नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

फुटकर इश्क़ / मनीष कुमार सिंह की अतिलघु – कवितायेँ

फुटकर इश्क़ / मनीष कुमार सिंह की अतिलघु – कवितायेँ

***

फुटकर इश्क़ / मनीष कुमार सिंह की अतिलघु – कवितायेँ

तुम मुझसे प्यार तो करते हो न ?

सुनो

सर फ्रांसिस बेकन ने कहा - 'it is impossible to love and to be wise'

और तुम्हें तो पता ही होगा मैं बुद्धिमान हूँ

हाँ ! हाँ ! पता है !

तुम कितने ज्ञानी हो

गधे नहीं तो

चुप करो वरना मुहँ तोड़ दूंगी तुम्हारा !

***

अच्छा

सुनो

यह बताओं

तुम इतना प्यारी क्यूँ हो ?

अबे ! हम सबसे छोटे है न घर में इसीलिए

हाँ तभी इतना नकचढ़ी हो

अच्छा अब हम नकचढ़ी हो गए तुम्हारे लिए

जाओं अब बात मत करना मुझसे

बाय !

***

अरे यार ! मैं बोल रही हूँ न

तुम पर यह ब्लैक - शर्ट अच्छी लगेगी

तुम मान क्यूँ नहीं रहे

अबे हम कभी पहने नहीं

नहीं अच्छी लगेगी

हाँ ठीक है

जाके कोई फ़िर कोई ब्लू - शर्ट ले लो

पागल ही हो तुम

तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता है !

***

ओय खडूस

पार्टी में आये हो

मजे करो

हँसो , डांस करो

हां जाके तुम करो तुम्हें ज्यादा ज़रूरत है

अच्छा जी

ठीक है

फ़िर जा रही हूँ मैं

कहा ?

मजे करने

अरे यार हद है

अब तुम भी छोड़ के मत जाओं न

प्लीज !

***

मैं क्या हूँ तुम्हारी ?

मातृभाषा

अरे यार !

माफ़ करो बाबा

मुझे पूछना ही नहीं था

बड़े आये मातृभाषा वालें

सीधे कुछ नहीं बता सकते है !

***

चलो समोसा खा लेते है

हां

तुम्हें बहुत तीखा लगा रहा होगा

सॉरी यार

यहाँ कही पानी भी नहीं

सॉरी सॉरी सॉरी

तुम सच में पागल हो क्या ?

हरेक बात पर सॉरी बोलती हो !

***

तुम न फ़ालतू की बात पर भी गुस्सा करते हो

हां मुझे बहुत गुस्सा है

और मैं इसे रखता हूँ तो

हां ठीक है रखो

मैं रहूँ या नहीं तुम्हें क्या फ़र्क है ?

थप्पड़ खाना है क्या ?

यहाँ तुम्हारे रहने या नहीं रहने का बात कहा से आ गया

हाँ तो तुम फ़ालतू में गुस्सा में मत हुआ करो

वरना ऐसे ही बोलूंगी !

***

यार !

चलो कही बहुत दूर चलते है

हाँ हाँ क्यूँ नहीं

घर से तो आ नहीं पाती हैं

और मैडम बहुत दूर चलेंगी

चाय पीने चलना हो तो बोलो ?

***

तुम मुझे छोड़ सकती हो

और उसे चुन सकती हो

जिसे तुम सबसे ज्यादा प्यार करती हो

नहीं पागल

मैं बेवकूफ़ थोड़ी ही हूँ

मैं उसे चुनुंगी

जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करता है

हाहाहाहाहा!

***

तुम्हारा मौन तुमसें ज्यादा बोलता है

अच्छा तो क्या मैं ना बोला करूं?

हां तुम्हारा मन

मेरा मन तो है

कि अंतिम-यात्रा पर जाने से पहले भी तुमसें बोलूं

ऐसे ही बोलना है

तो ना ही बोलो

जाओं !

***

यार सुनो न

मैंने तुम्हें दो साल पहले अपने बन्दर की फ़ोटो दी थी

मुझे दे दो न प्लीज

हद है यार

तुम भी कमाल हो

अब हम बन्दर की फ़ोटो कहा से लाये

मेरा फ़ोन ख़राब हो गया था

तुम्हें बताया तो था

अरे यार

तुम भी कुछ सम्हाल के नहीं रख सकते हो

हां इसीलिए तो तुमसे कहता हूँ

सोच लो

चुप करो

सोच लो सोच लो ना करो ज्यादा

जाके अपना काम करो

बाय !

-----

परिचय –

मनीष कुमार सिंह - जन्मस्थली बहराइच उत्तर प्रदेश, कंप्यूटर साइंस में परास्नातक, वर्तमान में दिल्ली में सॉफ्टवेर इंजिनियर.

फेसबुक - https://www.facebook.com/Manish.bharatvasi

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.