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हास्य - व्यंग्य // यमराज के पांवों में स्पोर्टस शू // सुरेश खांडवेकर

सुरेश खांडवेकर


स्वर्गलोक में इन दिनों यमराज बहुत ज्यादा परेशान और चिंतित है। उन्हें तकलीफ इस बात की है कि उनके पास उनका वाहन एक भैंसा है। वे मानते है कि विश्व तेल संकट में भी उनके भैंसे की दौड़-धूप बहुत तेजी से हो रहीं है। आकाश-गमन होने के कारण ट्रैफिक कंट्रोल जैसी असुविधा तो नहीं है। लेकिन उन्हें पलभर का विश्राम नहीं। इससे भी ज्यादा चिंता इस बात की है कि वे ब्रह्मा से कहते कि हजारों सालों से मृत्यु लोक से स्वर्ग लोक में आने वाले लोग अपना खोखला निस्तेज और बीमार शरीर लेकर आते थे, अब नौजवान लोग जत्थों में भैंसें की दुम पकड़-पकड़ कर आते है। कपड़े भले ही कैसे हो, लेकिन भले-चंगे, खूबसूरत स्पोर्ट शूज पहने स्वर्ग लोक आ रहें है।

लाखों जोड़ी जूते, साफ-सुथरे स्वर्गलोक में इकट्ठे हो गये, दिन रात छंटाई चलती रहती है। आंकड़ा विभाग बराबर बटवारा करता रहता है। अब तक के परिणामों से मालूम हुआ है कि भारत के जूतों के ब्रांडों की संख्या सबसे ऊपर है। उनके सूचना विभाग विजीलेंस, इंटेलिजेन्स ब्यूरो के अनुसार अयोध्या, आतंकवाद, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्रा, केरला, मध्य प्रदेश, गुजरात, आसाम में बेहिसाब दंगे, मारपीट, और बेहिसाब हत्याओं के कारण भारतीय नौजवान लोगों का स्वर्गारोहण हो रहा है।

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स्वर्ग के प्रधानमंत्री स्थानाभाव, व्यवस्था, प्रशासन और सामाजिक दायित्वों के कारण अक्सर अपने तेवर बदलते रहते हैं। कभी गृह मंत्रालय यमराज को सौंप देते, कभी महादेव को दे देते, कभी लेते, कभी अधिकार कम कर देते। यातायात व्यवस्था का स्वतंत्र भार उन्होंने यमराज के भैंसे को दे दिया है। वह कभी पागलों की तरह छलांग लगाता हुआ, यातायात को नियंत्रित करता तो दस बीस को वहीं खदेड़ देता है वे वहीं दम तोड़ देते हैं। मृत्यु लोक में कभी जसलोक व कभी एम्स जैसे अस्पतालों में सौ-दो सौ को ले जाने पहुंचता है। तभी उसे कभी अयोध्या, कभी चंडीगढ़, कभी इंदौर, कभी हैदराबाद जाना पड़ता है। राष्ट्रपति बने विष्णु शांत केवल पुरस्कार वितरण समारोहों में जमे रहते हैं। कहते है मौका ही ऐसा है। उसे स्वर्ग जाने और आने के बीच समय तो लगता ही है। इस बीच उन मरीजों के ऑपरेशन सफल हो जाते हैं, उनके घर पहुंचते हैं तो वे या तो हवन करते मिलते हैं या स्वामियों का उपदेश सुनते मिलते। तुलसी रामायण पढ़ते मिलते। यमराज अपने नियमानुसार भगवत भजन के समय वे कभी किसी को स्वर्ग द्वार नहीं दिखाते। इसलिये भजन कीर्तन के रूकावट की प्रतीक्षा में पलभर रूकते कि कश्मीर का बुलावा आ जाता हैं। क्या करें? भैंसा लगातार प्रशासन अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और कुप्रबंध को निंयत्रित करने के लिए विष्णु के पास पहुंचा और उन्होंने स्वर्गलोक के सभी भूखंडों में व्याप्त असंतोष और अनहोनी पर प्रकाश डाला। उसी समय नारद जी आए। उन्होंने विष्णु भगवान के गुणगान के बाद कहा, ‘‘नारायण! अब दुनिया में खासकर भारत में त्राहि त्राहि मच गयी है। भ्रष्टाचार, घूस, विध्वंसकारी शक्तियां उत्पन्न हो रही है।’’

‘‘नारायण नारायण! तुम्हारे यमराज ने तो रिश्वत खोरी की भी मर्यादा तोड़ दी। इससे तो सेल्सटैक्स और इंकमटैक्स के चपरासी अच्छे! वे भी काम करने और कराने के दो चार सौ रूपये झाड़ लेते है। लेकिन तुम्हारे गृहमंत्री यमराज की तो मत ही मारी गई। हर पंद्रह मिनट पर भारत जाता है और एक नया जूता पहन कर आता है। उसका भैंसा उसके सीटी का इशारा समझ लेता है, सौ-दो सौ को कुचलते हुए रास्ता बना देता है। नारायण नारायण! अकारण हत्या।’’

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नारद जी की बात से देवताओं के बुद्धिजीवियों को काफी सहारा और संतोष मिला। स्थिति नियंत्रण करने के लिए उपाय मांगा। भगवान

विष्णु ने तुरंत ताली बजा कर राष्ट्रपति शासन लागू करने का आदेश दिया। इस समय यमराज पृथ्वी पर एशिया भूखंड के भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ के दौरे पर थे। उनका भैंसा स्थिति पर काबू पाने के प्रयत्न में भीड़ पर नुकीले सींग चुभा रहा था। यमराज को देवलोक में राष्ट्रपति शासन लागू होने की खबर जैसे ही मिली पागल शैतान की तरह वह भैसें पर सवार हुआ, और सौ-दो सौ को खदेड़ते हुए स्वर्गलोक पहुंचा। भैंसे को भी यमराज की तरह स्वर्गलोक और मृत्युलोक की घास खाने की लत पड़ी थी। जैसे यमराज को गृह मंत्रालय छूट जाने का भय वैसे ही भैंसे को परिवहन मंत्रालय छूटने का! हड़बड़ाते हुए राष्ट्रपति भवन पहुंचे। भगवान विष्णु उनके सचिवों के जमघट के बीच नारद जी और बुद्धिजीवी प्रतिनिधिमंडल के बीच गहन गोपनीय वार्ता में लीन थे कि द्वार खुला। हाथ जोड़कर प्रणाम किया।

नारद जी ने यमराज को नंगे पांव देखा तो आश्चर्य में पड़ गये उनसे रहा ना गया। तुरंत पूछ बैठें। ‘‘यमराज जी आप नंगे पांव ही?’’

‘‘अब राज्यपाल जो बनना है?’’

‘‘क्यों?’’

‘‘अब भागदौड़ नहीं होती।’’

‘‘और कहीं टकराव हुआ तो?’’

‘‘उन्हें ही भगाता रहूंगा।’’

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