पुस्तक समीक्षा- ■■जीवन का गीत एवं आत्मा की लय हैः ’खोजना होगा अमृत कलश’■■● समीक्षक- सुविधा पंडित

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पुस्तक समीक्षा- ■■जीवन का गीत एवं आत्मा की लय हैः ’खोजना होगा अमृत कलश’■■● समीक्षक- सुविधा पंडित कविता संग्रह- ’खोजना होगा अमृत कलश’ लेखक- र...

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पुस्तक समीक्षा-

■■जीवन का गीत एवं आत्मा की लय हैः ’खोजना होगा अमृत कलश’■■●

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समीक्षक- सुविधा पंडित

कविता संग्रह- ’खोजना होगा अमृत कलश’

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लेखक- राजकुमार जैन राजन

प्रकाशक- अयन प्रकाशन, 1/20, महरौली, नई दिल्ली-30

मूल्य- 240 रु.

संस्करण- 2018

पृष्ठ- 120 ,

प्रकाशन वर्ष- 2018

पुस्तक प्राप्ति हेतु संपर्क-09828219919

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   राजकुमार जैन राजन का काव्य संग्रह ’खोजना होगा अमृत कलश’ प्राप्त होते ही एक-एक करके समस्त कविताएँ एक साथ पढ़ डालीं। कारण स्पष्ट है कि मानवीय संवेदनाओं से उद्भूत, जीवन के यथार्थ को ईमानदारी से उद्घाटित करती हुई, छंद मुक्त होते हुये भी ये कविताएं जीवन का गीत हैं,आत्मा की लय हैं। इसलिए पाठक का मन इनके साथ एकाकार हो जाता है।

कवि ने पुस्तक को जो शीर्षक दिया है वह सर्वथा उपयुक्त है। ये कविताएँ प्रत्येक व्यक्ति को प्रेरित करती हैं,कि अपना मनोमंथन कर ऐसा अमृत प्राप्त करें जो मृत मानवीय संवेदनाओं को पुनर्जीवित कर दे। कवि ने वस्तुतः अपने दर्द,वेदना,संवेदना,सहानुभूति व साफगोई से मानो अमृत कलश प्राप्त ही कर लिया हो। अपने मन रूपी सागर का मंथन कर दुर्भावना रूपी विष का वमन कर सदभावना रूपी अमिय निथार कर  भर लिया हो कलश। जिसका एक अंजुरि भर पान, एक आचमन भी किया जाए तो मृत होती मनुष्यता को नव जीवन दे सकता है।

राजकुमार जैन राजन ने अपनी कविताओं में सामाजिक विसंगतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए आक्रोश प्रकट किया है ,जो उनकी परिवर्तन की अदम्य लालसा का परिचायक है। वे कहते हैं ’धरती के अमृत कोश में विष बीज कौन बो गया?’, ’छद्म हंसी के पीछे कपट बहुत गहरा है’, ’रिश्तों को छलनी कर दिया है,झूठ ,कपट,बेशर्मी के शूलों ने’ इन कंटकों की चुभन और दर्द से ही वे आत्मा पर दबाव महसूस करते हैं--’और मेरी आत्मा पर एक दबाव ,निरंतर महसूस होता है,भीतर ही भीतर’,इसी दबाव एवं आत्मावलोकन से कवि को मार्ग मिलता है परिवर्तन व उत्कर्ष का।

सामाजिक कुप्रथाएँ  भी कवि को कलम उठाने के लिये बाध्य करती रही हैं। दहेज की आग मासूम बालाओं के सपनों को जला कर राख कर देती है। कवि भी इस जलन से कराह उठता है-’जब-जब भी कोई फूल मुरझाता,दुःख दर्द का गीत उभर आता।’ ’हाशिये पर वह’ में उन्होंने  नेताओं और समाज सेवी संस्थाओं के दिखावों पर भी व्यंग्य प्रहार किया है। ’निराश नहीं है वह’ में मजदूरों की व्यथा,’ बेरोजगार में बेरोजगारी की सामाजिक समस्या को मार्मिक स्वर प्रदान किये हैं।

कवि इन विषमताओं से निराश नहीं हैं,वरन अपनी जिजीविषा से नूतन भोर के प्रति आशावादी हैं और प्रत्येक कविता में नव सूर्य के  उदित होने की अभिलाषा लिये हैं। ये आशावाद ही इन कविताओं की उपयोगिता सिद्ध करता है।

कवि ने रुदन, विषाद, दारुण्य, कारुण्य के साथ समस्याओं के हल भी सुझाये हैं। उनके स्वरों में-’हारता नही जो परिस्थितियों से जीतता है, फिर वही उत्कर्ष,नए सृजन के साथ।’ वे पुरुषार्थ की ओर अग्रसर करते हैं- ’तुम्हें स्वयं सृष्टा बनना होगा।’ आत्मविश्वास का वरण ही सफलता की पहली सीढ़ी है-’कई बार बिना चले ही थक जाते हैं पाँव, बिना उड़े ही हार का हो जाता है भ्रम।’ ये पंक्तियाँ उन्हें संघर्षशीलता का पक्षधर बनाती हैं।

समस्त कविताएँ कवि की सूक्ष्म अवलोकन सामर्थ्य व अनुपम अनुभव क्षमता का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं-’रात्रि के अंधकार में,जगमगाते जुगनुओं की तरह क्यों नहीं छेड़ देते तुम जंग...’, ’सूखे गुलाबों की पत्तियों में भी खुशबू बची रहती है।’

राजन जी की कविताएं गहरी अनुभूतियों का सार्थक परिणाम हैं। उनके व्यक्तिवाद में भी समाजवाद है।’सीढियाँ उतरते पिता का बेचैन चेहरा,माँ की बदहवासी आज भी याद है’ ऐसा हृदय स्पर्शी चित्रण ,जो अपने अनुभव से समस्त गरीब, मजबूर लोगों की व्यथा को स्वर दे गया है। वे अपने एकांत,मौलिक,जीवंत अनुभवों का उत्कृष्टता से परिचय कराते हैं- ’पत्थर भी होते हैं दिल फेंक,प्रकाश भी करता है इंतजार...।’

’मन का कैनवास’ एक अद्वितीय भावप्रधान कविता है,पर उसमें कवि का आशावाद, आत्मविश्वास डाँवाडोल होता प्रतीत हुआ है,जो पाठकों को सामाजिक परिवेश पर पुनः पुनः विचार करने के लिए बाध्य करता है।

आज राजकुमार जैन राजन जीवन में सफलता के जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी अपने अस्तित्व की पहचान कराने की निरंतर कुलबुलाहट का ही परिणाम है , जी उनकी कविताओं में भी दृष्टिगत है-’आखिर अपनी पहचान बनाना चाहूं तो भी कैसे?’

कहीं कहीं उनके प्रतीक कुछ विरोधाभासी हो गए हैं। यथा-’इच्छाओं की जर्जर कुटिया में देखा करता था स्वप्न नव सृजन के।’ में इच्छाओं की कुटिया को जर्जर क्यों कहा है? इच्छाओं को तो स्वर्ण महल सा मजबूत होना चाहिए,तभी तो नव सृजन का सपना साकार हो सकता है।

’रिश्ते आजकल कटुता की हल्की सी आंच में भी भाप बन कर उड़ जाते हैं’ पंक्तियों के प्रति मैं  कवि से यह प्रतिप्रश्न अवश्य करना चाहूंगी कि क्या हम यश लिप्सा, स्वार्थ, लोकप्रियता को भावनाओं, आदर्शों, रिश्तों से अधिक महत्व नहीं दे रहे?

यदि ऐसा न होता तो हमें भी इतने कटु अनुभव न होते। क्योंकि हम जिस कसौटी पर औरों को कसते हैं ,स्वयं को भी कसें,जिस तराजू पर औरों को तौलते हैँ, उस पर खुद को भी तौलें तो ज्ञात होगा कि हमारी संवेदनाएं भी इतनी ठोस नहीं थीं। अन्यथा किसी द्रव्य में से केवल जल ही वाष्पित होता है, ठोस नहीं, उसे समय लगता है। अतः हमें भी अपनी संवेदनाओं को इतना ठोस बनाना होगा।

’मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं कि तुमने दिए थे जो स्वप्न,कहीं खो गए हैं’ कह कर वे मानो रिश्तों के टूटने की अवहेलना कर गये हैं। शायद अब सफलता की चिंता ,टूटन के दर्द  से अधिक ,उस पर हावी है। परंतु ये विचारणीय है कि आखिर सफलता की परिभाषा क्या है?

राजन जी की कविताएं आज के दौर में संवेदनशील सच्चे मनुष्य की दुःखद मनः स्थिति का सजीव चित्रण करती हुई इसी के समानांतर आशा के दीप प्रज्वलित करती हैं। कवि मन सत्य,शिव ,सुंदर की स्थापना करना चाहता है। ’उदय होता सूरज अपनी सम्पूर्ण रश्मियों से  सत्यम, शिवम , सुंदरम का फिर फैला देगा प्रकाश...।’

मैं पूर्ण विश्वास से कहना चाहूंगी कि प्रत्येक साहित्य प्रेमी को,प्रत्येक मानव को ये कविताएँ अवश्य पढ़नी चाहिए। परिवर्तन की राह में ये कवि की अप्रतिम सौगात है। प्रत्येक पाठक द्वारा ये प्रशंसित होंगीं। अपनी सरल,प्रवाहमयी भाषा के कारण ये जन साधारण के लिए भी बोधगम्य हैं। कवि को कोटिशः शुभकामनाएं।

अंत में मैं यही कहूंगी कि-

’हर बदमिजाज तजुर्बे के बाद, खुशमिजाज ख्वाब का इस्तकबाल है जिंदगी।

नाकामी के गमगीन दौर के बाद, बुलंदियों का कामिल मुकाम है जिंदगी।’

● सुविधा पंडित

155/बी सरदारनगर    शास्त्री स्कूल के पास, तलावड़ी सर्कल

अहमदाबाद-382475 (गुजरात )

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 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक 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मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: पुस्तक समीक्षा- ■■जीवन का गीत एवं आत्मा की लय हैः ’खोजना होगा अमृत कलश’■■● समीक्षक- सुविधा पंडित
पुस्तक समीक्षा- ■■जीवन का गीत एवं आत्मा की लय हैः ’खोजना होगा अमृत कलश’■■● समीक्षक- सुविधा पंडित
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रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/11/blog-post_79.html
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