देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 17 सेन्ट पीटर और उसकी बहिनें // सुषमा गुप्ता

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17 सेन्ट पीटर और उसकी बहिनें[1]

सेन्ट पीटर की दो बहिनें थीं एक बड़ी और एक छोटी। उसकी छोटी बहिन कौनवैन्ट[2] चली गयी थी और नन[3] बन गयी थी।

सेन्ट पीटर यह देख कर बहुत खुश था सो वह चाहता था कि उसकी बड़ी बहिन भी नन बन जाये। उसने उसको भी कहा कि वह भी नन बन जाये पर उसने उसकी एक नहीं सुनी और बोली “मैं तो शादी करूँगी।”

कुछ दिनों बाद पीटर भी अपने बलिदानों के बाद स्वर्ग का चौकीदार बना दिया गया।

एक दिन लौर्ड[4] ने उससे कहा — “पीटर आज स्वर्ग का दरवाजा जितना चौड़ा तुमसे हो सके उतना चौड़ा खोल दो और उसमें से सारे दैवीय गहने और सजावट निकाल कर स्वर्ग को सजा दो क्योंकि आज यहाँ एक बहुत ही बड़ी दैवीय आत्मा आ रही है।”

सेन्ट पीटर ने खुशी खुशी वह सब कर दिया जो जीसस ने उससे करने के लिये कहा था। उसने सोचा “यकीनन मेरी छोटी बहिन मर गयी होगी वही आज यहाँ आ रही होगी।”

जब सब कुछ तैयार हो गया तो उसने देखा कि उसकी बड़ी बहिन की आत्मा चली आ रही है। वह कई बच्चे छोड़ कर मर गयी थी और वे बच्चे भी उसके लिये कोई दुख नहीं मना रहे थे। लौर्ड ने उसको स्वर्ग में एक ऊँची जगह दी।

पीटर तो यह कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसकी बड़ी बहिन की आत्मा वहाँ आयेगी और लौर्ड उसको स्वर्ग इतना ऊँची जगह देंगे।

वह सोचने लगा कि जब उसकी छोटी बहिन की आत्मा वहाँ आयेगी तब वह क्या करेगा।

कुछ दिनों बाद लौर्ड ने पीटर से कहा “आज स्वर्ग का दरवाजा बस थोड़ा सा ही खोलना। तुमने सुना?”

सेन्ट पीटर ने वही किया जैसा कि लौर्ड ने उससे करने के लिये कहा था पर वह यह सोचता ही रह गया कि “आज कौन आ रहा है।”

उसने देखा कि उसकी छोटी बहिन की आत्मा चली आ रही है। उसको स्वर्ग के उस तंग दरवाजे में से अन्दर घुसने में बहुत तकलीफ हो रही थी। इसके अलावा उसको स्वर्ग में भी अपनी बड़ी बहिन से काफी नीची जगह मिली।

पीटर बोला “यह तो उसका बिल्कुल उलटा हुआ जो मैं सोच रहा था। पर कम से कम अब मैं यह कह सकता हूँ कि हर पेशे की अपनी अपनी जगह होती है और हर कोई अगर वह चाहे तो स्वर्ग में आ सकता है।


[1] St Peter and His Sisters (Story No 54)– a folktale from Italy.

Adapted from the book: “Italian Popular Tales”. By Thomas Frederick Crane. London, 1885.

Available free on the Web Site :

https://books.google.ca/books?id=RALaAAAAMAAJ&pg=PR1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false

[2] Convent is a community of persons devoted to religious life under a superior – normally of females. Wherever they live that building is also called Convent. There Superior is called Abbess.

[3] A nun is a member of a religious community of women, typically one living under vows of poverty, chastity, and obedience. She may have decided to dedicate her life to serving all other living beings, or she might be an ascetic who voluntarily chose to leave mainstream society and live her life in prayer and contemplation in a monastery or convent.

[4] Here Lord word is used for Jesus Christ

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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