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मछली मंडी (लघुकथा) // सुरेश सौरभ

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एक आला अधिकारी के कार्यालय में मछली मंडी लगी थी।
  व्यापारी बोले-हमारा लाइसेंस था। फिर भी तीस साल पुरानी मछली मंडी प्रशासन ने बंद करा दी।
    उनके पक्ष में आए नेता बोले- इन्हें व्यापार के लिए नई जगह दी जाए ,अन्यथा इन्हें वहीं व्यापार करने दिया जाए।
   आला अधिकारी ने आश्वासन दिया-कृपया शांति बनाए रखें। हम जल्द ही प्रशासन- शासन की नीति से इसका हल निकालेंगे।
   समझा बुझा कर उनसे चिट्ठी -पत्री लेकर आला अधिकारी ने उन्हें चलता किया। अब अपने माथे पर आए बल पर हाथ फिराते सोचने लगे, पता नहीं मेरे आफिस की मछली मंडी कब बंद होगी।
  उधर व्यापारी सोच रहे थे, पता नहीं प्रशासन कब हमारी मछली मंडी शुरू करायेगा।
   उनके साथ गये नेता सोच रहे थे, सत्ता का वनवास पता नहीं कब खत्म होगा और पता नहीं कब हमें  मछली मारने का मौका मिलेगा।

लेखक -सुरेश सौरभ

पता -निर्मल नगर लखीमपुर -खीरी उ. प्र.
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