नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

इटली की लोक कथाएँ–2 : 16 - खुश आदमी की कमीज // सुषमा गुप्ता

clip_image002

एक बार एक राजा था जिसके एक ही बेटा था और किसी के भी बारे में सोचने के लिये बस वही उसकी दुनिया थी।

पर उसका वह बेटा हमेशा उदास रहता था। वह सारा सारा दिन खिड़की में बैठा बैठा खिड़की के बाहर खाली जगह को देखता रहता।

राजा ने पूछा — “बेटे तुमको दुनिया में किस चीज़ की कमी है जो तुम इतने उदास रहते हो? तुम्हारे साथ क्या गड़बड़ है? कुछ तो बताओ।”

“पिता जी मुझे खुद कुछ नहीं मालूम।”

“क्या तुमको किसी से प्यार हो गया है? अगर ऐसी कोई खास लड़की है जो तुमको पसन्द है तो तुम मुझे बताओ मैं उसकी शादी तुमसे करा दूँगा। चाहे वह किसी सबसे ज़्यादा ताकतवर राजा की बेटी हो और या फिर सबसे गरीब किसान की बेटी।”

“नहीं पिता जी, मुझे किसी से प्यार व्यार नहीं हुआ है।”

“फिर क्या बात है?”

राजा ने उसको खुश करने की हर मुमकिन कोशिश कर ली पर नाटक, नाच, संगीत सम्मेलन कुछ भी उसको खुश नहीं कर पा रहे थे।

इस तरह से राजकुमार का गुलाबी चेहरा रोज ब रोज पीला पड़ता जा रहा था और साथ में राजा भी दुखी रहता था। आखिरकार राजा ने अपने सारे राज्य में मुनादी पिटवा दी कि जो कोई उसके बेटे को हँसा पायेगा उसको भारी इनाम दिया जायेगा।

दुनिया के कोने कोने से बहुत पढ़े लिखे लोग आये – डाक्टर प्रोफेसर ज्योतिषी आदि आदि। राजा ने उन सबको अपने बेटे को दिखाया और उनकी सलाह ली। वे सब एक जगह चले गये और सोचने के लिये कुछ समय माँगा।

कुछ समय बाद वे राजा के पास लौटे और बोले — “राजा साहब हम लोगों ने बहुत सोचा बहुत सोचा। हमने राजकुमार के सितारे भी पढ़े।

उस सबसे हमें ऐसा लगता है कि आपको यह करना चाहिये कि आप किसी ऐसे खुश आदमी को ढूँढें जो सारी ज़िन्दगी खुश रहा हो। अगर उसकी कमीज आप अपने बेटे की कमीज से बदल दें तो यह मुमकिन है कि वह खुश हो जाये।”

उसी दिन राजा ने अपने बहुत सारे आदमी एक ऐसा खुश आदमी ढूँढने के लिये दुनिया के कोने कोने में भेज दिये जो सारी ज़िन्दगी खुश रहा हो।

एक पादरी राजा के पास लाया गया तो राजा ने उससे पूछा — “क्या आप खुश हैं?”

“जी हाँ राजा साहब।”

“तो क्या आप मेरा पादरी बनना पसन्द करेंगे?”

“जैसा आप चाहें।”

“दूर हो जाओ मेरी आँखों के सामने से। मैं तो किसी ऐसे आदमी की तलाश में हूँ जो जैसा है वह वैसा ही खुश है। ऐसे आदमी की तलाश में नहीं जो अपनी तरक्की की तलाश में हो।”

और इस तरह राजा की तलाश जारी रही। जल्दी ही राजा को उसके एक पड़ोसी राजा के बारे में बताया गया जिसको सब लोगों ने कहा कि वह सच्चे तरीके से एक खुश आदमी था।

उस राजा की एक पत्नी थी जो जितनी सुन्दर थी उतनी ही अच्छी और अक्लमन्द भी थी। उस राजा के कई बच्चे थे। उसने अपने सारे दुश्मनों को जीत लिया था और उसके देश में शान्ति ही शान्ति थी।

उस राजा के बारे में सुन कर राजा को कुछ उम्मीद हुई कि हो सकता है वही ऐसा खुश आदमी हो जिसकी कमीज से वह अपने बेटे की कमीज से बदल कर अपने बेटे को खुश कर सके सो उसने अपने कुछ आदमी उसकी कमीज लाने के लिये भेजे।

पड़ोसी राजा ने उस राजा के आदमियों का स्वागत किया और बोला — “हाँ मेरे पास वह सब कुछ है जो किसी भी आदमी को खुश रखने को चाहिये पर मुझे यह चिन्ता है कि मुझे एक दिन मरना पड़ेगा और यह सब मैं यहीं छोड़ जाऊँगा। इस चिन्ता में मैं रात को सो भी नहीं सकता।”

राजा के आदमियों ने सोचा कि उनकी अक्लमन्दी इसी में है कि वे इस आदमी की कमीज लिये बिना ही घर लौट जायें।

एक दिन राजा शिकार खेलने गया। वहाँ जा कर उसने एक खरगोश पर अपना तीर मारा पर उस तीर से वह केवल घायल ही हो पाया, मरा नहीं। वह अपनी तीन टाँगों पर लँगड़ाता हुआ वहाँ से भाग गया।

राजा ने उसका पीछा किया और इस पीछा करने में शिकार करने के लिये जो लोग उसके साथ आये वे पीछे रह गये। जब वह एक खुली जगह आया तो उसने एक आदमी के गाने की आवाज सुनी।

गाने की आवाज सुन कर राजा वहीं रुक गया और अपने मन में सोचने लगा कि यह कौन आदमी हो सकता है जो इस जंगल में इतनी खुशी से गा रहा है।

उस आवाज का पीछा करते करते वह एक अंगूर के बागीचे में पहुँच गया। वहाँ जा कर उसने देखा कि एक नौजवान अंगूर की बेलों की काट छाँट कर रहा है और गाना गा रहा है।

राजा को देखते ही वह बोला — “राजा साहब गुड डे । अभी तो बहुत जल्दी है और आप बाहर निकल आये हैं?”

“खुश रहो बेटा। मैं यहाँ रास्ता भूल गया हूँ। क्या तुम मुझको मेरी राजधानी ले चलोगे? तुम मेरे दोस्त बन कर रहोगे।”

वह नौजवान बोला — “मुझे आपको आपकी राजधानी पहुँचा कर तो बहुत खुशी होगी राजा साहब। पर मैं तो इस बारे में सोचूँगा भी नहीं कि मैं आपका दोस्त हूँ या नहीं। मैं तो पोप की जगह भी नहीं लेना चाहता।”

राजा आश्चर्य से बोला — “क्यों नहीं? तुम जैसा अच्छा आदमी भी ़.... ़।”

नौजवान ने उसको समझाया — “नहीं नहीं। मैं आपको बताता हूँ कि ऐसा क्यों है। क्योंकि जो कुछ मेरे पास है मैं तो उसी से सन्तुष्ट हूँ। मुझे इससे ज़्यादा और कुछ चाहिये ही नहीं।”

राजा ने सोचा — “आखिर मुझे एक खुश आदमी मिल ही गया। अब मैं इसकी कमीज से अपने बेटे की कमीज बदल कर अपने बेटे को खुश कर लूँगा।”

वह उससे बोला — “सुनो ओ नौजवान। मेरा एक काम करोगे?”

“अपने पूरे दिल के साथ, अगर मैं कर सका तो।”

“तुम ज़रा यहीं रुको मैं अभी आया।” राजा तो अपनी खुशी ही नहीं रोक पा रहा था। वह तुरन्त ही अपने लोगों को लेने के लिये दौड़ गया।

और वहाँ जा कर बोला — “मेरे साथ आओ। मेरा बेटा बच गया, मेरा बेटा बच गया।” और वह उन लोगों को उस नौजवान के पास ले गया और उससे बोला — “मेरे प्यारे बच्चे। मैं तुमको तुम जो चाहोगे वह सब दूँगा पर तुम मुझको अपनी वह दे दो।”

“क्या राजा साहब, मैं आपको अपनी वह क्या दे दूँ?”

“बेटे, मेरा बेटा मर रहा है। उसे केवल तुम ही बचा सकते हो। यहाँ आओ मेरे साथ चलो।”

राजा ने उसको पकड़ा और उसकी जैकेट के बटन खोलने लगा। पर बटन खोलते खोलते वह तुरन्त ही रुक भी गया। उसकी बाँहें उसके दोनों तरफ लटक गयीं और वह खड़ा उसको भौंचक्का सा देखता ही रह गया।

वह तो अपनी जैकेट के नीचे कोई कमीज ही नहीं पहने था।

------------

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया इटली की बहुत सी अन्य लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

2 टिप्पणियाँ

  1. आप की कथा रोचक है, इतनी लंबी नहीं होती तो भी स-रस पढ़ी जाती। धन्यवाद। मैंने आपको ईमेल भेजा है, पढियेगा अवश्य।

    जवाब देंहटाएं
  2. आप की कथा रोचक है, इतनी लंबी नहीं होती तो भी स-रस पढ़ी जाती। धन्यवाद। मैंने आपको ईमेल भेजा है, पढियेगा अवश्य।

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.