नौकर ने गधे की पूँछ हिलायी और गधे ने वे दोनों सिक्के एक के बाद एक व्यापारी के हाथ पर उगल दिये। व्यापारी ने वे सिक्के अपनी जेब में डाले और अपनी दूकान की तरफ चला गया।

आज वह बहुत खुश था। वहीं से उसने लोगों से कहा - "अब तुम कोशिश करके देखो। भेद यही है कि अगर तुम सोना उसके मुँह में रखोगे तो वह सोना उगलेगा और जितना रखोगे उतना ही उगलेगा।"

अब जमींदार ने ऐसा ही किया तो गधे ने उसके रखे सिक्के ऐसे के ऐसे उगल दिये। अब व्यापारी ने पूछा - "अब बताओ, मैंने तुमको कोई धोखा तो नहीं दिया? तुमसे कोई झूठ तो नहीं बोला?"

जमींदार बोला - "बिल्कुल नहीं।" यह सुन कर व्यापारी ने अपनी दूकान बढ़ायी और अपने घर चला गया।

पर अगली सुबह वह भागा भागा बाजार आया क्योंकि उसे पता था कि गुस्से में भरी भीड़ उसका इन्तजार कर रही होगी।

वह सोच रहा था कि शायद उसके इस उदाहरण से वे लोग यह समझ जायें कि अगर जमीन से कुछ पाना चाहते हो तो पहले उसके अन्दर वह चीज़ रखो जो तुमको उससे लेनी है और इस बात से वे गुस्सा हो जायेंगे। पर ऐसा तो वहाँ कुछ भी नहीं था।

वहाँ तो गधा बीच में खड़ा था और उसके चारों तरफ बहुत सारे लोग खड़े थे। वे सब ऐसे आश्चर्यजनक गधे को देखने के लिये वहाँ दूर दूर से आये थे।

जमींदार भी बिल्कुल गुस्सा नहीं था बल्कि खुशी से गा रहा था, चिल्ला रहा था, नाच रहा था क्योंकि वह एक ऐसे आश्चर्यजनक गधे का मालिक था।

उसने व्यापारी को देखा तो चिल्ला कर बोला - "व्यापारी, तुमने सब सच कहा था। यह जानवर तो सचमुच ही बहुत आश्चर्य की चीज़ है। तुमने हम लोगों को खुश कर दिया, हम तुमसे बहुत खुश हैं।"

व्यापारी ने यह देख कर अपना सिर पीट लिया कि किन बेवकूफों और आलसियों से उसका पाला पड़ा था।

व्यापारी जब अपनी दूकान जाता तो रोज उस भीड़ से गुजरता और उसको बिना देखे दूकान तक जाने की कोशिश करता पर कभी ऐसा होता ही नहीं। वह उस भीड़ की तरफ जरूर देखता और उनकी बेवकूफी पर सिर पीटता हुआ आगे बढ़ जाता।

एक दिन वह व्यापारी बीमार पड़ गया और कुछ दिनों बाद मर गया। व्यापारी के मरने की खबर सुन कर आसपास वाले सब लोग उसको देखने के लिये आये।

उन्होंने उसके घर की तरफ इशारा करते हुए दूसरे गाँव के लोगों से कहा - "देखो, यहाँ हमारा वह भला व्यापारी रहता था। वो ही हमारे देश में सोना उगलने वाला गधा लाया था। बड़े दुख की बात है कि वह अब हमारे बीच नहीं है।"

सामान्य रूप से लोग पूरे तरीके से बुरे तो नहीं होते पर हाँ पूरे तरीके से बेवकूफ हो सकते हैं, जैसे ये सिडामो के लोग। सिखाने के बावजूद वे कुछ भी नहीं सीख सके।

---------

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं.

--

सुषमा गुप्ता का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में सन् 1943 में हुआ था। इन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से समाज शास्त्र और अर्थ शास्त्र में ऐम ए किया और फिर मेरठ विश्वविद्यालय से बी ऐड किया। 1976 में ये नाइजीरिया चली गयीं। वहां इन्होंने यूनिवर्सिटी औफ़ इबादान से लाइब्रेरी साइन्स में ऐम ऐल ऐस किया और एक थियोलोजीकल कौलिज में 10 वर्षों तक लाइब्रेरियन का कार्य किया।

वहां से फिर ये इथियोपिया चली गयीं और वहां एडिस अबाबा यूनिवर्सिटी के इन्स्टीट्यूट औफ़ इथियोपियन स्टडीज़ की लाइब्रेरी में 3 साल कार्य किया। तत्पश्चात इनको दक्षिणी अफ्रीका के एक देश़ लिसोठो के विश्वविद्यालय में इन्स्टीट्यूट औफ़ सदर्न अफ्रीकन स्टडीज़ में 1 साल कार्य करने का अवसर मिला। वहॉ से 1993 में ये यू ऐस ए आगयीं जहां इन्होंने फिर से मास्टर औफ़ लाइब्रेरी ऐंड इनफौर्मेशन साइन्स किया। फिर 4 साल ओटोमोटिव इन्डस्ट्री एक्शन ग्रुप के पुस्तकालय में कार्य किया।

1998 में इन्होंने सेवा निवृत्ति ले ली और अपनी एक वेब साइट बनायी- www.sushmajee.com <http://www.sushmajee.com>। तब से ये उसी वेब साइट पर काम कर रहीं हैं। उस वेब साइट में हिन्दू धर्म के साथ साथ बच्चों के लिये भी काफी सामग्री है।

भिन्न भिन्न देशों में रहने से इनको अपने कार्यकाल में वहॉ की बहुत सारी लोक कथाओं को जानने का अवसर मिला- कुछ पढ़ने से, कुछ लोगों से सुनने से और कुछ ऐसे साधनों से जो केवल इन्हीं को उपलब्ध थे। उन सबको देखकर इनको ऐसा लगा कि ये लोक कथाएँ हिन्दी जानने वाले बच्चों और हिन्दी में रिसर्च करने वालों को तो कभी उपलब्ध ही नहीं हो पायेंगी- हिन्दी की तो बात ही अलग है अंग्रेजी में भी नहीं मिल पायेंगीं.

इसलिये इन्होंने न्यूनतम हिन्दी पढ़ने वालों को ध्यान में रखते हुए उन लोक कथाओं को हिन्दी में लिखना पा्ररम्भ किया। इन लोक कथाओं में अफ्रीका, एशिया और दक्षिणी अमेरिका के देशों की लोक कथाओं पर अधिक ध्यान दिया गया है पर उत्तरी अमेरिका और यूरोप के देशों की भी कुछ लोक कथाएँ सम्मिलित कर ली गयी हैं।

अभी तक 1200 से अधिक लोक कथाएँ हिन्दी में लिखी जा चुकी है। इनको "देश विदेश की लोक कथाएँ" क्रम में प्रकाशित करने का प्रयास किया जा रहा है। आशा है कि इस प्रकाशन के माध्यम से हम इन लोक कथाओं को जन जन तक पहुंचा सकेंगे.

---------

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: इथियोपिया की लोक कथाएँ - 2 // 11 सोना उगलने वाला गधा // सुषमा गुप्ता
इथियोपिया की लोक कथाएँ - 2 // 11 सोना उगलने वाला गधा // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-2Hg_3StR_fY/WY2NxPi0d9I/AAAAAAAA6Ko/nC55p9wPEFQGY97hAgiaX-qb2tK8Jx6qwCHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-2Hg_3StR_fY/WY2NxPi0d9I/AAAAAAAA6Ko/nC55p9wPEFQGY97hAgiaX-qb2tK8Jx6qwCHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/08/2-11.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/08/2-11.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content