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लघुकथा- * सरमन का घर * -डॉ आर बी भण्डारकर.

सुप्रतीक बाला की कलाकृति

सरमन का परिवार एक सामान्य परिवार है।

विगत बरसात में उनका एक कच्चा घर(कमरा)गिर गया। उसकी जगह पुनः घर बनाना आवश्यक।

कच्चे घर के लिए मिट्टी तो पुराने घर की ही उपलब्ध थी ;पर पुराने घर की लकड़ी, खपड़े आदि सब नष्ट हो गए थे अतः इनकी व्यवस्था नए सिरे से करनी थी।

बाजार में लकड़ी और खप्पर के भाव आसमान छू रहे थे सो तय किया गया कि घर पक्का ही बना लिया जाए।

ईंटों, सीमेंट और सरिया एकत्र कर लिया गया और घर बनाने का काम शुरू हुआ। घर कच्चा बनता तो काम रोज न चल पाता। कच्चा निर्माण सूखने तक के लिए बार बार निर्माण कार्य रोकना पड़ता पर पक्का निर्माण निर्माण होने से कार्य निरंतर चलने लगा।

निर्माण मजदूर रोज 8 बजे आते,1 बजे दोपहर का भोजन करते,2 बजे फिर काम पर लग जाते;5 बजे काम बंद कर सब अपने अपने घर चले जाते।

दोपहर के भोजन में कोई मजदूर गेंहूँ की रोटी और आलू का भुर्ता खाता तो कोई बाजरा की रोटी आम या मिर्च के अचार से खा रहा होता। किसी किसी को वह भी नसीब नहीं था,वह नमक से रोटी खाता।

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निर्माण के समय काम-काज और निर्माण सामग्रियों की कमी-वेशी देखने के उद्देश्य से सरमन और कभी कभी उनका बड़ा बेटा भी निर्माण -स्थल पर उपस्थित रहते।

स्कूल की छुट्टी का दिन धमा चौकड़ी का दिन होता क्योंकि इस दिन सरमन के घर के बच्चे निर्माणाधीन मकान में और उसके आसपास ही अधिक खेलते-कूदते। सबको बड़ा अच्छा लगता।

एक दिन घर मेँ रौनक और बढ़ गयी क्योंकि उस दिन  सरमन की बेटी अपने बाल-गोपालों सहित ससुराल से आ पहुँची थी। बिटिया अपने भाइयों,भतीजे,

भतीजियों के लिए ढेर सारी मिठाइयाँ लाई। बच्चों की खुशी का ठिकाना न था।

दोपहर का समय है। मजदूर निर्माणाधीन मकान के पास नीम के पेड़ की छाँव मेँ दोपहर का भोजन कर रहे हैं। कुछ शोरगुल सा सुनकर सरमन उस तरफ देखते हैं तो अवाक रह जाते हैं।

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मजदूर भोजन कर रहे हैं। मजदूरों के ना ना कहने पर भी सरमन के पोते-पोती उन्हें मिठाइयाँ परोस रहे हैं।

सरमन जैसे ही उनके पास पहुँचते हैं, उनका बड़ा पोता सिर झुका कर बोल उठता है-बब्बा जी हमें तो आये दिन मिठाई मिलती ही रहती हैं। इन अंकल लोगों का भोजन देखकर नहीं लगता कि ये कभी मिठाई खा पाते होंगे। इसलिए हम लोगों ने........।

बस बस ! बेटों मुझे तुम पर गर्व है।

2 टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 08 सितम्बर 2018 को साझा की गई है......... https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बढ़िया। बाल मन ही इतना मासूम होता है और इस कारण कई बार काफी अच्छी सीख दे देता है।

    जवाब देंहटाएं

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