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इटली की लोक कथाएँ–2 : 14 - पोम और पील // सुषमा गुप्ता

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एक बार की बात है कि किसी समय में एक बहुत ही भले पति पत्नी रहते थे। उनके कोई बच्चा नहीं था सो उनको एक बेटे की बहुत इच्छा थी। एक दिन पति कहीं ...

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एक बार की बात है कि किसी समय में एक बहुत ही भले पति पत्नी रहते थे। उनके कोई बच्चा नहीं था सो उनको एक बेटे की बहुत इच्छा थी।

एक दिन पति कहीं बाहर गया हुआ था कि रास्ते में उसको एक जादूगर मिला। उसने उस जादूगर से कहा — “जादूगर साहब, मुझे एक बेटा चाहिये। मैं एक बेटा पाने के लिये क्या करूँ?”

जादूगर ने उसको एक सेब दिया और कहा — “लो यह सेब लो और इसको अपनी पत्नी को खिला देना और नौ महीने बाद उसको एक बहुत ही अच्छा बेटा हो जायेगा।”

पति उस सेब को ले कर घर वापस आ गया। वह सेब उसने अपनी पत्नी को दे कर कहा — “लो यह सेब खा लो। यह सेब मुझे एक जादूगर ने दिया है और कहा है कि इसको खा कर तुम्हारे एक बेटा हो जायेगा।”

उसकी पत्नी तो यह सुन कर बहुत ही खुश हो गयी। उसने तुरन्त अपनी दासी को बुलाया और उस सेब को छील कर लाने के लिये कहा।

दासी वह सेब छील कर ले आयी। छिला हुआ सेब तो उसने अपनी मालकिन को दे दिया पर उसके छिलके उसने अपने पास रख लिये और उनको उसने खुद खा लिया।

पत्नी को नौ महीने बाद एक बेटा हुआ और उसी दिन उस दासी को भी एक बेटा हुआ। पत्नी का बेटा सफेद रंग का था जैसा कि सेब के गूदे का रंग होता है और दासी का बेटा लाल रंग का था जैसा कि सेब के छिलके का रंग होता है।

पत्नी के बेटे का नाम था पोम और दासी के बेटे का नाम था पील। दोनों बच्चे बड़े होते गये। दोनों बच्चे एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे और भाइयों की तरह से रहते थे।

एक बार वे दोनों बाहर घूम रहे थे तो उन्होंने सुना कि एक जादूगर की बेटी है जो सूरज की तरह चमकीली है पर किसी ने उसको देखा नहीं था क्योंकि वह अपने घर से कभी बाहर ही नहीं निकलती थी। यहाँ तक कि वह कभी खिड़की से भी नहीं झाँकती थी।

पोम और पील के पास एक ताँबे का घोड़ा था जो अन्दर से खोखला था। एक दिन वे दोनों उसमें वायलिन और बिगुल ले कर बैठ गये और क्योंकि वे उस घोड़े को उसके पहियों को अन्दर से घुमा कर चला सकते थे सो वे उस घोड़े में बैठ कर अपनी वायलिन और बिगुल बजाते हुए उस घोड़े को उसके पहियों को अन्दर से घुमाते हुए चला कर जादूगर के महल की तरफ चल दिये।

जब वे जादूगर के महल के पास पहुँचे तो जादूगर ने बाहर देखा तो उसको एक बहुत ही बढ़िया ताँबे का घोड़ा दिखायी दिया जिसमें से संगीत निकल रहा था।

वह उस घोड़े को अन्दर ले आया और उस आश्चर्यजनक चीज़ दिखाने के लिये अपनी बेटी को अन्दर से बाहर बुलाया। उस संगीत वाले घोडे़ को देख कर उसकी बेटी भी बहुत खुश हुई।

पर जैसे ही वह उस घोड़े के साथ अकेली रह गयी पोम और पील दोनों उस घोड़े में से बाहर निकल आये। उनको देख कर वह लड़की डर गयी।

उन्होंने उससे कहा — “तुम डरो नहीं। हमने सुना था कि तुम बहुत सुन्दर हो तो बस हम तो तुमको केवल देखना चाहते थे सो यहाँ इस तरीके से हमने तुम्हें देख लिया।

अब अगर तुम यह चाहती हो कि हम लोग यहाँ से चले जायें तो हम चले जायेंगे पर अगर तुमको हमारा संगीत पसन्द हो और तुम चाहती हो कि हम तुम्हारे लिये वह संगीत बजाते रहें तो हम वह संगीत बजाते रहेंगे। फिर किसी के बिना जाने कि हम यहाँ कभी आये भी थे हम चले जायेंगे।”

लड़की को उनका संगीत अच्छा लगा तो वे वहाँ रुक गये और अपना संगीत उसको सुनाते रहे और फिर कुछ देर बाद तो वह उनको खुद ही जाने नहीं देना चाहती थी।

तो पोम बोला — “अगर तुम हमको यहाँ से नहीं जाने देना चाहतीं तो फिर चलो हमारे साथ। मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ।”

वह लड़की तैयार हो गयी। वे तीनों उस घोड़े के पेट में छिप गये और वह घोड़ा फिर अपने पहियों पर चलने लगा। वे तीनों वहाँ से चल कर रात काटने के लिये शाम को आ कर एक सराय में ठहर गये।

जैसे ही वे लोग वहाँ से गये वह जादूगर घर लौटा और अपनी बेटी को आवाज लगायी पर कोई नहीं बोला। उसको उसने इधर उधर भी ढूँढा पर जब उसको उसके महल में नहीं पाया तो अपने चौकीदारों से पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्होंने तो उसको महल से बाहर जाते नहीं देखा।

तब उस जादूगर को लगा कि उसके साथ चाल खेली गयी है। यह सोच कर वह बहुत गुस्सा हो गया। वह अपने महल के छज्जे पर गया और अपनी बेटी को तीन शाप दिये।

“उसको तीन घोड़े मिलेंगे, एक सफेद, एक लाल और एक काला। वे सब घोड़े प्यारे होंगे जैसे कि उसने अभी एक घोड़े से प्यार किया। वह सफेद घोड़े पर चढ़ेगी और यह सफेद घोड़ा उसका किया हुआ सब कुछ बेकार कर देगा।

फिर उसको तीन सुन्दर छोटे छोटे कुत्ते मिलेंगे, एक सफेद, एक लाल और एक काला। वह काले कुत्ते को पसन्द करेगी जैसे कि वह करती है और वह काला कुत्ता भी उसका किया हुआ सब कुछ बेकार कर देगा।

फिर जब वह रात को सोने के लिये अपने बिस्तर पर जायेगी तो उसके कमरे में एक बहुत बड़ा साँप आयेगा। वह खिड़की के रास्ते से आयेगा और उसको काट कर मार देगा।”

जब वह जादूगर ये तीन शाप अपने छज्जे पर से चिल्ला रहा था तो तीन बूढ़ी परियाँ नीचे सड़क पर से गुजर रहीं थी। उन्होंने ये शाप सुने और वे ये शाप सुनती हुई चलती गयीं और चलती गयीं।

अपनी लम्बी यात्रा के बाद शाम को थक कर वे परियाँ भी इत्तफाक से उसी सराय में रुकीं जिसमें पोम, पील और जादूगर की वह बेटी रुके हुए थे।

जैसे ही वे अन्दर घुसीं तो एक परी बोली — “ज़रा उस जादूगर की बेटी को देखना। अगर उसको अपने पिता के तीनों शापों का पता चल जाये तो वह बेचारी तो ठीक से सो भी नहीं सकेगी।”

उसी सराय में एक बैन्च पर पोम, पील और जादूगर की बेटी भी सो रहे थे। पोम और जादूगर की बेटी तो सो गये थे पर पील को अभी नींद नहीं आयी थी।

पील इतना अक्लमन्द था कि वह एक आँख खोल कर सोता था इसी लिये उसको पता रहता था कि उसके चारों तरफ क्या हो रहा है और इसी लिये यह परी भी क्या कह रही थी यह सब भी उसने सुन लिया था।

परी आगे बोली — “अगर उस जादूगर की यह इच्छा है कि उसकी बेटी को तीन घोड़े मिलें – सफेद, लाल और काला और वह सफेद घोड़े पर बैठे जो उसके सारे किये कराये को बेकार कर देगा तो ऐसा ही होगा।”

तो दूसरी परी बोली — “पर अगर कोई दूर का देखने वाला आदमी यहाँ मौजूद हो और वह उस सफेद घोड़े का सिर तुरन्त ही काट दे तो उस लड़की को कुछ नहीं होगा।”

इस पर तीसरी परी बोली — “और जो भी इस बात को अपने मुँह से निकालेगा वह पत्थर बन जायेगा।”

इसके बाद पहली परी फिर बोली — “इसके बाद जादूगर की इच्छा है कि उसकी बेटी को तीन छोटे छोटे सुन्दर कुत्ते मिलें और वह उन कुत्तों में से उसी कुत्ते को चुने जिसको वह जादूगर उससे चुनवायेगा यानी काले कुत्ते को चुने और वह उसके किये कराये को बेकार कर देगा तो ऐसा ही होगा।”

तो दूसरी परी बोली — “पर अगर कोई दूर देखने वाला आदमी यहाँ मौजूद हो तो वह उस काले कुत्ते का सिर काट देगा और फिर उसको कुछ नहीं होगा।”

तीसरी परी बाली — “और अगर इसके बारे में वह किसी से कुछ भी बोला तो वह पत्थर का बन जायेगा।”

पहली परी फिर बोली — “उसकी तीसरी और आखिरी इच्छा यह है कि जब वह रात को अपने बिस्तर पर सोने जाये तो उसकी खिड़की से एक बहुत बड़ा साँप आयेगा और उसको मार डालेगा। तो यह भी हो कर ही रहेगा।”

तो दूसरी परी फिर बोली — “पर अगर कोई दूर देखने वाला आदमी यहाँ मौजूद हो तो वह उस साँप का सिर काट देगा और फिर उसे कुछ नहीं होगा।”

तीसरी परी बाली — “और अगर इसके बारे में वह एक शब्द भी किसी को बतायेगा तो वह पत्थर का बन जायेगा।”

इस तरह पील को तीनों भयानक भेदों का पता चल गया जिनको अगर वह ठीक से बरतता तो जादूगर की बेटी की जान बचा सकता था और अगर किसी और को बताता तो वह खुद पत्थर का बन जाता।

अगले दिन पोम, पील और वह जादूगर की बेटी तीनों वह सराय छोड़ कर आगे चले जहाँ पोम का पिता उन लोगों के लिये तीन घोड़े लिये इन्तजार कर रहा था – एक सफेद, एक काला और एक लाल।

जादूगर की बेटी तुरन्त ही कूद कर सफेद घोड़े पर बैठ गयी पर पील भी तेज था। उसने भी तुरन्त ही उस घोड़े का सिर काट दिया।

पोम बोला — “यह तुमने क्या किया पील? क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है जो तुमने उसे मार डाला? वह घोड़ा तो मुझको बहुत ही प्यारा था।”

पील बोला —“मुझे अफसोस है कि मैंने तुम्हारा वह प्यारा घोड़ा मार दिया पर यह सब मैं तुमको अभी नहीं बता सकता।”

जादूगर की बेटी बोली — “पोम, इस पील का दिल तो बहुत ही खराब है। मैं अब इसके साथ नहीं जाऊँगी।”

पर पील ने यह मान लिया कि उसने पागलपन में उस घोड़े को मार डाला था और उसने इस बात के लिये जादूगर की बेटी से माफी भी माँग ली। जादूगर की बेटी ने उसको माफ कर दिया।

पोम के पिता उन सबको ले कर अपने घर पहुँचे तो वहाँ तीन छोटे छोटे सुन्दर कुत्ते उनका स्वागत करने आये – एक सफेद, एक काला और एक लाल।

जादूगर की बेटी तुरन्त ही काले छोटे कुत्ते को उठाने के लिये झुकी कि पील ने अपनी तलवार से तुरन्त ही उस काले कुत्ते का सिर काट दिया।

जादूगर की बेटी बड़ी ज़ोर से चिल्लायी — “तुम तो बहुत ही पागल और बेरहम आदमी हो पील। दूर हो जाओ मेरी नजरों से। तुमने पहले मेरा घोड़ा मार दिया और अब यह प्यारा सा छोटा सा कुत्ता भी मार दिया।”

उसी समय पोम के माता पिता भी बाहर निकल आये। उन्होंने खुशी खुशी अपने बेटे और बहू का स्वागत किया और बहू को समझाया कि वह एक बार पील को फिर से माफ कर दे।

पर शाम को खाने के समय जबकि सब लोग बहुत खुश थे पील कुछ उदास और अकेला सा बैठा था। कोई उसको उकसा कर अपने साथ बातें करने पर मजबूर भी नहीं कर पा रहा था।

लोगों ने उससे पूछने की कोशिश भी की कि वह उदास सा क्यों था पर उसने सबको यह कह कर टाल दिया था कि कोई खास बात नहीं थी बस वह जरा थका हुआ था।

वह दावत से पहले ही यह कह कर उठ कर वहाँ से चला गया कि अपनी थकान की वजह से उसको नींद आ रही थी और वह सोने जा रहा था। पर वह अपने कमरे की बजाय पोम के सोने के कमरे में जा कर उसके पलंग के नीचे छिप गया।

जब पोम और जादूगर की बेटी सोने के लिये अपने कमरे में आये और अपने पलंग पर लेटे तो पील पलंग के नीचे से उनके कमरे की खिड़की पर निगाह जमाये हुए था।

जब पोम और जादूगर की बेटी गहरी नींद सो गये तो पील ने उस कमरे की खिड़की का शीशा टूटने की आवाज सुनी। उसकी आँखें तो खिड़की की तरफ ही लगी थीं।

उसने देखा कि बहुत बड़ा साँप उस खिड़की से हो कर कमरे के अन्दर आने की कोशिश रहा था। पील तुरन्त ही पलंग के नीचे से बाहर निकला और अपनी तलवार से उसका सिर काट दिया।

इस शोर से जादूगर की बेटी की आँख खुल गयी। उस समय उसको वह बड़ा साँप तो दिखायी नहीं दिया क्योंकि वह तो गायब हो गया था बस केवल पील ही अपने हाथ में नंगी तलवार लिये वहाँ खड़ा दिखायी दिया।

उसको इस तरीके से खड़ा देख कर वह ज़ोर से चिल्लायी — “बचाओ बचाओ। हत्या हत्या। यह पील हमको मारना चाहता है। मैंने उसको दो बार तो माफ कर दिया पर अब की बार मैं उसको माफ नहीं कर सकती। इस बार तो इस जुर्म के लिये उसको मरना ही पड़ेगा।”

यह सुन कर सब जाग गये और पोम के सोने के कमरे की तरफ भागे। पील को पकड़ कर जेल भेज दिया गया और तीन दिन बाद उसको फाँसी लगाने का दिन निश्चित कर दिया गया।

यह सोच कर कि अब चाहे वह यह भेद किसी को बताये या न बताये उसे तो मरना ही है सो उसने मरने से पहले पोम की पत्नी को तीन बातें बताने की इजाज़त माँगी। उसको इजाज़त दे दी गयी। पोम की पत्नी उससे मिलने के लिये जेल में आयी।

पील ने उससे कहा — “तुम्हें याद है जब हम तुम्हारे पिता के घर से भाग कर पहली बार एक सराय में रुके थे?”

“हाँ हाँ बिल्कुल याद है।”

“उस समय तुम और तुम्हारा पति तो सो रहे थे पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं उस समय जागा हुआ था। उस समय वहाँ तीन परियाँ आयीं और उन्होंने आपस में बात की कि तुम्हारे जादूगर पिता ने तुमको तीन शाप दिये।

पहला शाप तो यह कि तुमको तीन घोड़े मिलेंगे – सफेद, लाल और काला। पर तुम सफेद घोड़े पर चढ़ोगी जो तुम्हारा सब कुछ खत्म कर देगा। पर अगर कोई सफेद घोड़े का गला काट देगा तो तुम बच जाओगी। और जो भी यह बात किसी और से कहेगा तो वह पत्थर का हो जायेगा।”

जैसे ही पील ने अपनी यह बात खत्म की उस बेचारे के पैर और टाँगें संगमरमर की हो गयीं। जादूगर की बेटी समझ गयी। वह रुआँसी हो कर बोली — “पील, बस इतना काफी है और आगे कुछ मत बोलना।”

पर वह आगे बोलता ही गया — “मुझे तो मरना ही है चाहे मैं बोलूँ या न बोलूँ इसलिये मैं बोलने के बाद मरना ज़्यादा पसन्द करूँगा।

उन तीनों परियों ने यह भी कहा कि जादूगर का अपनी बेटी को दूसरा शाप यह था कि फिर उसको तीन छोटे छोटे सुन्दर कुत्ते मिलेंगे – सफेद, लाल और काला।

पर वह काले कुत्ते को अपनी गोद में उठायेगी जो उसका सब कुछ खत्म कर देगा। पर अगर कोई उस काले कुत्ते को मार देगा तो वह बच जायेगी। और जो भी यह बात किसी और से कहेगा वह पत्थर का हो जायेगा।”

जब पील ने कुत्ते वाला शाप पोम की पत्नी को बताया तो उसका शरीर उसकी गरदन तक संगमरमर का हो गया। जादूगर की बेटी यह सब सुन कर रो पड़ी।

वह रोते रोते बोली — “पील, मेहरबानी करके मुझे माफ कर दो। मैं समझ गयी। अब कुछ और मत कहो।”

पर क्योंकि अब पील का गला पत्थर का हो चुका था और उसका जबड़ा भी पत्थर का हो रहा था उसकी आवाज भर्रा रही थी।

उसी भर्रायी हुई आवाज में उसने कहा — “और जो कोई इस बात को अपने मुँह से कहेगा वह पत्थर का हो जायेगा।” और यह कहने के बाद तो वह सिर से पैर तक संगमरमर की मूर्ति ही बन गया।

पील की पत्नी बहुत ज़ोर से रो पड़ी और रो रो कर कहने लगी — “आह यह मैंने क्या किया। मैंने एक ऐसे वफादार आदमी को मार दिया जिसने मेरी जान बचायी।”

फिर कुछ सोच कर उसने अपने आँसू पोंछे और बोली अगर इस आदमी को कोई फिर से ज़िन्दा कर सकता है तो वह हैं मेरे पिता जी खुद।

सो उसने अपने पिता को एक चिठ्ठी लिखी — “प्रिय पिता जी, आप मुझे माफ कर दें और मेहरबानी करके तुरन्त ही यहाँ आ जायें।”

वह जादूगर अपनी बेटी को बहुत प्यार करता था सो उसकी चिठ्ठी मिलते ही वह अपनी बेटी के पास दौड़ा चला आया।

उसकी बेटी ने उसे चूमा और बोली — “पिता जी, मुझे आपसे एक सहायता चाहिये। ज़रा इस बेचारे नौजवान को देखिये। आपके तीन शापों से मेरी रक्षा करके मेरी जान बचाने के बदले में यह बेचारा सारा का सारा पत्थर का हो गया है। मेहरबानी करके आप इसको ज़िन्दा कर दीजिये।”

जादूगर बोला — “बेटी तुम्हारे प्यार की खातिर मैं यह भी करूँगा।” उसने अपनी जेब से बालसम के मरहम की एक शीशी निकाली और पील के सारे शरीर पर चुपड़ दी। उस मरहम के लगाते ही पील तुरन्त ही ज़िन्दा हो गया।

इस तरह फिर उसे फाँसी के फन्दे की तरफ ले जाने की बजाय वे लोग उसको एक गाड़ी में बिठा कर गाते बजाते और “पील जिन्दाबाद” के नारे लगाते हुए घर ले गये।

इस तरह पील ने जादूगर की बेटी की जान बचायी और जादूगर की बेटी ने पील की जान बचायी।


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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया इटली की बहुत सी अन्य लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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रचनाकार: इटली की लोक कथाएँ–2 : 14 - पोम और पील // सुषमा गुप्ता
इटली की लोक कथाएँ–2 : 14 - पोम और पील // सुषमा गुप्ता
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रचनाकार
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