इटली की लोक कथाएँ–1 : 8 एक छोटी लड़की जो नाशपाती के साथ बेची गयी // सुषमा गुप्ता

SHARE:

एक बार एक आदमी के पास एक नाशपाती का पेड़ था जिसमें हर साल चार टोकरी नाशपाती आती थी। वह ये नाशपाती राजा को दे आया करता था। एक साल ऐसा हुआ कि...

clip_image002

एक बार एक आदमी के पास एक नाशपाती का पेड़ था जिसमें हर साल चार टोकरी नाशपाती आती थी। वह ये नाशपाती राजा को दे आया करता था।

एक साल ऐसा हुआ कि उसमें केवल साढ़े तीन टोकरी नाशपाती ही आयीं जबकि राजा को उसको चार टोकरी नाशपाती दे कर आनी थी। अब वह क्या करे।

जब उसको कोई और रास्ता नहीं सूझा तो उसने चौथी टोकरी में अपनी सबसे छोटी लड़की को रख दिया। उसको नाशपाती और उसके पत्तों से ढक दिया और उस टोकरी को बाकी की तीन टोकरियों के साथ राजा के महल में दे आया।

सारी टोकरियाँ राजा के रसोई भंडार में ले जायी गयीं। वहाँ वह लड़की उन नाशपातियों के नीचे छिपी रही। पर जब उसको वहाँ कुछ और खाने को नहीं मिला तो वह अपने ऊपर रखी हुई नाशपातियों को ही खाने लगी।

कुछ समय बाद नौकरों ने देखा कि उन टोकरियों में से नाशपातियाँ कुछ कम हो रही थीं और साथ में उन्होंने कुछ कुतरी हुई नाशपातियाँ भी देखीं।

उन्होंने सोचा कि जरूर ही कहीं या तो कोई चूहा है और या फिर कोई मोल है जो नाशपातियाँ कुतर रहा है। हमें टोकरी के अन्दर देखना चाहिये कि उसके अन्दर तो कुछ नहीं है।

सो उन्होंने एक टोकरी में से ऊपर से कुछ नाशपातियाँ और उसके कुछ पत्ते हटाये तो उनको उसमें वह छोटी लड़की दिखायी दे गयी।

उन्होंने उससे पूछा — “अरे तुम यहाँ क्या कर रही हो? चलो हमारे साथ चलो और चल कर राजा की रसोई में काम करो।”

उन्होंने उसको वहाँ से निकाल लिया और उसको परीना नाम दे दिया। परीना इतनी होशियार लड़की थी कि बहुत थोड़े समय में ही वह राजा की बहुत सारी नौकरानियों से भी अच्छा काम करने लगी।

वह सुन्दर भी इतनी थी कि कोई उसको प्यार किये बिना रह ही नहीं सकता था।

राजा का एक बेटा था जो उसी की उम्र का ही था। वह तो उसको छोड़ता ही नहीं था। वह हमेशा ही उसके साथ साथ रहता। वे दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे।

जैसे जैसे वह लड़की बड़ी होती गयी दूसरी नौकरानियाँ उससे और ज़्यादा जलने लगीं। पहले तो कुछ समय तक तो वे चुप रहीं पर फिर वे परीना को यह इलजाम देने लगीं कि वह यह शान बघारती है कि वह जादूगरनी का खजाना चुरा सकती है।

राजा को इस बात की हवा लगी तो उसने उस लड़की को बुला भेजा। उसने उससे पूछा — “क्या तुम यह कह रही थीं कि तुम जादूगरनी का खजाना चुरा कर ला सकती हो?”

“नहीं जहाँपनाह नहीं, मैंने तो ऐसी कुछ भी शान नहीं बघारी।”

राजा ने ज़ोर दे कर कहा — “नहीं, तुमने ऐसा कहा है। मैंने ऐसा ही सुना है और अब तुमको अपना कहा करके दिखाना पड़ेगा।” और यह कह कर उसने परीना को उस जादूगरनी का खजाना लाने के लिये अपने महल से बाहर भेज दिया।

परीना महल से निकल कर चलती रही चलती रही जब तक कि रात नहीं हो गयी। रात होने पर वह एक सेब के पेड़ के पास आयी पर वह वहाँ रुकी नहीं बल्कि चलती ही गयी।

उसके बाद वह एक खूबानी के पेड़ के पास आयी पर वह वहाँ भी नहीं रुकी। लेकिन फिर वह एक नाशपाती के पेड़ के पास आयी। वहाँ वह उस पेड़ के ऊपर चढ़ गयी और सो गयी।

सुबह सवेरे जब वह उठी तो उसने एक बुढ़िया को पेड़ के नीचे खड़े देखा। वह बोली — “मेरी बच्ची, तुम वहाँ ऊपर क्या कर रही हो?”

परीना ने उसको अपनी कहानी सुना दी कि वह किस मुसीबत में फँस गयी थी। बुढ़िया बोली — “तुम यह तीन पौंड चिकनाई लो, यह तीन पौंड डबल रोटी लो और यह तीन पौंड बाजरा लो और इस रास्ते चली जाओ।”

परीना ने उसको बहुत बहुत धन्यवाद दिया और वहाँ से चल दी। आगे चल कर वह एक डबल रोटी बनाने वाले की बेकरी पर आयी जहाँ तीन स्त्रियाँ ओवन साफ करने के लिये अपने बाल नोच रही थीं।

परीना ने उनको वह तीन पौंड बाजरा दिया जो उन्होंने ओवन साफ करने में इस्तेमाल कर लिया और उस लड़की को आगे जाने के लिये कहा।

वह फिर आगे बढ़ी तो उसको तीन बड़े कुत्ते मिले जो वहाँ से किसी भी आने जाने वाले के ऊपर भौंकते थे और उनके पीछे दौड़ते थेे। परीना ने उनको तीन पौंड डबल रोटी फेंकी तो वह उन्होंने खा ली और परीना को उसके रास्ते जाने दिया।

उसके बाद वह मीलों चली तो एक खून जैसी लाल रंग की नदी के पास आ पहुँची। वह सोच ही नही सकी कि वह उसे कैसे पार करे।

फिर उसे याद आया कि उस बुढ़िया ने उससे यह कहने के लिये कह रखा था —

कितना सुन्दर लाल पानी है, पर मुझे जल्दी जाना है नहीं तो मैं तुम्हें जरूर चखती

सो उस बुढ़िया की बात याद करके उसने वहाँ ऐसा ही कह दिया। ऐसा कहते ही उस नदी का पानी दो हिस्सों में बँट गया और वह उसमें से बने रास्ते में से उस नदी को पार कर गयी।

नदी के दूसरी तरफ परीना ने दुनिया का एक बहुत ही सुन्दर और बड़ा महल देखा। पर उसका दरवाजा इतनी जल्दी से खुल और बन्द हो रहा था कि उसके अन्दर किसी का भी घुसना मुमकिन नहीं था।

सो परीना ने उस दरवाजे के कब्जों में तीन पौंड चिकनाई लगायी तब कहीं जा कर वह बहुत धीरे से बन्द होने और खुलने लगा।

अब परीना उस महल के अन्दर चली गयी। उसने देखा कि खजाना एक मेज पर एक सन्दूकची में रखा है। उसने उस सन्दूकची को उठा लिया और वह उसको उठा कर वहाँ से ले कर जाने ही वाली थी कि वह सन्दूकची बोली — “ओ दरवाजे, इसको मार दे।”

दरवाजा बोला — “मैं इसे नहीं मार सकता क्योंकि इसने मेरे कब्जों में चिकनाई लगायी है जिनको किसी ने न जाने कबसे देखा तक नहीं है।”

परीना दरवाजे में से हो कर निकल गयी। जब वह नदी पर आयी तो वह सन्दूकची बोली — “ओ नदी इसको डुबो दे, इसको डुबो दे।”

नदी बोली — “मैं इसको नहीं डुबो सकती क्योंकि इसने मुझसे कहा है कि मेरा लाल पानी कितना सुन्दर है।”

लड़की अब चलते चलते कुत्तों के पास तक आयी तो सन्दूकची ने कुत्तों से कहा — “कुत्तों इसको मार दो, इसको काट लो।”

पर कुत्तों ने कहा — “नहीं, हम इसको नहीं काट सकते क्योंकि इसने हमको तीन पौंड डबल रोटी खिलायी है।”

फिर वह लड़की चलते-चलते बेकरी की दूकान पर आयी तो सन्दूकची ने ओवन से कहा — “इसको जला डालो, ओ ओवन इसको जला डालो।”

पर ओवन की जगह उन तीन स्त्रियों ने जवाब दिया — “हम इसको नहीं जला सकते क्योंकि इसने हमको तीन पौंड बाजरा दिया है और अब हमें इसको साफ करने के लिये अपने बाल नहीं नोचने पड़ेंगे।”

अब परीना करीब करीब अपने घर आ पहुँची थी। उसको भी उस सन्दूकची को देखने की उतनी ही उत्सुकता थी जितनी कि दूसरी छोटी लड़कियों को होती है सो उसने उस सन्दूकची को खोल कर उसमें झाँकने की सोची।

जैसे ही उसने वह सन्दूकची खोली तो उसमें से एक सुनहरी मुर्गी और उसके कई चूज़े निकल पड़े। वे तो उस सन्दूकची में से निकलते ही इधर उधर इतनी तेज़ी से भाग गये कि कोई उनको पकड़ ही नहीं सकता था।

परीना उनके पीछे पीछे भागी। वह सेब के पेड़ के पास से गुजरी पर वे चूज़े तो वहाँ थे ही नहीं। वह खूबानी के पेड़ के पास आयी पर वे तो वहाँ भी नहीं थे।

फिर वह नाशपाती के पेड़ के पास आयी तो वहाँ उसको वह बुढ़िया अपने हाथ में जादू की डंडी लिये खड़ी दिखायी दी और वे मुर्गी और उसके चूज़े उसके चारों तरफ दाना खा रहे थे।

वह बुढ़िया शू-शू चिल्लाती उनके पीछे भागी तो वह मुर्गी और उसके बच्चे फिर से सन्दूकची में घुस गये।

परीना उस सन्दूकची को ले कर जब महल वापस लौटी तो राजा का बेटा उससे मिलने के लिये बाहर आया और बोला — “जब मेरे पिता तुमसे कोई इनाम माँगने को कहें तो उनसे नीचे वाले कमरे में रखा कोयले का बक्सा माँग लेना।”

महल के दरवाजे की सीढ़ियों पर परीना का स्वागत करने के लिये राजा की नौकरानियाँ, राजा और सारा दरबार खड़ा था। परीना ने वह सुनहरी मुर्गी और उसके चूज़े राजा को दे दिये।

राजा बोला — “माँगो तुम क्या माँगती हो परीना? तुम जो भी माँगोगी मैं तुमको वही दूँगा।”

परीना बोली — “मुझे नीचे के कमरे में रखा कोयले का बक्सा चाहिये।”

राजा तो उसकी यह अजीब सी माँग सुन कर आश्चर्य में पड़ गया। उसको उसकी यह माँग कुछ अजीब सी जरूर लगी पर वह क्या करता। उसने उसको वायदा किया था कि वह जो माँगेगी वह उसको वही देगा सो राजा के नौकर नीचे के कमरे से वह कोयले का बक्सा तुरन्त ही उठा कर ले आये।

परीना ने उस बक्से को खोला तो उसमें से राजा का बेटा कूद कर बाहर आ गया जो उस बक्से के अन्दर छिपा बैठा था।

राजा ने खुशी-खुशी परीना की शादी अपने बेटे से कर दी और सब लोग खुशी-खुशी रहने लगे। 

----------

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओंको आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: इटली की लोक कथाएँ–1 : 8 एक छोटी लड़की जो नाशपाती के साथ बेची गयी // सुषमा गुप्ता
इटली की लोक कथाएँ–1 : 8 एक छोटी लड़की जो नाशपाती के साथ बेची गयी // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-xpcbGZaHOGg/Wc9KFue2HpI/AAAAAAAA7YU/nmI3hUl8v6kmo0Xvb9FtAcWQ_gEiZT1sQCHMYCw/clip_image002_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-xpcbGZaHOGg/Wc9KFue2HpI/AAAAAAAA7YU/nmI3hUl8v6kmo0Xvb9FtAcWQ_gEiZT1sQCHMYCw/s72-c/clip_image002_thumb?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/09/1-8_30.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/09/1-8_30.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content