देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–5 : 3 चौदह // सुषमा गुप्ता

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3 चौदह [1] एक बार की बात है कि एक पति पत्नी के 13 लड़के थे। उनके एक लड़का और हो गया तो उन्होंने उसका नाम चौदह रख दिया। वह जल्दी जल्दी बड़ा होने...

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3 चौदह[1]

एक बार की बात है कि एक पति पत्नी के 13 लड़के थे। उनके एक लड़का और हो गया तो उन्होंने उसका नाम चौदह रख दिया।

वह जल्दी जल्दी बड़ा होने लगा। जब वह बड़ा हो गया तो उसकी माँ ने उससे कहा — “बेटा अब तुमको खेतों को खोदने आदि में अपने भाइयों की सहायता करनी चाहिये। लो अपने और उनके खाने की यह टोकरी लो और खेतों पर उनके साथ चले जाओ और वहाँ जा कर उनकी सहायता करो।”

कह कर उसने चौदह को एक टोकरी दी जिस में 14 गोल डबल रोटियाँ थीं, 14 चीज़ के टुकड़े[2] थे और 14 सेर शराब थी। माँ से यह सब ले कर चौदह खेतों की तरफ चल पड़ा।

जब वह बीच रास्ते में पहुँचा तो उसे भूख और प्यास दोनों लग आयीं। उसने खाने की वह टोकरी खोली और चौदहों डबल रोटी और चौदहों चीज़ के टुकड़े खा लिये और चौदहों बोतल शराब पी गया। उस दिन उसके भाई लोग बेचारे भूखे प्यासे ही रह गये।

उन्होंने उससे कहा — “चलो एक हल ले लो और खेतों में काम करना शुरू कर दो।”

चौदह बोला — “हाँ हाँ क्यों नहीं। पर मुझे तो ऐसा हल चाहिये जो 14 पौंड भारी हो।”

सो उसके लिये उन्होंने 14 पौंड का एक हल ढूँढ कर ला कर दिया। अब 14 भाइयों ने मिल कर खेत जोतना शुरू किया तो बीच में ही चौदह बोला — “क्या हम इस खेत को आखीर तक जोतने के लिये दौड़ लगायें?”

“हाँ हाँ क्यों नहीं।”

चौदहों भाई खेत खोदते हुए दौड़े तो चौदह जीत गया। उसके बाद से चौदह अपने भाइयों के साथ काम करने लगा। वह चौदह आदमियों का काम करता तो वह चौदह आदमियों का खाना भी खाता था।

इस तरह उसके तेरहों भाई डंडों की तरह दुबले होते चले गये और वह खुद तन्दुरुस्त होता चला गया।

एक दिन उसके माता पिता ने उससे कहा — “बेटा अब तुम थोड़ा बाहर जाओ और दुनिया देखो।”

सो वह घर से बाहर चल दिया। चलते चलते वह एक अमीर किसान के पास आया। उस किसान को 15 मजदूरों की जरूरत थी।

लड़का बोला — “तुम्हारा 14 लोगों का काम तो मैं कर सकता हूँ। पर मैं खाता पीता भी 14 लोगों के खाने के बराबर हूँ। इस लिये मुझे तनख्वाह भी 14 लोगों के बराबर ही दी जानी चाहिये। अगर तुम मुझे इन शर्तों पर काम देना चाहो तो मैं तुम्हारे लिये काम करने के लिये तैयार हूँ।”

उस किसान की कुछ समझ में नहीं आया पर फिर भी उसने उसको एक मौका देना चाहा सो उसने उसको और एक और आदमी को अपने खेत पर रख लिया। इस तरह उसके पास चौदह और एक और आदमी कुल मिला कर 15 मजदूर हो गये।

उन्होंने खेत में हल चलाना शुरू कर दिया तो चौदह ने उस एक मजदूर से सचमुच ही चौदह गुना काम किया तो उस किसान का वह खेत बहुत जल्दी ही खुद गया।

खेत खुदने के बाद वह अमीर किसान चौदह को उसको उसकी 14 मजदूरों की मजदूरी और 14 आदमियों का खाना देना नहीं चाहता था सो उसने चौदह से बचने की एक तरकीब सोची।

वह बोला — “सुनो तुम अब मेरा एक काम और कर दो। तुम ये 7 खच्चर और 14 बालटी ले कर नरक जाओ और वहाँ से इनमें लूसीबैलो[3] का सोना भर लाओ।”

clip_image004चौदह बोला — “मैं यकीनन ले आऊँगा पर तुम मुझको 14 पौंड भारी पकड़ने वाला एक चिमटा[4] दे दो।”

उस अमीर किसान ने उसको एक 14 पौंड भारी चिमटा दे दिया और चौदह वह 14 पौंड भारी चिमटा, 14 बालटी और 7 खच्चर ले कर नरक की तरफ चल दिया।

जब वह नरक पहुँचा तो उसके बाहर के दरवाजे पर एक शैतान खड़ा था। उसने उस शैतान से कहा — “लूसीबैलो को बुलाओ।”

चौकीदार शैतान ने चौदह से पूछा — “तुमको हमारे सरदार से क्या काम है?”

चौदह ने अमीर किसान की लिखी वह चिठ्ठी जो उसने लूसीबैलो के नाम लिखी थी जिसमें लिखा था “इसको 14 बालटी सोना दे दो।” उस शैतान को दे दी।

वह उस चिठ्ठी को अपने मालिक के पास ले गया तो मालिक लूसीबैलो ने चौदह को अन्दर बुला लिया और उसको सोना निकालने के लिये नीचे जाने के लिये कहा।

जैसे ही चौदह जमीन के नीचे पहुँचा 14 शैतान उसको ज़िन्दा खाने के लिये उसके ऊपर कूद पड़े पर चौदह ने अपने 14 पौंड भारी चिमटे से उन 14 शैतानों की जीभ पकड़ ली और उन्हें इतना सताया कि वे सब मर गये। बस केवल उनका सरदार लूसीबैलो ही ज़िन्दा बचा।

लूसीबैलो बोला — “मैं अब इन बालटियों को सोने से कैसे भरूँगा जब तुमने मेरे 14 शैतानों को तो मार दिया जो इन बालटियों को सोने से भरते।”

चौदह बोला — “तुमको इस बात की चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं मैं इन बालटियों को सोने से अपने आप भर लूँगा।”

उसने अपनी 14 बालटियाँ सोने से भरीं, लूसीबैलो को बाई बाई किया और वहाँ से चल दिया।

लूसीबैलो बोला — “रुको तो। तुम इस तरह से यहाँ से नहीं जा सकते।”

clip_image006उसने चौदह को खाने के लिये जैसे ही अपना मुँह खोला तो चौदह ने अपनी सँड़ासी से उसकी जबान पकड़ ली। उसको अपने कन्धे के ऊपर डाला और अपने सोने से लदे खच्चर ले कर वहाँ से चल दिया।

चौदह सही सलामत उस अमीर किसान के घर आ गया। घर आ कर उसने शैतान को रसोईघर में रखी मेज के पाये से बाँध दिया।

लूसीबैलो बोला — “अब तुम मेरे साथ क्या करना चाहते हो?”

चौदह बोला — “कुछ खास नहीं। बस तुम मेरे मालिक को साथ ले कर नरक चले जाओ और फिर यहाँ कभी नहीं आना।”

इतना कह कर उसने लूसीबैलो को खोल दिया और वह उस अमीर किसान को ले कर नरक चला गया।

इस तरह शैतान को उससे बचने के लिये अपनी ज़िन्दगी की भीख नहीं माँगनी पड़ी। उसने उसको बस उस अमीर किसान के वहाँ से ले जाने के बदले में ही आजाद कर दिया था।

उस अमीर किसान के जाने के बाद अब चौदह उस गाँव का सबसे ज़्यादा अमीर किसान बन गया था।

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[1] Fourteen (Story No 96) – a folktale from Marcbe area, Italy, Europe.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino. Translated by George Martin in 1980.

[2] Cheese in the western world is the processed Paneer of India.

[3] Name of the Chief Satan (Devil) – known with several names, such as Lucifer, Lucibello etc

[4] Translated for the word “Tongs” – see its picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

नाम

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फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–5 : 3 चौदह // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–5 : 3 चौदह // सुषमा गुप्ता
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