उत्तरी अमेरिका की लोककथाएँ // ईकटोमी और हिरन का बच्चा // सुषमा गुप्ता

SHARE:

देश विदेश की लोक कथाएँ — उत्तरी अमेरिका–ईकटोमी : चालाक ईकटोमी संकलनकर्ता सुषमा गुप्ता 10 ईकटोमी और हिरन का बच्चा [1] एक बार ईकटोमी घने जंगलो...

clip_image002

देश विदेश की लोक कथाएँ — उत्तरी अमेरिका–ईकटोमी :

clip_image002

चालाक ईकटोमी


संकलनकर्ता


सुषमा गुप्ता


10 ईकटोमी और हिरन का बच्चा[1]

एक बार ईकटोमी घने जंगलों में घूम रहा था कि उसने एक पेड़ के ऊपर एक ऐसी चिड़िया बैठी देखी जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी।


उसके पीछे वाले लम्बे पंख इन्द्रधनुषी रंग के थे। धूप में चमकती हुई वह चिड़िया उसको बहुत सुन्दर लग रही थी। सो ईकटोमी की आंख उसी के ऊपर जा कर टिक गयी। वह मोर था।

वह पेड़ के नीचे खड़ा खड़ा उस मोर को बहुत देर तक देखता रहा। बहुत देर तक देखने के बाद उसने एक गहरी सांस ली और बोला — “काश मेरे भी ऐसे पंख होते। काश मैं ऐसा न होता जैसा मैं अब हूं।

अगर मेरे भी इतने सुन्दर पंख होते तो मैं कितना खुश रहता। मैं भी किसी पेड़ पर ऊँचाई पर बैठा होता और गरमी की धूप में तुम्हारी तरह चमक रहा होता, ओ चिड़िया। ”

यह कहते हुए उसने अचानक ऊपर की तरफ देखते हुए अपनी उँगली मोर की तरफ कर दी जो खुद भी उस अजनबी को अपना सिर घुमा घुमा कर देखे जा रहा था।

“मैं तुमसे प्रार्थना करता हूं कि मुझे भी ऐसे ही हरे नीले पंख वाली चिड़िया बना दो जैसे तुम हो। ” असल में वह अपनी मोती लगी हिरन की खाल के कपड़ों से थक चुका था।

यह सुन कर मोर बोला — “मेरे पास एक जादुई ताकत है। अगर तुम मेरी एक शर्त मानो तो मेरे एक बार छूने से तुम दुनिया के सबसे सुन्दर मोर में बदल जाओगे। ”

सुनते ही ईकटोमी ने अपने होठों को आश्चर्य में अपनी हथेली से थपका और ऊपर नीचे कूदते हुए चिल्लाया — “मैं तुम्हारी दस शर्त मान सकता हूं अगर तुम मुझको इतने लम्बे चमकीले रंगों के पंखों वाली चिड़िया में बदल दो तो।

देखो न, देखने में मैं कितना बदसूरत दिखता हूं। मैं तो अपने आपसे तंग आ गया हूं। मेहरबानी करके मुझे बदल दो। ”

यह सुन कर मोर ने अपने दोनों पंख फैलाये और बहुत ही धीरे से उनको हिलाता हुआ नीचे की तरफ उतर आया।

नीचे आ कर वह ईकटोमी के बिल्कुल पास आ कर बैठ गया और उसके कान में फुसफुसाया — “क्या तुम अभी भी उस शर्त को निभाने के लिये तैयार हो जो मैं अभी तुम्हें बताने जा रहा हूं? हालाँकि वह थोड़ी मुश्किल है। ”

ईकटोमी खुशी से नाचता हुआ बोला — “मैंने कहा न कि अगर दस शर्तें हों तब भी। ”

मोर बोला — “तब मैं बोलता हूं कि तुम दुनिया की सबसे सुन्दर चिड़िया बन जाओ पर फिर आज से तुम चालाकी खेलने वाले ईकटोमी नहीं रहोगे। ”

यह कह कर मोर ने ईकटोमी को अपने पंख की नोक से छुआ। मोर के छूते ही ईकटोमी तो गायब हो गया और अब उस पेड़ के नीचे दो सुन्दर मोर खड़े थे।

उन दोनों मोरों में से एक मोर तो अपना सिर उठा कर शान से खड़ा था और दूसरा मोर धीरे से ऊपर उड़ गया। जमीन पर खड़ा मोर अपने ही चमकदार पंखों की चमक से जगमगा रहा था।

कुछ देर तक तो वह वहाँ धूप में अपने इस रूप में सन्तुष्ट सा चुपचाप सा बैठा रहा। फिर कुछ देर बाद जब वह होश में आया तो उस नकली मोर ने अपने चमकीले रंगों के पंखों से चक्कर सा खाते हुए अपने पंख फैलाये और उसी शाख पर जा कर बैठ गया जिस पर वह असली मोर बैठा था।

वहाँ बैठ कर वह बोला — “ओह उड़ना कितना कठिन काम है। ये चमकीले रंग वाले पंख तो बहुत सुन्दर हैं पर अगर ये थोड़े हल्के होते तो कितना अच्छा होता। ”

तभी असली मोर बोला — “सो शर्त यह है कि तुम दूसरी चिड़ियों की तरह उड़ने की कभी कोशिश नहीं करोगे। जिस दिन भी तुमने उनकी तरह उड़ने की कोशिश की तुम अपने पहले रूप में आ जाओगे। ”

ईकटोमी बोला — “ओह, यह तो बड़ी बुरी बात है कि इन चमकीले पंखों से आसमान में नहीं उड़ा जा सकता। ”

क्योंकि वह तो उड़ने के लिये पहले से ही बहुत बेचैन था। वह तो आसमान में उड़ना चाहता था। वह तो पेड़ों के ऊपर से उड़ कर सूरज के पास तक जाना चाहता था और मोर ने यह शर्त रख दी थी कि वह आसमान में नहीं उड़ सकता था। तब फिर इन पंखों का क्या फायदा।

इतने में उसको कुछ चिड़ियें आसमान में उड़ती दिखायी दे गयीं। वह अपने पंख फड़फड़ाते हुए बोला — “मुझे अपने इन पंखों से उतना ऊँचा उड़ने की कम से कम कोशिश तो करनी ही चाहिये। ” वह अपनी उस लम्बी सी पंखों की पूंछ से थक गया था।

असली मोर बोला — “नहीं नहीं। ऐसा कभी मत करना। ”

पर इतने में ही उन चिड़ियों का झुंड उसके पास से उड़ गया।

अपनी उड़ने की इच्छा को न रोक पाने की वजह से ईकटोमी चिल्लाया — “ओ चिड़ियों, जरा रुक जाओ मैं भी तुम्हारे साथ आना चाहता हूं। ”

और इसके साथ ही उसने अपने फेफड़ों में हवा भरी और वह ऊपर की तरफ उड़ा। पर यह क्या? ऊपर जाने की बजाय वह तो नीचे जमीन पर आ गिरा। और अब वह सुन्दर मोर नहीं था बल्कि हिरन की खाल में लिपटा ईकटोमी था।

ईकटोमी ने दुखी आवाज में फिर से उस असली मोर से प्रार्थना की — “ओह, मैं तो फिर से ईकटोमी बन गया। मुझे फिर से वही सुन्दर चिड़िया बना दो। मुझे एक बार फिर से मौका दो ओ सुन्दर चिड़िया। ”

पर सब बेकार। असली मोर ने उसकी कोई बात नहीं सुनी और वह ईकटोमी ही बना रह गया।

चिड़ियें वहाँ से गाती चली गयी — “ओह, यह ईकटोमी हमारे साथ उड़ना चाहता है पर यह तो आया ही नहीं। अब हम इसका और इन्तजार नहीं कर सकते हम चलते हैं। ”

कुछ बेकार के इरादों को बड़बड़ाते हुए ईकटोमी वहाँ से आगे चल दिया। अभी वह कुछ दूर ही गया होगा कि उसको कुछ लम्बे तीर दिखायी दिये। वे एक एक करके मैदान में एक लम्बी लाइन की तरफ जा रहे थे। कुछ आसमान की तरफ भी जा रहे थे पर वे जल्दी ही आंखों से ओझल भी हो जाते थे।

केवल एक तीर रह गया था। वह भी उड़ने की तैयारी में था कि ईकटोमी उसके पास दौड़ा गया और रो कर उससे बोला — “मैं भी एक तीर बनना चाहता हूं। तुम मुझे एक तीर बना दो न।

मैं भी ऊपर वाले उस नीले आसमान को भेदना चाहता हूं। मैं सूरज को उसके बीच में से भेदना चाहता हूं। तुम मुझे एक तीर बना दो न। ”

तीर ने पूछा — “क्या तुम मेरी एक शर्त मान सकते हो? हालाँकि वह शर्त थोड़ी मुश्किल है पर अगर मान लोगे तो मैं तुमको तीर बना सकता हूं। ”

ईकटोमी खुशी से चिल्लाता हुआ बोला — “हाँ हाँ। मैं तुम्हारी सब शर्तें मानने के लिये तैयार हूं बस तुम मुझे तीर बना दो। ”

इस पर उस तीर ने ईकटोमी को अपनी पत्थर की नोक से बहुत ही धीरे से छुआ तो ईकटोमी तो वहाँ से गायब हो गया और अब वहाँ दो तीर बराबर बराबर उड़ने के लिये तैयार खड़े थे।

ईकटोमी को तीर में बदलने के बाद असली तीर धीरे से बोला — “पहली शर्त तो यह है कि तुमको हमेशा सीधी लाइन में उड़ना है। और दूसरे न तो किसी मोड़ पर मुड़ना है और न ही किसी हिरन के छोटे से बच्चे की तरह कूदना है। ”

यह कहने के तुरन्त बाद ही वह असली तीर उस नकली तीर को सीधी लाइन में उड़ना सिखाने के लिये तैयार हो गया — “देखो, उस ऊपर वाले नीले आसमान को इस तरीके से भेदते हैं। ”

कह कर वह तीर सीधा ऊपर चला गया।

clip_image003

उसके जाने के तुरन्त बाद ही हिरनों का एक झुंड घूमता हुआ उधर आ निकला। उनके पीछे उनके बच्चे खेलते हुए चले आ रहे थे। वे लोग बिल्ली के बच्चों की तरह लड़ झगड़ रहे थे और अपने चारों पैरों पर गेंद की तरह से उछल रहे थे।

ईकटोमी ने जब उनको देखा तो उसने देखा कि वे तो जमीन पर ही कितना खुश थे। तो उसने सोचा कि वह भी तो इसी तरह से जमीन पर खुश रह सकता था।

सो उसने तुरन्त ही आसमान की तरफ देखा और अपने दिल में सोचा “वह जादूगर तो चला गया। अब जब तक वह वापस आता है तब तक मैं इन हिरन के बच्चों के साथ खेल लेता हूं। ”

सो वह उन हिरन के बच्चों की तरफ बढ़ा। एक तीर को अपनी तरफ आया देख कर हिरन के बच्चे डर गये।

उनको डरा हुआ देख कर ईकटोमी बोला — “ओ हिरन के बच्चों, डरो नहीं। मैं तो तुम्हारे साथ उछलना कूदना चाहता हूं। मैं भी तुम्हारी तरह से तुम्हारे साथ खुश होना चाहता हूं। मैं तुमको कोई नुकसान नहीं पहुंचाऊँगा। ”

यह सुन कर हिरन के बच्चों की टाँगें सीधी हो गयीं और वे खड़े हो गये। वे एक बोलते हुए तीर को देख कर आश्चर्य में पड़ गये और उसको अपनी बड़ी बड़ी कत्थई आंखों से घूरने लगे।

उनको अपनी तरफ घूरते देख कर ईकटोमी नाचता हुआ बोला — “देखो मैं भी तुम्हारी तरह से नाच सकता हूं। ” कह कर उसने हिरन की तरह से एक कूद मारी।

यह देख कर अचानक ही हिरन के बच्चों ने अपनी नाक सिकोड़ी। क्योंकि वहाँ तो अब एक अजीब बोलने वाले तीर की बजाय अपनी हिरन की खाल पहने ईकटोमी खड़ा था।

यह देख कर ईकटोमी अपने आपको नोचने लगा और अपनी हिरन की खाल से टुकड़े निकाल निकाल कर चिल्ला पड़ा — “ओह मैं तो फिर से ईकटोमी बन गया। यह क्या हो गया। ”

“ही ही ही। मैं तो उड़ना चाहता था पर अब मैं क्या करूं। ”

असली तीर तब तक नीचे वापस आ गया था। वह ईकटोमी के बिल्कुल पास आ कर खड़ा हो गया।

उसने आसमान से ही उन हिरन के बच्चों को घास में खेलते देख लिया था और उसने ईकटोमी को भी उनके साथ कूद लगाते देख लिया था।

सो जैसे ही ईकटोमी ने कूद लगायी असली तीर के छूने का जादू टूट गया और वह फिर से ईकटोमी बन गया।

ईकटोमी ने एक बार फिर उससे प्रार्थना की कि वह उसको एक बार फिर से तीर में बदल दे पर ऐसा न हो सका।

तीर बोला — “नहीं बस, अब दूसरी बार नहीं। ” और वह सीधा उड़ कर आसमान में उसी तरफ चला गया जिधर उसके साथी गये थे।

अब तक वे हिरन के बच्चे उसके पास आ गये थे और उसके शरीर में अपनी नाक गड़ा गड़ा कर यह देखने की कोशिश कर रहे थे कि वह अजनबी कौन था।

अपनी इस हालत पर ईकटोमी बहुत दुखी था। वह बहुत ज़ोर ज़ोर से रोने लगा। पर तुरन्त ही उसके मन में एक और इच्छा जाग उठी और इस इच्छा के जागते ही उसके आंसू सूख गये।

वह हिरन के सबसे बड़े बच्चे के पास पहुंचा। उसने उसके चेहरे पर बड़े बड़े कत्थई निशान देखे तो वह उससे बोला — “ओ हिरन के बच्चे, तुम्हारे चेहरे पर ये कितने सुन्दर कत्थई निशान हैं। क्या तुम मुझे बता सकते हो कि तुम्हारे चेहरे पर ये इतने सुन्दर निशान कैसे बने?”

वह हिरन का बच्चा बोला — “हाँ हाँ क्यों नहीं। इसमें क्या बात है। मैं बताता हूं तुमको। जब मैं बहुत छोटा था तभी मेरी माँ ने लाल गरम आग से मेरे चेहरे पर ये निशान बना दिये थे।

उसने जमीन में एक गड्ढा खोदा। उसमें उसने थोड़ी सी मुलायम घास और छोटी छोटी डंडियाँ बिछायी। फिर उसने मुझको उस गड्ढे में रख दिया। उसके बाद उसने मुझे मीठी खुशबू वाली सूखी घास से ढक दिया और उसके ऊपर सीडर की लकड़ी रख दी।

फिर वह पड़ोसी के घर से एक लाल अंगारा ले कर आयी जो उसने मेरे सिर पर रख दिया। इस तरह से मेरे चेहरे पर ये कत्थई निशान बनाये गये। ”

ईकटोमी जो हमेशा दूसरों की तरह होना चाहता था बड़ी उत्सुकता से बोला — “क्या तुम मेरे साथ भी ऐसा ही कर सकते हो? क्या तुम उस तरीके से मेरे चेहरे पर भी ऐसे ही निशान बना सकते हो?”

हिरन का बच्चा बोला — “हाँ हाँ क्यों नहीं। मैं गड्ढा खोद सकता हूं। उसमें सूखी घास और डंडियाँ भर सकता हूं। फिर अगर तुम उस गड्ढे में कूद सकते हो तो मैं तुमको मीठी खुशबू वाली सूखी घास और सीडर की लकड़ी से भी ढक सकता हूं। ”

ईकटों उसको बीच में काटता हुआ बोला — “क्या तुम यकीन के साथ कह सकते हो कि तुम मुझको काफी सारी सूखी घास और डंडियों से ढक दोगे?

और क्या तुम यह भी यकीन के साथ कह सकते हो कि फिर मेरे वे निशान उतने ही कत्थई होंगे जितने तुम्हारे हैं?”

“हाँ हाँ, मैं वहाँ काफी सारी घास और डंडियाँ रखने के बाद भी घास और डंडियाँ रखता रहूंगा, अपनी माँ से भी ज़्यादा। तुम बिल्कुल चिन्ता न करो। ”

ईकटोमी खुशी से चिल्ला कर बोला — “तब हमको जल्दी से एक गड्ढा खोदना चाहिये और घास और डंडियाँ इकठ्ठा करनी चाहिये। ”

इस तरह से ईकटोमी ने अपनी कब्र अपने आप ही खोदने में उस हिरन के बच्चे की सहायता की।

गड्ढा खोदा गया। उसमें घास बिछायी गयी। उन कत्थई निशानों के बारे में कुछ बड़बड़ाने के बाद ईकटोमी उस गड्ढे में उतर गया।

वह उसमें लम्बा लम्बा लेट गया। हिरन के बच्चे ने उसको मीठी खुशबू वाली घास और सीडर की लकड़ी से ढक दिया। दूर से एक आवाज आयी “ओ कत्थई निशान हमेशा के लिये आ जाओ। ”

फिर हिरन ने उस गड्ढे में एक अंगारा डाल दिया और सारे हिरन के बच्चे वहाँ से अपनी अपनी माँओं के पीछे भाग गये। काफी दूर जाने पर उन्होंने पीछे मुड़ कर देखा तो उस गड्ढे में से बहुत सा काला धुंआ उठ रहा था और वह नीले आसमान की तरफ जा कर गायब हो जाता था।

यह देख कर एक हिरन के बच्चे ने दूसरे से पूछा — “क्या यह ईकटोमी की आत्मा है?”

उसके साथी ने जवाब दिया — “नहीं। मेरे खयाल से तो उसको जलने से पहले ही बाहर कूद जाना चाहिये। ”

बच्चों तुम क्या सोचते हो? क्या ईकटोमी अपनी जान बचाने के लिये उस गड्ढे में से वाकई बाहर कूद गया होगा या फिर , , ,



[1] Iktomi and the Fawn – a folktale from Native Americans, North America.

Adapted from the Web Site : http://www.manataka.org/page146.html


---

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,इथियोपिया व इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: उत्तरी अमेरिका की लोककथाएँ // ईकटोमी और हिरन का बच्चा // सुषमा गुप्ता
उत्तरी अमेरिका की लोककथाएँ // ईकटोमी और हिरन का बच्चा // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-pAfrIogAr-I/Wv2j58hRCQI/AAAAAAABBbA/E0Sz8q-Rwws_oEtmS0gg0DcuPVXZJNMPQCHMYCw/clip_image002_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-pAfrIogAr-I/Wv2j58hRCQI/AAAAAAABBbA/E0Sz8q-Rwws_oEtmS0gg0DcuPVXZJNMPQCHMYCw/s72-c/clip_image002_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/05/blog-post_38.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2018/05/blog-post_38.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content