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संकल्प (बाल लघुकथा ) // सुशील शर्मा

संकल्प

(बाल लघुकथा )

सुशील शर्मा

आज विद्यालय में पौधरोपण हो रहा था सभी बच्चे बड़े उत्साह से स्कूल में उछल कूद कर रहे थे। बड़े बच्चे गड्ढा खोद रहे थे छोटे बच्चे गड्ढों के पास पानी और खाद वगैरह का इंतजाम कर रहे थे। मास्टरजी सबको ताकीद कर रहे थे की पौधों को कैसे रोपित करना है।

'सुनील गड्ढा जरा नाप का खोदो देखो तुम तिरछा खोद रहे हो " मास्टरजी ने सुनील को निर्देशित किया।

'जी सर " सुनील अलर्ट हो कर गड्ढा सीधा करने लगा

"सवि तुम वो गोबर की खाद लेकर आओ " मास्टरजी ने कहा।

"जी सर "सवि पॉलिथीन में राखी गोबर की खाद उठा लाई।

"सर हम पौधों में खाद क्यों डालते हैं "सवि ने बड़ी सहजता से पूछा।

"तुम खाना क्यों खाती हो ?"मास्टरजी ने मुस्कुराते हुए सवि से पूछा।

"खाने से हमें ताकत आती है " सोहन बीच में ही बोल पड़ा।

"लेकिन खाद तो खाना नहीं है ये तो गन्दा गोबर है "सवी ने फिर प्रश्न किया।

"पेड़ पौधे ऐसी ही सदी गली चीजों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं " मास्टरजी ने सभी बच्चों को समझाया।

"पेड़ पौधों में यह शक्ति होती है की वो सदी गली चीजों को अच्छी ऊर्जा में बदल देते हैं जैसे वो वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर उसे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ऑक्सीजन में बदलते हैं और अपना भोजन बनाते हैं। "मास्टरजी ने सभी छात्रों को समझाया फिर एक प्रश्न किया "अच्छा बताओ बच्चो इस प्रक्रिया को क्या कहते हैं ?

सवि झट से बोली "सर इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं "

"बहुत सुंदर सवि ,अब तुम सब बच्चों को पता चला की अगर पेड़ पौधे भी ऑक्सीजन बनाना छोड़ दें तो क्या होगा " मास्टरजी ने बच्चों की और प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा।

"ऑक्सीजन जल्दी ख़त्म हो जाएगी और हम मर जायेंगे " सुनील ने झट से उत्तर दिया।

"ऑक्सीजन बनती रहे इसके लिए हमें क्या करना होगा ?"मास्टरजी ने फिर प्रश्न किया।

हमें बहुत सारे ,इतने सारे पौधे लगाने पड़ेंगे "नन्ही ऋतु ने अपनी दोनों बाहें फैलाकर बताया।

"हमें इतने सारे पौधे लगाकर उन्हें बड़ा करना होगा ताकि हमें ज्यादा ऑक्सीजन मिले" सवि ने ऋतु की बात को और विस्तृत किया।

आओ हम सब मिलकर नन्हे नन्हे पौधे रोपें और उन्हें पेड़ बनाने का संकल्प लें "मास्टरजी ने नन्ही ऋतु के हाथ में पौधा थमाते हुए कहा।

सभी बच्चे जोर से चिल्लाये "हम सभी संकल्प लेते हैं "

2 टिप्पणियाँ

  1. संकल्प एक बालोपयोगी रचना है इसमें संदेह नहीं लेकिन बाल लघुकथा?मेरी जानकारी में बाल लघुकथा कोई विधा ही नहीं है.
    सीताराम गुप्ता,

    जवाब देंहटाएं
  2. मेरी जानकारी में बाल लघुकथा कोई विधा नहीं है. लघुकथा एक अत्यंत परिपक्व विधा है जिसमें बच्चों के लिए लिखना संभव ही नहीं.जैसे बाल विवाह अव्यावहारिक है वैसे ही बाल लघुकथा लिखना अथवा किसी रचना को बाल लघुकथा कहना भी पूर्णतः अव्यावहारिक होगा.
    सीताराम गुप्ता,
    दिल्ली.

    जवाब देंहटाएं

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