रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

हास्य - व्यंग्य - कहानी // हम भी पक्या के साथ हैं // सुरेश खांडवेकर

साझा करें:

रात के बारह बज रहे थे। कल्याण से कसारा जाने वाली आखिरी लोकल का इंतजार कुछ यात्री कर रहे थे। रेल्वे स्टेशन लगभग खाली था। जो यात्री किसी ना क...

सुरेश खांडवेकर


रात के बारह बज रहे थे। कल्याण से कसारा जाने वाली आखिरी लोकल का इंतजार कुछ यात्री कर रहे थे। रेल्वे स्टेशन लगभग खाली था। जो यात्री किसी ना किसी कारणवश पिछली गाड़ी चुक गए थे, धीरे-धीरे यहां इकट्ठे होने लगे। उनकी चाल में हताशा और थकान थी। उनके दोनों हाथ कुछ झोले और सामानों से लदे थे। समानता यह थी किसी ने हाथ में तो किसी ने अपने बगल में, छोटे-छोटे बैगनुमा गल पट्टे वाले झोले लटकाये थे। उनकी आपसी बातचीत से पता चला कि यह शिक्षक समूह हैं।

संयोग से और भी दो पुरुष दिखाई दिये। विंचणकर ने एक को पहचाना तो पूछ लिया, ‘प्रकाशराव इतनी रात?’

क्या करूं कुछ ना कुछ काम याद आता गया। देखो बारह बज गये भागाभागा आ रहा हूं। अगर ये लोकल चूक जाती तो रात-भर यहीं रूकना पड़ता। मेरे साथ ये बेड़ेकर सर हैं पटेल सीनियर स्कूल के प्रिंसिपल।’

‘अच्छा-अच्छा नमस्कार, भई वाह। इस बार तो पटेल सीनियर स्कूल ने तो खूब नाम कमाया। दस वर्षों से मेरिट लिस्ट में बच्चे आ रहे हैं। बेड़ेकर साहब बधाई आपको। आपके निर्देशन में बच्चे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।’

‘धन्यवाद’ बेडेकर ने कहा।

इसी बीच सुधारकर पेडणेकर दिखाई दिये, तो बेडेकर ने उसे आवाज लगाई, ‘ओहो पेडणेकर यहां कहां? इतनी रात?’

पेडणेकर जेकेट कुर्ता पाजामा में थे। दौड़ते आये बोले, ‘चलो समय पर आ गये वर्ना यह आखिरी लोकल भी निकल जाती। आधे रास्ते तक का साथ हो जायेगा। अच्छा हुआ मिल गये।’ वे एक-दूसरे को देखने लगे तो बेडेकर ने पूछा, ‘आपने इन्हें नहीं पहचाना?’

[post_ads]

‘न, न, क्षमा चाहता हूं।’

बेडेकर ने उसका परिचय दिया, ‘अरे ये खर्ड़ी के यशवंत स्कूल के प्रकाशराव। इन्हीं के स्कूल के और दो-तीन शिक्षक बहुत लोकप्रिय है। अपने शिवराज पाटिल, नाथ सर, दीक्षित जी सब यशवंत स्कूल, खर्ड़ी के बड़े लोकप्रिय शिक्षक हैं।’

पेडणेकर ने सिर हिलाया। तो बेडेकर आगे बोलने लगे, ‘प्रांत में इस बार भी यह स्कूल रिजल्ट में अव्वल आया। सभी जगह शिक्षा, खेल, संगीत, नाटक। वाह क्या बात है?’

प्रकाशराव बोले, ‘हमारे स्कूल का बरसों से यही रिकॉर्ड है।’ सब टीचर स्टाफ इसे मेंटेन करने में जी-जान लगाते हैं। इसी वजह से जहां हमारे स्टूडेंट्स को स्कॉलरशीप्स और ईनाम मिलता रहता है। वहां शिक्षकों को भी अनेकों पुरस्कार मिलते रहते हैं।’

इस बीच ये विंचणकर ने कहा, ‘प्रकाशराव क्यों भीतर ही भीतर मुस्कुरा रहे हो। इस बार तो आपको भी आदर्श शिक्षक का पुरस्कार मिलने वाला है।’

प्रकाशराव चुप रहे। उन्हें बाकी शिक्षकों ने बधाई दी। प्रकाशराव बोले, ‘ये तो संयोग की बात है। पिछले वर्ष राज्य सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने हमारे विद्यालय के आरआर पाटील को आदर्श शिक्षक के रूप में सम्मानित किया और इस बार मेरा नाम घोषित होने के संकेत मिले हैं।’

इस बीच पेडणेकर ने एक-दो जाने-पहचाने चेहरों को देखा तो बोल पड़े, ‘लो आज तो जैसे बड़े-बड़े महारथियों का सम्मेलन हो रहा हो।’ प्रकाशराव का भी ध्यान प्लेटफार्म पर लोकल ट्रेन आने के दिशा में था। बोले, ‘‘ देखो, एमआर बोंडे सर भी आ रहे हैं। उनके साथ महाजन भी है। यह प्रेरणाताई सीनियर सेकेंडरी स्कूल के अंग्रेजी के व्याख्या है।’

आश्चर्य व्यक्त करते हुए वे आगे बोले, ‘बोंडसर गजब है। चलती-फिरती डिक्शनरी है, क्या ग्रामर है इनका। दिन-रात स्टूडेंट्स का रेला लगा रहता है इनके पास।’

वे प्लेटफार्म पर इधर-उधर जा रहे थे, तो उन्हें भी पेडणेकर ने अपने साथ मिला लिया।

बोंडेसर को अपनी ओर आने का इशारा किया। आते ही, ‘नमस्कार-नमस्कार, क्यों इधर-उधर जा रहे हो? अब लोकल में सब शिक्षक बंधु एक साथ ही बैठेंगे।’

धक्का-मुक्की का अब सवाल ही नहीं था। आखिरी लोकल वापस कसारा जानेवाली आ गयी और शिक्षकों का झुंड सामने की आयी बोगी में घुस गया। अपनी-अपनी सीट पर जमे, प्रकाशराव, बेडेकर, पेडणेकर, एकनाथ सर, भोंडे सर, महाजन सर। सौभाग्य से उसी बोगी में और भी चार शिक्षक बैठे थे। एनआर सर, वामनसर, कुलकर्णी और श्रीपाद कडूसर। समय-समय पर ये शिक्षक किसी न किसी शैक्षणिक या सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बहाने मिलते रहते थे। ये ठाणे से बैठे थे। सभी की दिशा कसारा की ओर थी। ये सभी प्रसिद्ध स्कूलों के प्रसिद्ध ही नहीं आदर्श शिक्षक थे।

इसी बीच थोड़ा-थोड़ा वार्तालाप भी हुआ, बेडेकर ने प्रकाशराव से पूछा, ‘तुम्हारी हिन्दी भाषा तो कमाल की है। तुम्हारा रिजल्ट हमेशा अच्छा रहता है। तुम्हारे स्कूल के एक अध्यापक कह रहे थे चाहे जो फंक्शन हो स्कूल में प्रकाशराव का भाषण अवश्य होता है।’

इस पर प्रकाशराव बोले, ‘ऐसा कुछ नहीं है। सभी का प्रोत्साहन है। विद्यार्थियों का बैच भी अच्छा हो तो, शिक्षक को भी पढ़ाने में मजा आता है।’

थोड़ी देर की चुप्पी के बाद महाजनसर ने एक अध्यापक की ओर संकेत करते हुए पूछा, ‘और कुलकर्णी कैसे लेट हो गये?’

‘कुछ नहीं, बेटी साठे के गेस पेपर मांग रही थी, उसे ढूंढ़ने में देर लगी।’

‘साठे के गैस पेपर? हम तो चाटे के गैसपेपर सुनते आये हैं?’

‘यहां तो चाटे के गैसपेपरों की खूब पब्लिशिटी है। लेकिन अब साठे के गैस पेपर बच्चों को ज्यादा पसंद है।’

‘तुम्हारे यहां साईंस कौन पढ़ाते है?’

कडूसर ने हाथ जोड़ दिये। उनकी प्रशंसा करते हुए नाथसर बोलने लगे, ‘प्रकाशराव के साथ-साथ इस बार नहीं तो अगली बार कडुसर को भी आदर्श शिक्षक की फुलमाला पहनने को जरूर मिलेगी।’

‘बिल्कुल’ पेडणेकर हां कहते हुए बोले, ‘कडुसर, हमारे स्कूल के रत्न हैं। विद्यार्थियों को विज्ञान में खूब उत्साहित करते रहते हैं। उनके एक्सपीरिमेंट भी गजब के होते हैं। समाचार पत्रों में भी उनके प्रयोग छपते रहते हैं। पीछे टीवी में भी उनके प्रयोग प्रसिद्ध हुए थे।’

[post_ads_2]

कडुसर चुप्पी साधे हुए थे। रेल खटाखट-खटाखट आगे बढ़ती जा रही थी। पंखे पूरी शक्ति से हीन-हीना रहे थे। खिड़कियों से हवा अंदर घुस रही थी। प्रकाशराव ने कडुसर को सम्बोधित करते हुए पूछा, ‘कडुसर कुछ तो बोलो, चुप क्यों हो?’

कडुसर खिड़की ओर देखते हुए बोले, ‘कुछ नहीं मैं बार-बार विद्यार्थियों से यही कहता रहता हूं सृष्टि है तो सिद्धांत है और सिद्धांत है यानी विज्ञान है। इसी तरह मैं विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति उत्साहित करता रहता हूं।’

सभी शिक्षकों ने उनकी बात का मौन समर्थन किया। सारे शिक्षक बोगी के एक कोने में बैठे थे। रात की काली चादर में खिड़की के उस पार केवल बिजली के चमकते बल्ब की कतारें दिखाई दे रही थी। ये बल्ब ही कहीं पहाड़ से लगते थे कहीं पेड़ से दिखाई देते थे। कब लोकल रुकती और कब आगे बढ़ती इसका सबको भीतर ही भीतर ज्ञान था। अपना-अपना गंतव्य सबको याद था। शाद के बाद आम्बिवली, उसके बाद टिटवारा, उसके बाद खडावली उसके बाद बासिंदे उसके बाद आसनगांव उसके बाद खर्डी उसके बाद आदि-आदि.... और आखीर में कसारा। इस तरह सब लोकल रूकने अपने स्टेशन का ध्यान करते थे। बोगी में सात-आठ शिक्षक थे। सभी आत्मगौरव से भावविभोर थे। सभी अपने स्कूलों की प्रसिद्धि और व्यक्तिगुणों की पुष्टि कर रहे थे। यात्रियों के सहारे की छत पर लगी कड़ियां शान्ति से हील रही थी। थकी-थकी सी झूल रही थी। रात ने जैसे कोलाहल को भी निगल लिया था। कुछ देर सारे शिक्षकों ने चुप्पी साध ली। कुछ झपकी लेने लगे। कुछ आकारण बोलने के बजाय चुप रहने में ही भलाई समझ रहे थे। कुछ निश्चिंत आंखें बंद किये थे। आखिरी लोकल होने की वजह से न शोरगुल था न भीड़। स्टेशन पर लोकल ट्रेन तो रुकती लेकिन लगता जैसे गाड़ी अपने खानापूर्ति कर रही है। न कोई उतरता न कोई चढ़ता। अब टिटवाडा स्टेशन पर लोकल रुकी। चार दबंग नौजवान बड़ी बेफिक्री से इन्हीं शिक्षकों बोगी में जोर-जोर से वार्तालाप कतरे हुए चढ़े। उन्होंने शिक्षकों को एक कोने में देखा और दूसरे कोने में पैर फैलाकर बैठ गये। एक की आवाज आ रही थी, ‘ये बोगी अपने लिए अच्छी, उधर कोने में बैठने का।’

दूसरा बोला, ‘बिल्कुल सही।’ उसने चारो ओर निगाह डाली तो सात-आठ पचास-पच्चपन की आयु के पुरुष थे। उन्हें देखते हुए एक ने गले में लटका तौलिया निकाला और शीट पर फटके मारते हुए बोला, ‘अब हिलने का नहीं यहां से। कसारा तक यहीं बैठेंगे और देख पक्या, ‘उस पाटिल को कह दे सीधे-सीधे रुपये मेरे हवाल कर दे, नहीं तो सारा का सारा खानदान किधर चला जायेगा पता भी नहीं चलेगा। साला हमको क्या समझा? अपुन ने अपने भाई को नहीं छोड़ा, तो पाटिल कौन-सी चीज है? अपने लीडर-वीडर से डरने का नहीं। साले को चीर डालूंगा।’

ये संवाद सुनते ही शिक्षक जागे और पसीना पोंछना शुरू कर दिया। कुछ हिम्मत बटोर के सम्भल कर बैठ गये।

दबंग आगे बोलने लगा, ‘अबे पक्या, उस बामण को भी समझा देना कढीचट को, मैं पिछले दो साल से दो-दो रामपुरी रखता हूं। तूने देखी की नहीं?’

पक्या बोला, ‘भाऊ, वो पाटिल अपने आप रुपये ला देगा।’

तभी भाऊ ने जेब में से ताश की गड्डी निकाली, ‘ले पक्या, पिस जरा पत्तों को। जरा दिमाग ठंडा कर लूं।’

थोड़ी देर बाद अगला स्टेशन खडावली आया। इसमें पेसेंजर तो नहीं चढ़े लेकिन एक काले कोट वाला, नाक पर चश्मा चढ़ाये टी.टी. जरूर इनकी बोगी में चढ़ा। उसने बोगी के चारो ओर चश्मे के ऊपर से निगाह डाली। बोगी दो ग्रुपों में बटी थी। एक तरफ शिक्षकों का झूंड था दूसरी तरफ भाई पक्या एंड पार्टी। ये पैर फैलाये ताश खेल रहे थे। टी.टी. पहले उन्हीं के पास गया। वह समझ रहा था कि ये जो समझदार यात्री दिखाई दे रहे हैं। ये तो ईमानदर लग रहे हैं। इनसे तो बाद में भी निपटा जा सकता है। वो पक्या वाली टोली के पास पहुंचा। उसके एक हाथ में रसिद बुक थी और दूसरे हाथ में पेन। उसने पूछा, ‘टिकट बताओ?’

‘हमारे पास टिकट विकट कुछ नहीं है।’

‘तो अगले स्टेशन पर तुम्हें उतरना पड़ेगा।’

‘टी.टी. साहब, शान्ति रखो वर्ना अगले स्टेशन पर तुम्हें उतरना पड़ेगा।’

‘क्या कहा मुझे उतरना पड़ेगा?’

‘हां, तो जबरदस्ती करोगे तो क्या हम उतरेंगे?

‘देखो एक तो तुम्हारे पास टिकट नहीं है, और ऊपर से तुम धमका रहे हो अलग।’

‘इसको धमकाना नहीं समझो साहब, आपको हम साहब-साहब कर रहे हैं।’

‘तुम्हें पुलिस के हवाले कर दूंगा।’

‘पक्या क्या नाम है भाई इनके कोट पे?’ वह खड़ा होकर पढ़ते हुए बोलने लगा, ‘पक्या, इनका नाम वसंत नेने है। नेने साहब पिछले पांच साल में अपुन ने कोई टिकट लिया है। हमको तो याद नहीं।’

‘एक तो बगैर टिकट जा रहे हो और फिर शेखी बघार रहे हो।’

इस वार्तालाप को देखकर शिक्षकों के कान खड़े हो गये। सभी अपने-अपने जेब में हाथ डालने लगे। कुछ मुट्ठियां भींचने लगे।

टी.टी. ने फिर संभलकर कहा, ‘तुम्हें अगले स्टेशन उतरना होगा?’

अब पक्या बोल पड़ा, ‘तुम्हारा क्या, हमारा बाप भी हमें कसारा से पहले कोई उतार नहीं सकता। आपने अब इस बात को ज्यादा बढ़ा दिया है तो फिर.....’

उसको बोलने से रोकते हुए उसका लीडर बोला, ‘हमारे टी.टी. साहब वसंत नेने अच्छे आदमी हैं।’

पक्या ने जवाब दिया, ‘भाऊ कैसे अच्छे आदमी हैं बार-बार धमकी दिये जा रहा है। टी.टी. साहब आपने वसंत ऋतु के हिसाब से नये-नये खुश्बू वाले फूलो की तरह बोलना चाहिए। अपनी हालत को देखो। जरा-सा जोर से बोल दूंगा तो पैंट गीली हो जायेगी। तुम कैसे बोल रहे हो कि हमको उतार देंगे। तुमको पता है इस लोकल ट्रेन में दरवाजा भी नहीं है। कितनी देर लगेगी लुढ़काने में?’

अब नेने को थोड़ा सा पछतावा होने लगा कि बात बेवजह बढ़ा दी इन दबंगों से। ये गुंडे हैं, दबंग है, बेशर्म हैं। चाकू-छूरे लेकर घूमते है। कुछ भी कर सकते हैं। मन ही मन अपनी हार मानते हुए टी.टी. पलट गया, तो देखा शिक्षक सांस रोके बैठे थे। तभी भाई ने पक्या से कहा, ‘पक्या काई को रामपुरी निकाल रहा है यार वसंत नेने साहब बहुत भले आदमी हैं हो जाती है गलती।’

टी.टी. वसंत नेने मन ही मन बुदबुदाते हुए शिक्षकों की तरफ घुम गये। धीरे-धीरे कदम बढ़ा ही रहे थे कि प्रिंसिपल बेडेकर ने भाई की ओर इशारा करते हुए जोर से बोला, ‘पक्या भाई टी.टी. को बोलो हम भी आपके साथ हैं। फिर क्या सबने एक साथ घोषणा की, ‘हम भी पक्या के साथ हैं।’

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
Loading...

-----****-----

-----****-----

---***---

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|नई रचनाएँ_$type=complex$count=8$page=1$va=0$au=0

|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3830,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,335,ईबुक,191,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2771,कहानी,2096,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,485,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,49,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,820,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,307,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1908,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,644,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,685,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,54,साहित्यिक गतिविधियाँ,183,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: हास्य - व्यंग्य - कहानी // हम भी पक्या के साथ हैं // सुरेश खांडवेकर
हास्य - व्यंग्य - कहानी // हम भी पक्या के साथ हैं // सुरेश खांडवेकर
https://lh3.googleusercontent.com/-e9B5o1U9ZHk/W7s6qS890YI/AAAAAAABEoE/lUwvEeHfOOw64PsdXUj67lfUW3P1m2uKwCHMYCw/clip_image002_thumb%255B6%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-e9B5o1U9ZHk/W7s6qS890YI/AAAAAAABEoE/lUwvEeHfOOw64PsdXUj67lfUW3P1m2uKwCHMYCw/s72-c/clip_image002_thumb%255B6%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/10/ham-bhi-pakhya-ke-sath-hain-suresh.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/10/ham-bhi-pakhya-ke-sath-hain-suresh.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ