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पूर्वीय अफ्रीका की लोक कथाएँ // 3 नदी की आत्मा // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ — पूर्वीय अफ्रीका की लोक कथाएँ जिबूती, ऐरिट्रीया, केन्या, मैडागास्कर, रीयूनियन, सोमालिया, सूडान, यूगान्डा संकलनकर्ता ...

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देश विदेश की लोक कथाएँ —

पूर्वीय अफ्रीका की लोक कथाएँ

जिबूती, ऐरिट्रीया, केन्या, मैडागास्कर, रीयूनियन, सोमालिया, सूडान, यूगान्डा

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संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

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3 नदी की आत्मा[1]

यह लोक कथा पूर्वीय अफ्रीका के केन्या देश की लोक कथाओं से ली गयी है।

घियासे[2] अपनी जाति का एक बहुत बड़ा लड़ने वाला था इसलिये यह स्वाभाविक था कि अब उसको एक पत्नी की जरूरत थी जो उसके लायक हो।

सो उसने अपने लिये कोई लड़की ढूँढनी शुरू की। काफी ढूँढने के बाद और दर्जनों लड़कियों को मना करने के बाद उसको एक लड़की पसन्द आयी। इसमें कोई शक नहीं कि वह लड़की उस जगह की सबसे सुन्दर लड़की थी। उसका नाम ऐम्मे[3] था और वह नदी के उस पार रहती थी।

घियासे अपना समय बरबाद नहीं करना चाहता था सो उसने उस लड़की के माता पिता से कहा कि वे उसकी शादी उसके साथ जल्दी ही कर दें। उनको भी कोई ऐतराज नहीं था सो घियासे उनसे बात करके शादी का इन्तजाम करने के लिये घर वापस लौट गया।

ऐम्मे का पिता भी अपने जाति का बहुत अमीर और बहुत ताकतवर आदमी था। और क्योंकि वह चाहता था कि उसकी बेटी अपने पति के घर में पहली बार ठीक से घुसे इसलिये उसने उसके साथ के लिये एक बहुत सुन्दर दासी का इन्तजाम कर दिया था। उसने अपनी सबसे छोटी बेटी को भी उसकी बड़ी बहिन के साथ जाने के लिये कह दिया था।

सो तीनों लड़कियाँ घियासे के गाँव चल दीं। उनको घियासे के गाँव पहुँचने के लिये सारा दिन चलना पड़ा इसलिये उनकी शादी की खुशी थकान में बदल गयी। जब तक वे घियासे के घर तक पहुँचीं तब तक शाम हो आयी थी। शाम का पहला तारा आसमान में निकल आया था।

अपनी थकान मिटाने के लिये और घियासे के घर में ठीक से घुसने के लिये ऐम्मे ने सोचा कि वह नदी में नहा कर तरोताज़ा हो ले तब घियासे के घर जाये।

अब उस नदी में एक आत्मा रहती थी जो उस नदी की अकेली ही मालिक थी। पर ऐम्मे को यह पता नहीं था सो ऐम्मे उस पानी में बिना किसी झिझक के कूद गयी। उसकी बहिन और उसकी दासी तब तक अपने कपड़े ही उतार रही थीं।

ऐम्मे और उसकी बहिन दोनों ही नदी की उस आत्मा से बेखबर थीं। उनको उसके बारे में कुछ भी मालूम नहीं था। उधर उस दासी का बाहर से तो व्यवहार बड़ा नम्र था पर उसका दिल बहुत काला था।

वह उस आत्मा के बारे में सब जानती थी पर उसने अपनी मालकिन को जानबूझ कर उसके बारे में नहीं बताया और उसे नदी में नहाने से नहीं रोका।

उल्टे वह नदी के किनारे पर खड़ी रह कर अपनी मालकिन को नदी के बीच में जाने को कहती रही कि वहाँ पानी ज़्यादा साफ था सो वह वहाँ जा कर नहाये।

ऐम्मे भी आगे बढ़ती गयी कि अचानक दो हल्के नीले रंग की बाँहें पानी में से निकलीं और उसे पकड़ कर पानी में अन्दर ले गयीं। उसकी बहिन यह देख कर बहुत डर गयी पर दासी ने उसको धमकाया और बताया कि उसका असली रूप क्या था।

वह बोली — “यह रोना धोना छोड़ो नहीं तो मैं तुमको भी नदी में फेंक दूँगी। वह आत्मा आ कर तुमको भी इसी तरह से ले जायेगी जैसे वह ऐम्मे को ले कर गयी। आज से तुम मेरी दासी रहोगी और ध्यान रखना अगर तुमने यह सब किसी से भी कहा तो , , ,।

इस तरह से उसने मालकिन की छोटी बहिन को सारा बोझा उठाने पर मजबूर कर दिया और वह छोटी बहिन उस बोझे को अपनी पीठ पर लाद कर उस दासी के साथ ऐम्मे की ससुराल चली। दोनों नदी के उस पार घियासे के गाँव आयीं।

जब घियासे ने दासी को एक छोटी सी लड़की के साथ देखा तो वह बड़ी मुश्किल से अपना आश्चर्य छिपा सका क्योंकि उसको लगा कि यह तो वह लड़की नहीं थी जिसका हाथ उसने माँगा था।

पर उसने सोचा कि इतनी लम्बी यात्रा की थकान और रात के अँधेरे की वजह से शायद उसकी शक्ल बदली बदली लग रही होगी। सो उसने उन दोनों को घर में बुलाया और उनका इज़्ज़त से स्वागत किया।

अगले दिन घियासे ने अपनी होने वाली पत्नी को अपनी जाति के लोगों से मिलवाया तो वे सब उसको देख कर चकित रह गये। वे सब सोचने लगे कि घियासे तो कह रहा था कि उसकी होने वाली पत्नी बहुत सुन्दर है पर यह तो ऐसी नहीं है। यह तो बहुत ही मामूली सी लड़की है।

पर उन्होंने घियासे से कुछ कहा नहीं क्योंकि वे सब उसको बहुत प्यार करते थे और उसको कोई दुख नहीं पहुँचाना चाहते थे।

दिन बीतते गये और घियासे अन्दर ही अन्दर चिन्तित रहने लगा। वह अपनी शादी की रस्म की तारीख को भी जितना आगे बढ़ा सकता था बढ़ाता रहा। वह कभी एक बहाना बना देता तो कभी दूसरा। पर उसको समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस मामले में करे क्या।

दासी इस सबसे बहुत परेशान हो गयी और उसने अपना गुस्सा ऐम्मा की छोटी बहिन पर निकालना शुरू कर दिया। वह उसको डाँटने का कोई भी मौका नहीं छोड़ती थी। कभी कभी तो वह उसको डंडी से भी मारती।

इससे भी ज़्यादा वह उसको उसकी बड़ी बहिन की दुख भरी घटना की भी याद दिलाती रहती।

रोज सुबह वह उस लड़की को बड़े बड़े घड़े ले कर नदी पर पानी भरने भेजती। वह बच्ची भी उस दुख के डर की वजह से जो उसने ऐम्मा का देखा था चुप ही रहती और उस दासी से कुछ नहीं कहती।

घियासे को पता चल गया था कि वह दासी उस छोटी सी बच्ची से किस तरह से बरताव करती थी।


घियासे जब तक घर में रहता तब तक वह पाम के फल की तरह से बहुत मीठी बनी रहती पर जैसे ही घियासे घर से बाहर जाता वह उसके लिये बहुत बुरी बन जाती – वह उससे बुरी तरह से बोलती, उसको धमकियाँ देती, उसको मारती।

घियासे ने एक दिन उसको इस बात के लिये बहुत डाँटा पर उस डाँट का कोई फायदा नहीं हुआ।

एक दिन वह बच्ची रोज की तरह से नदी पर पानी भरने गयी। उसने नदी के पानी में अपना घड़ा डुबोया और उसे बाहर निकाल कर अपने सिर पर रखने ही वाली थी कि वह ऐसा नहीं कर सकी।

वह घड़ा उसकी अपनी बदकिस्मती की तरह बहुत बड़ा और बहुत भारी हो गया था। वह वहीं किनारे पर बैठ गयी और रोने लगी।

अचानक नदी की सतह कुछ हिली और पानी में से एक बहुत ही सुन्दर लड़की निकली। यह ऐम्मे थी जो अब नदी की आत्मा के पानी के महल में एक कैदी की तरह से रह रही थी।

अपनी छोटी बहिन को रोते देख कर उसने अपनी कैद करने वाली नदी की आत्मा से प्रार्थना की थी कि वह उसको कुछ देर के लिये नदी की सतह पर आने दे ताकि वह उसको कुछ तसल्ली दे सके।

आत्मा को अपनी ताकत का पूरा भरोसा था सो उसने उसको नदी की सतह पर जाने की इजाज़त दे दी।

पर जब बच्ची ने ऐम्मे को फिर से देखा तो वह तो बेहोश सी ही हो जाती पर उसकी बहिन के नम्र शब्दों ने उसको यह विश्वास दिला दिया कि वह सपना नहीं देख रही थी वह सच में ही नदी में से बाहर निकल कर आयी थी।

वह अपनी बहिन से लिपट गयी और रो रो कर उसे बताया कि उनकी दासी उसके साथ कैसा बरताव कर रही थी और वहाँ वह अपने आपको कितनी मजबूर महसूस कर रही थी।

सबसे बाद में ऐम्मे ने उसने पूछा — “और मेरा होने वाला पति?”

ऐम्मे की बहिन बोली — “वह तो रोज ही शादी की तारीख आगे बढ़ा देते हैं। ”

ऐम्मे बोली — “मुझे विश्वास है कि सब कुछ ठीक हो जायेगा, तुम देखना। अब मुझे जाना है क्योंकि अगर मैं अब समय से वापस नहीं गयी तो जब तुम अगली बार यहाँ आओगी तो नदी की आत्मा मुझे तुमसे मिलने नहीं देगी। तुम यहाँ वापस आओगी न?”

“हाँ मैं रोज सुबह यहाँ आऊँगी। ”

“ठीक है तो कल सुबह तक। और देखो बहादुरी से काम लेना। घबराना नहीं। ” कह कर वह पानी में अन्दर चली गयी।

इस तरह से कुछ दिन बीत गये। वह छोटी बच्ची रोज पानी लेने के लिये नदी पर जाती रही। उसकी बहिन ऐम्मे उससे बात करने लिये रोज नदी की सतह पर आती रही।

वे दोनों कुछ देर के लिये साथ साथ बैठतीं, एक दूसरे को तसल्ली देतीं और फिर अपने अपने रास्ते चली जातीं।

एक दिन जब वह बच्ची पानी पर झुक रही थी और “ऐम्मे ऐम्मे” करके अपनी बहिन को बुला रही थी कि घियासे की जाति का एक शिकारी उधर आ निकला।

“ऐम्मे ऐम्मे” की आवाज सुन कर वह शिकारी एक घनी झाड़ी के पीछे छिप गया और देखने लगा कि वहाँ क्या हो रहा था।

कुछ ही देर में उसने देखा कि नदी का पानी फट गया और उसमें से एक बहुत सुन्दर लड़की किनारे पर आ गयी। उसने बच्ची को प्यार से गले लगाया और उससे बात करने लगी। कुछ देर बात करके वह लड़की नदी में फिर से वापस चली गयी।

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जब वह सुन्दर लड़की नदी में वापस कूद गयी और वह बच्ची अपने पानी के घड़ों के साथ अकेली रह गयी तो वह शिकारी जल्दी से उस घनी झाड़ी के पीछे से निकला और गाँव की तरफ भाग गया। वहाँ घियासे एक जगह बैठा बैठा अपना भाला बना रहा था।

वह खुशी खुशी उसके पास पहुँचा और जल्दी जल्दी बोला — “घियासे घियासे, मैंने अभी अभी कुछ देर पहले तुम्हारी होने वाली पत्नी की दासी को नदी के किनारे देखा। ”

घियासे ने उसकी इस बात पर ज़्यादा ध्यान न देते हुए और अपना काम जारी रखते हुए कहा — “तो क्या हुआ। वह तो पानी लाने के लिये रोज ही वहाँ जाती है। ”

“पर तुम आगे तो सुनो। मैने उसको “ऐम्मे ऐम्मे” पुकारते हुए सुना। ”

यह सुन कर घियासे कुछ परेशान सा हो गया और बीच में ही बात काट कर बोला — “क्या कहा? वह ऐम्मे ऐम्मे पुकार रही थी?”

“हाँ, और फिर एक बहुत सुन्दर लड़की पानी में से निकल कर आयी और उससे बात करने लगी। ”

“पर ऐम्मे तो , , ,। ” यह सुन कर घियासे तो कुछ भी न समझ सका।

वह शिकारी फिर बोला — “मुझे मालूम है कि “ऐम्मे” तो उस लड़की का नाम है जिसको तुमने अपनी होने वाली पत्नी के लिये चुना था।

सुनो घियासे, मुझे तो ऐसा लगता है कि नदी की आत्मा ने किसी तरह से तुम्हारी होने वाली पत्नी को पकड़ लिया है और वह उसको पकड़ कर कैदी की तरह से रखे हुए है। और जो लड़की तुम्हारे घर में रह रही है वह कोई दूसरी लड़की है। ”

घियासे कुछ सोच कर बोला — “तुम शायद ठीक कह रहे हो। यही बात ठीक हो सकती है क्योंकि जितना ज़्यादा मैं उस लड़की की तरफ देखता हूँ उतना ही ज़्यादा मैं उसको पहचान नहीं पाता।

ऐसा करते हैं कि कल हम दोनों साथ साथ नदी पर चलते हैं और वहाँ चल कर देखते कि हमारा शक ठीक है कि नहीं। यह खबर देने के लिये तुम्हारा बहुत बहुत धन्यवाद मेरे दोस्त। ”

सो अगली सुबह घियासे और वह शिकारी दोनों नदी पर गये और एक घनी झाड़ी के पीछे छिप कर बैठ गये।

कुछ देर बाद वह बच्ची वहाँ पानी भरने आयी तो उसने अपनी बहिन ऐम्मे को पुकारना शुरू किया। कुछ ही मिनटों में ऐम्मे उस पानी में निकल आयी। घियासे ने उसको तुरन्त ही पहचान लिया कि वही उसकी असली पत्नी थी। उसके मुँह से खुशी की एक चीख निकलते निकलते बची।

जब ऐम्मे पानी में वापस चली गयी तो वे दोनों आदमी भी यह बात करते करते गाँव वापस चले गये कि ऐम्मे को नदी की आत्मा के चंगुल से किस तरह से छुड़ाया जाये।

शिकारी बोला — “मुझे लगता है कि हम लोग इसको अकेले नहीं कर पायेंगे। केवल नदी की बुढ़िया ही तुम्हारी सहायता कर सकती है। ”

घियासे खुशी से चिल्लाया — “तुम ठीक कहते हो वही हमारी सहायता कर सकती है। चलो उसी के पास चलते हैं। ”

कोई भी यह नहीं जानता था कि नदी की उस बुढ़िया की कितनी उम्र थी। कोई कहता था कि वह 100 साल की थी, कोई कहता था कि वह 200 साल की थी जबकि कुछ का विश्वास था कि वह 1000 साल की थी।

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पर हर आदमी जानता था कि वह कहाँ रहती थी। वह नदी के बाँये किनारे पर एक झोंपड़ी में रहती थी। उसकी झोंपड़ी के पास तो हयीना[4] भी आने से डरते थे। वे उसके डर की वजह से वहाँ कभी नहीं आते थे।

घियासे उस नदी की बुढ़िया के पास गया और जा कर उसको अपनी सब बात बतायी तो उस बुढ़िया ने उसको तसल्ली दी कि वह इस मामले में उसकी जरूर सहायता करेगी।

वह एक सफेद बकरा, एक सफेद मुर्गी, एक सफेद शाल और एक टोकरी अंडे इकठ्ठे कर ले। जब वह ये सब चीज़ें इकठ्ठी कर ले तो वह उनको उसके पास ले आये और तब वह देखेगी कि वह क्या कर सकती है।

घियासे वहाँ से चला गया और उस बुढ़िया की बतायी सारी चीज़ें ले कर लौटा तो बुढ़िया ने कहा कि उसको आने वाली अमावस्या तक इन्तजार करना पड़ेगा। अभी वह गाँव वापस जा सकता था और उस दिन वह सब कुछ देखभाल लेगी।

अमावस्या आयी तो बुढ़िया नदी के दूसरे किनारे पर खुद ही चली गयी। पहले उसने वह सफेद बकरी पानी में धकेल दी और फिर वह सफेद मुर्गी। फिर एक एक करके सारे अंडे उसने पानी में फेंक दिये। उसके बाद उसने शाल नदी के पानी पर बिछा दिया जो उसकी लहरों पर बहता चला गया।

तुरन्त ही पानी फाड़ कर ऐम्मे उस शाल पर बैठ कर ऊपर नदी के किनारे आ गयी।

बुढ़िया बोली — “आओ ऐम्मे। तुम्हारा स्वागत है। तुम डरो नहीं। मैं घियासे की तरफ से आयी हूँ। मेरा विश्वास करो। ”

कह कर वह ऐम्मे को अपनी झोंपड़ी में ले गयी। वहाँ पहुँच कर उसने उसके होने वाले पति घियासे को बुलाया तो वह तुरन्त ही अपने शिकारी दोस्त के साथ वहाँ आ पहुँचा।

दोनों ने एक दूसरे को पहचान लिया। कुछ देर बाद यह सब ऐम्मे की छोटी बहिन को भी चुपचाप बता दिया गया तो वह भी उस बुढ़िया की झोंपड़ी में आ गयी।

वहाँ से उस समय जो कोई और भी गुजरा वह यह नहीं बता सका कि वहाँ पर लोग खुशियाँ मना रहे थे या किसी के मरने का दुख मना रहे थे। क्योंकि सभी लोग खुशी के आँसू भी बहा रहे थे और खुशी से हँस भी रहे थे।

उसके बाद उन सबने मिल कर एक प्लान बनाया जिसके अनुसार उस छोटी बच्ची को गाँव वापस भेज दिया गया।

जब वह बच्ची घर पहुँची तो उसने उस दासी को बुरा भला कहना शुरू किया — “ओ नीच लड़की, तू घियासे से शादी करना चाहती थी? उँह। तूने मेरी बहिन को केवल इसलिये मार डाला ताकि तू उसके होने वाले पति से शादी कर सके?”

दासी ज़ोर से चिल्लायी — “चुप रह ओ बेवकूफ। मैं अभी तेरी खबर लेती हूँ। ” कह कर उसने एक डंडी उठायी और उससे उसको वहाँ से भगाने की कोशिश करने लगी।

बच्ची यह कह कर वहाँ से दरवाजे से बाहर निकल कर बुढ़िया की झोंपड़ी की तरफ भाग गयी।

वहाँ ऐम्मे और दूसरे लोग उसका इन्तजार कर रहे थे। उधर वह दासी भी उस बच्ची के पीछे पीछे उस बुढ़िया की झोंपड़ी के अन्दर तक भागी चली गयी।

पर वहाँ तो बच्ची की बजाय ऐम्मे खड़ी थी। दासी को कुछ समझ में नहीं आया कि वहाँ ऐम्मे कहाँ से आ गयी। वह उसको ऐम्मे को भूत समझ कर बहुत डर गयी।

वह वहाँ से बिना सोचे समझे लौट पड़ी और जल्दी ही नदी के किनारे आ पहुँची। वहाँ आ कर वह अपने आपको रोक न सकी और पानी में सिर के बल गिर पड़ी।

उसी समय हल्के नीले रंग की बाँहें पानी में से निकलीं और उस दासी को घसीट कर अपने महल ले गयीं। वह दासी अभी तक नदी की आत्मा की कैदी है।

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कुछ दिन बाद घियासे और एम्मे की शादी हो गयी और वे दोनों खुशी खुशी रहने लगे।


[1] The Spirit of the River – a folktale from Kikuyu Tribe, Kenya, East Africa.

Adapted from the book “African Folktales” by A Ceni. English Edition in 1998.

The Kikuyu are the largest ethnic group in Kenya. They speak the Bantu language as a mother tongue.

[2] Ghiyase – name of the Kenyan man

[3] Emme – name of the girl

[4] Hyena is a tiger-like animal. See its picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

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तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,344,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,66,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,14,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1244,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2002,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,705,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,790,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,80,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,201,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: पूर्वीय अफ्रीका की लोक कथाएँ // 3 नदी की आत्मा // सुषमा गुप्ता
पूर्वीय अफ्रीका की लोक कथाएँ // 3 नदी की आत्मा // सुषमा गुप्ता
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